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महात्मा गांधी के घर के ख़रीदार की तलाश

२८ जुलाई २००९

दक्षिण अफ़्रीका के जोहानसबर्ग शहर में जिस घर में महात्मा गांधी तीन सालों तक रहे थे उस घर के मालिक ने अब वह घर बेचने का फ़ैसला लिया है. हालांकि बहुत कम लोग इस ऐतिहासिक घर को ख़रीदने के इच्छुक दिखाई दे रहे हैं.

तीन साल तक रहे जोहानसबर्ग के घर मेंतस्वीर: AP

महात्मा गांधी की यादों से भरे इस घर को ख़रीदने के लिए दक्षिण अफ़्रीका का भारतीय समुदाय भी उत्साहित नहीं लग रहा है. जोहानसबर्ग के उत्तरी इलाक़े में एक शांत सड़क पर स्थित इस घर का डिज़ाइन गांधीजी के विश्वासपात्र हेरमान कालेनबाख ने किया था. हेरमान एक आर्किटेक्ट भी थे.

कुछ समय पहले हुई थी उनकी वस्तुओं की नीलामीतस्वीर: picture-alliance/ dpa

इस घर को औपचारिक रूप से द क्राल के नाम से पुकारा जाता था और गांधीजी यहां 1908 से 1911 तक रहे. इस दौरान कालेनबाख भी उनके साथ थे. इस घर की मालिकन नैन्सी बॉल पिछले 25 सालों से इस घर में रह रही हैं लेकिन अब वह केपटाउन में जाकर रहना चाहती हैं.

द टाईम्स अख़बार के मुताबिक़ पहले इस ऐतिहासिक धरोहर को सहेज कर रखने वाले किसी व्यक्ति की तलाश के लिए नैन्सी बॉल ने अपने स्तर पर प्रयास किए. लेकिन कोई सफलता मिलती न देख अब उन्होंने औपचारिक रूप से इस घर को बेचने की घोषणा कर दी है. हालांकि उन्होंने अभी यह नहीं बताया है कि इस धरोहर की क़ीमत उन्होंने कितनी रखी है.

किसी ख़रीदार को तलाशने के लिए उन्होंने युनिवर्सिटी ऑफ़ विटवॉटर्सरैंड में सेंटर ऑफ़ इंडियन स्टडीज़ के संस्थापक निदेशक स्टीफ़न गेल्ब की मदद मांगी है. गेल्ब अब दक्षिण अफ़्रीका में रह रहे भारतीयों से इस संबंध में बात कर रहे हैं. उनकी कोशिश इस बात की भी है कि इस घर को विज़िटिंग प्रोफ़ेसर के रहने की जगह के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सके.

रिपोर्ट: एजेंसियां/एस गौड़

संपादन: आभा मोंढे

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