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कैसे बुजुर्गों का सहारा बनी यह सामुदायिक रसोई

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२९ सितम्बर २०२६

गुजरात के चंदनकी गांव में युवाओं के शहरों की ओर पलायन के बाद अकेले रह गए बुजुर्गों के लिए 'सामुदायिक रसोई' उम्मीद और सामाजिक जुड़ाव की एक अनोखी किरण बनकर उभरी है.

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