आमतौर पर पीड़ित इस बीमारी की चपेट में आने के दो से तीन साल के भीतर दम तोड़ देते हैं लेकिन हॉकिंग एक दो नहीं, बल्कि पचास साल से ज्यादा वक्त तक इससे जूझते रहे और वो एक दुर्लभ अपवाद हैं.
इस न्यूरोडिजेनरेटिव स्थिति में दिमाग और स्पाइन कॉर्ड (मेरूरज्जू) के मोटर नर्व सेल्स पर हमला होता है जिसके कारण मांसपेशियों से संवाद और स्वैच्छिक गतिविधियों पर नियंत्रण खत्म हो जाता है. इसकी परिणति लकवे के रूप में सामने आती है.
शुरुआत में मांसपेशियां अकड़ जाती हैं, फिर धीरे धीरे कमजोरी बढ़ती जाती है, समय बीतने के साथ पीड़ित चलने, बोलने यहां तक कि सांस लेने की क्षमता भी खो देता है. यह घातक स्थिति दुर्लभ है. आमतौर पर हर साल एक लाख में दो लोग इस बीमारी की चपेट में आते हैं और ज्यादातर ऐसे लोगों की उम्र 55 से 65 साल के बीच होती है.
2014 में इस बीमारी का नाम घर घर सुना जाने लगा जब "आइस बकेट चैलेंज" वायरल हुआ. इसमें लोग अपने सिर पर ठंडा पानी डाल कर वीडियो अपलोड कर रहे थे. इसका मकसद इस बीमारी के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाना था.
फिलहाल एएलएस का कोई इलाज या उपचार नहीं है जो इसे रोक सके, हालांकि इसके लक्षणों को कुछ हद तक नियंत्रित करने के कुछ विकल्प जरूर मौजूद हैं.
मशहूर ब्रिटिश वैज्ञानिक प्रोफेसर स्टीफन हॉकिंग ने सिलिकॉन वैली के रूसी अरबपति यूरी मिलनर के साथ मिलकर एक अनोखा अभियान शुरू किया है. वे जानना चाहते हैं कि क्या ब्रह्मांड में हम पृथ्वीवासियों के अलावा कोई अलौकिक जीव भी है.
तस्वीर: AP'ब्रेकथ्रू लिसन प्रोजेक्ट' के तहत धरती के सबसे बड़े टेलीस्कोपों, लेजर और रेडियो सिग्नलों का इस्तेमाल कर, 10 सालों तक, करीब 10 करोड़ अमेरिकी डॉलर का खर्च. प्रोफेसर हॉकिंग का मानना है कि ब्रह्मांड के कई हिस्सों में जीवन है. केवल ग्रहों पर ही नहीं, बल्कि तारों या फिर ग्रहों के बीच की जगह में भी.
तस्वीर: APक्या ऐसे अलौकिक जीव या एलियन वाकई होते है? इस पर जाने माने भौतिकशास्त्री प्रोफेसर हॉकिंग तो हां ही कहेंगे. हॉकिंग हमेशा से मानते आए हैं कि हमारे ग्रहों से बाहर एलियन्स हैं लेकिन पहले वे उनके साथ संपर्क साधने को बेदह खतरनाक बताते थे.
तस्वीर: APब्रह्मांड में करीब 100 अरब गैलेक्सियों का अनुमान है. हर गैलेक्सी में लाखों तारे होते हैं. ऐसे में यह मान कर बैठना तो नासमझी ही होगी कि इतनी बड़ी जगह में केवल एक धरती पर ही जीवन हो. यूनिवर्स की रचना के बिग बैंग सिद्धांत के अनुसार एक विशाल विस्फोट के बाद सौर मंडल के तमाम ग्रह अस्तित्व में आए.
तस्वीर: picture-alliance/dpaइंसान के लिए अंतरिक्ष रहस्यों का खजाना है. कहानियों, फिल्मों में दूसरे ग्रह से आए जीवों से लेकर उड़नतश्तरियों का जिक्र होता है लेकिन इनके साक्ष्य हासिल करने के लिए वैज्ञानिक तमाम परीक्षण और गणनाएं करते हैं.
तस्वीर: picture-alliance/dpaदक्षिण अफ्रीका में लगे दुनिया के सबसे बड़े रेडियो टेलीस्कोप स्क्वेयर किलोमीटर ऐरे की मदद से हजारों मील दूर तारों को करीब से देखा जा सकता है. इसके अलावा प्रोजेक्ट वैज्ञनिकों का मानना है कि अगर अंतरिक्ष में कहीं कोई जीव हैं और वे अपने संकेत छोड़ रहे हैं तो उसकी पहचान ऐरे के शक्तिशाली एंटीने कर लेंगे.
