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दूसरा चरणः यूपी, यूके और गोवा में मतदान

१४ फ़रवरी २०२२

उत्तर प्रदेश में दूसरे चरण के साथ-साथ सोमवार को गोवा और उत्तराखंड में भी वोट डाले जा रहे हैं. यूपी में मुस्लिम मतदाताओं के प्रभाव वाले सबसे बड़े इलाके में चुनाव है.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथतस्वीर: Rajesh K. Singh/AP/picture alliance

सोमवार को पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के दूसरे चरण का मतदान है. गोवा और उत्तराखंड में एकमात्र चरण की वोटिंग के अलावा उत्तर प्रदेश के रोहिलखंड इलाके में भी आज मतदान हो रहा है, जहां मुस्लिम मतदाताओं के प्रभाव वाली सबसे ज्यादा सीटें हैं.

रोहिलखंड के नौ जिलों में से छह में आज मतदान हो रहा है, जो उत्तर प्रदेश के सात चरण के चुनाव का दूसरा चरण है. यह छह जिले वे हैं जहां मुस्लिम मतदाताओं का घनत्व सबसे अधिक है.

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2017 में इन जिलों की 55 सीटों पर अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी का प्रदर्शन पूरे राज्य में सबसे अच्छा रहा था. उसने 26.3 प्रतिशत मत हासिल करते हुए 15 सीटें जीती थीं. क्षेत्र में सबसे ज्यादा 38 सीटें बीजेपी को मिली थीं. कांग्रेस को सिर्फ दो सीटें मिली थीं.

यूपी में चार मंत्री मैदान में

इस बार इन 55 सीटों पर 586 उम्मीदवार मैदान में उतरे हैं. सहारनपुर, बिजनौर, मुरादाबाद, संभल, रामपुर, अमरोहा, बदायूं, बरेली और शहाजहांपुर के इलाकों में फैलीं इन सीटों में कई बड़े नाम भी चुनाव लड़ रहे हैं.

मौजूदा सरकार में चार वर्तमान और एक पूर्व मंत्री (धर्म सिंह सैनी) इसी इलाके से आते हैं. भारतीय जनता पार्टी ने शाहजहांपुर से सुरेश खन्ना को टिकट दिया है जबकि बिलासपुर से बदलाव सिंह औलख, बदायूं से महेश चंद्र गुप्ता और चंदौसी से गुलाब देवी चुनाव मैदान में हैं. भारतीय जनता पार्टी छोड़ चुके धर्म सिंह सैनी इस बार समाजवादी पार्टी की टिकट पर अपने गृह क्षेत्र सहारनपुर की नकूर सीट से लड़ रहे हैं.

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इन 55 सीटों पर दो करोड़ मतदाता हैं जिनमें से 70 लाख मुसलमान हैं. देवबंद के इर्दगिर्द की इन सीटों पर पिछली बार 68 प्रतिशत मतदान हुआ था.

उत्तराखंड और गोवा में आप का दांव

गोवा में भारतीय जनता पार्टी हैट-ट्रिक लगाने की कोशिश में जुटी है जबकि कांग्रेस को एंटी-इनकंबेंसी से उम्मीद है. राज्य में 11.6 लाख वोटर हैं जिनके सामने कांग्रेस और बीजेपी ही विकल्प हैं क्योंकि आम धारणा है कि गैर बीजेपी सरकार चाहिए तो कांग्रेस ही ऐसा कर सकती है. यही कांग्रेस की उम्मीद भी है ताकि आम आदमी पार्टी या तृणमूल कांग्रेस वे बीजेपी विरोधी वोट ना ले उड़ें, जो उसे मिल सकते हैं.

आम आदमी पार्टी और टीएमसी को इस बार राज्य में खाता खोलने की उम्मीद है. टीएमसी तो इस बार प्रशांत किशोर के दम पर कुछ बड़ा करने की उम्मीद में है. बीजेपी के पुराने सहयोगी रहे दल एमजीपी ने चूंकि गठबंधन करने से इनकार कर दिया है इसलिए सभी 40 सीटों पर वह खुद चुनाव लड़ रही है. कांग्रेस ने 37 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं जबकि तीन सीटें सहोयगी जीएफपी को दी हैं.

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उत्तराखंड में इस बार तिहरा मुकाबला नजर आ रहा है. कांग्रेस और बीजेपी के सामने आम आदमी पार्टी मजबूत दावेदारी पेश कर रही है. उसने सभी 70 सीटों पर अपने उम्मीवार खड़े किए हैं. बीच में एक कोण उन बागी उम्मीदवारों का भी है जिन्हें कांग्रेस और बीजेपी ने टिकट नहीं दिए. ऐसी 20 से ज्यादा सीटें हैं जहां कांग्रेस या बीजेपी का कोई बागी इस बार निर्दलीय चुनाव लड़ रहा है.

रिपोर्टः विवेक कुमार (रॉयटर्स)

 

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