मेक्सिको में माया सभ्यता का 1,500 साल पुराना शहर मिला
३० मई २०२२
पुरातत्वविदों ने माया सभ्यता का एक प्राचीन शहर खोजा है जो महलों, पिरमिडों और बाजारों से भरा हुआ है. मेक्सिको के युकातान प्रायद्वीप पर एक निर्माण स्थल के इलाके में यह शहर मिला.
ऐसा है हिओलतस्वीर: Lorenzo Hernandez/REUTERS
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मेक्सिको के युकातान प्रायद्वीप पर मेरिडा के नजदीक एक इंडस्ट्रियल पार्क के निर्माण के दौरान एक ऐसी खोज हुई है जो इतिहास के बारे में मनुष्य की जानकारी को अलग मुकाम पर ले जा सकती है. पुरातत्वविदों को यहां एक शहर मिला है, जो विलुप्त हो चुकी माया सभ्यता का माना जा रहा है. इस शहर में महल, पिरामिड और बाजारों की भरमार मिली है.
इस शहर को हिओल नाम दिया गया है. पुरातत्वविदों हिओल में माया सभ्यता की पहचान रहे विशेष आर्किटेक्चर के प्रतीक स्पष्ट देखे जा सकते हैं. वैसे युकातान पर माया सभ्यता से जुड़ी चीजें पहले भी मिलती रही हैं, लेकिन जिस मेरिडा इलाके में यह खोज हुई है, वहां इस शहर का मिलना एक असामान्य घटना है.
माया सभ्यता मानव इतिहास के सबसे बड़े रहस्यों में से एक है. जहां आज मैक्सिको है, वहां सदियों पहले यह एक बेहद समृद्ध सभ्यता थी लेकिन ऐसा क्या हुआ कि अचानक यह गायब हो गई!
तस्वीर: Historisches Museum der Pfalz
वन में शहर
माया सभ्यता के लोगों ने जंगलों के भीतर अद्भुत शहर बनाए थे. ये शहर इतने बड़े थे कि इनमें एक लाख लोग रह सकते थे. लेकिन नौवीं सदी में अचानक ये शहर खाली हो गए है. क्यों, कुछ पता नहीं.
तस्वीर: picture-alliance/dpa/INAH
हैरतअंगेज निर्माण
16वीं सदी में जब बाकी दुनिया को इन शहरों का पता चला तो सब हैरान रह गए. विशेषज्ञों को यकीन ही नहीं हुआ कि माया सभ्यता के लोगों ने ये शहर कैसे बनाए होंगे.
तस्वीर: picture-alliance/dpa/INAH
माया कैलेंडर
माला कैलेंडर 2012 तक ही था. इससे बहुत से लोगों ने अनुमान लगाया कि 2012 के बाद दुनिया खत्म हो जाएगी. ऐसा कुछ नहीं हुआ.
तस्वीर: Historisches Museum der Pfalz/Grafik und Programmierung: PXNG.LI Gmbh
कैसा था समाज
माया सभ्यता का समाज एक वर्गीकृत समाज था. लोग राजा को ईश्वर की आवाज मानते थे और उसके मंदिर बनाते थे. राजा की संतान को ही राज मिलता था.
तस्वीर: Historisches Museum der Pfalz/Ricky López Bruni
दास नहीं थे
माया सभ्यता में दास प्रथा नहीं थी लेकिन युद्धबंदियों से खूब मजदूरी कराई जाती थी. कई बार उनकी बलि भी दे दी जाती थी.
तस्वीर: Fundación La Ruta Maya, Guatemala
मृत्यु के देवता
माया सभ्यता के हर तरह की मृत्यु के लिए अलग देवता था. हालांकि ज्यादातर देवता तो चित्रों में नाचते ही दिखते हैं. आज भी मेक्सिको में कंकालों के इर्द गिर्द नाचने का उत्सव होता है.
तस्वीर: Historisches Museum der Pfalz/Ricky López Bruni
8000 देवता
माया सभ्यता के आठ हजार देवता थे. सबसे बड़ा देवता मक्के का था. उसके चित्र हर जगह थे.
तस्वीर: Historisches Museum der Pfalz/Carolin Breckle
कोकोआ
यहां कोकोआ की बड़ी कीमत थी. अमीर लोग कोकोआ को तोहफे में लेते देते थे. उत्सवों में इसका इस्तेमाल होता था.
तस्वीर: Historisches Museum der Pfalz/Ricky López Bruni
गधे नहीं थे क्या?
