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मच्छरों से परेशान ग्रीस

२५ अक्टूबर २०१२

आर्थिक संकट से खस्ताहाल हो रहे ग्रीस के लोगों पर एक और खतरा मंडरा रहा है. मच्छर और मच्छरों से होने वाली बीमारियों ने उनका संकट और बढ़ा दिया है.

तस्वीर: picture-alliance/dpa

जलवायु परिवर्तन की वजह के गर्म देशों में होने वाली बीमारियां इन मच्छरों के साथ दक्षिणी यूरोप के गर्म होते देशों में पहुंच सकती हैं जो उनके लिए उतनी ही खतरनाक भी साबित हो सकती हैं. मच्छरों से पैदा होने वाली बीमारियों में मलेरिया के अलावा, पश्चिमी नील वायरस, चिकनगुनिया और डेंगू जैसे बुखार हैं जिनकी यूरोप को आदत नहीं.

बजट में कटौती, भरभरा कर गिरती स्वास्थ्य सेवाएं और राजनीतिक पटल पर मतभेद के साथ ही विदेशी लोगों के लिए बढ़ती नफरत के दौरान बीमारी नियंत्रण की कोशिशें कमजोर पड़ रही हैं और मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है.

मलेरिया जैसी बीमारी जो 1974 में ही ग्रीस से पूरी तरह मिटा दी गई थी वह ग्रीस के अंदर एक इंसान से दूसरे तक पहुंच रही है.

इस साल वेस्ट नील वायरस के कारण 11 अक्टूबर तक 16 लोगों की मौत हो गई थी. यह इस बात के संकेत हैं कि मेडेसिन्स सान फ्रंटियर जो सब सहारा में बच्चों को मच्छरों से बचाने के लिए काम कर रहा था वह ग्रीस के मच्छर मार रहा है.

तस्वीर: Fotolia/Kletr

पर्यटकों के पसंदीदा ग्रीस में इस मुश्किल के खिलाफ कदम उठाने की बजाए ग्रीसवासी विदेशियों पर अंगुली उठा रहे हैं. स्थानीय मेयर राष्ट्रीय नेताओं, मरीज डॉक्टर और मंत्री अधिकारियों के खिलाफ लड़ रहे हैं. एमएसएफ के ग्रीस में काम करने वाले निदेशक अपोल्टोलोस वेइजिस का कहना है, यूरोपीय देश में इस तरह की मुश्किल का पैदा होना और इसे नियंत्रण में नहीं लाया जाना चिंताजनक है. आप मलेरिया के पीछे नहीं भाग सकते. यूरोपीय संघ जैसे बड़े इलाके में आप इस तरह की बीमारियों से आपात स्थिति में पार नहीं पा सकते. गरीबी से जूझ रहे अफ्रीका में भी इस तरह की योजनाएं सही चल रही हैं लेकिन यूरोपीय संघ के सदस्य देश में हालत बुरी है.

मुश्किल में

एथेंस के बाहरी इलाके में यहां के सबसे पुराने और अच्छे अस्पताल में कटौती असर साफ साफ दिखाई देता है. बेघर लोग सड़कों पार्क की बेंचों पर सोते नजर आते हैं. इवांगेलिस्मोस अस्पताल के मुख्य दरवाजे पर एक बैनर टंगा है जिस पर लिखा है स्वास्थ्य प्रणाली खून से लथपथ है.

एक सफेद चादर पर लाल और काले रंग से लिखा है कि नौकरी, आपूर्ति में और कटौती नहीं, बिना तनख्वाह के अब और काम नहीं. यहां काम करने वाले डॉक्टरों को कई महीने से तनख्वाह नहीं मिली है और वह 36-36 घंटे की लगातार ड्यूटी पर हैं.

तस्वीर: Getty Images

ग्रीस में पांच साल से मंदी का दौर है, बेरोजगारी की दर 25 फीसदी है. संक्रामक बीमारियों के विशेषज्ञों का मानना है कि मरीजों की संख्या के हिसाब से मलेरिया से ज्यादा दूसरी परेशानियां घातक हैं. इस साल में संक्रामक बीमारियों के 59 मामले सामने आए हैं. जिसमें से 48 आप्रवासी हैं या फिर ग्रीस से लौटने वाले यात्री. सिर्फ इस साल नील वायरस से ग्रस्त होने वाले लोगों की संख्या 159 है.

बीमारी पर नियंत्रण और इसकी रोकथाम के लिए यूरोपीय केंद्र ईसीडीसी के योहान गीसेके मानते हैं कि यह मामले फिर नहीं आने चाहिए.

