यूरोप को कोरोना संकट से उबारने की कोशिश तेज करेगा जर्मनी
३० जून २०२०
जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल ने कहा है कि जर्मनी 1 जुलाई को यूरोपीय संघ की अध्यक्षता संभालने के बाद एक प्रभावी रिकवरी योजना को सुनिश्चित करेगा. बर्लिन में फ्रांस के राष्ट्रपति से बातचीत के बाद उन्होंने यह बात कही.
जर्मनी और फ्रांस मिलकर रिवकरी प्लान पर काम कर रहे हैंतस्वीर: Getty Images/AFP/H. Jeon
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मैर्केल ने कहा कि जर्मनी यूरोपीय संघ में कोरोना महामारी के बाद रिवकरी की कोशिशों को तेज करेगा. बर्लिन में फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों के साथ बातचीत के बाद उन्होंने कहा, "हम मिल कर काम कर रहे हैं और यूरोप को इस संकट से लड़ने के लिए फिट बना रहे हैं." मैर्केल ने कहा, "मुझे खुशी है कि हमारे बीच उन चुनौतियों पर सहमति बनी है जिनसे हमें एक साथ मिल कर पार पाना है."
मैर्केल ने माना कि "उम्मीदें बहुत ज्यादा हैं," लेकिन जर्मनी और फ्रांस मिलकर इस जिम्मेदारी को निभाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. उन्होंने कहा, "महामारी के बाद की दुनिया अलग होगी. इसलिए भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए हमें ज्यादा निवेश करना होगा."
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बजट संबंधी पाबंदियों और महामारी के बाद के रिवकरी फंड से जुड़े सवालों पर चर्चा जुलाई के आखिर में होने वाली यूरोपीय परिषद के शिखर सम्मेलन में होगी. उन्होंने कहा, "यूरोप हमारा भविष्य है."
ईयू रिकवरी प्लान
जर्मनी, फ्रांस और यूरोपीय संघ के अन्य सदस्य देश 750 अरब यूरो के एक राहत पैकेज के लिए प्रयास कर रहे हैं, जिसके तहत महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों को यूरोपीय आयोग के जरिए ऐसी मदद दी जाए, जिसे चुकाना जरूरी नहीं होगा. हालांकि चार देश ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, नीदरलैंड्स और स्वीडन इसका विरोध कर रहे हैं.
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कोरोना के इलाज का दावा करने वाली दवाएं
कोविड-19 से फैली महामारी से छुटकारा दिलाने वाले टीके या सटीक दवा का इंतजार हर किसी को है. लेकिन इस बीच कुछ ऐसी नई और पुरानी दवाएं पेश की गई हैं जो कोरोना वायरस से लोगों की जान बचा सकती हैं.
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कोरोनील
पतंजलि योगपीठ के संस्थापक बाबा रामदेव कोविड-19 के लिए देश की पहली आयुर्वेदिक दवा 'दिव्य कोरोनील टैबलेट' ले आए हैं. इसे गिलोय, अश्वगंधा, तुलसी, श्वसारि रस और अणु तेल का मिश्रण बताया जा रहा है. निर्माताओं का दावा है कि इससे 14 के अंदर कोरोना ठीक हो जाएगा. ट्रायल के दौरान करीब सत्तर फीसदी लोगों के केवल तीन दिन में ही ठीक होने का दावा किया गया है.
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फेबीफ्लू
ग्लेनमार्क फार्मा की दवा फेवीपीरावीर गोली के रूप में खाई जा सकने वाली एंटी-वायरल दवा है. इसे कोविड-19 के हल्के या मध्यम दर्जे के संक्रमण वाले मामलों में दिया जा सकता है. करीब सौ रूपये प्रति गोली के दाम पर यह गोली भारतीय बाजार में फेबीफ्लू के नाम से मिलेगी. विश्व भर में इसके टेस्ट से अच्छे नतीजे मिले हैं. मरीजों में वायरल लोड कम हुआ और वे जल्दी ठीक हो पाए.