दूसरी से नौवीं सदी के बीच माया सभ्यता में गधे, घोड़े और खच्चरों की जानकारी नहीं मिलती. लेकिन यह पेंटिंग एक भालू की है जो सामान उठा रहा है. क्या वे भालू पालते थे?
तस्वीर: Historisches Museum der Pfalz/Ricky López Bruni
धातु तो थी
माया सभ्यता में धातु का इस्तेमाल होता था. लेकिन कलाकार मुखौटे बनाने के लिए पत्थरों का इस्तेमाल करते थे.
तस्वीर: Historisches Museum der Pfalz/Ricky López Bruni
कहां गई सभ्यता
इस बारे में बहुत से सिद्धांत दिए गए हैं. लेकिन कोई सिद्धांतकार कुछ पुख्ता नहीं बता पाया है कि माया सभ्यता अचानक लापता कैसे हो गई.
तस्वीर: picture-alliance/robertharding
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इस शहर की खुदाई के अभियान में शामिल रहे पुरातत्वविदों में से एक कार्लोस पेराजा ने बताया कि इस शहर पर 600-900 एडी में माया सभ्यता का कब्जा रहा होगा. उन्होंने कहा, "हमें लगता है कि यहां 4,000 से ज्यादा निवासी रहते होंगे. इनमें अलग-अलग वर्गों के लोग थे. पुजारी और लेखक थे, बड़े-बड़े महलों में रहने वाले लोग थे और छोटे भवनों में रहने वाले आम लोग भी थे.”
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हिओल की खोज
शोधकर्ताओं को इलाके में कब्रिस्तान भी मिले हैं जहां वयस्कों और बच्चों को दफनाया जाता होगा. इन कब्रों में औजार, बर्तन और अन्य सामान भी मिला है जो शवों के साथ दफनाया गया होगा. इलाके में समुद्री जीवन के निशान भी मिले हैं, जो बताता है कि शहर के लोग तटीय इलाकों में मछली पकड़ने आदि कामों में संलग्न रहे होंगे. यह भी पता चलता है कि कृषि से मिले उत्पादों के अलावा मछली जैसी चीजें भी उनके खाने में शामिल रही होंगी.
पेराजा ने बताया, "समय के साथ-साथ इस इलाके में शहरों के निर्माण हुए हैं और पुरातात्विक महत्व की बहुत सी चीजें नष्ट हो गई हैं. लेकिन हम पुरातत्वविदों को भी हैरत हुई है क्योंकि हमें इतनी संरक्षित हालत में किसी जगह के मिलने की उम्मीद नहीं थी.
दुनिया भर में ऐसे कई मंदिर हैं जो पौराणिक वास्तुकला और संस्कृति के सबूत हैं. इनमें से कुछ हिंदू और बौद्ध मंदिर तो भारत से बाहर दूसरे देशों में हैं.
तस्वीर: picture alliance/DINODIA
मृतकों का मंदिर, मिस्र
करीब 1300 ईसा पूर्व मिस्र में मृतकों का यह मंदिर बनाया गया. यहां शव रखे जाते थे, जिन्हें पौराणिक देवता अमून को चढ़ाया जाता था.
तस्वीर: picture-alliance/AP Photo/M. El-Dakhakhny
पार्थेनॉन का मंदिर, ग्रीस
इस मंदिर के खंडहर आज भी सिंकदर वाले ग्रीक साम्राज्य की निशानी हैं. एंथेस नाम की देवी के सम्मान में यह मंदिर 438 ईसा पूर्व में बनाया गया.
तस्वीर: Reuters/Y. Behrakis
टेम्पल ऑफ इनस्क्रिप्शन, मेक्सिको
माया सभ्यता से जुड़ा यह मंदिर सन 683 के आस पास तैयार हुआ. मिस्र के बाहर यह दुनिया में पिरामिड आकार का सबसे बड़ा ढांचा है.
तस्वीर: picture alliance/AP Photo/A. Meneghini
सोमनाथ मंदिर, भारत
सोमनाथ मंदिर पहली बार कब बना, इसका सही सही अंदाजा नहीं है. लेकिन दूसरी बार यह 649 ईसवी में बना. इसके बाद सोमनाथ बार बार हमलों का शिकार हुआ. 1951 में मंदिर का चालुक्य वास्तुकला के अनुसार पुर्नउद्धार किया गया.
तस्वीर: picture alliance/DINODIA
बोरोबुडुर मंदिर, इंडोनेशिया
9वीं शताब्दी में सेंट्रल जावा में यह महायान बौद्ध मंदिर बनाया गया. यहां खास अंदाज में गौतम बुद्ध की 500 से ज्यादा मूर्तियां हैं.
