भारतीय सेना के सर्जिकल स्ट्राइक के दावे की खबर सभी पाकिस्तानी अखबारों की पहली खबर है. लेकिन सभी अखबारों ने एक सुर में इसे फर्जी बताया है, जैसा कि पाकिस्तानी सेना अपने बयान में कह चुकी है.
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उड़ी हमले के बाद कदम उठाने का दबाव झेल रही भारतीय सेना ने गुरुवार को घोषणा की कि उसने नियंत्रण रेखा पार कर पाकिस्तानी कश्मीर में कार्रवाई की है और कई आंतकवादी ठिकानों को नष्ट कर दिया है. पहले पाकिस्तान की सरकार की तरफ से इसकी निंदा की गई लेकिन कुछ देर बाद सर्जिकल स्ट्राइक के भारत के दावे को खारिज कर दिया गया. पाकिस्तान की सेना और सरकार का कहना है कि ये सर्जिकल स्ट्राइक नहीं बल्कि गोलीबारी की कार्रवाई थी.
पाकिस्तान के उर्दू के बड़े अखबारों में से एक 'जंग' की सुर्खी है- "सर्जिकल स्टाइक का झूठा भारतीय दावा खारिज.” अखबार लिखता है कि इस बारे में भारतीय उच्चायुक्त को तलब किया गया है और कहीं भी अगर कोई कार्रवाई हुई तो इसका मुंहतोड़ जबाव दिया जाएगा.
'नवा-ए-वक्त' ने भी नियंत्रण रेखा को पार कर कार्रवाई करने के दावे को भारत का नया झूठ बताया है. हालांकि अखबार ने नियंत्रण रेखा के पास फायरिंग की घटनाओं में पाकिस्तान के दो सैनिकों की मौत और नौ के जख्मी होने की खबर दी है.
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अखबार ने अपने संपादकीय में भी इस मुद्दे को उठाया है. अखबार कहता है कि अगर मोदी सरकार आज सर्जिकल स्ट्राइक करने का दावा करती है तो कल को वो इस पर अमल भी कर सकती है, इसलिए हमें एटमी हथियार वाले अपने घोड़े तैयार रखने हैं. अब दुश्मन के साथ अमन की एकतरफा कोशिश करना बेमानी है. अखबार के मुताबिक पूरा ध्यान पाकिस्तान की सुरक्षा पर देना होगा.
वहीं 'एक्सप्रेस' की हेडलाइन है, "कंट्रोल लाइन पर फायरिंग में दो जवान शहीद, जवाबी कार्रवाई में 14 इंडियन फौजी मारे गए." अखबार ने पाकिस्तान सेना की तरफ से एक भारतीय सैनिक की गिरफ्तारी के दावे को भी अपनी खबर में प्रमुखता से जगह दी है. वहीं दुनिया की खबर में 8 भारतीय सैनिकों के मारे जाने की बात कही गई है.
कश्मीर मुद्दे की पूरी रामकहानी
आजादी के बाद से ही कश्मीर मुद्दा भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में एक फांस बना हुआ है. कश्मीर के मोर्चे पर कब क्या क्या हुआ, जानिए.
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1947
बंटवारे के बाद पाकिस्तानी कबायली सेना ने कश्मीर पर हमला कर दिया तो कश्मीर के महाराजा ने भारत के साथ विलय की संधि की. इस पर भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध शुरू हो गया.
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1948
भारत ने कश्मीर का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र में उठाया. संयुक्त राष्ट्र ने प्रस्ताव 47 पास किया जिसमें पूरे इलाके में जनमत संग्रह कराने की बात कही गई.
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1948
लेकिन प्रस्ताव के मुताबिक पाकिस्तान ने कश्मीर से सैनिक हटाने से इनकार कर दिया. और फिर कश्मीर को दो हिस्सों में बांट दिया गया.
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1951
भारतीय कश्मीर में चुनाव हुए और भारत में विलय का समर्थन किया गया. भारत ने कहा, अब जनमत संग्रह का जरूरत नहीं बची. पर संयुक्त राष्ट्र और पाकिस्तान ने कहा, जनमत संग्रह तो होना चाहिए.
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1953
जनमत संग्रह समर्थक और भारत में विलय को लटका रहे कश्मीर के प्रधानमंत्री शेख अब्दुल्लाह को गिरफ्तार कर लिया गया. जम्मू कश्मीर की नई सरकार ने भारत में कश्मीर के विलय पर मुहर लगाई.
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1957
भारत के संविधान में जम्मू कश्मीर को भारत के हिस्से के तौर पर परिभाषित किया गया.
