अमेरिकी सीनेट ने भारत के साथ सैनिक सहयोग बढ़ाने का समर्थन किया है, लेकिन सामरिक रक्षा कानून पर बहस के तहत दो भारत संबंधी संशोधन करने से मना कर दिया. भारत ने कहा कि नए कानून पर अटकलें लगाना समयपूर्व होगा.
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सीनेट ने खतरे के विश्लेषण, सैनिक सिद्धांत, फोर्स प्लानिंग, लॉजिस्टिकल सपोर्ट और इंटेलिजेंस जुटाने पर भारत के साथ सहयोग बढ़ाने की बात कही है. सीनेटर जॉन सलिवन के प्रस्ताव का जॉन कॉर्नी और मार्क वार्नर ने भी समर्थन किया था. लेकिन दो दूसरे भारत संबंधी संशोधनों को सीनेट की सहमति नहीं मिली.
सैनिक समिति के प्रमुख जॉन मैक्केन के अनुसार इसकी वजह प्रक्रिया संबंधी मुश्किलों के अलावा राजनीतिक मुद्दे भी रहे. मैक्केन ने रक्षा निर्यात नियमों में संशोधन कर भारत को वैश्विक सामरिक और रक्षा सहयोग मानने का प्रस्ताव दिया था. दूसरा प्रस्ताव भारत के साथ रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर सीनेटर मार्क किर्क का था.
रक्षा सहयोग का आयाम
भारत ने अमेरिकी सीनेट के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि अंतिम टेक्स्ट के बारे में अटकलें लगाना काफी जल्दबाजी होगी. अमेरिका ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका दौरे पर भारत को महत्वपूर्ण रक्षा सहयोगी माना था. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा, "हमने नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन एक्ट एनडीएए में भारत संबंधी संशोधन को शामिल नहीं किए जाने पर मीडिया रिपोर्ट देखी है. एनडीएए 2017 अभी बनने की प्रक्रिया में है और उसके अंतिम कंटेंट पर अटकलें लगाना समयपूर्व होगा."
ऐसा करेंगे भारत और अमेरिका
भारत और अमेरिका के बीच कई बड़े समझौते हुए हैं. एक नजर इन समझौतों पर.
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लाइसेंस फ्री तकनीक
रक्षा संबंधों को नई ऊंचाई देते हुए अमेरिका भारत को कई तकनीकों तक लाइसेंस मुक्त पहुंच देगा. भारत और अमेरिका साझा उपक्रमों के जरिए रक्षा तकनीक का विकास करेंगे. दोनों देश समुद्र, हवा और हथियार सिस्टम का साझा विकास करेंगे.
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अंतरिक्ष में सहयोग
अमेरिकी अतंरिक्ष एजेंसी नासा और भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो भी मिलकर काम करेंगे. मंगल अभियान, स्पेस एजुकेशन और अंतरिक्ष में मानव को भेजने के मिशन के अलावा धरती के सैटेलाइट डाटा को भी साझा करने पर भी समझौता हुआ है.
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स्वच्छ ऊर्जा
दोनों देशों के बीच जलवायु परिवर्तन को रोकने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए विस्तृत सहयोग करने के समझौते हुए हैं. अमेरिका सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भारत में निवेश भी करेगा. अमेरिका जल्द ही भारत में छह परमाणु बिजलीघर बनाने का काम शुरू करेगा.
पेरिस से पठानकोट और ब्रसेल्स से काबुल तक हुए आतंकवादी हमलों की निंदा करते हुए भारत और अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ाने का एलान किया. अल कायदा, आईएस, जैश ए मोहम्मद, लश्कर ए तैयबा और डी कंपनी व उसके सहयोगियों तथा यूएन की सूची में आने वाले आतंकी संगठनों के खिलाफ दोनों देश मिलकर काम करेंगे.
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ग्लोबल एंट्री प्रोग्राम
साझा कारोबार को बढ़ाने के लिए अमेरिका ने ग्लोबल एंट्री प्रोग्राम में भारत की सदस्यता का समर्थन किया है. इसके तहत दोनों देशों के नागरिकों को वीजा पाने में आसानी भी होगी.
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स्वास्थ्य और विज्ञान
बेकाबू हो चुके टीबी के वायरस, एंटी बायोटिक से ज्यादातर ताकवर विषाणु, स्वच्छ पर्यावरण, समुद्र विज्ञान और समुद्रों के टिकाऊ विकास भी सहयोग बढ़ाया जाएगा.
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वैश्विक नेतृत्व
अमेरिका ने भारत की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता और न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप की सदस्यता का समर्थन किया है. एशिया के बाहर अफ्रीका में भी अमेरिका और भारत विकास संबंधी सहयोग करेंगे.
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पीपल टु पीपल कॉन्टैक्ट
भारत सिएटल में नया उच्यायोग खोलेगा. अमेरिका भी भारत में नया उच्चायोग खोलेगा. दोनों देश पर्यावरण वैज्ञानिकों के लिए फुलब्राइट-कलाम फेलोशिप भी शुरू करेंगे. भारत 2017 में अमेरिका का ट्रैवल एंड टूरिज्म पार्टनर देश होगा.
