पाकिस्तान के लाहौर शहर में एक आत्मघाती हमले में सेना के चार जवानों समेत छह लोग मारे गए. हमलावर ने जनगणना कर रही टीम को निशाना बनाया.
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पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की राजधानी लाहौर में बुधवार सुबह एक जनगणना टीम को निशाना बनाया गया. राज्य सरकार के एक अधिकारी के मुताबिक बेदियां रोड पर सेना की गाड़ी खड़ी थी. सेना के जवान जनगणना कर रहे कर्मचारियों के साथ थे. इसी दौरान मोटरसाइकिल पर सवार एक शख्स गाड़ी के पास पहुंचा और धमाका कर दिया. सेना के चार जवान और जनगणना कर रहे दो कर्मचारी मौके पर ही मारे गए.
पंजाब सरकार के प्रवक्ता मलिक अहमद खान ने पाकिस्तान के टीवी चैनल जिओ न्यूज से कहा, "यह एक आत्मघाती हमला था, हालांकि अभी इस बात का पता करना है कि कितना विस्फोटक इस्तेमाल किया गया." तीन घायलों की हालत नाजुक है. लाहौर के अस्पतालों में इमरजेंसी लागू की गई है.
क्यों खास है पाकिस्तान की जनगणना
दुनिया के छठे सबसे ज्यादा आबादी वाले देश पाकिस्तान में 19 सालों के बाद राष्ट्रीय जनगणना होने जा रही है. देखिए भारत के इस पड़ोसी देश की जनगणना से जुड़ी कुछ और खास बातें.
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पहली बार ट्रांस सेक्शुअल लोगों को भी जनगणना में अलग से गिना जाएगा. यह समुदाय पाकिस्तानी समाज में काफी प्रताड़ित रहा है.
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ट्रांस सेक्शुअल लोगों को देश की आाबादी में गिने जाने का आदेश कोर्ट से आया और इसके लिए नये सेंसस फॉर्म छपवाते समय तीसरी श्रेणी रखी गई है.
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गणना का काम करने वालों को ट्रेनिंग में बताया जा रहा है कि फार्म में तीन खाने होंगे: 1- पुरुष, 2- महिला और 3- ट्रांस सेक्शुअल लोगों के लिए.
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कई जाति-समुदायों वाले पाकिस्तान में कई भाषाओं के प्रचलन से भी विविधता का पता चलता है. अनुमान तो करीब 70 का है लेकिन केवल 9 भाषाएं ही सूची में हैं.
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कम आबादी वाले गिलगिट-बाल्तिस्तान इलाके की क्षेत्रीय भाषा या गुजराती को भी सूची में नहीं रखा है. भारत से पाकिस्तान पहुंचे कई मुस्लिम प्रवासी गुजराती को साथ लाए थे.
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जनगणना से धार्मिक अल्पसंख्यकों की सही तादाद का पता चलेगा, जैसे ईसाई और हिन्दू. करीब 20 लाख से 1 करोड़ ईसाइयों और 25 लाख से 45 लाख हिन्दुओं का अनुमान है.
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नागरिक खुद को मुसलमान, ईसाई, हिन्दू या अहमदी धर्म को मानने वाला बता सकेंगे. अहमदी इस्लाम की ही एक शाखा हैं, जिन्हें राज्य विधर्मी मानता है.
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इन मुख्य धार्मिक विकल्पों के अलावा कोई व्यक्ति अपने आपको "अनुसूचित जाति का सदस्य" भी बता सकता है. इनमें ज्यादातर हाशिये पर रहने वाले कुछ हिन्दू परिवार हैं.
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पाकिस्तान के बाकी धर्म के लोगों को खुद को "अन्य" की श्रेणी में रखवाना होगा. सिखों, पारसियों या बहाई लोगों के लिए कोई श्रेणी जनगणना सूची में नहीं रखी गई है.
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एक बॉक्स में यह जानकारी भी देनी है कि घर में कितने शौचालय हैं. यूएन के अनुसार अब भी करीब 40 फीसदी पाकिस्तानी लोग खुले में शौच जाते हैं.
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सरकारी जनगणना में राष्ट्रीयता दर्ज कराने के लिए दो खाने हैं. पाकिस्तानी या विदेशी. लेकिन इसी के साथ पाकिस्तानी सेना भी गणना करवाएगी, जिसमें अफगानी शरणार्थियों के भी आंकड़े दर्ज होंगे.
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अफगान शरणार्थियों पर पाकिस्तान में आतंकवाद फैलाने से लेकर तस्करी में शामिल होने तक के आरोप लगते हैं. स्थानीय लोगों को डर है कि अगर अफगानियों को स्थानीय माना गया तो इलाके की पश्तून पार्टियां मजबूत बनेंगी.
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पाकिस्तान के करीब 60 लाख लोग बाहर के देशों में काम कर रहे हैं, जिन्हें जनगणना में शामिल नहीं किया जाएगा.
