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'हिन्दी फिल्मों में डांस के हाल बदतर'

३ जून २०१३

माधुरी दीक्षित को धक धक करना सिखाने वाली सरोज खान का कहना है कि हिन्दी फिल्मों में डांस का कोई सम्मान नहीं बचा है. इसका स्तर लगातार गिरता जा रहा है.

तस्वीर: STR/AFP/Getty Images

कोरियोग्राफर सरोज खान की डायचे वेले से बातचीत के कुछ अंश-

आपने फिल्म उद्योग में कोई 25 साल गुजार दिए हैं. मौजूदा दौर की फिल्मों की कोरियोग्राफी आपको कैसी लगती है?

आजकल तो मुझे हर गाना एक जैसा ही लगता है.हर गीत में सैकड़ों लोगों की भीड़ होती है. महिला किरदार से छोटे कपड़े पहन कर कमर मटकाने को कह दिया जाता है. कैमरे की ज्यादा निगाह उसके पैरों पर ही होती है. यही है इस दौर की कोरियोग्राफी. अब फिल्मों में नृत्य लगातार बदतर हो रहा है. बालीवुड के कोरियोग्राफर अब हालीवुड की फिल्मों की नकल करने लगे हैं. इसके अलावा अब किसी गाने पर न तो वो मेहनत करना चाहते हैं और न ही अभिनेता.

मौजूदा कोरियोग्राफरों में आपका पसंदीदा कौन है ?

मुझे प्रभुदेवा पसंद हैं और उनमें कोरियोग्राफी की जबरदस्त क्षमता है. प्रभु के हर नृत्य निर्देशन में अलग किस्म का कंसेप्ट होता है. उन्होंने माधुरी दीक्षित और ऋतिक रोशन से बेहतरीन नृत्य कराया है.

क्या अब कोरियग्राफी भी एक व्यवसाय बन गया है ?

पहले इंडियन फिल्म डांस डायरेक्टर्स असोसिएशन के महज 60 सदस्य थे. अब इनकी तादाद चार सौ के पार पहुंच गई है. पहले तमाम तरह के टेस्ट के बाद किसी को कोरियोग्राफर होने का प्रमाणपत्र मिलता था. लेकिन अब भीड़ बढ़ने लगी है. ऐसे लोग काम के लिए कोई भी समझौता करने के लिए तैयार होते हैं. इसलिए बेहतरीन कोरियोग्राफरों के पास ज्यादा काम नहीं है. इसकी वजह यह है कि उनकी फीस ज्यादा है. वह अपनी मेहनत के पैसे लेते हैं.

आपको हिंदी फिल्म उद्योग में काम करते लगभग चौथाई सदी बीत गई. उस दौर और आज के अभिनेताओं में क्या मूल अंतर है ?

देखिए, जब मैंने इस उद्योग में कदम रखा था तब अभिनेताओं में अपने काम के प्रति लगन थी. आजकल यह चीज दुर्लभ है. अब अभिनेताओं के पास कोई नई चीज सीखने की न तो लगन है और न ही इसका समय.

क्या कभी फिल्म निर्देशन का ख्याल नहीं आया ?

मैंने कभी इस बारे में सोचा ही नहीं. अगर कभी काम नहीं रहा तो दूसरे पहलुओं पर विचार कर सकती हूं. लेकिन अब तक हालात ऐसे नहीं हुए हैं.

आजकल टीवी पर डांस पर आधारित रियलिटी शोज की बाढ़ गई है. आपको कैसा लगता है ?

यह एक कारोबार बन गया है. इनमें हिस्सा लेने वाले ज्यादातर बच्चों को उनके माता-पिता जबरन वहां भेजते हैं. सबको जल्दी पैसा कमाने की लालसा है. इसलिए पढ़ाई-लिखाई पर ध्यान देने की बजाय लोग बच्चों को डांस की ट्रेनिंग दिलाने लगते हैं. इन शोज में कोई भी इसलिए हिस्सा नहीं लेता कि उसे डांस से प्यार है. सब पैसों की माया है.

लेकिन आप भी तो ऐसे कुछ शोज में जज रह चुकी हैं ?

हां, मैंने जज की भूमिका निभाई है. लेकिन वहां भी मैंने वही किया है जो मुझे सही लगा. कभी निर्माता की बात नहीं सुनी. मैं मौके पर ही ईमानदारी से अपनी बात कह देती थी. शायद इसी वजह से कार्पोरेट घराने मुझे पसंद नहीं करते. मुझे झूठ बोलना बिल्कुल पसंद नहीं है.

अरसे बाद गुलाब गैंग में माधुरी दीक्षित के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा ?

माधुरी दीक्षित बिल्कुल नहीं बदली हैं. अब भी उनका नृत्य बेजोड़ है. उनसे मनपंसद काम कराने में किसी भी कोरियोग्राफर को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती. वह बेहतरीन डांसर के तौर पर एक मिसाल हैं. उन पर किसी गाने के फिल्मांकन के दौरान ज्यादा रीटेक नहीं करने पड़ते.

इंटरव्यूः प्रभाकर, कोलकाता

संपादनः आभा मोंढे

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