कोलोन में मुसलमानों पर हुए हमले निंदनीय हैं. डीडब्ल्यू के शामिल शम्स मानते हैं कि इनसे जाहिर है कि जर्मन उस संस्कृति से खतरा महसूस कर रहे हैं जो उनसे तौर तरीकों में अलग है.
तस्वीर: Süddeutsche Zeitung
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जर्मनी में काम करने वाले पाकिस्तानी पत्रकार की हैसियत से मुझे जर्मन सरकार के हजारों शरणार्थियों के बिना पृष्ठभूमि की जांच के अपने यहां आने देने के फैसले पर संशय रहा है. बेशक, मुझे उन लोगों के दर्द से सहानुभूति है जो युद्ध के हालात झेल रहे सीरिया जैसे देशों से भाग रहे हैं. जो इस्लामिक स्टेट और राष्ट्रपति बशर अल असद के दमन और हिंसा का शिकार हो रहे हैं. जो कभी एक शांत राष्ट्र था, मैं उनका दुख, प्रियजनों से बिछड़ने का दर्द, युद्ध में घर और जीवन खोने की पीड़ा समझता हूं.
लेकिन इसके साथ ही, मैं यह भी जान रहा था कि आप्रवासियों की बाढ़ अंतत: जर्मन समाज की समरसता और संतुलन को प्रभावित करेगी. मैं मानता हूं कि इस्लामी संस्कृति और जर्मन तौर तरीके एक दूसरे के अनुरूप नहीं हैं. ज्यादातर जर्मन लोगों ने शरणार्थी संकट के प्रति मानवीयता का उदाहरण पेश किया है. मेरे बहुत सारे यूरोपीय दोस्त नाराज हो गए जब मैंने उन्हें चांसलर मैर्केल की शरणार्थियों के प्रति दोस्ताना नीति के खिलाफ चेतावनी दी. मुझे यह उनका भोलापन लगा कि बहुत से जर्मन मानते हैं कि सभी मध्यपूर्वी और दक्षिण एशियाई शरणार्थी उनके जैसे जीवनयापन के तरीकों और मूल्यों को अहमियत देंगे. मैंने अपने मित्रों से कहा भी था कि मुस्लिम विश्व को लेकर उनकी समझ सीमित है और उसमें दोष हैं. उन्होंने मेरे तर्कों को महत्व नहीं दिया.
शामिल शम्सतस्वीर: DW/P. Henriksen
मेरा डर सच साबित हुआ जब सैकड़ों कथित रूप से मध्यपूर्वी और उत्तर अफ्रीकी मूल के सैकड़ों युवा पुरुषों ने नव वर्ष की पूर्व संध्या पर कोलोन के स्टेशन पर महिलाओं के साथ बदसलूकी की. कई लोग मानते हैं कि यह पूर्वनियोजित घटना थी, मुस्लिम पुरुषों ने महिलाओं को आपत्तिजनक स्थानों पर बेशर्मी से छुआ. और आखिरकार जर्मन इस बारे में बहस कर रहे हैं कि अनजान देशों से आने वाले लोगों को इस तरह गले लगाना क्या सही फैसला था.
असल में मुझे खुद पर इतनी शर्म पहले कभी नहीं आई. मैं मुस्लिम पृष्ठभूमि का हूं जो कई सालों से जर्मनी में रह रहा है. मेरे साथ लोग यहां हमेशा सम्मान और विनम्रता से पेश आए हैं. मैंने खुद को जर्मनी में पाकिस्तान से ज्यादा सुरक्षित महसूस किया है. मेरे बहुत सारे जर्मन दोस्त हैं और मुझे जर्मन समाज में कभी अकेलेपन का एहसास नहीं हुआ.
लेकिन नव वर्ष की पूर्व संध्या पर होने वाली घटना ने मुझे एहसास कराया कि मैं भी इस जघन्य अपराध के लिए कहीं ना कहीं जिम्मेदार महसूस करता हूं. जो कोलोन में हुआ वह पाकिस्तान में बहुत आम है. मर्दों को ऐसा करने में कभी शर्मिंदगी नहीं होती, उन्हें अपराधबोध नहीं होता, वे कभी इस बात पर ग्लानि नहीं जताते कि वे औरतों के साथ कैसा बर्ताव करते हैं.
वे पुरुष जिन्होंने कोलोन में महिलाओं का यौन उत्पीड़न किया वे पागल नहीं थे. वे जानते थे वे क्या कर रहे हैं. और मुझे भरोसा है कि ऐसा करते हुए वे यूरोपीय संस्कृति, इसके तौर तरीकों और यहां के लोगों का तिरस्कार जान कर रहे थे.
