ऐश्वर्या राय बॉलीवुड की ऐसी अभिनेत्रियों में शामिल हैं जिन्होंने फिल्मों में अभिनेत्रियों के महज शो-पीस के तौर पर इस्तेमाल किये जाने की सोच को न सिर्फ बदला बल्कि बालीवुड को अंतराष्ट्रीय स्तर पर भी विशेष पहचान दिलायी.
ऐश्वर्या राय का जन्म 1 नवंबर 1973 को मंगलुरू में हुआ. कुछ वर्ष के बाद उनका परिवार मुंबई आ गया, जहां उन्होंने अपनी प्रांरभिक शिक्षा पूरी की. बचपन में वह आर्किटेक्ट बनना चाहती थीं लेकिन बाद में उनका रूझान मॉडलिंग इंडस्ट्री की ओर हो गया. ऐश्वर्या राय ने 1994 में मिस इंडिया प्रतियोगिता में हिस्सा लिया, जहां उन्हें मिस इंडिया वर्ल्ड के खिताब से नवाजा गया.
मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में रीता फारिया के बाद मिस वर्ल्ड का खिताब जीतने वाली वह दूसरी भारतीय सुंदरी बनीं. इस प्रतियोगिता में उन्हें मिस फोटोजेनिक के खिताब से भी नवाजा गया. इस जीत ने उनके लिए मॉडलिंग और फिल्म उद्योग के दरवाजे खोले और उन्होंने सामाजिक सरोकार से जुड़े कई क्षेत्रों में काम किया.
ऐश्वर्या राय ने 1997 में अपने सिने करियर की शुरूआत तमिल फिल्म "इरुअर” से की. इसी वर्ष उन्होंने बालीवुड में भी कदम रखा और बॉबी देओल के साथ "और प्यार हो गया” में काम किया. दुर्भाग्य से यह फिल्म टिकट खिड़की पर विफल रही. इसके बाद 1998 में ऐश्वर्या राय ने एस शंकर की तमिल फिल्म ‘जीन्स' में काम किया. इस फिल्म की व्यावसायिक सफलता के बाद ऐश्वर्या राय फिल्म इंडस्ट्री में कुछ हद तक अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो गयीं.
ऐश्वर्या राय बच्चन भारत की इकलौती अभिनेत्री हैं, जो डेढ़ दशक से ज्यादा वक्त से कान फिल्म महोत्सव में शिरकत कर रही हैं. देखिए इस साल रेड कार्पेट पर उनकी मौजूदगी.
तस्वीर: Stephane MaheREUTERS
2022
2020 में कोविड की वजह से कान रद्द हो गया था. 2021 का आयोजन कोविड के साए में हुआ, लेकिन भारतीय कलाकार नहीं पहुंच पाए. अब 2022 में 75वें कान समारोह में पुरानी रंगत दिखी और दिखे भारतीय कलाकार. कान में 19वीं बार शिरकत कर रहीं ऐश्वर्या ने एक बार फिर अपनी खूबसूरती और लिबास से सुर्खियां बटोरीं. रेड कार्पेट से आईं उनकी तस्वीरें बताती हैं कि क्यों उनके प्रशंसक उन्हें 'क्वीन ऑफ रेड कार्पेट' कहते हैं.
तस्वीर: Stephane MaheREUTERS
2019
भारतीय अभिनेत्री ऐश्वर्या राय बच्चन 72वें कान फिल्म महोत्सव में रेड कॉर्पेट पर कुछ इस अवतार में नजर आईं. पीले और हरे रंग के अपने फिशकट गाउन के साथ ऐश्वर्या ने कोई गहना नहीं पहना था. इस गाउन को डिजाइन किया है जॉं लुई साबाजी ने.
तस्वीर: picture-alliance/Xinhua/Zhang Cheng
2018
भारतीय अभिनेत्री ऐश्वर्या राय बच्चन ने 71वें कान फिल्म महोत्सव में भी रेड कार्पेट पर अपने जलवे बिखेरे. इस साल वे 13 मई को सिंक और स्विम फिल्म की स्क्रीनिंग के लिए कान पहुंची.
