अफगानिस्तान में पहली बार खाड़ी के अधिकारियों को निशाना बनाया गया. अफगान अधिकारी इसके लिए पाकिस्तान के हक्कानी नेटवर्क को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं.
तस्वीर: AP
विज्ञापन
अफगानिस्तान की राजधानी काबुल और दक्षिणी राज्य कंधार में पिछले हफ्ते मंगलवार को घातक धमाके हुए. हमलों में 50 से ज्यादा लोगों की मौत हुई. मृतकों में कई विदेशी अधिकारी भी शामिल थे. काबुल में हुए दो धमाकों की जिम्मेदारी तालिबान ले ली. लेकिन कंधार में हुए हमले की जिम्मेदारी लेने से तालिबान ने इनकार कर दिया. कंधार ब्लास्ट में राज्य के डिप्टी गवर्नर समेत संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के पांच अधिकारी मारे गए. अफगानिस्तान में तैनात यूएई के राजदूत जुमा मोहम्मद अब्दुल्लाह अल-काबी भी जख्मी हो गए.
विशेषज्ञों के मुताबिक विकास परियोजनाओं से जुड़े प्रोजेक्ट का उद्घाटन करने कंधार पहुंचे विदेशी अधिकारियों को निशाना बनाना, ये दिखाता है कि अफगानिस्तान का संघर्ष कितना पेचीदा है. यह पहला मौका है जब अफगानिस्तान में खाड़ी के अधिकारियों को निशाना बनाया गया है. भारत, अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के अधिकारियों पर तो हमले होते ही रहते हैं.
कंधार हमले से तालिबान का इनकारतस्वीर: Reuters
कंधार में चरमपंथियों ने विस्फोटक एक सोफे में छुपाये थे. सोफा उस कमरे में रखा गया था जहां अफगान अधिकारियों और यूएई के कूटनीतिक अधिकारियों के बीच बैठक हो रही थी. कंधार के पुलिस प्रमुख जनरल अब्दुल राजिक भी मीटिंग में मौजूद थे. लेकिन धमाके से पहले वह कमरे से निकल गए थे. राजिक हमले के लिए हक्कानी नेटवर्क को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. हक्कानी नेटवर्क पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन है, जिसके तार तालिबान से भी जुड़े हैं.
दक्षिण अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ संघर्ष का प्रमुख चेहरा माने जाने वाले राजिक पहले भी पाकिस्तान की आलोचना कर चुके हैं. राजिक के मुताबिक पाकिस्तान तालिबान की मदद कर अफगानिस्तान में हिंसा को बढ़ावा देता है. दूसरे अफगान अधिकारियों का भी दावा है कि पाकिस्तान तालिबान को पनाह देकर अफगान सरकार और अंतरराष्ट्रीय मददगारों पर हमले करवाता है. इस्लामाबाद हमेशा इन आरोपों को नकारता रहा है.
बुधवार को राजिक ने पत्रकारों से कहा, "हमारे पास जो जानकारी है उसके मुताबिक, हक्कानी नेटवर्क, कुछ आतंकी संगठनों और पाकिस्तानी सेना की खुफिया एजेंसी (आईएसआई) लंबे समय से हमले की तैयारी कर रहे थे." राजिक ने ईरान से अच्छे संबंध रखने वाले तालिबान के धड़े को क्लीनचिट दी. अफगान अधिकारियों को लगता है कि ईरान पर जिम्मेदारी डालकर आतंकी अफगानिस्तान की हिंसा को नया रूप देने की कोशिश कर रहे थे.
ऐसे होते हैं अफगान
जर्मन फोटोग्राफर येंस उमबाख ने उत्तरी अफगानिस्तान का दौरा किया. इस इलाके में जर्मन सेना तैनात रही है और लोग जर्मन लोगों से अपरिचित नहीं हैं.
मजार-ए-शरीफ के चेहरे
ये बुजुर्ग उन 100 से ज्यादा अफगान लोगों में से एक हैं जिन्हें जर्मन फोटोग्राफर येंस उमबाख ने मजार-ए-शरीफ शहर के हालिया दौरे में अपने कैमरे में कैद किया है.
असली चेहरे
उमबाख ऐसे चेहरों को सामने लाना चाहते थे जो अकसर सुर्खियों के पीछे छिप जाते हैं. वो कहते हैं, “जैसे कि ये लड़की जिसने अपनी सारी जिंदगी विदेशी फौजों की मौजूदगी में गुजारी है.”
नजारे
उमबाख 2010 में पहली बार अफगानिस्तान गए और तभी से उन्हें इस देश से लगाव हो गया. उन्हें शिकायत है कि मीडिया सिर्फ अफगानिस्तान का कुरूप चेहरा ही दिखाता है.
मेहमानवाजी
अफगान लोग उमबाख के साथ बहुत प्यार और दोस्ताना तरीके से पेश आए. वो कहते हैं, “हमें अकसर दावतों, संगीत कार्यक्रमों और राष्ट्रीय खेल बुजकाशी के मुकाबलों में बुलाया जाता था.”
सुरक्षा
अफगानिस्तान में लोगों की फोटो लेना आसान काम नहीं था. हर जगह सुरक्षा होती थी. उमबाख को उनके स्थानीय सहायक ने बताया कि कहां जाना है और कहां नहीं.