गुस्सा और जवाब
अब हम जर्मन समूहों से पलटवार होता देख रहे हैं. रविवार की शाम करीब 20 लोगों ने 6 पाकिस्तानियों और एक सीरियाई युवक पर कोलोन स्टेशन के पास हमला किया. यह ऐसी जगह है जहां से मैं अक्सर आधी रात के बाद भी निडर होकर गुजरता रहा हूं. जर्मन मीडिया के मुताबिक हमलावर "बाइकर, बदमाश और भारी भरकम" किस्म के लोग थे. कुछ लोग बुरी तरह जख्मी हुए और अस्पताल ले जाए गए. यह निंदनीय और प्रतिशोध की हरकत थी, लेकिन दक्षिणपंथी गुटों से आप और किस तरह की अपेक्षा करते हैं?
इन बदमाशों के हाथों पिटने वाला एक पाकिस्तानी मैं भी हो सकता था. वे मुझे मारने या मेरी बेइज्जती करने से पहले मेरा इंटरव्यू नहीं करते. वे नहीं जानते कि मैं एक नास्तिक हूं और इस्लामी कट्टरपंथ के बारे में 15 साल से आलोचनात्मक तौर पर लिखता रहा हूं. उन्हें इस सब की चिंता नहीं होती. उनके लिए, मैं एक अन्य मुसलमान होता, एक अन्य दक्षिण एशियाई, जो उनकी जीवनशैली बदलने पर आमादा है. हो सकता है कि हमलावर राजनीतिक स्तर पर प्रेरित हों, लेकिन उनके डर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. जर्मन समाज में दक्षिणपंथी ईसाइयों और इस्लामी समूहों के मजबूत होने के साथ बदलाव आ रहे हैं. यह जर्मनी और यूरोप में रहने वाले धर्मनिरपेक्ष लोगों के लिए चिंताजनक स्थिति है.
अगर जर्मन सरकार देश के धर्मनिरपेक्ष आधार को बचाए रखना चाहती है, तो इसे उन लोगों की छानबीन को बढ़ाना होगा जो इस समाज का हिस्सा बनने के इच्छुक हैं. एकीकरण का मतलब सिर्फ जर्मन भाषा सीखना नहीं है. मैं ऐसे बहुत से मुसलमानों को जानता हूं जो दसियों सालों से जर्मनी में रह रहे हैं, फर्राटेदार जर्मन बोलते हैं, लेकिन अपने दिल में धर्मनिरपेक्षता और पश्चिमी मूल्यों के लिए नाराजगी को पाल रहे हैं. नव वर्ष की पूर्व संध्या पर जो हुआ वह विदेशियों के प्रति जर्मन लोगों के सलूक को हमेशा के लिए बदल सकता है. सरकार को सुनिश्चित करना होगा कि ऐसा फिर कभी दोबारा ना हो. और बतौर विदेशी, मेरी भी इस दिशा में जिम्मेदारी है.
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जर्मनी 2015
एक सेल्फी संकेत में बदल गया. क्या चांसलर को और दूसरे लोगों को इस तरह की तस्वीर के असर का अंदाजा था? साल की समाप्ति 10 लाख शऱणार्थियों के साथ हो रही है. 2015 आधुनिक जर्मनी के इतिहास का अहम साल है.
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भावनाएं और सख्ती
जुलाई 2015 की यह महत्वपूर्ण तस्वीर थी. जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल ने भावनाएं तो दिखाईं लेकिन सख्त रहीं. उन्होंने 14 वर्षीय फलीस्तीनी लड़की को सहलाया और उसके दर्द पर मरहम जरूर लगाया, जिनके माता पिता अभी भी शरण का इंतजार कर रहे हैं. लेकिन यह भी कहा कि जर्मनी सबको शरण नहीं दे सकता. लड़की सोशल मीडिया स्टार बन गई लेकिन चांसलर की बड़ी आलोचना हुई.
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प्रोमिस्ड लैंड की चांसलर
और अचानक काफिले आने लगे. सीरिया, इराक, अफगानिस्तान से शरणार्थियों ने जर्मनी आना शुरू कर दिया. वे सब यहां शरण चाहते हैं. गर्मियां खत्म होने से पहले ही लाखों लोग जर्मनी पहुंच चुके थे. राजनीतिज्ञों में खलबली मची थी. अंगेला मैर्केल ने घोषणा की शरण के अधिकार में संख्या की सीमा नहीं है. चांसलर ने मानवीयता दिखाई और युद्ध ग्रस्त इलाकों के दमित पीड़ितों की स्टार बन गईं.
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हर सोमवार
एक ओर हजारों लोग अपनी इच्छा से शरणार्थियों की मदद करने में, जर्मनी में उनके निवास को आसान बनाने में लगे थे. इतना कि स्वागत की संस्कृति साल का अहम शब्द बन गया. तो दूसरी ओर बहुत से लोग मैर्केल की शरणार्थी नीति के खिलाफ एकजुट हो रहे थे. पेगीडा नाम के संगठन के लिए ड्रेसडेन शहर हर सोमवार को आप्रवासन और प्रतिनिधि लोकतंत्र के खिलाफ विरोध का ठिकाना रहा.
