गला रेत कर लोगों की बर्बर हत्या और उसका वीडियो जारी करना, आईएस की इन हरकतों से दुनिया भर के मुसलमान खुद को असहज महसूस करने लगे हैं. उन्हें एक बार फिर लग रहा है कि आतंकवादी इस्लाम को बदनाम कर रहे हैं.
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दुनिया भर में कई जगहों पर मुस्लिम समुदाय के लोग इराक और सीरिया में सक्रिय इस्लामिक स्टेट (आईएस) की क्रूर हरकतों की खुलकर आलोचना कर रहे हैं. सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर 'ए लीबिया लिबर्टी' नाम की यूजर ने लिखा, "अगर आप यह सोच रहे हैं कि मुसलमान आईसिस (आईएस) की निंदा नहीं कर रहे हैं तो इसका मतलब है कि आप मुसलमानों को नहीं सुन रहे हैं."
मिस्र की सम्मानित धार्मिक संस्था अल-अजहर ने आईएस की हरकतों को गैर इस्लामी करार दिया है, "इन आपराधिक हरकतों का इस्लाम से कोई लेना देना नहीं है. इनके पीछे इस्लामिक कानून का कोई आधार नहीं है." अल अजहर के अधिकारी अब्बास शोमान ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में कहा, "ये लोग इस्लाम से ताल्लुक नहीं रखते."
अमेरिकी की पिट्सबर्ग यूनिवर्सिटी में इस्लामिक कानून के विशेषज्ञ प्रोफेसर हैदर अला हामोदी मानते है कि बर्बर हत्याओं के जरिए आईएस मनोवैज्ञानिक भय फैलाना चाहता है, "पुराने समय में लोगों को लगता था कि सिर काटकर किसी को कम से कम दर्द देकर मारा जा सकता है." लेकिन इससे पहले सुनवाई होती थी और माफी न मिलने पर यह सजा दी जाती थी. आईएस ऐसा कुछ नहीं कर रहा है, बल्कि वो तो तड़पाने और डराने के लिए सिर कलम कर रहा है.
इराक और सीरिया में लाखों लोग विस्थापिततस्वीर: DW/R. Erlich
आईएस अब तक कई लोगों का सिर कलम कर चुका है. मृतकों में दो अमेरिकी पत्रकार भी हैं. आतंकवादियों के लिए किसी बंधक को सिर कलम कर मारना नया नहीं. 2002 में पाकिस्तान से अगवा किये गए अमेरिकी पत्रकार डैनियल पर्ल के साथ भी तालिबान ने यही सलूक किया. विशेषज्ञों को लगता है कि आतंकवादी संगठन सिर कलम करने वाले वीडियो से कट्टरपंथी और हिंसक सोच रखने वाले युवाओं को रिझाने की कोशिश कर रहे हैं.
लेबनान की सुप्रीम इस्लामिक काउंसिल के महासचिव शेख खालदून अरायमित कहते हैं, "सिर कलम करने या अल्पसंख्यकों का अपमान करने वाली आईएस की हरकतें इस्लाम और मुस्लिम मान्यताओं को बिल्कुल उलट हैं. इस्लाम दूसरों के साथ दया, प्रेम और संवाद का संदेश देता है."
अमेरिका पर 9/11 के हमलों के बाद अमेरिका और यूरोप में मुसलमानों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा. उन्हें शक की नजर से देखा जाने लगा. अमेरिका में तो लम्बी दाढ़ी रखने वालों पर हमले भी हुए. आईएस की बढ़ती बर्बरता से एक बार फिर मुसलमान खुद को असहज महसूस करने लगे हैं. दुनिया में सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुशीलो बामबांग युडोयोनो ने दुनिया भर के मुसलमान नेताओं से चरमपंथ के खिलाफ साथ आने की अपील की है. वहीं भारतीय राज्य केरल के एक इमाम ने तो आईएस के खिलाफ फतवा भी जारी कर दिया है. ब्रिटेन में भी आईएस के लिए लड़ रहे युवाओं के खिलाफ फतवे जारी किये जा रहे हैं.