गीसेके और दूसरे लोगों का मानना है कि यह परेशानी जलवायु परिवर्तन के कारण हो रही है. इसी कारण यूरोप में वो मच्छर पैदा हो रहे हैं जो पहले नहीं थे. इसमें एशिया का डेंगू और चिकनगुनिया फैलाने वाला टाइगर मच्छर भी शामिल है. कारण कि अक्तूबर आधा गुजरने के बाद जहां बाकी यूरोप ठंड में दुबक रहा है वहीं ग्रीस 30 डिग्री और नमी से परेशान है.

तस्वीर: picture-alliance/dpa

ग्रीस में चिकनगुनिया के कोई मामले इस साल सामने नहीं आए हैं लेकिन यूरोप में इसके मामले देखे जा रहे हैं. पुर्तगाल के माडेरिया द्वीप पर डेंगू फैला है.

वहीं थेसले यूनिवर्सिटी में बीमारी के रोकथाम और नियंत्रण के हेलेनिक सेंटर में सलाहकार क्रिस्टोस हाजीक्रिस्टोदौलू का कहना है कि मच्छरों से होने वाली बीमारियां स्वास्थ्य नहीं आप्रवासन का मुद्दा है.

एक करोड़ 10 लाख लोगों का देश एशियाई और अफ्रीकी निवासियों के लिए यूरोप में आने का बड़ा रास्ता है. सलाहकार कहते हैं, मलेरिया वाले देशों, पाकिस्तान, अफगानिस्तान से आने वाले लोगों की संख्या काफी है और यह ऐसे इलाके है जहां मच्छर हैं.

ऐसे इलाकों में ग्रीस का एव्रोतास गांव हैं. यहां चार हजार एशियाई मजदूर जैतून और संतरे के खेतों में काम करते हैं. इन खेतों को पानी 130 किलोमीटर लंबी नहर से मिलता है.

हाजीक्रिस्टोदौलू एक सर्वे दिखाते हैं जिसके मुताबिक दक्षिणी ग्रीस में 6000 ऐसे मजदूर हैं जिनके खून में मलेरिया के लिए एंटिबॉडी पाई गई हैं. जिसका मतलब है कि वह पहले इस संक्रमण का शिकार हो चुके हैं. पाकिस्तान और अफगानिस्तान में पाए जाने वाले मलेरिया को विवैक्स मलेरिया कहते हैं यह कई बार हो सकता है. तो यह बीमारी मच्छरों के कारण तेजी से आगे भी बढ़ सकती है. दक्षिणी ग्रीस के एक गांव में रहने वाले 41 साल के इयोआनिस ग्रेवेनिटिस पिछले साल मलेरिया के शिकार हुए, तीन दिन अस्पताल में रहे और अगले सप्ताह फिर मलेरिया का बुखार उन्हें हुआ. वैसे तो वो कहते हैं कि वह नस्लवादी नहीं हैं लेकिन अपने रेस्टोरेंट में वह किसी पाकिस्तानी नागरिक को खाना नहीं देते. दूसरे स्थानीय लोग भी उससे डरते हैं.

इस तरह के पूर्वाग्रह दक्षिणपंथी होते नेताओं के लिए एक और मौका होंगे जो आप्रवासियों के खिलाफ नीतियां बनाएंगे ताकि उन्हें वोट मिल सकें. डॉक्टर काकालौ और एमएसएफ के वाइजिस चिंता में हैं कि ग्रीस मच्छरों पर नियंत्रण पाने के लिए क्या कर रहा है. क्योंकि गर्मी और नमी के कारण ठहरे पानी में इनकी संख्या तेजी से बढ़ रही है.

नियंत्रण

ग्रीस में लोग मलेरिया को पूरी तरह भूल गए हैं और इसके फैलने पर भी कोई चिंता पैदा नहीं हो रही. वेइजिस के मुताबिक एटिका इलाके में 56 नगर पालिकाओं को मच्छर नियंत्रण करना था लेकिन आठ ही ने यह काम किया.

समस्या को नियंत्रण नहीं कर पाने का एक मुख्य कारण यह भी है कि स्वास्थ्य मंत्रालय और उससे जुड़ी सभी युनिट्स भारी कटौती झेल रही हैं. न तो उनके पास स्टाफ है और न उन्हें रखने के लिए पैसे. ग्रीस में पब्लिक हेल्थ का सिस्टम इतना विकसित नहीं है. स्वास्थ्य मंत्री आंद्रेयास लिकोरेन्जोस का कहना है कि जरूरी निधि वह जमा करेंगे और अगले साल के लिए अच्छे से तैयारी करेंगे.

एएम/एनआर (रॉयटर्स)

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