तस्वीर: picture alliance/abaca
2017
कान में 70वें फिल्म महोत्सव के मौके पर ऐश्वर्या राय बच्चन हर दिन एक नये अवतार में नजर आयीं. 120 बीट्स पर मिनट फिल्म की स्क्रीनिंग के लिए वह इस साल लाल गाउन पहनकर रेड कार्पेट पर पहुंचीं. पूर्व ब्यूटी क्वीन ने कान फिल्म महोत्सव में 15 साल पहले बनी कल्ट फिल्म देवदास भी प्रेजेंट की.
तस्वीर: picture-alliance/dpa/A. Yesayants
2016
इस साल ऐश्वर्या राय 15वीं बार कान फिल्म महोत्सव में पहुंचीं. पहले दिन वे सुनहरे रंग का गाउन पहन कर रेड कार्पेट पर उतरीं. हर बार की तरह इस बार भी सब की नजरें उनके कपड़ों और मेकअप पर टिकीं थीं. ऐश्वर्या हर साल कम से कम चार अलग अलग लुक्स पेश करती हैं. इस साल अपने चौथे लुक में उन्होंने जामुनी रंग की लिपस्टिक लगा कर सब को हैरान कर दिया.
तस्वीर: Getty Images/I. Gavan
2015
ऐश्वर्या ने इस साल अपने चाहने वालों को पांच दिन तक इंतजार कराया. 13 मई को शुरू हुए कान फिल्म महोत्सव के रेड कार्पेट पर वे 17 तारीख को पहुंची. उनसे पहले कैटरीना को यहां देखा जा चुका था. ऐश्वर्या इस बार अपनी बेटी को साथ ले कर आई हैं और हॉलीवुड की हस्तियों के साथ अपनी सेल्फी ट्वीट कर रही हैं.
तस्वीर: Reuters/E. Gaillard
2014
इतने सालों से कान फिल्म महोत्सव में ऐश्वर्या की मौजूदगी में एक बात आम रही है. हर साल डिजाइनरों का ध्यान उनके कपड़ों पर रहा है. रेड कार्पेट पर इस साल ऐश्वर्या के सुनहरे लिबास ने सबका दिल जीत लिया.
तस्वीर: Reuters
2013
कान के रेड कार्पेट पर काला ऐश्वर्या का सबसे पसंदीदा रंग रहा है. हालांकि पूरे फेस्टिवल के दौरान वे कम से कम चार अलग अलग पोशाकों के साथ फोटोशूट कराती हैं, पर अक्सर इनमें से कोई एक ड्रेस काले रंग की होती है.
तस्वीर: ALBERTO PIZZOLI/AFP/GettyImages
2012
नई नई मां बनी ऐश्वर्या जब 2012 में कान पहुंची तो उनका बढ़ा हुआ वजन सुर्खियों में रहा. हालांकि इस काले ड्रेस की तारीफ भी हुई पर वजन की चर्चा में ड्रेस पीछे छूट गयी.
तस्वीर: ALBERTO PIZZOLI/AFP/GettyImages
2011
सफेद और गहरे नीले का कॉम्बिनेशन. यह ऐश्वर्या के उन चुनिंदा लिबासों में से एक है जिसे डिजाइनरों ने खूब पसंद किया. दस साल में ऐश स्टाइलिश होना सीख चुकी थीं.
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2010
इस साल ऐश अपने पति अभिषेक के साथ कान पहुंचीं. सब्यसाची की डिजाइन की हुई साड़ी में कुछ लोगों ने उन्हें खूब पसंद किया, तो कुछ को यह खास नहीं लगा.
तस्वीर: ANNE-CHRISTINE POUJOULAT/AFP/Getty Images
2009
सफेद रंग के इस ऑफ शोल्डर गाउन को ऐश्वर्या की अब तक की सबसे बेहतरीन रेड कार्पेट परफॉर्मेंस माना गया है. रेड कार्पेट पर उन्होंने कोई चूक नहीं की.
तस्वीर: ANNE-CHRISTINE POUJOULAT/AFP/Getty Images
2008
ऐश्वर्या के चाहने वाले और आलोचक मानते हैं कि उनकी खूबसूरती सादगी में ही नजर आती है. इस हरे और सुनहरे ड्रेस में उनकी फिगर की काफी तारीफ हुई.
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2007
इस साल ऐश्वर्या और अभिषेक की शादी हुई और जैसी कि उम्मीद थी, ऐश अपने पति के साथ रेड कार्पेट पर पहुंचीं. हालांकि पहली बार कान के रेड कार्पेट पर अभिषेक थोड़े हैरान परेशान लगे.
