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राजनीतिविश्व

बढ़ते वैश्विक संकटों के बीच जर्मनी का विकास सहायता बजट घटा

मार्सेल फुर्स्टेनाउ
२२ सितम्बर २०२६

जर्मनी के आर्थिक सहयोग और विकास मंत्रालय का बजट लगातार पांचवें साल कम होने वाला है. सहायता संगठनों ने चेतावनी दी है कि इन कटौतियों से लाखों लोगों पर गंभीर असर पड़ेगा.

जर्मन चांसलर के बर्लिन ऑफिस के सामने प्रदर्शन करते एनजीओ कार्यकर्ता
जुलाई 2026 में जर्मन चांसलर के बर्लिन ऑफिस के सामने प्रदर्शन करते एनजीओ कार्यकर्तातस्वीर: Giulia Saudelli/DW

जर्मनी की विकास मंत्री रीम अलाबाली राडोवन ने संसद के निचले सदन ‘बुंडेस्टाग' में अपने भाषण की शुरुआत तबाही और दुखों की एक लंबी सूची के साथ की. उन्होंने नेपाल में आई बाढ़, भीषण गर्मी की लहरों, आग की लपटों में घिरे जंगलों, सूखती नदियों और सूखे के कारण बर्बाद हुई फसलों का जिक्र किया.

सेंटर-लेफ्ट सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी (एसपीडी) की नेता राडोवन ने कहा, "लाखों लोग भुखमरी का सामना कर रहे हैं. एक बात साफ है: जलवायु संकट पूरी दुनिया के लिए खतरा बना हुआ है. कोई भी देश अकेले इससे नहीं निपट सकता.”

राडोवन ने अपने मंत्रालय के लिए सरकार के प्रस्तावित 2027 के बजट पर चर्चा की शुरुआत जमीनी हकीकत का कड़वा सच बताकर की. यह पिछली बार 10 अरब यूरो से थोड़ा ज्यादा था, जो इस बार घटकर 9.5 अरब यूरो से भी थोड़ा कम हो जाएगा. 2022 में यह लगभग 14 अरब यूरो था, यानी पिछले पांच वर्षों में मंत्रालय के बजट में लगभग एक-तिहाई की कमी आई है.

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विकास सहायता में इतनी बड़ी कमी जर्मनी की विकास मंत्री के उस दावे से कैसे मेल खाती है, जिसमें उन्होंने इसकी अहमियत पर जोर दिया था? इतनी बड़ी कटौती तो मंत्री की बात से बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करती है. जनवरी में अपनी रणनीति पेश करते हुए उन्होंने कहा था कि ‘कूटनीति और रक्षा के साथ विकास नीति भी जर्मनी की सुरक्षा का और अधिक महत्वपूर्ण आधार बनेगी.'

मानवीय सहायता के लिए फंडिंग में कोई बढ़ोतरी नहीं

जब इस नीति में बदलाव की घोषणा की गई थी, तो सहायता संगठनों ने इस पर संदेह जताया था. फंडिंग में हालिया कटौती के बाद उनकी चिंताएं और बढ़ गई हैं. लगभग 150 विकास और मानवीय गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के प्रतिनिधि संगठन वीनरो (VENRO) के मिशाएल हर्ब्स्ट ने कहा, "अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए फंडिंग में फिर से की गई कटौती पहले से ही गंभीर स्थिति को और खराब कर रही है.”

हर्ब्स्ट ने जर्मन विदेश मंत्रालय की ओर से दिए जाने वाले मानवीय सहायता के स्थिर बजट की आलोचना की. जहां यह 2022 में 3 अरब यूरो से अधिक था, वहीं यह 2025 से केवल 1 अरब यूरो पर ही अटका हुआ है. गहराते वैश्विक संकटों को देखते हुए, वीनरो ने रणनीति में बदलाव करने की मांग की है. संगठन की ओर से काफी ज्यादा फंडिंग की मांग करते हुए हर्ब्स्ट ने कहा, "अगले साल हमें भुखमरी से निपटने के लिए ज्यादा खर्च करने होंगे, क्योंकि ईरान से जुड़े संघर्ष और सूखे की वजह से खेती की पैदावार में भारी गिरावट आने की आशंका है.”

एक करोड़ लोगों को नहीं मिल पाई मदद

वीनरो के मुताबिक, कटौती का असर पहले से ही साफ तौर पर दिख रहा है. इसके सदस्य संगठनों के एक सर्वेक्षण में पाया गया कि वित्त पोषित परियोजनाओं की संख्या में भारी गिरावट आ रही है. "34 संगठनों के हमारे सैंपल से पता चलता है कि सिर्फ इन्हीं संगठनों के जरिए मिलने वाली मदद से करीब 1 करोड़ से ज्यादा लोग वंचित रह गए हैं.”

हर्ब्स्ट ने कहा, "कई स्थानीय साझेदार संगठन, जो जमीनी स्तर पर विकास के काम और मदद पहुंचाने के लिए बहुत जरूरी हैं, अब काम ही नहीं कर पा रहे हैं.” उन्होंने आगे कहा कि इतनी बड़ी कटौती का पूरा असर साफ तौर पर सामने आने में शायद तीन से चार साल लग सकते हैं.”

क्या विकास कार्यों के लिए ‘डेट ब्रेक' से छूट मिल सकती है?