ओएसजे/एएम (एएफपी)
कौन हैं यजीदी
कई धर्मों के मिले जुले रिवाज वाला धर्म यजीदी है. इसमें इस्लाम, ईसाइयत और कुछ दूसरे धर्मों के मिले जुले पुट हैं. इराक में रहने वाले इन लोगों पर आइसिस ने हमला बोला है. हालांकि उन्हें कुर्दों का समर्थन है.
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मलिक ताउस
यजीदी एक ईश्वर में विश्वास करते हैं और मानते हैं कि उसके सात फरिश्ते दुनिया में उनकी मदद करते हैं. मोर के रूप में मलिक ताउस उनमें सबसे अहम है.
पांच बार आराधना
यजीदी धर्म के अनुयायी दिन में पांच बार सूर्य की तरफ मुंह करके पूजा करते हैं. दोपहर की पूजा लालिश पहाड़ियों की तरफ मुंह करके की जाती है, जहां उनका पवित्र मजार है. यह जगह उसी का प्रतीक है.
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इराक में बसेरा
दुनिया भर में करीब 8 लाख यजीदी हैं, जिनमें से ज्यादातर निनेवेह प्रांत में पहाड़ियों के पास रहते हैं. कुर्द भाषा बोलने वाले यजीदियों को 1990 के बाद से सीरिया और तुर्की जैसे देशों से भागना पड़ा. उनमें से कई ने अब यूरोप में पनाह ली है.
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घर छोड़ते यजीदी
आइसिस का कहना है कि यह "अशुद्ध" लोगों को इराक में नहीं रहने देंगे. लिहाजा उन्होंने यजीदियों पर हमला बोल दिया है. इससे पहले इन लोगों को सद्दाम हुसैन के शासनकाल में भी हमलों का सामना करना पड़ा था.
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सिंजर की पहाड़ियां
ये लोग इराक छोड़ कर सीरिया की तरफ भाग रहे हैं. सफर के लिए कई बार गधों का भी इस्तेमाल करना पड़ रहा है. रिपोर्टें हैं कि आइसिस ने सैकड़ों यजीदियों को मार डाला है. उनके खौफ से ईसाई भी कुर्दों के प्रभाव वाले शहर इरबील भाग रहे हैं.
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जहां तहां ठिकाना
इराक सरकार का दावा है कि आइसिस के सदस्यों ने कई यजीदियों को जिंदा दफ्न कर दिया है, जबकि औरतों को अगवा कर लिया गया है. बच कर भाग रहे लोगों में से कुछ ने दोहुक प्रांत में ठिकाना जमाया है.
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कहां कहां यजीदी
आम तौर पर वे इराक के उत्तर में रहते हैं, जहां कुर्दों का भी भारी प्रभाव है. दोनों की भाषा भी लगभग एक जैसी है. इराक से बाहर सबसे ज्यादा यजीदी यूरोपीय देश जर्मनी में रहते हैं. इसके अलावा रूस, अर्मेनिया, जॉर्जिया और स्वीडन में भी उन्होंने शरण ली है.
अंतरराष्ट्रीय मदद
आइसिस के खिलाफ अमेरिका ने जहां हवाई हमले करने का फैसला किया है, वहीं कुछ देशों ने वहां मदद पहुंचाने का भी काम किया है. फ्रांस का एक कार्गो विमान बगदाद के पास अरबील में राहत सामग्री लेकर उतरा, जो प्रभावित इलाकों में भेजी गई.
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कुर्दों का साथ
सीरिया के अल-हसाका इलाके की तरफ जाते हुए यजीदी समुदाय के लोगों को कुर्द लड़ाकों का समर्थन मिल रहा है. आइसिस ने इराक में खिलाफत का एलान किया है और यजीदी खास तौर पर उनके निशाने पर हैं.
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जर्मनी में प्रदर्शन
बीलेफेल्ड शहर में इराक के यजीदियों के समर्थन में प्रदर्शन किए गए. इस दौरान कुर्दिश वर्कर्स पार्टी के सह संस्थापक अब्दुल्लाह ओएचेलान के पोस्टर भी लोगों ने थाम रखे थे. इस प्रदर्शन में 10,000 लोगों ने हिस्सा लिया.