तस्वीर: ANNE-CHRISTINE POUJOULAT/AFP/Getty Images
2006
गहरे नीले रंग की ड्रेस, सीधे बाल और गले में सांप जैसा दिखने वाला नेकलेस. फैशन के मामले में ऐश्वर्या अनुभवी हो गई थीं. उन्होंने इस साल आलोचकों के मुंह पर ताले लगा दिए.
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2005
इस साल ऐश्वर्या ने अंतरराष्ट्रीय डिजाइनरों का सहारा लिया. काले रंग की इस हॉट गुच्ची ड्रेस और इस से पहले सफेद रंग के अरमानी गाउन ने उन्हें फोटोग्राफरों का पसंदीदा बना दिया.
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2004
नीता लूला का डिजाइन किया हुआ यह सिल्वर गाउन थोड़ा विवादास्पद रहा. अब तक नीता लूला ही ऐश की पसंदीदा डिजाइनर थीं. लेकिन इतनी आलोचना के बाद उन्हें मन बदलना पड़ा.
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2003
इसे ऐश्वर्या की अब तक की सबसे बुरी परफॉर्मेंस कहा गया. हरे रंग की यह साड़ी भी नीता लूला ने ही डिजाइन की थी. कोई भारतीय अभिनेत्री पहली बार कान की जूरी में थी, इसलिए सबकी नजरें ऐश पर थीं.
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2002
यह ऐश्वर्या का कान में पहला साल था. वह अपनी फिल्म देवदास के साथ यहां पहुंची थीं और इसलिए पूरी तरह भारतीय लिबास में थीं.
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संजय लीला भंसाली की 1999 में बनी फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम' ऐश्वर्या राय के सिने करियर की महत्वपूर्ण फिल्म साबित हुई. सलमान खान और अजय देवगन जैसे मंझे हुए सितारों की मौजूदगी में भी ऐश्वर्या ने फिल्म में ‘नंदिनी' के किरदार को रूपहले पर्दे पर जीवंत कर दिया. इस फिल्म में दमदार अभिनय के लिए उन्हें फिल्म फेयर पुरस्कार भी मिला. 1999 में ही ऐश्वर्या राय को प्रसिद्ध निर्माता निर्देशक सुभाष घई की फिल्म ‘ताल' में काम करने का अवसर मिला. फिल्म में ऐश्वर्या ने एक ऐसी ग्रामीण लड़की ‘मानसी' का किरदार निभाया जो पॉप सिंगर बनने का सपना देखा करती है. इस फिल्म ने खासकर अमरीका में टॉप 20 फिल्मों में अपना नाम दर्ज कराया. फिल्म में अपने दमदार अभिनय के लिए वह सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्म फेयर पुरस्कार के लिए भी नामांकित की गयीं.
बॉलीवुड के डबस्मैश से मशहूर हुईं जर्मन लड़कियां
02:58
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ऐश्वर्या राय के सिने करियर के लिए 2000 अहम वर्ष साबित हुआ. इस वर्ष उनकी फिल्म ‘जोश' रिलीज हुई जिसमें उन्होंने शाहरुख खान की बहन की भूमिका निभायी. इसके साथ ही ऐश्वर्या राय की 'हमारा दिल आपके पास है' और 'मोहब्बतें' जैसी कामयाब फिल्में भी प्रदर्शित हुई. वर्ष 2002 में ऐश्वर्या राय को शरतचंद्र चट्टोपाध्याय के मशहूर उपन्यास ‘देवदास' पर बनी फिल्म में काम करने का अवसर मिला. संजय लीला भंसाली की इसी नाम से बनी फिल्म में ‘पारो' के अपने किरदार से उन्होंने दर्शकों का दिल जीत लिया. इस फिल्म के लिए दूसरी बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित की गयीं. इस फिल्म को कान फिल्म महोत्सव में विशेष स्क्रीनिंग के दौरान दिखाया गया.
मिस इंडिया प्रतियोगिता को 50 साल से भी ज्यादा हो गए हैं. इसके जरिए भारतीय महिलाओं को दुनिया में अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिला.