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डेक्सामेथासोन
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोविड-19 के लिए स्टीरॉयड ‘डेक्सामेथासोन’ का बड़े स्तर पर निर्माण करने की अपील की है. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के रिसर्चरों ने इसका परीक्षण करीब 2,000 बेहद गंभीर रूप से बीमार मरीजों पर किया. इसके इस्तेमाल से सांस के लिए पूरी तरह वेंटिलेटर पर निर्भर मरीजों की मौत को 35 फीसदी तक कम किया जा सका. यह बाजार में 60 साल पहले आई थी.
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कोविफोर
भारत के हैदराबाद की हीटेरो लैब ‘कोविफोर’ दवा ला रही है. यह असल में एंटीवायरस दवा ‘रेमडेसिविर’ ही है जिसे नए नाम से पेश किया जा रहा है. कंपनी ने इसे बनाने और बेचने के लिए भारतीय ड्रग रेगुलेटर संस्था से अनुमति हासिल कर ली है.
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एविफाविर
इस दवा को रूस में इस्तेमाल करने की अनुमति मिल गई है. ट्रायल के दौरान इंफ्लुएंजा की इस दवा से कोविड-19 के मरीजों में हालत में जल्दी सुधार आता देखा गया है. यही कारण है कि रूस ने ट्रायल पूरा होने से पहले ही देश के सभी अस्पतालों में इसका इस्तेमाल करने को कहा है.
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सिप्ला की सिप्रेमी
सिप्ला कंपनी भी वही जेनेरिक एंटीवायरस दवा ‘रेमडेसिविर’ अपने ब्रांड सिप्रेमी के नाम पर लाई है. अमेरिका की ड्रग्स रेगुलेटर बॉडी, यूएस एफडीए ने कोविड के मरीजों में इमरजेंसी की हालत में इसके इस्तेमाल की अनुमति दी है.
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हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन
मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाली यह दवा भारत में ही विकसित हुई थी. पहले उम्मीद की जा रही थी कि इससे कोविड-19 मरीजों को भी मदद मिल सकती है और अमेरिका ने भारत से इसकी बड़ी खेप भी मंगाई थी. लेकिन इससे खास फायदा नहीं होने के कारण फिलहाल कोरोना में इसे प्रभावी नहीं माना जा रहा है. ब्रिटेन और अमेरिका में इसका ट्रायल भी बंद हो गया है.
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फ्रांस के राष्ट्रपति ने पिछले हफ्ते हेग में डच प्रधानमंत्री मार्क रुटे से मुलाकात की और बताया गया कि रिकवरी योजना को लेकर प्रगति हुई है. वैसे फ्रांस के राष्ट्रपति कार्यालय के एक सूत्र ने कहा है कि उनका देश डील होने के प्रति आशावान है, लेकिन उसने यह भी माना कि "अभी हम वहां तक नहीं पहुंच पाए हैं."
लोकतंत्रों की रक्षा
फ्रांस के राष्ट्रपति माक्रों ने कहा कि महामारी का चरम बिंदु आना अभी बाकी है, इसलिए आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए यूरोपीय संघ के स्तर पर कदम उठाने की जरूरत है.
महामारी के बाद के रिवकरी प्लान की तरफ इशारा करते हुए उन्होंने कहा, "चांसलर और मैंने इसे कागज पर दर्ज किया है: स्पष्ट रूप से यह हमारी प्राथमिकता है. इसके बिना यूरोप चुनौतियों का सामना नहीं कर पाएगा. हमें अपने लोकतंत्रों की रक्षा करनी होगी."
फ्रांस के राष्ट्रपति ने इस बात का जिक्र भी किया कि जर्मनी ने 2008 में जिस तरह से वित्तीय संकट का सामना किया, फ्रांस उससे बहुत प्रेरित है और इससे महामारी के बाद की स्थिति को संभालने में मदद मिलेगी.
रात के खाने पर दोनों यूरोपीय नेताओं के बीच चीन, अमेरिका और तुर्की के साथ साथ लीबिया में जारी संघर्ष और पश्चिमी अफ्रीका के साहेल इलाके में आतंकवाद विरोधी अभियान पर भी चर्चा होनी थी.