पाकिस्तान में बरामद हुए कुछ दस्तावेज आतंकी संगठन आईएस के दुनिया पर कब्जा कर खिलाफत राज स्थापित करने के सपनों का खुलासा करते हैं. भारत अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ ऐसी संगठित आतंकियों से निबटने के तरीके तलाश रहा है.
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इराक और सीरिया में सक्रिय इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने पूरे विश्व पर खिलाफत स्थापित करने के जो सपने देखे, उनके लिए विस्तृत योजना भी बनाई है. पाकिस्तान के कबायली इलाके में मिले दस्तावेजों की तुलना हिटलर की आत्मकथा माइन कांप्फ से की जा रही है. इसमें अगले पांच सालों में यानि 2020 तक आईएस के पूरी दुनिया में खिलाफत का दावा करने की बात है.
उर्दू में लिखे इन दस्तावेजों में ऐसे नक्शे भी हैं जो साफ दिखाते हैं कि आईएस ने अपना मकसद हासिल करने के लिए कितने विस्तार से योजना बनाई है. इस मैप में पूरे भारतीय महाद्वीप को भी 2010 तक खिलाफत के कब्जे में लेने का चित्रण है.
पहले ही बहुत तबाही झेल चुका सीरिया का पालमिरा इलाका एक बार फिर आईएस आतंकियों का निशाना बना है. पालमिरा की ऐतिहासिक धरोहरों को वे पहले भी नष्ट कर चुके हैं. सीरियाई अधिकारियों ने बताया है कि अब आईएस ने प्राचीन शहर पालमिरा के 81 वर्षीय पुरावशेष प्रमुख खालिद असाद को बहुत बेरहमी से मार डाला है.
अमेरिका ने आतंकवाद को एक साझी चुनौती बताते हुए भारत और पाकिस्तान समेत सभी देशों को मिलकर आईएस जैसे आतंकी गुटों का सफाया करने के प्रयास करने की बात दोहराई है. हाल ही में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी ने भी अपने संयुक्त अरब अमीरात के दौरे पर क्राउन प्रिंस जायेद अल नाह्यान के साथ द्विपक्षीय महत्व के मुद्दों के अलावा इलाके की स्थिति, खासकर कट्टरपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट और अन्य कट्टरपंथी संगठनों से बढ़ते आतंकवादी और चरमपंथी खतरे पर भी चर्चा की.
एमनेस्टी इंटरनेशनल पहले ही आईएस के चंगुल से भागी 40 लड़कियों से बात के आधार पर रिपोर्ट दे चुका है कि इस्लामी कट्टरपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट के लड़ाके यजीदी लड़कियों का यौन शोषण और उनकी नीलामी जैसे काम करते रहे हैं. अब यजीदी महिलाओं ने भी इस्लामिक स्टेट के खिलाफ संगठित होकर हथियार उठा लिए हैं.
आरआर/एमजे
तुर्की की 10 दिलचस्प बातें
रिपब्लिक ऑफ तुर्की, जी हां, 1923 से तुर्की का यही असली नाम है और इसकी राजधानी विश्वप्रसिद्ध इस्तांबुल नहीं, बल्कि अंकारा है. समुद्री किनारों और चहल पहल भरे बाजारों के अलावा समृद्ध इतिहास वाले तुर्की के कुछ मजेदार तथ्य.
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कल्पना का घोड़ा: ट्रोजन हॉर्स
ट्रॉय के पुरातात्विक स्थल के प्रवेश द्वार पर रखी लकड़ी के घोड़े की एक शानदार प्रतिकृति. तुर्की के कुछ पुरातत्व विज्ञानियों ने दावा किया था कि उन्हें ऐतिहासिक ट्रॉय शहर में खुदाई के दौरान बड़ी लकड़ी की संरचना मिली जो ट्रोजन हॉर्स हो सकता है. कई इतिहासकार इसे केवल एक मिथक का हिस्सा मानते हैं.
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दो विश्व अजूबे
दुनिया के 7 प्राचीन अजूबों में शामिल इफेसस और हेलिकार्नासुस तुर्की में ही हैं. माना जाता है कि इफेसस के दक्षिण में स्थित एक घर में खुद वर्जिन मेरी रही थीं. प्राचीन शहर हेलिकार्नासुस में राजा मुसोलस का मकबरा विश्व अजूबा माना गया.
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असली सांता क्लॉज
दुनिया भर में सांता क्लॉज के नाम से मशहूर संत का असली नाम सेंट निकोलस था. उनका जन्म तुर्की के पटारा में हुआ माना जाता है. बाद में वे तुर्की में भूमध्यसागर के तट पर बसे शहर डेमरी के बिशप बने.
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दो महाद्वीपों की कड़ी
दुनिया भर में केवल इस्तांबुल ही एक ऐसा शहर है जो दो महाद्वीपों में बसा है. वैसे तुर्की का केवल 3 प्रतिशत हिस्सा ही यूरोप में और बाकी एशिया में है. 2010 में यूरोपीय संघ ने इस्तांबुल को यूरोपियन कैपिटल ऑफ कल्चर घोषित किया था.
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नीदरलैंड्स के नहीं थे ट्यूलिप
इतिहासकारों ने पाया है कि 16वीं सदी में तुर्की के व्यापारियों ने ही सबसे पहले डच लोगों को ट्यूलिप के फूलों से परिचित करवाया. आधुनिक समय में ट्यूलिप का पर्याय बन चुके नीदरलैंड्स के मशहूर कोएकेनहोफ बागीचे में ईरान, तुर्की, बुल्गारिया के ट्यूलिप पहली बार 1954 में बोए गए.
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कॉफी का यूरोप से परिचय
15वीं सदी में तुर्की के रास्ते ही यूरोप में कॉफी आई. तुर्की के तत्कालीन ओटोमन साम्राज्य ने सबसे पहले कॉफी के बीजों से इतावली लोगों को परिचित कराया. फिर इटली से इसकी लोकप्रियता दूसरे यूरोपीय देशों में फैली.
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हेजलनट का दबदबा
आज तमाम चॉकलेट, केक और मिठाइयों में इस्तेमाल होने वाले मेवे हेजलनट का करीब 80 फीसदी केवल तुर्की से ही निर्यात होता है. मेवों से बनने वाली बकलावा जैसी कई तुर्क मिठाइयां आज विश्व भर में पसंद की जाती हैं.
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नाम के अनुरूप- ग्रैंड
इस मशहूर बाजार में 64 गलियां, करीब 4,000 दुकाने और 25,000 से भी ज्यादा लोग काम करते हैं. ग्रैंड बाजार दुनिया के सबसे विशाल और सबसे पुराने ढके हुए बाजारों में एक है. हर साल दुनिया भर से लाखों पर्यटक इन बाजारों का रूख करते हैं.
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धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक
तुर्की मुस्लिम बहुल होकर भी लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों पर चलता है. 1923 में आजादी की लड़ाई के बाद से यह रिपब्लिक ऑफ तुर्की बना और साथ ही देश में इन सेकुलर और डेमोक्रेटिक प्रक्रियाएं लागू हुईं.
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महिला अधिकारों में अव्वल
जून 2015 में 25वें आम चुनावों में अपना वोट देती तुर्क महिला. 1750 ईसा पूर्व से 1190 के बीच तुर्की में प्रभावशाली हितितीज ने शासन किया, जो महिला और पुरुष अधिकारों में समानता के पक्षधर थे. आधुनिक काल में भी, अमेरिका या किसी भी यूरोपीय देश से पहले तुर्की में ही महिलाओं को मत का अधिकार मिला था.