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सुंदरी से अदाकार तक
बॉलीवुड के कई कलाकार मिस इंडिया रहे हैं. मिस इंडिया बनी कई सुंदरियों ने अपनी खिताब का फायदा उठाया और फिल्मों में अपनी किस्मत आजमाई.
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"दुनिया की सबसे खूबसूरत महिला"
1994 में ऐश्वर्या राय मिस वर्ल्ड बनीं. मीडिया कई बार उन्हें दुनिया की सबसे खूबसूरत महिला बताता है. आज वह एक सफल अदाकार हैं और लॉरियल जैसे अंतरराष्ट्रीय ब्रैंडों की दूत भी.
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भारत की पहली मिस यूनिवर्स
सुष्मिता सेन मिस यूनिवर्स जीतने वाली पहली भारतीय महिला हैं. सेन ने फिल्मों में भी काम किया और बच्चों को गोद लेकर भारत में कई महिलाओं के लिए मिसाल कायम की.
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एक मिस इंडिया से दूसरी को
2000 में प्रियंका चोपड़ा मिस वर्ल्ड बनीं. वह यह खिताब जीतने वाली चौथी भारतीय हैं. 1999 में खिताब जीतने वाली भारत की ही युक्ता मुखी ने चोपड़ा को मिस वर्ल्ड का ताज पहनाया.
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1970 का दशक
जीनत अमान एक ऐसी मिस इंडिया थीं जिन्होंने हिंदी फिल्म अभिनेत्रियों को अलग पहचान दी. उन्होंने मॉडर्न महिला की भूमिका निभाई लेकिन अपने कपड़ों की वजह से आलोचकों के घेरे में भी आईं.
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समाजसेवा की राह पर
लारा दत्ता भी मिस यूनिवर्स रही हैं. उन्हें बॉलिवुड से जोड़ा तो जाता ही है लेकिन वह जानवरों के लिए भी खूब काम करती हैं. इस तस्वीर में वह शाकाहारी खानपान को बढ़ावा दे रही हैं.
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भारत का हैट्रिक
दिया मिर्जा 2000 में मिस एशिया पैसिफिक बनीं. लारा दत्ता उस साल मिस यूनिवर्स रहीं और प्रियंका बनीं मिस वर्ल्ड.
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समलैंगिकों के लिए
सेलीना जेटली 2001 मिस यूनिवर्स में फाइनलिस्ट तो बनीं, लेकिन खिताब जीत नहीं पाईं. उन्होंने 2009 में भारत की पहली समलैंगिक पत्रिका बॉम्बे दोस्त का उद्घाटन किया.
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सुंदरता और सामाजिक मुहिम
2012 की मिस इंडिया वनया मिश्रा इलैक्ट्रिकल इंजीनियरिंग कर रही हैं. मिस वर्ल्ड में उन्होंने कहा कि वह हर दिन 1000 भूखे बच्चों को पेट भर खाना खिलाना चाहेंगीं.
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बच्चों का दिल
निकोल एस्टल फारिया 2010 में मिस अर्त बनीं. 15 साल से मॉडलिंग कर रहीं फारिया अंतरराष्ट्रीय कंपनी फ्रेडरीक कोंस्टां जेनेव की वैश्विक पहचान हैं. इनमें से कमाए पैसे अंततराष्ट्रीय बाल हृदय संगठन को जाता है.
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ऐश्वर्या राय ने 2003 में फिल्म निर्माण के क्षेत्र में कदम रखा और ‘दिल का रिश्ता' फिल्म का निर्माण किया. यह फिल्म व्यावसायिक रूप से सफल नहीं रही. ऐश्वर्या राय को 2004 में गुरिन्दर चड्ढा की अंग्रेजी फिल्म ‘प्राइड एंड प्रीजुडिस” और राज कुमार संतोषी की फिल्म "खाकी” में अमिताभ बच्चन के साथ काम करने का अवसर मिला. फिल्म में ऐश्वर्या राय ने अपने सिने करियर में पहली बार नेगेटिव किरदार निभाया जो सिने दर्शकों को काफी पसंद आया.
ऐश्वर्या राय के लिए वर्ष 2004 सिने करियर का उपलब्धियों वाला वर्ष साबित हुआ. उस वर्ष लंदन के सुप्रसिद्ध मैडम तुसाद म्यूजियम में उनका मोम का पुतला लगाया गया. इसी साल अमेरिका की सुप्रसिद्ध पत्रिका टाइम मैगजीन ने विश्व की 100 प्रभावशाली हस्तियों में ऐश्वर्या राय का नाम शामिल किया.