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धमाके के चलते पास खड़ी कारों में आग भी लग गई. बेदियां रोड लाहौर की सबसे व्यस्त सड़कों में से एक है. सड़क लाहौर के पॉश इलाके डीएचए को जोड़ती है.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने धमाके की निंदा की है. वहीं नवाज शरीफ के भाई और पंजाब के मुख्यमंत्री शहबाज शरीफ ने अधिकारियों ने धमाके की रिपोर्ट मांगी है.
पाकिस्तान में इस साल अब तक ही कई बड़े आतंकी हमले हो चुके हैं. फरवरी में सिंध की सूफी दरगाह में हुए धमाके में 70 से ज्यादा लोग मारे गए थे. फरवरी में ही पंजाब विधान सभा के बाहर भी धमाका हुआ, जिसमें 13 लोग मारे गए. इन हमलों के बाद सेना ने देश भर में आतंकवाद के खिलाफ अभियान छेड़ा है, लेकिन इसके बावजूद आए दिन आतंकी हमले हो रहे हैं.
पाकिस्तान में 19 साल बाद जनगणना हो रही है. जनगणना से यह भी पता चलेगा कि देश में कितने अफगान रह रहे हैं. पाकिस्तान में लाखों अफगान नागरिक बिना आधिकारिक दस्तावेजों के रहते हैं. सरकार के जनगणना के इरादों को इस समुदाय के कुछ लोग शक की नजर से देखते हैं. पंजाब के न्याय मंत्री राणा सनाउल्ला ने बताया है कि जनगणना का काम लाहौर और पूरे प्रांत में बिना रुकावट के जारी रहेगा.
(पाकिस्तान: दहशत के 10 साल)
पाकिस्तान: दहशत के दस साल
अफगानिस्तान पर 2001 में तालिबान के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई के बाद से पाकिस्तान में इस्लामी कट्टरपंथियों ने हजारों लोगों की जान ली है. यहां तस्वीरों में पिछले एक दशक के कुछ प्रमुख कट्टरपंथी हमले.
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2017- शाहबाज कलंदर की मजार पर हमला
सिंध प्रांत के सेहवान में 16 फरवरी 2017 को एक सूफी संत शाहबाज कलंदर की मजार को निशाना बनाया जिसमें 70 से ज्यादा लोग मारे गए. आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट ने हमले की जिम्मेदारी ली है.
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2016 - क्वेटा पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज
24 अक्टूबर को क्वेटा के पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज पर तीन आतंकवादियों ने हमला किया. इस हमले में 60 से ज्यादा कैडेटों की मौत हो गई. इस साल के सबसे भयानक हमलों में से एक में तीनों आत्मघाती हमलावरों को मार डाला गया.
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2016 - क्वेटा में अस्पताल पर हमला
आतंकवादियों ने 8 अगस्त 2016 को क्वेटा के सरकारी अस्पताल पर आत्मघाती हमला किया. फायरिंग और उसके बाद हुए आत्मघाती हमले में 70 लोग मारे गए. निशाना वकीलों को बनाया गया था जो अस्पताल में बार एसोसिएशन के प्रमुख बिलाल अनवर कासी की लाश के साथ आए थे. उन्हें अज्ञात लोगों ने गोली मार दी थी.
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2016 - लाहौर में पार्क पर हमला
27 मार्च 2016 को लाहौर में एक लोकप्रिय पार्क पर आत्मघाती हमला हुआ जिसमें 75 लोग मारे गए. हमला ईसाई समुदाय पर लक्षित था जो ईस्टर मना रहे थे. मृतकों में 14 लोगों की शिनाख्त ईसाइयों के रूप में हुई, बाकी मुसलमान थे. तहरीके तालिबान से जुड़े गुट जमात उल अहरार ने जिम्मेदारी ली.
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2015 - कराची में एक बस को बनाया निशाना
कराची में सफूरा गोठ में 8 बंदूकधारियों ने एक बस पर हमला किया. फायरिंग में 46 लोग मारे गए. मरने वाले सभी लोग इस्माइली शिया समुदाय के थे. प्रतिबंधित उग्रपंथी गुट जुंदलाह ने हमले की जिम्मेदारी ली. हमले की जगह इस्लामिक स्टेट को समर्थन देने वाली पर्चियां भी मिली.
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2014 - पेशावर में बच्चों पर क्रूर हमला
16 दिसंबर 2014 को तहरीके तालिबान से जुड़े 7 बंदूकधारियों ने पेशावर में आर्मी पब्लिक स्कूल पर हमला किया. आतंकियों ने बच्चों और स्टाफ पर गोलियां चलाईं और 154 लोगों को मार दिया. उनमें 132 बच्चे थे. यह पाकिस्तान में होने वाला अब तक का सबसे खूनी आतंकी हमला था.
