कट्टरपंथी इस्लामिक स्टेट के जिहादी तत्व आने वाले दिनों में पूरी दुनिया में और हमले कर सकते हैं. कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि सीरिया और इराक में दबाव में आने के कारण आईएस अब नए ठिकानों को निशाना बना सकता है.
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एक वरिष्ठ अमेरिकी जनरल ने चेतावनी दी है कि हाल ही में इंडोनेशिया और तुर्की में हुए आईएस के हमलों की ही तरह आने वाले समय में और वारदातें होने की संभावना है. जनरल लॉयड ऑस्टिन अमेरिकी सेना के मध्यपूर्व ऑपरेशन के मुखिया हैं. उनका तर्क है कि हाल में तुर्की और इंडोनेशिया के उदाहरण इस बात के सबूत हैं कि इस्लामिक स्टेट कमजोर पड़ा है.
फ्लोरिडा में एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए जनरल ऑस्टिन ने कहा, "इराक और सीरिया में आइसिल बचाव की भूमिका में आ गया है." उन्होंने कहा, "हमें लगता है कि भविष्य में ज्यादा से ज्यादा ऐसी आतंकी वारदातें सामने आएंगी जैसे हमले हाल ही में बगदाद, तुर्की और जकार्ता में दिखे."
आईएस ने 2014 और 2015 के बीच इराक और सीरिया का काफी बड़ा हिस्सा अपने कब्जे में ले लिया था. कई शहरों को लूटने, हथियाने और वहां अपनी खिलाफत स्थापित करने वाले आईएस को हाल ही में कई मोर्चों पर मुंहकी खानी पड़ी है. अमेरिकी नेतृत्व में लड़ रहे स्थानीय बल ने इराक में उनके कब्जे से रामादी शहर को भी आजाद करा लिया है.
अमेरिका समर्थित गठबंधन सेना लगातार आतंकी समूह के कब्जे में आए तेल के ठिकानों और उससे जुड़ी अर्थव्यवस्था को तबाह कर रहा है. अमेरिकी सेना ने बताया है कि हाल ही में उन्होंने आईएस के कब्जे वाले इराकी शहर मोसुल में उनके कई अरब डॉलर की रकम वाले ठिकाने को नष्ट कर दिया.
जनरल ऑस्टिन का मानना है कि इस तरह के कई नुकसान झेल रहा आईएस इससे ध्यान हटाने के लिए अब इन इलाकों के बाहर के देशों को सुनियोजित ढंग से निशाने पर ले रहा है. इस प्रक्रिया में आतंकी वारदातों को अंजाम देने के लिए आईएस अलग अलग नामों का इस्तेमाल भी कर रहा है. जनरल ऑस्टिन ने कहा, "इसका मतलब हमें ये समझना चाहिए कि आईएस को मात देने में हम कामयाब हो रहे हैं."
आरआर/एमजे (एएफपी)
आईसिस, आईसिल, आईएस या दाएश?
खुद को "इस्लामिक स्टेट" कहने वाले आतंकी संगठन का सही नाम क्या है? आखिर क्यों जगह जगह इसके लिए अलग अलग नाम का इस्तेमाल किया जाता है?
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आईएसआई
आज जिसे इस्लामिक स्टेट के नाम से जाना जाता है, दरअसल उसकी शुरुआत अल कायदा से हुई. 2006 में इराक में मौजूद अल कायदा ने खुद को इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक का नाम दिया. तब यह आईएसआई कहलाया.
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आईसिस
फिर 2013 में संगठन अल कायदा से अलग हो गया और इसके लीडर अबु बक्र अल बगदादी ने नाम के आगे "अल-शाम" भी जोड़ दिया. तब यह इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड अल-शाम कहलाया. अंग्रेजी में इसे इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया यानि आईसिस कहा जाने लगा.
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क्या है अल-शाम?
अरबी भाषा में सीरिया को शाम कहा जाता है. हालांकि "अल शाम" एक बेहद पुराना शब्द है जो सीरिया, लेबनान, इस्राएल, फलीस्तीन और जॉर्डन को एक साथ संबोधित करता है.
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आईसिल
भूमध्यसागर के करीब जिस इलाके को अरबी में अल-शाम कहा जाता है, लगभग उसी को अंग्रेजी में लैवेंट पुकारा जाता है. यहीं से एक नया अनुवाद हुआ और संगठन को अब इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड लैवेंट यानि आईसिल कहा जाने लगा.
जून 2014 में इस आतंकी संगठन ने घोषणा की कि वह अपने नाम के आगे से इराक और सीरिया हटा रहा है. तब से वह आईएस के नाम से जाना जाने लगा है. अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र अब भी आइसिल का प्रयोग करते हैं और फ्रांस दाएश का.
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दाएश
दौलत अल इस्लामिया फ-अल इराक वा अल-शाम. अरबी मीडिया आईएस को इस नाम से पुकारता है. इसे छोटा करके बनता है दाईश. फ्रांस समेत कई पश्चिमी देशों ने इसे एक शब्द बना कर दाएश के रूप में इस्तेमाल करने का फैसला किया है. हालांकि अरबी में दाएश जैसा कोई शब्द नहीं है.
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खिलाफत
संगठन का दावा है कि वह एक इस्लामिक खिलाफत स्थापित कर चुका है. संगठन ने अपने नाम के आगे से इराक और सीरिया हटाने का भी यही कारण बताया. इस तर्क से दुनिया की सभी इस्लामी सरकारें नाजायज हैं और केवल आईएस ही सही है.
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अल बगदादी
केवल दुनिया की सरकारें ही इस आतंकी संगठन को "इस्लामिक" मानने से इंकार नहीं करतीं, खुद आतंकवादी भी करते हैं. अल कायदा ने इसे अल बगदादी का नाम दिया है और इस्लाम के नाम पर इस संगठन द्वारा की जा रही हरकतों की निंदा भी कर चुका है.