भारत पाक सीमा पर चल रही गोलीबारी में एक और बीएसएफ पुलिसकर्मी की जान गयी है. पाकिस्तान की ओर से कश्मीर के साम्बा और कथुआ सेक्टर में 15 सैन्य चौकियों पर हमला किया गया.
तस्वीर: dapd
विज्ञापन
सीमा सुरक्षा बल के आईजी डी पारेख ने बताया कि सोमवार को हमला होते ही जवान की मौत हो गयी. कश्मीर में सीमा पर पिछले छह दिनों से गोलीबारी जारी है. इलाके से 1500 लोगों को निकाल कर सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया है और कई खुद ही घर छोड़ कर जा चुके हैं. रविवार दिन में लोगों ने अपने खेतों में जाने की कोशिश की लेकिन दिन ढलते ही वे वापस सरकारी शिविरों में लौट आए. भारत सरकार ने पाकिस्तान पर 2014 में 550 बार युद्धविराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है. 2003 में दोनों देशों के बीच हुए शांति समझौते के बाद से यह अब तक की सबसे बड़ी संख्या है. उल्लंघन का सबसे ज्यादा असर अक्टूबर में देखा गया जब हमलों में दोनों देशों के नौ नौ नागरिकों की जान गयी.
आतंकवादी या ड्रग माफिया?
वहीं अरब सागर में पाकिस्तानी नाविकों के खुद को उड़ा लेने का मामला भी तूल पकड़ रहा है. इंडियन एक्सप्रेस ने पाकिस्तान के कुछ विशेषज्ञों के हवाले से लिखा है कि नाव में सवार लोग तस्कर थे. ये विशेषज्ञ देश में ड्रग्स की आवाजाही पर नजर रखते हैं. उन्होंने अपना नाम ना बताने की शर्त पर कहा है कि यह नाव दक्षिणी पाकिस्तान के बलोचिस्तान इलाके में पार्सल पहुंचाने के लिए जिम्मेदार थी और मीर याकूब बीजेंजो के लिए काम करती थी, जिसे अमेरिका ने 2009 में अंतरराष्ट्रीय तस्कर घोषित किया था.
दूसरी ओर भारतीय रक्षा मंत्री मनोहर परिकर ने नई दिल्ली में कहा है कि नाविकों के तस्कर होने की कोई संभावना नहीं दिखती. उन्होंने कहा कि एक घंटे तक नाव का पीछा कर उसे रोका गया और इसके बाद नाविकों ने आत्मघाती हमला कर उसे उड़ा दिया, "क्योंकि उन्होंने आत्महत्या की है इसलिए मुझे लगता है कि वे संदिग्ध आतंकवादी थे. ड्रग्स ले जा रही नाव भी आत्मसमर्पण कर सकती है." परिकर ने बताया कि 12 घंटों तक नाव की निगरानी की जा रही थी. नाव ने सामान्य रास्ता नहीं लिया, इसलिए उस पर शक हुआ, "तस्कर अक्सर व्यस्त रास्ते चुनते हैं ताकि नावों की भीड़ में शामिल हो सकें." उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कोस्ट गार्ड की सतर्कता ने शायद 2008 के मुंबई जैसे हमले को होने से रोक दिया.
आईबी/एमजे (एएफपी, डीपीए)
2014 के खूंखार आतंकी हमले
साल 2014 में कोई ऐसा महीना नहीं जिसमें आतंकवादी वारदात न घटी हो. बाजार से लेकर घरों तक लोग आतंकियों के निशाने बनते रहे. 2014 में सबसे ज्यादा इस्लामिक स्टेट के आतंकियों ने ध्यान खींचा.
तस्वीर: Reuters
कैंसर से खतरनाक आतंकवाद
वैश्विक आतंकवाद सूचकांक 2014 के दूसरे संस्करण की रिपोर्ट के मुताबिक आतंकी हमलों में मारे गए 82 फीसदी लोगों में सिर्फ पांच देश इराक, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, नाइजीरिया और सीरिया से थे.
तस्वीर: picture-alliance/abaca/Yaghobzadeh Rafael
पेशावर
2014 के खत्म होते होते आतंकवाद का सबसे घिनौना चेहरा सामने आया. पाकिस्तान तालिबान ने पेशावर के सैनिक स्कूल पर हमला कर 145 लोगों की जान ले ली जिनमें 132 बच्चे शामिल थे. इस वारदात को 9 आतंकियों ने अंजाम दिया. हमले का मकसद सेना की कार्रवाई का बदला लेना था.
तस्वीर: picture-alliance/AP Photo/M. Sajjad
सिडनी
ऑस्ट्रेलिया के शहर सिडनी में ईरानी मूल के नागरिक मान हारून मोनिस ने लिंड्ट कैफे में ग्राहकों और कर्मचारियों को बंधक बना लिया. इस दौरान बंदूकधारी से बच निकलने में करीब 14 लोग कामयाब हुए. 16 घंटे बाद पुलिस ने इस संकट को खत्म किया, दो बेगुनाह लोगों के साथ हारून भी मारा गया. बंधक बनाए गए 17 लोग भी बचा लिए गए.
तस्वीर: Getty Images/J. Martinson
कराची
10 जून 2014 को दस आतंकियों ने कराची के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर हमला किया. इस हमले में आतंकी आत्मघाती जैकेट, रॉकेट लॉन्चर और ग्रेनेड से लैस थे. हमले में 10 दहशतगर्द समेत 36 लोग मारे गए. हमले की जिम्मेदारी तहरीके तालिबान ने ली थी.
तस्वीर: Reuters
अबूजा
25 जून 2014 को नाइजीरिया की राजधानी अबूजा के शॉपिंग मॉल में जबरदस्त धमाके में 21 लोगों की मौत हो गई थी. धमाका ऐसे वक्त हुआ था जब लोग नाइजीरिया और अर्जेंटीना के बीच विश्व कप मुकाबला देखने की तैयारी में जुटे थे.
तस्वीर: picture-alliance/AP Photo
चिबोक
14 और 15 अप्रैल की दरम्यानी रात नाइजीरिया के पूर्वोत्तरी शहर चिबोक के सरकारी स्कूल के सामने कई ट्रक आकर खड़े हो गए. ट्रक में आतंकवादी दल बोको हरम के लड़ाके सवार थे. इन्होंने लड़कियों को नींद से जगाया और उन्हें ट्रकों में लाद कर ले गए.
तस्वीर: picture alliance/AP Photo
ब्रसेल्स
24 मई 2014 को एक बंदूकधारी ने बेल्जियम की राजधानी ब्रसल्स में यहूदी म्यूजियम में ताबड़तोड़ फायरिंग की. इस हमले में तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि एक जख्मी की अस्पताल में कुछ दिनों बाद मृत्यु हो गई. 30 मई को अल्जीरियाई मूल के फ्रांसीसी नागरिक मेहंदी नेमूशे को पुलिस ने इस हमले के लिए गिरफ्तार किया.
तस्वीर: Reuters
हिल्ला
9 मार्च 2014 को इराक के शिया शहर हिल्ला में आत्मघाती हमलावर ने खुद को धमाके से उड़ा दिया. आत्मघाती हमलावर बस में सवार था और धमाके की चपेट में वे आए जो अपनी गाड़ियों में सवार होकर वहां से गुजर रहे थे. इस हमले में 45 लोग मारे गए और 157 के करीब घायल हुए.