तस्वीर: AFP/Getty Imagesकई दशकों से वैज्ञानिक पृथ्वी से बाहर किसी एलीयन के संदेशों को सुनने की कोशिश करते आए हैं. अमेरिकी एस्ट्रोफिजिसिस्ट्स ने यह सुझाया कि उनसे संपर्क साधने के लिए हमें खुद पृथ्वी से उन्हें शक्तिशाली सिग्नल भेजने चाहिए. यही कैलिफोर्निया के सर्च फॉर एक्स्ट्राटेरिस्ट्रियल इंटेलीजेंस (सेटी) के 'एक्टिव सेटी' प्रोजेक्ट का आधार है.
तस्वीर: Bernhard Musilसेटी रिसर्चरों का मानना है कि अंतरिक्षविज्ञानियों का तारों की ओर अपने रेडियो टेलीस्कोप साधे हुए वहां से आने वाले सिग्नलों की राह देखना काफी नहीं. एक्टिव सेटी प्रोजेक्ट के तहत उन लाखों तारा समूहों, गैलेक्टिक केंद्रों, धरती के सबसे पास के करीब 100 गैलेक्सियों और पूरी आकाशगंगा में सिग्नल भेजे जाएंगे, जहां जीवन की संभावना हो सकती है.
तस्वीर: Colourboxसाल 1977 में दो वोयाजर स्पेसक्राफ्ट पर फोनोग्राफ रिकॉर्ड रख कर भेजे गए जिनमें धरती के कुछ चुनिंदा दृश्य और आवाजें थीं. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने 2008 में बीटल्स के मशहूर गाने "एक्रॉस दि यूनिवर्स" को धरती से 430 प्रकाश वर्ष दूर स्थित तारे नॉर्थ स्टार तक भेजा था.
तस्वीर: imago/United Archivesफिल्मों के मशहूर एलियन किरदार ईटी और किंग कॉन्ग की रचना करने वाले इटली के स्पेशल इफेक्ट के जादूगर कार्लो रांबाल्दी ने इसके लिए तीन ऑस्कर पुरस्कार जीते. रांबाल्दी को 1982 में स्टीवन स्पीलबर्ग की फिल्म ईटी (एक्स्ट्रा टेरेसट्रियल) से बेशुमार शोहरत मिली और दुनिया को एलियनों का एक चेहरा ईटी मिला.
तस्वीर: Getty Images अमेरिका में मौजूद एएलएस एसोसिएशन के मुताबिक यह बीमारी दो रूपों में सामने आती है. ज्यादातर लोग "स्पोर्डिक" वर्जन की चपेट में आते हैं जो किसी को भी अपना शिकार बना सकता है हालांकि अमेरिका में 10 फीसदी मरीज ऐसे हैं जिन्हें यह बीमारी विरासत में मिली है.
आम लोगों की तुलना में दोगुनी संख्या में पूर्व सैनिक इस बीमारी की चपेट में आते देखे गए हैं हालांकि इसके पीछे क्या वजह है इस बारे में कोई जानकारी नहीं है. एएलएस एसोसिएशन के मुताबिक बीमारी का शिकार होने के बाद जीवित रहने की औसत आयु 3 साल है. केवल पांच फीसदी मरीज ही ऐसे हैं जो 20 साल या उससे ज्यादा वक्त तक जीवित रहते हैं.
रिसर्चरों का कहना है कि इतने लंबे समय तक हॉकिंग का जिंदा रहना एक रहस्य है. हालांकि कुछ रिसर्चरों का यह भी कहना है कि अलग अलग लोगों में इस बीमारी का विस्तार अलग तरीके से होता है और इसे जेनेटिक्स के जरिए कुछ हद तक नियंत्रित होता है.
इस बीमारी के पीड़ित अन्य मशहूर लोगों में प्लेराइट सैम शेपर्ड भी हैं जिनकी अगस्त 2017 में मौत हुई. इसके अलावा सीसेम स्ट्रीट के क्रिएटर जॉन स्टोन और जैज म्यूजीशियन चार्ल्स मिंगस भी इसके शिकार हुए.
एएलएस को आमतौर पर "लोउ गेहरिंग्स डिजीज" कहा जाता है इसके जरिए बेसबॉल के उस मशहूर खिलाड़ी को याद किया जाता है जिनकी जान इस बीमारी के कारण 1941 में गई.
एनआर/एके (एएफपी)