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वन्य जीव संरक्षण
भारत और अमेरिका साथ मिलकर वन्य जीव संरक्षण पर काम करेंगे. दोनों देशों ने संरक्षण और तस्करी पर नकेल कसने के लिए एमओयू पर दस्तखत किये हैं.
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अमेरिकी संसद में एनडीएए की तैयारी की प्रक्रिया में प्रतिनिधि सभा और सीनेट में कानून के कई मसौदे तय किए जाते हैं जिन्हें मिलाकर सहमति की प्रक्रिया से अंतिम टेक्स्ट तैयार होता है, फिर इसे मतदान के लिए कांग्रेस में पेश किया जाता है. विकास स्वरूप ने ये भी कहा कि नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन एक्ट पास करने की प्रक्रिया भारत को प्रमुख रक्षा सहयोगी मानने के अमेरिकी सरकार के फैसले से अलग है.
भारतकीअसलीचिंता
भारत संबंधी संशोधन को शामिल नहीं कर सीनेट ने भारत को अपना वैश्विक रणनैतिक और रक्षा पार्टनर मानने से इनकार कर दिया. लेकिन भारत को हथियारों की बिक्री को लेकर अमेरिका के निकट सहयोगियों और नाटो सदस्यों के बराबर लाने का संशोधन पास कर दिया. भारत की असली चिंता यह है कि आतंकवाद विरोधी संघर्ष में मदद के नाम पर पाकिस्तान के लिए एक कोष बनाने का फैसला किया गया है. सीनेट ने पाकिस्तान सिक्योरिटी इन्हैंसमेंट ऑथराइजेशन के तहत 80 करोड़ डॉलर की मंजूरी दी. पाकिस्तान संबंधी प्रस्तावों को सीनेट ने पास कर दिया.
अमेरिका का नया कोष कोएलिशन सपोर्ट फंड की जगह लेगा जिससे अफगानिस्तान और पाकिस्तान को आतंकवाद के लड़ने के कदमों के लिए धन मिलता था. 2013 से पाकिस्तान को इस कोष से 3.1 अरब डॉलर मिले हैं. नई व्यवस्था में पाकिस्तान को अफगानिस्तान की सुरक्षा जरूरतों से अलग कर दिया गया है और अब पूरा ध्यान पाकिस्तान की सुरक्षा जरूरतों पर दिया जाएगा. इस तरह अमेरिका ने पाकिस्तान को अमेरिका के लिए स्वतंत्र सामरिक मूल्यों वाला देश माना है.
किसका पासपोर्ट है सबसे ताकतवर
हेनले एंड पार्टनर्स कंसल्टेंसी फर्म ने अपने 'वीसा प्रतिबंध इंडेक्स' 2015 में दुनिया के 199 देशों की रैंकिंग में पासपोर्ट की ताकत को दिखाया है कि किस नागरिक को कितने अधिक देशों में बिना वीसा के यात्रा करने का अधिकार है.
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इस रैंकिंग के अनुसार जर्मन और ब्रिटिश नागरिकों का पासपोर्ट दुनिया में सबसे ताकतवर माना जाता है. इसका अर्थ हुआ कि यूके या जर्मन पासपोर्ट धारक दुनिया के 173 देशों में बिना वीसा के प्रवेश कर सकता है.
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रैंकिंग में दूसरे स्थान पर हैं फिनलैंड, स्वीडन और अमेरिका - जहां के नागरिक 172 देशों में वीसा-फ्री यात्रा कर सकते हैं.
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तीसरा स्थान संयुक्त रूप से मिला है डेनमार्क, फ्रांस, इटली, जापान, दक्षिण कोरिया, नीदरलैंड्स और नॉर्वे को.
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कनाडा, बेल्जियम, न्यूजीलैंड, पुर्तगाल और स्पेन चौथे स्थान पर हैं. जबकि ऑस्ट्रिया, आयरलैंड, सिंगापुर और स्विट्जरलैंड पांचवें पर. यूरोप के आठ अन्य देशों के पासपोर्ट भी इंडेक्स में टॉप दस स्थान में शामिल हैं.
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स्टडी में पाया गया कि यूएई के पासपोर्ट की ताकत अचानक काफी बढ़ गई है. कारण है मई 2015 में यूरोपीय संघ के साथ हुआ वीसा-फ्री यात्रा का करार. अब यूएई नागरिक कुल 113 देशों की यात्रा कर सकते हैं जिनमें शेंगन क्षेत्र के 26 देश भी शामिल हैं.
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इंडेक्स में भारत का नंबर है 84वां, और स्कोर 51 जिसका मतलब हुआ कि भारतीय पासपोर्ट धारक दुनिया के 51 देशों में बिना पहले से वीसा लिए यात्रा कर सकते हैं.