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2013 - पेशावर में चर्च पर हमला
पेशावर में 22 सितंबर 2013 को ऑल सेंट चर्च पर हमला हुआ. यह देश के ईसाई अल्पसंख्यकों पर सबसे बड़ा हमला था. इस हमले में 82 लोग मारे गए. हमले की जिम्मेदारी तहरीके तालिबान पाकिस्तान से जुड़े एक इस्लामी कट्टरपंथी गुट जुंदलाह ने ली.
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2011 - चारसद्दा में पुलिस पर हमला
13 मई 2011 को खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के चारसद्दा जिले में शाबकदर किले पर दोहरा हमला हुआ. दो आत्मघाती हमलावरों ने एक पुलिस ट्रेनिंग सेंटर के बाहर दस दिन की छुट्टी के लिए बस पर सवार होते कैडेटों पर हमला किया और 98 लोगों की जान ले ली. कम से कम 140 लोग घायल हो गए.
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2010 - कबायली इलाके पर दबिश
उत्तर पश्चिम के मोहमंद जिले में एक आत्मघाती हमलावर ने व्यस्त बाजार पर हमला किया और 105 लोगों की जान ले ली. केंद्र शासित कबायली इलाके में ये हमला 9 जुलाई को हुआ. माना जाता है कि हमले का लक्ष्य कबायली सरदारों की एक मीटिंग थी. जिम्मेदारी तहरीके तालिबान पाकिस्तान ने ली.
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2010 - लाहौर नरसंहार
मई 2010 के आतंकी हमले को लाहौर नरसंहार के नाम से भी जाना जाता है. 28 मई को जुम्मे की नमाज के दौरान अल्पसंख्यक अहमदिया संप्रदाय की दो मस्जिदों पर एक साथ हमले हुए. 82 लोग मारे गए. हमले की जिम्मेदारी तहरीके तालिबान पाकिस्तान ने ली.
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2010 - वॉलीबॉल मैच को बनाया निशाना
पाकिस्तान के उत्तर पश्चिमी जिले बन्नू के एक गांव में वॉलीबॉल मैच चल रहा था. आतंकवादियों ने इस मैच को भी शांति में नहीं होने दिया. उस पर कार में रखे बम की मदद से आत्मघाती हमला हुआ. हमले में 101 लोग मारे गए. खेल का मैदान कत्लेआम का गवाह बना.
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2009 - लाहौर का बाजार बना निशाना
दिसंबर 2009 में लाहौर के बाजार में दो बम धमाके किए गए और देश के दूसरे सबसे बड़े शहर के भीड़ भरे बाजार में फायरिंग भी की गई. हमलों में कम से कम 66 लोग मारे गए. मरने वालों में सबसे ज्यादा तादाद महिलाओं की थी. इस हमले के साथ देश का प्राचीन शहर आतंकियों की जद में आ गया था.
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2009 - नया निशाना पेशावर
पाकिस्तान के पश्चिमोत्तर में बसे शहर पेशावर के मीना बाजार में एक कार बम का धमाका किया गया. इस धमाके में 125 लोग मारे गए और 200 से ज्यादा घायल हो गए. पाकिस्तान की सरकार ने हमले के लिए तालिबान को जिम्मेदार ठहराया. लेकिन तालिबान और अल कायदा दोनों ने ही हमले में हाथ होने से इंकार किया.
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2008-राजधानी में लक्जरी होटल पर हमला
कट्टरपंथी आम लोगों पर हमले के तरह तरह के तरीके ईजाद कर रहे थे. एक ट्रक में विस्फोटक भर कर उन्होंने 20 सितंबर 2008 को राजधानी इस्लामाबाद के मैरियट होटल के सामने उसे उड़ा दिया. कम से कम 60 लोग मारे गए और 200 से ज्यादा घायल हो गए. मरने वालों में 5 विदेशी नागरिक भी थे.
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2008-पाकिस्तान की हथियार फैक्टरी पर हमला
वाह में 21 अगस्त 2008 को पाकिस्तान की ऑर्डिनेंस फैक्टरी पर दोहरा आत्मघाती हमला किया गया. हमलों में कम से कम 64 लोग मारे गए. यह पाकिस्तानी सेना के इतिहास में उसके संस्थान पर हुआ अब तक का सबसे खूनी हमला है. तहरीके तालिबान पाकिस्तान के एक प्रवक्ता ने हमले की जिम्मेदारी ली.
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2007- बेनजीर की वापसी पर बम हमला
सैनिक तानाशाह परवेज मुशर्रफ ने 2008 में चुनाव कराकर सत्ता के बंटवारे का रास्ता चुना था. दो बार प्रधानमंत्री रही बेनजीर भुट्टो चुनाव में भाग लेने निर्वासन से वापस लौटीं. करांची में उनके काफिले पर बम हमला हुआ. वे बाल बाल बची. लेकिन दो महीने बाद 27 दिसंबर को रावलपिंडी में भाग्य ने उनका साथ नहीं दिया.