दरअसल, 2022 में यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद तत्कालीन चांसलर ओलाफ शॉल्त्स (एसपीडी) ने ‘साइटेनवेन्डे' यानी एक ऐतिहासिक मोड़ की घोषणा की थी. इसी के चलते संघीय सरकार को लगभग सभी मंत्रालयों में खर्च में कटौती करनी पड़ी थी. तब से जर्मनी ने अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने पर जोर दिया है और हर साल रक्षा बजट बढ़ाया है, जबकि बाकी लगभग सभी मंत्रालयों को बहुत कम फंड से ही काम चलाना पड़ा है.

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वीनरो के कार्यकारी बोर्ड के सदस्य हर्ब्स्ट ने जर्मन संसद ‘बुंडेस्टाग' से मांग की है कि विकास कार्यों में सहयोग और मानवीय सहायता, दोनों को जर्मनी के ‘डेट ब्रेक' नियमों से छूट दी जाए. बतौर हर्ब्स्ट, "आखिरकार, बुंडेसवेयर (जर्मन सेना) के आधुनिकीकरण और यूक्रेन को सैन्य मदद के लिए भी तो छूट दी गई है. इस छूट से जर्मनी अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बार फिर बड़ी जिम्मेदारी उठाने में सक्षम हो पाएगा.”

क्या कम पैसे का मतलब कम असर है?

विपक्षी ग्रीन पार्टी की सांसद जमीला शेफर ने विकास मंत्रालय के बजट पर बुंडेसटाग में हुई बहस के दौरान ऐसी ही दलील दी. उन्होंने तर्क दिया कि जलवायु के लिए कदम उठाना और विकास में सहयोग करना कोई दान-पुण्य या चैरिटी का काम नहीं है, बल्कि यह खुद जर्मनी के अपने हित में है.

शेफर ने कहा, "जर्मनी को अपनी रक्षा क्षमताओं में निवेश करना चाहिए, लेकिन सुरक्षा सिर्फ रक्षा बजट में निवेश करने से नहीं बनती. जो लोग अंतरराष्ट्रीय स्थिरता के लिए मदद में कटौती करते हुए सैन्य सुरक्षा को मजबूत करते हैं, उनकी सुरक्षा नीति में एक बड़ी कमी है.”

सरकार में शामिल सेंटर-राइट कंजर्वेटिव गठबंधन, क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन और क्रिश्चियन सोशल यूनियन (सीडीयू/सीएसयू) के सांसद निकोलस जिपेलियूस विकास खर्च में हो रही कटौतियों को अलग नजरिए से देखते हैं. उनके मुताबिक, संघीय बजट को संतुलित करने में हर मंत्रालय को अपना योगदान देना होगा. वह कहते हैं, "कम पैसे का मतलब यह नहीं है कि उसका असर कम होगा. बल्कि, इसके बजाय हमें अपनी प्राथमिकताओं पर साफ तौर पर ध्यान देने और मौजूदा ढांचों की बारीकी से समीक्षा करने के लिए प्रेरित होना चाहिए.”

जिपेलियूस जर्मनी के ‘डेट ब्रेक' से विकास मंत्रालय को छूट देने की मांगों को खारिज करते हैं. उन्होंने कहा, "मुख्य सवाल यह है कि क्या खर्च किया गया हर यूरो ऐसी जगह लगाया जा रहा है जहां उससे सबसे ज्यादा फायदा हो सके.” क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक पार्टी के इस नेता का तर्क है कि नीति के अन्य क्षेत्रों की तरह ही, विकास सहयोग में सफलता को बजट के आकार से नहीं, बल्कि उससे पड़ने वाले असर से मापा जाना चाहिए.

रोकथाम पर ज्यादा जोर देने की जरूरत

मानवीय सहायता और विकास सहायता संगठन ‘एक्शन अगेंस्ट हंगर' के प्रमुख यान सेबास्टियान फ्रीडरिष-रुस्ट का नजरिया इससे बिल्कुल अलग है. डीडब्ल्यू को दिए एक लिखित बयान में उन्होंने कहा, "2027 के बजट के लिए योजनाबद्ध कटौतियां अदूरदर्शी और खतरनाक हैं. इसका नतीजा यह हो सकता है कि 2030 तक दुनिया भर में 2.26 करोड़ लोगों की मौत हो सकती है.”

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फ्रीडरिष-रुस्ट ने कहा कि विकास सहयोग और मानवीय सहायता में कटौती करना पैसों के मामले में भी एक नासमझी भरा कदम है. उन्होंने चेतावनी दी, "भूख, संकट और अस्थिरता की वजह से लंबे समय में जो नुकसान और खर्च होता है, वह रोकथाम के खर्च से कहीं ज्यादा होता है. जो लोग आज खर्च में कटौती कर रहे हैं, वे असल में बिल को आगे के लिए टाल रहे हैं और आखिर में इसे कई गुना महंगा बना रहे हैं.”

अपनी चिंता जताने के लिए, ‘एक्शन अगेंस्ट हंगर' अलायंस ने बुंडेस्टाग में बजट पर बहस से ठीक एक शाम पहले सत्ताधारी गठबंधन (एसपीडी और सीडीयू/सीएसयू संसदीय समूहों) के नेताओं को एक याचिका सौंपी. लगभग 1,00,000 लोगों ने इस अपील पर अपने हस्ताक्षर किए थे, जिसका शीर्षक था: ‘बजट संतुलन के नाम पर एकजुटता (एकता) से समझौता न करें: अंतरराष्ट्रीय सहायता को मजबूत करें!'

यह लेख मूल रूप से जर्मन में लिखा गया था.

Editing:ऋतिका पाण्डेय
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