तस्वीर: Getty Images/U. Ifansasti
प्रांबानन मंदिर, इंडोनेशिया
9वीं शताब्दी के मध्य में ही इंडोनेशिया के दूसरे इलाके में हिंदू साम्राज्य संजया के राजाओं ने प्रांबानन मंदिर बनवाया. 47 मीटर ऊंचा यह मंदिर वास्तुकला का मास्टरपीस भी माना जाता है.
तस्वीर: A Brit and a Broad
अंकोरवाट मंदिर, कंबोडिया
12वीं शताब्दी में खमेर साम्राज्य के सूर्यवर्णम द्वितीय राजा ने अंकोरवाट में विष्णु का मंदिर बनाया. मान्यताओं के मुताबिक विशाल इलाके में फैला यह मंदिर एक रात में बनाया गया.
तस्वीर: S. Bandopadhyay
हम्पी मंदिर, भारत
भारत के कर्नाटक राज्य में पड़ने वाला यह मंदिर 14वीं शताब्दी में बनाया गया. कुछ इतिहासकारों के मुताबिक वहां मिले कुछ ढांचे ईसा पूर्व के भी हैं. हम्पी बीजिंग के बाद मध्यकाल का दूसरा बड़ा शहर था. इतिहासकारों के मुताबिक हम्पी तब शायद भारत का सबसे समृद्ध शहर था.
तस्वीर: Getty Images/AFP/D. Sarkar
पशुपतिनाथ, नेपाल
15वीं शताब्दी में राजा शुपुष्पा ने पशुपतिनाथ मंदिर का पुर्ननिर्माण किया. 11वीं शताब्दी के एक ग्रंथ के मुताबिक वहां पहले भी मंदिर था.
तस्वीर: Getty Images/AFP
वाट अरुण मंदिर, थाइलैंड
13वीं से 17वीं शताब्दी में अयुतथाया स्रामाज्य के दौरान यह मंदिर बनाया गया. यह बौद्ध मंदिर सूर्य को समर्पित है. इसे सूर्योदय का मंदिर भी कहते हैं.
तस्वीर: picture-alliance/Sergi Reboredo
स्वर्ण मंदिर, भारत
16वीं शताब्दी में अमृतसर में एक गुरुद्वारा बनाया गया. लेकिन इसके बाद गुरुद्वारे ने कई हमले झेले. 1802 में महाराजा रणजीत सिंह ने मंदिर को चमकाने का एलान किया. उन्होंने निर्माण में सोने और संगमरमर का इस्तेमाल किया. 1830 में महाराजा रणजीत सिंह ने मंदिर के लिए खजाने का सोना दान किया.
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हिओल की खोज मेरिडा में एक ओद्यौजिक पार्क का निर्माण शुरू होने के बाद हुई. यह ओद्यौगिक पार्क अब भी बनाया जाएगा लेकिन पुरातत्वविदों का कहना है कि खोज में मिली चीजों को संभालकर रखा जाएगा.
रहस्यमयी माया सभ्यता
पुरतत्वविदों के लिए माया सभ्यता प्राचीन इतिहास का एक रहस्यमयी काल रहा है. यह सभ्यता उत्तर और दक्षिण अमेरिका के विशाल इलाके में फैली हुई थी. इसका अब तक मिला सबसे बड़ा केंद्र ग्वाटेमाला के तिकाल में है, जहां विशालकाल मंदिर, बाजार और पिरामिड मिले हैं.
तिकाल का महाकाय जैगुआर मंदिर 700 एडी में बना माना जाता है. मास्क्स और आर्कोपोलीस के मंदिर तिकाल की महत्वपूर्ण जगहों में हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक स्पेन द्वारा मेक्सिको और मध्य अमेरिका पर कब्जे से पहले पश्चिमी गोलार्थ में माया सभ्यता ही सबसे बड़ा साम्राज्य था.
मेक्सिको में मिला माया सभ्यता का शहरतस्वीर: Lorenzo Hernandez/REUTERS
माया सभ्यता के जानकार कहते हैं कि जब यह सभ्यता अपने चरम पर थी, तब इसका विस्तार कम से कम 40 शहरों में था जिनमें से हरेक की आबादी 5,000 से 50,000 के बीच थी. माया सभ्यता की कुल आबादी 20 लाख तक पहुंची थी. लेकिन 900 ए़डी के बाद इस सभ्यता का पतन शुरू हो गया और धीरे-धीरे सारे शहर जंगलों में तब्दील हो गए.