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यूरो 2024 का सपना देखता जर्मनी

२५ अक्टूबर २०१३

वर्ल्ड कप के बाद फुटबॉल के सबसे चर्चित मुकाबले यूरो कप की मेजबानी को लेकर जर्मनी में सुगबुगाहट तेज हो गई है. जर्मन फुटबॉल संघ 2024 यूरो सॉकर टूर्नामेंट की मेजबानी के लिए आधिकारिक रूप से आवेदन करने जा रहा है.

तस्वीर: picture-alliance/dpa

जर्मन फुटबॉल एसोसिएशन के प्रमुख वोल्फगांग नीर्सबाख के मुताबिक, "2006 के वर्ल्ड कप के 18 साल बाद जर्मनी के पास गर्मियों में एक और गाथा लिखने का मौका है. आखिरी बार जर्मन फुटबॉल संघ ने यूरो टूर्नामेंट 1998 में करवाया. हमें लगता है कि पिछले टूर्नामेंटों के आयोजक के हवाले से हमने फीफा और यूएफा के सामने एक अच्छी छवि पेश की है."

वर्ल्ड कप की तरह यूरोपीय देशों के यूरो सॉकर टूर्नामेंट भी चार साल के अंतर पर होता है. आम तौर पर वर्ल्ड कप के दो साल बाद यूरो टूर्नामेंट होता है और फिर दो साल बाद वर्ल्ड कप. 2014 में ब्राजील में फुटबॉल वर्ल्ड कप होना है. 2016 का यूरो टूर्नामेंट फ्रांस में खेला जाएगा. 2020 में यूरोपीयन चैंपियनशिप की 60वीं सालगिरह के मौके पर यह मुकाबला यूरोप के 13 देशों में कराया जाएगा. इससे आयोजकों पर भी कम बोझ पड़ेगा.

मेजबानी का सपनातस्वीर: picture-alliance/dpa

सात साल बाद होने वाले यूरो टूर्नामेंट के लिए जर्मनी ने म्यूनिख शहर का नाम आगे रखा है. म्यूनिख को फुटबॉल, खाने, बीयर और मोटर के लिए जाना जाता है. 2024 के टूर्नांमेंट की मेजबानी किसे दी जाएगी, इसका फैसला 2017 में होगा.

मेजबानी के पीछे असल में बहुत कुछ छुपा रहता है. यूरोप में फुटबॉल को लेकर बेईंतहां दीवानगी है. जो देश आयोजक होता है कि उसकी टीम को घरेलू माहौल का फायदा मिलता है. उस टीम के खिलाड़ियों पर ध्यान ज्यादा केंद्रित रहता है, स्थानीय प्रशंसक हमेशा मनोबल बढ़ाने के लिए मौजूद रहते हैं. खेल अपने साथ अथाह कारोबार भी लाता है. टूर्नांमेंट की मेजबानी से पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था चमकती है. मीडिया अधिकार, करार से होने वाली कमाई भी आयोजकों को फायदा पहुंचाती है.

ओएसजे/आईबी (डीपीए, रॉयटर्स)

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