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शतरंज का नया शहंशाह

१६ जुलाई २०१०

विश्वविजेता विश्वनाथन का ताज खतरे में है और हुंकार भरी है 19 साल के मैगनस कार्लसन ने. नॉर्वे के कार्लसन शतरंज में पहले नंबर की गद्दी पर जम चुके हैं और अब नजरें सीधे विश्व खिताब पर है, जो भारत के विश्वनाथन आनंद के पास है.

नॉर्वे के मैग्नस कार्लसनतस्वीर: AP

उम्मीदें इसलिए भी बढ़ जाती हैं कि कार्लसन के सिर पर महान ग्रैंडमास्टर गैरी कास्परोव का हाथ है. वह नॉर्वे के इस किशोर को ट्रेनिंग दे रहे हैं. खुले बाल और बेफिक्र अंदाज में रहने वाले कार्लसन ने बरसों पहले ही लोगों का ध्यान खींच लिया था, जब वह कैजुअल कपड़े पहन कर शतरंज के बड़े मुकाबलों में पहुंच जाते और गंभीर चालों पर अपनी राय देने लगते.

सिर्फ 13 साल की उम्र में स्वेन मैगनस कार्लसन तीसरे सबसे युवा ग्रैंडमास्टर बन गए और एक जनवरी, 2010 को दुनिया उस वक्त हैरान रह गई जब 19 साल के कार्लसन फिडे की रैंकिंग में पहले नंबर पर पहुंच गए. वह दुनिया के सबसे कम उम्र के ग्रैंडमास्टर बन चुके हैं.

अच्छे अच्छों को छकाने वाले मैगनसतस्वीर: AP

कार्लसन के चेहरे पर अभी ढंग से मूंछें भी नहीं उगी हैं. लेकिन उनकी चालें बड़े बड़ों के पसीने छुड़ाने के लिए काफी हैं. कहा जाता है कि पिछले साल भर में उन्होंने जिस तरह का शतरंज खेला है, वैसा हाल के बरसों में कहीं नहीं देखने को मिला था. बड़े बड़े टूर्नामेंटों में कामयाबी और इस साल के कैंडिडेट टूर्नामेंट में चुना जाना. इसी मुकाबले में तय होता है कि विश्व चैंपियन को कौन सा शतरंज का खिलाड़ी चुनौती देगा. अगर कार्लसन इसमें कामयाब रहते हैं तो 2012 में वह विश्व खिताब के लिए भारत के विश्वनाथन आनंद के सामने बैठे नजर आएंगे.

पहले नंबर के कार्लसन भी इस खिताब पर नजरें गड़ा चुके हैं. उनका कहना है, "कई बरसों से मेरा लक्ष्य था कि मैं नंबर वन खिलाड़ी बनूं. लेकिन वर्ल्ड चैंपियनशिप जीते बगैर भला आप कैसे नंबर वन बन सकते हैं. यह एक बड़ी चीज है." कार्लसन के मौजूदा फॉर्म को देखते हुए इस बात की पूरी संभावना है कि वह वर्ल्ड चैंपियनशिप खेल सकते हैं.

अपने पिता हेनरिक कार्लसन से शतरंज की बाजियां सीखने वाले मैगनस अब खुद बड़े उस्ताद हो गए हैं और उनके पिता चाह कर भी अपने बेटे को हरा नहीं पाते. कार्लसन की जबरदस्त याददाश्त है. सिर्फ दो साल की उम्र में उन्हें बड़ी कार कंपनियों के नाम याद हो गए थे. पांच साल में लेगो से वो शानदार कृतियां बना सकते थे. इसके बाद उन्हें दुनिया भर के देशों, उनकी राजधानियों और उनके झंडों की पहचान मुंहजबानी याद हो गई. बहन को हरा देने की तमन्ना के साथ वह शतरंज की बिसात पर पहली बार बैठे.

गैरी हैं गुरुतस्वीर: AP

आठ साल के होते होते उन्होंने अपना पहला टूर्नामेंट खेला और 13 साल की उम्र में शतरंज की दुनिया उनकी चर्चा करने लगी. 2004 में कार्लसन ने अनातोली कास्परोव को हरा दिया, कास्परोव को ड्रॉ पर रोक लिया और ग्रैंडमास्टर बन बैठे.

कास्परोव उनके खेल से इस कदर प्रभावित हैं कि उन्होंने पिछले साल से कार्लसन को ट्रेनिंग देनी शुरू कर दी. इसके बाद कार्लसन और तेजी से आगे बढ़े और फौरन पहले नंबर पर चढ़ बैठे. कास्परोव को भी पहले नंबर तक पहुंचने में कार्लसन से ज्यादा 20 साल और नौ महीने का वक्त लगा था. कास्परोव का कहना है, "वह हमारे परंपरागत शतरंज का खेल बदलने वाले हैं."

काली मुहरें हों या सफेद, कार्लसन तेजी से चाल चलने के लिए जाने जाते हैं. वह ब्लिट्ज चेस मुकाबला यानी त्वरित शतरंज के भी चैंपियन हैं. तेज चाल चलते ही सामने वाले खिलाड़ी पर दबाव बन जाता है. भारत के विश्वनाथन आनंद भी अपनी चालें बड़ी तेजी से चलते हैं.

कार्लसन के पिता आम तौर पर उनके साथ ही दिखते हैं. शतरंज में नई बुलंदियों को छूने वाले कार्लसन अचानक प्रेस से घिर जाने और उनके सवालों से थोड़ा हिचकिचा जाते हैं. वहां उनके पिता उनकी मदद को आगे आते हैं. 19 साल के कार्लसन पिछले नौ साल से अपने पिता से शतरंज की एक भी बाजी नहीं हारे हैं, पर पिता को इस बात का कोई मलाल नहीं.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए जमाल

संपादनः आभा एम

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