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मायावती को जूते भेंजेंगे असांज

७ सितम्बर २०११

सरकारें हिला देने वाले विकीलीक्स में अपना नाम देख उत्तर प्रदेश की मुख्य मंत्री मायावती बेहद गुस्से में हैं. कहा विकीलीक्स का मालिक पागल है. असांज ने भी किया पलट वार.

WikiLeaks founder Julian Assange arrives at Belmarsh Magistrates' Court in London, Monday, Feb. 7, 2011. Assange is accused of sexual misconduct by two women he met during a visit to Stockholm last year and Swedish authorities want him extradited to face the allegations. A two-day hearing that begins Monday will decide Assange's legal fate. (AP Photo/Kirsty Wigglesworth)
तस्वीर: AP

पैसों को खुल कर लुटाना 'बहन जी' के लिए कोई नई बात नहीं. कभी उनके जन्मदिन पर करोड़ों खर्च होते हैं तो कभी राज्य में उनकी मूर्तियों पर खर्चा किया जाता है. ऐसे में अगर मायावती ने जूते मंगाने के लिए अपना प्राइवेट जेट मुंबई भेज दिया तो इसमें लोगों को खास हैरानी तो नहीं हुई होगी. लेकिन इस बात का खुलासा हो जाने पर मायावती को गुस्सा बहुत आया. इतना कि शब्द कम पड़ गए और वही पुरानी बात जबान पर आ गई, "इस में विपक्ष की चाल है." शायद मायावती भूल गईं कि जूलियन असांज कौन हैं और उनका विपक्ष से दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं. गुस्से में आग बबूली मायावती ने तो असांज को पागल भी ठहरा दिया और उन्हें पागलखाने में बंद करने की बात भी कही.

मायावती के जन्मदिन पर कुछ ऐसा चमका लखनऊतस्वीर: DW

अक्टूबर 2008 के केबल्स के हवाले से विकीलीक्स में मायावती को "भ्रष्ट" नेता और "अहंकारी" महिला कहा गया है जो देश की प्रधानमंत्री बनने का सपना रखती हैं. लेकिन मायावती ने अपने खिलाफ हर बात को दलितों के खिलाफ कही गई बात बना दिया. पत्रकारों से बात करते हुए मायावती ने कहा, "ये आरोप गलत और बेबुनियाद हैं. विकीलीक्स ने साबित कर दिया है कि वह एंटी दलित अजेंडे पर काम कर रहा है. विकीलीक्स का मालिक या तो पागल हो गया है या विपक्ष के साथ मिल कर जान बूझ कर हमारी पार्टी कि छवि खराब करने की कोशिश कर रहा है. विकीलीक्स के मालिक को पागलखाने भेजने की जरूरत है. अगर उस देश के पागलखाने में जगह न हो तो मेरी सलाह है कि उसे आगरा के पागलखाने में भेज दें."

इसके जवाब में असांज ने चुटकी लेते हुए मीडिया से कहा, "मायावती को अपनी गलती माननी चाहिए और माफी भी मांगनी चाहिए. अगर वह ऐसा नहीं कर सकती तो वह खुशी खुशी यहां इंगलैंड में मुझ तक अपना जेट भेज सकती हैं. मुझे भारत में शरण लेने में बहुत खुशी होगी, लेकिन मैं मेंटल नहीं पोलिटिकल असायलम लेना चाहूंगा. भारत... वह देश जिस से मिझे बहुत प्यार है. और बदले में मैं उनके लिए यहां के बेहतरीन जूते ले कर आउंगा."

रिपोर्ट: एजेंसियां/ईशा भाटिया

संपादन: आभा एम

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