नेता और उग्रवादी
उमबाख ने अता मोहम्मद नूर जैसे प्रभावशाली राजनेताओं की तस्वीरें भी लीं. बाल्ख प्रांत के गवर्नर मोहम्मद नूर जर्मनों के एक साझीदार है. उन्होंने कुछ उग्रवादियों को भी अपने कैमरे में कैद किया.
जर्मनी में प्रदर्शनी
उमबाख ने अपनी इन तस्वीरों की जर्मनी में एक प्रदर्शनी भी आयोजित की. कोलोन में लगने वाले दुनिया के सबसे बड़े फोटोग्राफी मेले फोटोकीना में भी उनके फोटो पेश किए गए.
फोटो बुक
येंस उमबाख अपनी तस्वीरों को किताब की शक्ल देना चाहते हैं. इसके लिए वो चंदा जमा कर रहे हैं. वो कहते हैं कि किताब की शक्ल में ये तस्वीरें हमेशा एक दस्तावेज के तौर पर बनी रहेंगी.
8 तस्वीरें1 | 8
काबुल में रहने वाले वाहिद मुजहद के मुताबिक, "इससे अफगानिस्तान में चल रहे जटिल अपरोक्ष युद्ध की परतें खुलती हैं." इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के सीनियर विश्लेषक टिमोर शैरन भी कुछ ऐसी ही राय रखते हैं. डॉयचे वेले से बात करते हुए उन्होंने कहा कि कंधार के हमले में भीतरी लोगों का ही हाथ है. राजिक भी यही कह रहे हैं. पुलिस चीफ के मुताबिक हमले के आरोप में कुछ सरकारी कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है. उनकी गिरफ्तारी के बाद ही हक्कानी नेटवर्क का नाम लिया जा रहा है.
अमेरिका हक्कानी नेटवर्क को आतंकवादी संगठन घोषित कर चुका है और पाकिस्तान से कई बार उसके खिलाफ कार्रवाई की मांग कर चुका है. लेकिन इस्लामाबाद अब तक कार्रवाई से बचता रहा है. हक्कानी नेटवर्क अफगानिस्तान से सटे पाकिस्तान के कबायली इलाकों से अपनी गतिविधि चलाता है. अफगानिस्तान में कई हमले हक्कानी नेटवर्क ही करता है. पाकिस्तान को यह संगठन चुनौती नहीं देता है.
सबसे घातक आतंकवादी संगठन
आतंकवाद दुनिया भर में हजारों जानें ले रहा है. आतंकी संगठनों में एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ सी लगी हुई है. एक नजर सबसे खूनी आतंकवादी संगठनों पर.
तस्वीर: Getty Images/AFP/I. Lieman
1. बोको हराम
जी हां, इस्लामिक स्टेन नहीं, बोको हराम. यह दुनिया का सबसे घातक आतंकी संगठन है. अबु बकर शेकाऊ के इस संगठन ने अकेले 2014 में ही 6,644 लोगों की जान ली. 1,742 लोग घायल हुए. सैकड़ों लड़कियों को अगवा किया.
तस्वीर: picture-alliance/AP Photo/S.Alamba
2. इस्लामिक स्टेट
इस्लामिक स्टेट द्वारा मारे गए लोगों की संख्या भले ही बोको हराम से कम हो, लेकिन इस संगठन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा माना जा रहा है. 2015 में इस्लामिक स्टेट ने 6,073 लोगों को मारा. कुल 5,799 आतंकी हमले किये. अबु बकर बगदादी का यह संगठन यूरोप, सीरिया, इराक, तुर्की और बांग्लादेश में सक्रिय है.
तस्वीर: picture-alliance/dpa
3. तालिबान
अफगानिस्तान के गृह युद्ध के दौरान 1994 में तालिबान बना. इसे दुनिया का सबसे अनुभवी आतंकी संगठन कहा जाता है. 2015 में तालिबान ने 891 हमले किये, जिनमें 3,477 लोगों की जान गई. हिबातुल्लाह अखुंदजादा की अगुवाई वाला तालिबान अफगानिस्तान पर दोबारा कब्जा करना चाहता है.
तस्वीर: picture-alliance/dpa/Noorullah Shirzada
4. फुलानी उग्रवादी
इस संगठन के बारे में बहुत ज्यादा जानकारी अभी भी नहीं है. खानाबदोश की तरह जगह बदलता यह संगठन नाइजीरिया में सक्रिय है. यह फुला कबीले का हथियारबंद संगठन है. ये फुलानी लोगों के जमींदारों को निशाना बनाता है. 2015 में इस उग्रवादी संगठन ने 150 से ज्यादा हमले किये और 1,129 लोगों की जान ली.
तस्वीर: Getty Images/AFP/I. Lieman
5. अल शबाब
बोको हराम का संबंध जहां इस्लामिक स्टेट से है, वहीं अल शबाब के तार अल कायदा से जुड़े हैं. पूर्वी अफ्रीका में सक्रिय यह आतंकी संगठन सोमालिया को इस्लामिक स्टेट बनाना चाहता है. बीते साल अल शबाब ने 496 आतंकी हमले किये और 1,021 लोगों की जान ली.