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घृणा में आगजनी
जर्मनी ने 2015 में अपना यह चेहरा भी दिखाया. इस साल शरणार्थियों के रहने के लिए बने 600 घरों पर हमला किया गया. 2011 में उनकी संख्या सिर्फ 18 थी. सुरक्षा अधिकारियों ने इन हमलों में अब किसी ग्रुप का समन्वित हाथ होने का सबूत नहीं पाया है. हमला करने वाले लोग आम तौर पर स्थानीय युवा हैं. और उनमें से अधिकांश अब तक विदेशियों का विरोध करने के कारण पुलिस फाइलों में नहीं हैं.
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हवाई त्रासदी
यूरोप में विमान हादसा. 24 मार्च को बार्सिलोना से डुसेलडॉर्फ आ रहा यात्री विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया. 150 लोग मारे गए. उनमें हाल्टर्न शहर के हाई स्कूल के 16 बच्चे भी थे. त्रासद बात यह रही कि मनोरोग के शिकार को-पाइलट ने जर्मनविंग्स कंपनी के यात्री विमान को जानबूझकर बार्सिलोना से डुसेलडॉर्फ के रास्ते में फ्रांस की आल्प पहाड़ियों पर टकरा दिया.
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राजनीतिक रिश्तेदारी
गद्दी पर बैठने के बाद से ही वे जर्मनी के लोगों को आकर्षक और दिलचस्प लगती रही हैं. इस साल जब ब्रिटेन की महारानी अपने संभवतः अंतिम राजकीय दौरे पर जर्मनी आईं तो यह कुछ कुछ रिश्तेदारों से भेंट जैसी भी थी. महारानी के पति प्रिंस फिलिप जर्मन मूल के हैं. शायद जर्मन सहानुभूति के पीछे ब्रिटेन का ताज वाला गणतंत्र होना है, जैसा कि एक बार जॉर्ज ऑरवेल ने कहा था.
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अतीत का सामना
ये कैसा भाव प्रदर्शन था. आउशवित्स के नाजी यंत्रणा शिविर में कैद रहीं एफा कॉर ने कुख्यात एसएस के पूर्व सदस्य 94 वर्षीय ऑस्कर ग्रोएनिंग की ओर अदालत में सुलह का हाथ बढ़ाया. आउशवित्स के अपराधियों के खिलाफ सबसे ताजा मुकदमे में 81 वर्षीया कॉर ने कहा, "मैंने नाजियों को माफ कर दिया है." अब तक सामान्य जिंदगी जी रहे पूर्व गार्ड ग्रोएनिंग ने भी नाजी काल के नैतिक अपराध को स्वीकार किया.
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ताकतवर चांसलर
जब पश्चिमी दुनिया बवेरिया में चांसलर मैर्केल की मेहमान थी, उस समय तक मैर्केल को लेकर विवाद शुरू नहीं हुआ था, वह मतदाताओं के दिलों पर एकछत्र राज कर रही थीं और यूरोप में उनका रुतबा था. विला एलमाउ में जी-7 शिखर सम्मेलन के अंत में ग्लासहाउस गैसों में कमी लाने का फैसला हुआ. नतीजा पेरिस में पर्यावरण समझौते के रूप में सामने आया.
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राजनीति और साहित्य
इस साल जर्मनी और विश्व ने जिन लोगों को खोया उनमें नोबेल पुरस्कार विजेता जर्मन साहित्यकार गुंटर ग्रास और पूर्व चांसलर हेल्मुट श्मिट भी थे. कोलकाता में एक साल रह चुके ग्रास की मौत 13 अप्रैल को हुई तो लोकप्रिय पूर्व चांसलर हेल्मुट श्मिट ने 10 नवंबर को आखिरी सांसें लीं, हालांकि ग्रास एसपीडी के समर्थक थे लेकिन दोनों शख्सियतों में ज्यादा अपनापन नहीं था.
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नामी ब्रांड का पतन
भरोसेमंद, इमानदार और किफायती - इसके लिए जर्मन कंपनी फोक्सवागेन की कारों का नाम था. और तब इस साल हुआ रहस्योद्घाटन कि कंपनी ने दुनिया भर को धोखा दिया है. लाखों डीजल गाड़ियों में ऐसा सॉफ्टवेयर लगा था जो उत्सर्जन के बारे में सही सूचना नहीं देता था. कंपनी पर अब अलग अलग देशों में करोड़ों का दावा ठोंका गया है.
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बात मनवाने की कला
जैसे जैसे जर्मनी में शरणार्थी संकट गहराता गया, चांसलर अंगेला मैर्केल का राजनैतिक फातिहा पढ़ने की तैयारी होने लगी. पार्टी का बड़ा हिस्सा उनके खिलाफ था. लेकिन मैर्केल ने अपना जुझारुपन दिखाया और कार्ल्सरूहे में हुए पार्टी सम्मेलन में पार्टी और आलोचकों का विश्वास जीतने में कामयाब रहीं. उन्होंने कहा कि जर्मनी ताकतवर है, वह चुनौती का सामना कर पाएगा.