जर्मनी में बॉलीवुड
05:45
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2006 में ऐश्वर्या राय ने यश चोपड़ा के बैनर तले बनी फिल्म 'धूम' के सीक्वल ‘धूम-2' में काम किया. इस फिल्म में उन्होंने एक बार फिर से नकारात्मक किरदार निभाया और दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया. फिल्म क्षेत्र में ऐश्वर्या राय के उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए वर्ष 2009 में उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
अभिषेक बच्चन के साथ शादी के बाद अपने पारिवारिक दायित्व को देखते हुए ऐश्वर्या राय ने फिल्मों में काम करना काफी कम कर दिया. वर्ष 2010 में प्रदर्शित फिल्म 'गुजारिश' में काम करने के बाद ऐश्वर्या राय फिल्म इंडस्ट्री से दूर हो गयीं. ऐश्वर्या राय ने वर्ष 2015 में प्रदर्शित फिल्म 'जज्बा' से इंडस्ट्री में कमबैक किया है. ऐश्वर्या राय की पिछले वर्ष 'सरबजीत' और 'ऐ दिल है मुश्किल' प्रदर्शित हुई है. ऐश्वर्या की आने वाली फिल्मों में 'फन्ने खान' प्रमुख है.
एमजे/एके (वार्ता)
पहली प्रसिद्ध अभिनेत्रीः देविका रानी
हिन्दी फिल्मों की पहली बड़ी अभिनेत्री देविका रानी ने 1933 में पहली बार पर्दे पर किस करके हलचल मचा दी. उनके पति हिमांशु रॉय भी फिल्में बनाते थे. जर्मन फिल्मकार फ्रांत्स ओस्टेन के साथ मिल कर उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय फिल्मों को शक्ल दी.
बेधड़क नाडियाः मैरी इवैंस
फियरलेस नाडिया के नाम से विख्यात मैरी इवैंस हिन्दी फिल्मों में काम करने वाली पहली अंतरराष्ट्रीय कलाकार थीं. सुनहरे बालों वाली गोल मटोल ऑस्ट्रेलियाई मैरी ने होमी वाडिया के साथ कई मारधाड़ वाली फिल्मों में काम किया बाद में उन्होंने होमी से शादी भी की.
हिन्दी सिनेमा की विश्व सुंदरीः ऐश्वर्या रॉय
सुंदरियों के मुकाबले और हिंदी फिल्मों में तो ऐश्वर्या ने पहले ही डंका बजवा दिया था 2003 में कान फिल्म फेस्टिवल की ज्यूरी में शामिल हो कर उन्होंने वो करिश्मा भी कर दिखाया जो पहले किसी और हिंदुस्तानी के हिस्से नहीं आई थी. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की किसी अभिनेत्री को ऐश्वर्या जितनी सुर्खियां नहीं मिलीं.
तस्वीर: AP
बॉक्स ऑफिस पर पहला बवालः शोले
खूब नाच गाना और प्यार मुहब्बत देखने के बाद हिन्दी फिल्मों की मुलाकात गब्बर सिंह से हुई. रामगढ़ में जय वीरू की गब्बर से जंग ने ऐसी आग लगाई कि बसंती की बड़ बड़ करती और जया बच्चन की खामोश मुहब्बत भी उसकी लपटों को मद्धिम न कर सकीं. 38 साल से धधकते शोलों की जुबान आज भी बच्चा बच्चा बोलता है.
तस्वीर: Mskadu
सिनेमा की शुरूआतः राजा हरिश्चंद्र
दादा साहब फाल्के की इसी फिल्म के साथ 1913 में हिन्दी सिनेमा का सफर शुरू हुआ जो अब 100 साल की उम्र हासिल कर चुका है. उस वक्त कहानियां धार्मिक ग्रंथों और ऐतिहासिक चरित्रों से ली जाती थीं. महिलाओं के किरदार भी पुरुष निभाया करते थे.
