फांसी की तारीख से एक दिन पहले तक भी याकूब मेमन की सजा पर अनिश्चितता बनी हुई है. सुप्रीम कोर्ट ने दया याचिका खारिज कर दी है. राष्ट्रपति गृह मंत्रालय से परामर्श कर रहे हैं.
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सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपक मिश्रा, पीसी पंत और अमिताभ राय की बेंच ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 1993 के मुंबई बम धमाकों में दोषी पाए गए याकूब मेमन की अपील खारिज कर दी. मेमन ने अपील की थी कि डेथ वारंट जारी करने की प्रक्रिया में गलतियां हुईं और सुप्रीम कोर्ट इन पर दोबारा ध्यान दे. अदालत ने कहा कि टाडा की विशेष अदालत द्वारा जारी डेथ वारंट में कोई प्रक्रियागत खामी नहीं है, इसलिए याचिकाकर्ता की अपील खारिज की जाती है.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद महाराष्ट्र के गवर्नर ने भी मेमन की दया याचिका को खारिज कर दिया. महाराष्ट्र सरकार के वकील शिवपति पांडेय ने सुनवाई के बाद अदालत परिसर में संवाददाताओं को बताया कि याकूब को कल फांसी दिए जाने या नहीं दिए जाने का मसला कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में है और वही इस पर निर्णय करेगी.
उत्तर प्रदेश में हाई अलर्ट
मेमन ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के पास एक और याचिका भेजी है. ताजा खबरों के अनुसार राष्ट्रपति गृह मंत्रालय की साथ इस दया याचिका पर विचार विमर्श कर रहे हैं. यदि राष्ट्रपति भी सजा पर रोक नहीं लगाते, तो गुरूवार सुबह सात बजे नागपुर जेल में मेमन को फांसी पर लटकाया जाएगा. इसके मद्देनजर उत्तर प्रदेश में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है.
अयोध्या, काशी और मथुरा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों मे खास चौकसी बरतने के निर्देश दिए गए हैं. उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक दलजीत चौधरी ने समाचार एजेंसी यूनीवार्ता को बताया कि राज्य के सभी जिला पुलिस प्रमुखों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं और अधिकारियों को गश्त करने के लिए कहा गया है.
आईबी/एमजे (वार्ता)
मौत की सजा के तरीके भी अलग
दोषी पाए गए किसी व्यक्ति को मौत की सजा दिए जाने के खिलाफ दुनिया भर में मानवाधिकार संगठन लड़ रहे हैं. अभी भी दुनिया के कई देशों में दोषियों को कई तरह के क्रूर तरीकों से मौत की सजा देना जारी है.
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ताबड़तोड़ गोलियां
इस तरीके में सजा पाने वाले की आंखों पर काली पट्टी बांधी जाती है और उसे फायरिंग स्क्वॉड में खड़ा किया जाता है या बैठा दिया जाता है. फायरिंग स्क्वॉड में आमतौर पर सेना के कर्मचारी और कानून व्यवस्था के लिए जिम्मेदार अधिकारी होते हैं. इस तरीके से इंडोनेशिया, चीन, सऊदी अरब, ताइवान और वियतनाम में मौत की सजा दी जाती है.
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मौत का इंजेक्शन
इन इंजेक्शनों में आमतौर पर तीन रसायनों का इस्तेमाल होता है: सोडियम पेंटोनाल, पैनकुरोनियम ब्रोमाइड और पोटैशियम क्लोराइड. हालांकि अगर एक बार में रसायन असर ना करें तो व्यक्ति को मरने में समय लगता है और यह लंबे समय के लिए दर्दनाक हो सकता है. यह तरीका अमेरिका, चीन और वियतनाम में इस्तेमाल होता है.
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कुर्सी में करंट
सजा पाने वाले के सिर से बाल उतारे जाते हैं और फिर उसे एक कुर्सी पर बैठाया जाता है. इसके बाद उसे एक कैप पहनाई जाती है जिसके अंदर नमक के पानी में भीगा स्पंज होता है. इसके बाद 500 से 2000 वोल्ट के बीच करंट प्रवाहित किया जाता है. यह प्रक्रिया तब तक बार बार दोहराई जाती है जब तक व्यक्ति दम नहीं तोड़ देता. यह तरीका भी अमेरिका में अपनाया जाता है.
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फांसी
यह तरीका अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भारत, पाकिस्तान, ईरान, इराक, जापान, मलेशिया और कुवैत में अपनाया जाता है. कई देशों में फांसी से पहले सजा पाने वाले का वजन लिया जाता है ताकि पता चल सके कि रस्सी कितनी लंबी होनी चाहिए.
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सिर कलम
मौत की सजा देने का यह तरीका हजारों साल पुराना है. इस समय सऊदी अरब एकलौता देश है जहां मौत की सजा सिर कलम करके दी जाती है. एमनेस्टी इंटरनेशनल के मुताबिक 2013 में सऊदी अरब में 79 लोगों के सिर कलम किए गए.
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अन्य तरीके
इनके अलावा भी मौत की सजा देने के कई तरीके हैं जो कि कम ही इस्तेमाल किए जाते हैं. जैसे पत्थर मारकर, गैस चैम्बर में डालकर या फिर सजा पाने वाले को ऊंचाई से फेंक देना.