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1962-63
चीन ने 1962 की लड़ाई भारत को हराया और अक्साई चिन पर नियंत्रण कर लिया. इसके अगले साल पाकिस्तान ने कश्मीर का ट्रांस काराकोरम ट्रैक्ट वाला हिस्सा चीन को दे दिया.
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1965
कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान का युद्ध हुआ. लेकिन आखिर में दोनों देश अपने पुरानी पोजिशन पर लौट गए.
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1971-72
दोनों देशों का फिर युद्ध हुआ. पाकिस्तान हारा और 1972 में शिमला समझौता हुआ. युद्धविराम रेखा को नियंत्रण रेखा बनाया गया और बातचीत से विवाद सुलझाने पर सहमति हुई.
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1984
भारत ने सियाचिन ग्लेशियर पर नियंत्रण कर लिया, जिसे हासिल करने के लिए पाकिस्तान कई बार कोशिश की. लेकिन कामयाब न हुआ.
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1987
जम्मू कश्मीर में विवादित चुनावों के बाद राज्य में आजादी समर्थक अलगाववादी आंदोलन शुरू हुआ. भारत ने पाकिस्तान पर उग्रवाद भड़काने का आरोप लगाया, जिसे पाकिस्तान ने खारिज किया.
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1990
गवकदल पुल पर भारतीय सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 100 प्रदर्शनकारियों की मौत. घाटी से लगभग सारे हिंदू चले गए. जम्मू कश्मीर में सेना को विशेष शक्तियां देने वाले अफ्सपा कानून लगा.
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1999
घाटी में 1990 के दशक में हिंसा जारी रही. लेकिन 1999 आते आते भारत और पाकिस्तान फिर लड़ाई को मोर्चे पर डटे थे. कारगिल की लड़ाई.
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2001-2008
भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत की कोशिशें पहले संसद पर हमले और और फिर मुबई हमले समेत ऐसी कई हिंसक घटनाओं से नाकाम होती रहीं.
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2010
भारतीय सेना की गोली लगने से एक प्रदर्शनकारी की मौत पर घाटी उबल पड़ी. हफ्तों तक तनाव रहा और कम से कम 100 लोग मारे गए.
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2013
संसद पर हमले के दोषी करार दिए गए अफजल गुरु को फांसी दी गई. इसके बाद भड़के प्रदर्शनों में दो लोग मारे गए. इसी साल भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री मिले और तनाव को घटाने की बात हुई.
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2014
प्रधानमंत्री मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ गए. लेकिन उसके बाद नई दिल्ली में अलगाववादियों से पाकिस्तानी उच्चायुक्त की मुलाकात पर भारत ने बातचीत टाल दी.
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2016
बुरहान वानी की मौत के बाद कश्मीर में आजादी के समर्थक फिर सड़कों पर आ गए. अब तक 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और गतिरोध जारी है.
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2019
14 फरवरी 2019 को पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले में 46 जवान मारे गए. इस हमले को एक कश्मीरी युवक ने अंजाम दिया. इसके बाद परिस्थितियां बदलीं. भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बना हुआ है.
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2019
22 जुलाई 2019 को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान से मुलाकात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने दावा किया की भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे कश्मीर मुद्दे को लेकर मध्यस्थता करने की मांग की. लेकिन भारत सरकार ने ट्रंप के इस दावे को खारिज कर दिया और कहा कि कश्मीर का मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय बातचीत से ही सुलझेगा.
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2019
5 अगस्त 2019 को भारत के गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में एक संशोधन विधेयक पेश किया. इस संशोधन के मुताबिक अनुच्छेद 370 में बदलाव किए जाएंगे. जम्मू कश्मीर को विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाएगा. लद्दाख को भी एक केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाएगा. धारा 35 ए भी खत्म हो गई है.
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दैनिक 'आज' ने भारत की तरफ से हुई कार्रवाई को आक्रामकता बताया है. अखबार कहता है कि ये अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की जिम्मेदार बनती है कि वो भारत को आक्रामक कदम उठाने से रोके. अखबार के मुताबिक बेबुनियाद इल्जाम लगाने और कश्मीर में निहत्थे लोगों पर भारतीय सेना के जुल्मों का नोटिस लिया जाए. अखबार ने कश्मीर के हल के लिए वहां जनमत संग्रह कराने से जुड़े संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों पर अमल की बात भी कही है.
वहीं 'मशरिक' की पहली खबर है- भारत की हठधर्मी से सार्क कांफ्रेस रद्द. 'इंसाफ' ने भी इस मुद्दे पर संपादकीय लिखते हुए कहा है कि भारत के आरोपों का सख्ती से जबाव दिया जाए और इससे पूरे क्षेत्र को जो खतरे पैदा हो रहे हैं, उसकी तरफ दुनिया का ध्यान दिलाने की जरूरी है.