तस्वीर: gemeinfrei
बॉलीवुड के बापः दादा साहब फाल्के
आज जिन्हें हम दादा साहब फाल्के कह कर सम्मान देते हैं उन्हीं ढुंडीराज गोविंद फाल्के ने हिंदी सिनेमा की शुरूआत की. फोटोग्राफर के रूप में काम करने वाले दादा साहब फाल्के की मुलाकात जर्मनी के कार्ल हर्त्ज से हुई और उन्होंने लुमियरे बंधुओं के साथ भी काम किया. लुमियरे बंधुओं ने ही सिनेमेटोग्राफी विकसित की. इसके बाद दादा साहब फिल्में बनाने लगे और उनके नाम कोई 100 से ज्यादा फिल्में हैं.
तस्वीर: gemeinfrei
पहली बोलती फिल्मः आलम आरा
फिल्में तो बनने लगीं लेकिन वो खामोश थीं. 18 साल बाद आई आलम आरा हिन्दी की पहली बोलती फिल्म थी. इसके जरिए लोगों ने आवाज और संगीत से सजी चलती फिरती बोलती तस्वीरें देखी.
तस्वीर: public domain
आलोचकों के दुलारेः राज कपूर
राज कपूर की आवारा के साथ हिन्दी सिनेमा ने रूस, चीन समेत कई देशों में कदम रखे. फिल्म बहुत मशहूर हुई और इसे देखने वाले लोग भारतीयों को अब भी इस फिल्म से जोड़ कर देखते हैं. फिल्म का टाइटल सॉन्ग भी खासा लोकप्रिय हुआ. यहां तक कि दुनिया के कई देशों से राजकपूर को न्योते मिलने लगे.
पहली अंतरराष्ट्रीय कामयाबीः मदर इंडिया
असली भारत के असली गांव और उनकी सच्ची मुश्किलें. मदर इंडिया पर वास्तविकता की इतनी गहरी छाप थी कि किरदारों का दर्द लोगों के दिल में कहीं गहराई तक बैठ गया. फिल्म विदेशी फिल्मों की श्रेणी में ऑस्कर का नामांकन भी ले गई. फिल्म में पश्चिम के लोगों ने भारत की दिक्कतें देखीं और वो उनके मन में गहरी दर्ज हुई. नर्गिस मदर इंडिया बन गईं
पहला ऑस्करः सत्यजीत रे
बॉलीवुड की आम पहचान से एकदम दूर होने के बावजूद पाथेर पांचाली का जादू ऐसा है कि भुलाए नहीं भूलता. सत्यजीत और उनके सिनेमा ने भारत की दुनिया में जो छवि बनाई उससे वो आज भी पूरी तरह आजाद नहीं हो सका है. 1992 में सत्यजित रे को ऑस्कर मिला और वो तब यह पुरस्कार पाने वाले पहले भारतीय थे.
कोई एक दशक तक हिन्दी फिल्मों को यश चोपड़ा वाली मोहब्बत करना सिखा कर शाहरुख विदेशों में बॉलीवुड का चेहरा बन गए. खासतौर से जर्मनी में तो वो बेहद लोकप्रिय हैं. लंबे समय तक यहां का एक टीवी चैनल उनकी फिल्मों को जर्मन भाषा में डब कर दिखाता रहा. डॉन 2 फिल्म का बहुत सा हिस्सा जर्मनी में ही शूट किया गया और हर साल शाहरुख यहां कम से कम एक बार तो आते ही हैं.
तस्वीर: Johannes Eisele/AFP/Getty Images
दुनिया के पर्दे परः लगान
पहली बार कोई हिन्दी फिल्म अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिलीज हुई. लगान से पहले भारत के सपनों की दुनिया में या तो आजादी थी या फिर प्यार और पैसा. आशुतोष गोवारिकर और आमिर खान ने एक नया सपना दिया कुछ अनोखा और अच्छा कर दिखाने का. आमिर परफेक्शनिस्ट हो गए और उसके बाद एक एक कर बॉक्स ऑफिस, आलोचक, फिल्म समारोह उस पर मुहर लगाते चले गए.
तस्वीर: Getty Images/AFP
ऑस्कर में जय होः ए आर रहमान
'जय हो' गाने के लिए दो ऑस्कर और गोल्डन ग्लोब जीत कर ए आर रहमान ने दुनिया भर में धूम मचा दी. ऑस्कर ने पूरब के संगीत और कलाकारों का लोहा माना.