लंदन के मेट्रो स्टेशन पर हुए हमले ने ना केवल शहर, बल्कि पूरे देश को एकजुट कर दिया है. हमले के इस वीडियो को देख कर जानें, क्या है इस एकजुटता का कारण.
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लंदन के मेट्रो स्टेशन पर यह घटना शनिवार शाम हुई. चश्मदीदों के अनुसार हाथ में छुरा लिए यह व्यक्ति लोगों पर हमला करने लगा और चिल्लाते हुए कहने लगा, "यह सीरिया के लिए है." इस हमले में दो लोग घायल हुए. मोबाइल फोन से लिए गए इस वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे पुलिस ने इस व्यक्ति को काबू में किया. पुलिस के अनुसार हमलावर की उम्र 29 साल है और इसे आतंकी हमले के रूप में देखा जा रहा है. लेकिन इस हमले ने ब्रिटेन और खास कर लंदन को एकजुट कर दिया है. वीडियो में एक प्रत्यक्षदर्शी को कहते हुए सुना जा सकता है, "यूं एंट नो मुस्लिम ब्रव" यानि "तुम मुसलमान नहीं हो, भाई." यह एक वाक्य सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है. लोग एकजुट हो कर लिख रहे हैं कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता. इसी के साथ #YouAintNoMuslimBruv चल पड़ा. किसी ने लिखा है, "सोशल मीडिया भी कमाल की चीज है. हैशटैग बरसाओ, बम नहीं."
इसी तरह किसी और ने लिखा है, "कभी कभी मुझे लंदन का निवासी होने पर बहुत गर्व होता है." एक अन्य ट्वीट कहता है, "जिस व्यक्ति ने यह बात कही, वह खुद एक मुस्लिम था. यह बात अपने आप में ही बहुत कुछ कह जाती है. हम आतंकवाद का समर्थन नहीं करते."
ब्रिटेन इन दिनों हाई अलर्ट पर है. पिछले हफ्ते से वह सीरिया में इस्लामिक स्टेट के खिलाफ हवाई हमले कर रहा है और बदले में देश में आतंकी हमलों की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता. हालांकि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन साफ कर चुके हैं कि इस डर से वे इस्लामिक स्टेट पर हमलों को नहीं रोकेंगे क्योंकि उनके विचार में ब्रिटेन पहले से ही आईएस के निशाने पर है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस साल वहां सात आतंकी हमलों की योजना को निष्क्रिय किया जा चुका है. आईबी/एमजे (रॉयटर्स, डीपीए)
यूरोप पर हुए आतंकवादी प्रहार
इस्लामी कट्टरपंथी एक दशक से भी ज्यादा समय से पूरे यूरोपीय महाद्वीप को निशाना बनाते आ रहे हैं. तस्वीरों में देखिए कब क्या हुआ...
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फिर निशाने पर पेरिस
शुक्रवार, 13 नवंबर पेरिस के लिए काला दिन बन गया. बंदूकधारी और आत्मघाती हमलावरों ने शहर के आम जनजीवन से जुड़े कई ठिकानों जैसे स्टेडियम, कैफे, रेस्तरां और कॉन्सर्ट हॉल को निशाना बनाया. इस हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने ली, जिसमें 129 लोगों की जान चली गई.
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आजादी पर हमला
शार्ली एब्दॉ पर हमले को दुनिया भर में अभिव्यक्ति और प्रेस की स्वतंत्रता पर एक हमला माना जा रहा है. यूरोप समेत विश्व के कई देशों में मीडिया, राजनेताओं और आम लोगों ने इस आतंकी वारदात की कड़ी निंदा की है. चित्र में दिख रहे पत्रिका के संपादक को हमलावरों ने 7 जनवरी को किए अपने हमले में मौत के घाट उतार दिया. वह यूरोप में साहसी लेखन की मिसाल बन चुके एक निडर सेनानी थे.
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जनवरी 2015, पेरिस
सबसे ताजा हमले में पेरिस की प्रसिद्ध व्यंग्य पत्रिका शार्ली एब्दॉ के कार्यालय पर हथियारों से लैस आतंकियों ने हमला बोला और कई पत्रकारों, कार्टूनिस्टों को निशाना बनाया. इन अपराधियों को पकड़ने की कोशिशें जारी हैं और अभी तक किसी भी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है. राष्ट्रपति फ्रांसोआ ओलांद ने इसे "बर्बरता का असाधारण कृत्य" बताया है.
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मई और सितंबर 2014, ब्रसेल्स
24 मई को ब्रसेल्स के मशहूर यहूदी संग्रहालय के प्रवेश द्वार पर हुई गोलीबारी में चार लोग मारे गए. इसी साल सितम्बर में ब्रसेल्स स्थित यूरोपीय संघ आयोग के मुख्यालय पर भी हमला करने की एक नाकाम कोशिश हुई थी.
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नवंबर 2011, पेरिस
फ्रेंच पत्रिका शार्ली एब्दॉ 2011 में आतंकी हमले का शिकार बनी. कुछ अज्ञात हमलावरों ने पत्रिका के संपादकीय कार्यालय में एक कॉकटेल बम फेंका था. पत्रिका इस्लामी मामलों पर टिप्पणियां और कार्टून प्रकाशित कर रही थी जिसे कई लोग पसंद नहीं करते थे. हमले के बाद फिर से पत्रिका के कार्यालय को पुलिस संरक्षण देना पड़ा.
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सितंबर 2005, डेनमार्क
30 सितंबर को डेनिश अखबार जाइलांड्स ने इस्लामी मान्यताओं से जुड़े बारह कार्टून प्रकाशित किए. उनमें से एक कार्टून में पैगंबर मोहम्मद के सिर पर पगड़ी की जगह बम रखा दिखाया गया था. इस चित्र के विरोध में दुनिया भर में खूनी विरोध प्रदर्शन हुए. इसी कड़ी में ऐसे कार्टून प्रकाशित करने वाली पेरिस की व्यंग्य पत्रिका शार्ली एब्दॉ की भी सुरक्षा बढ़ानी पड़ी थी.
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जुलाई 2005, लंदन
इसे ब्रिटेन के इतिहास में सबसे गंभीर इस्लामी आतंकवादी हमला माना जाता है. लंदन की तीन मेट्रो रेलों और एक बस में आत्मघाती हमले हुए, जिनमें 52 लोगों की जान गयी और 150 घायल हुए. चार में से तीन आतंकवादी पाकिस्तानी मूल के ब्रिटिश नागरिक थे और चौथा जमैका मूल का. इन सबने अपने बैग में बम रखे थे.
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मार्च 2004, मैड्रिड
स्पेन के इतिहास में दर्ज हुए इस सबसे बड़े आतंकवादी हमले में 191 लोग मारे गए और 1,800 से ज्यादा घायल हुए. अलग अलग रेलगाड़ियों में कई बम रखे गए थे. इस घटना को अंजाम देने वाले अपराधियों को पकड़ लिया गया और सभी दोषियों को मिलाकर 43,000 साल के कारावास की सजा सुनाई गई.
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नवंबर 2003, इस्तांबुल
पांच दिनों के अंदर तुर्की की राजधानी इस्तांबुल में इस्लामी आतंकवादियों ने कई हमले किए. इसमें 58 लोगों की मौत हो गई और 600 से ज्यादा लोग घायल हुए. प्रार्थनागृह के सामने, ब्रिटिश बैंक और वाणिज्य दूतावास पर भी हुए थे हमले. आरोपी आतंकवादियों को 2007 में दोषी ठहराया गया.