खगोलविदों ने अंतरिक्ष की धुंध में ऐसे सितारे खोज निकाले हैं, जिन्हें आकाश गंगा के सबसे दूर स्थित सितारे कहा जा रहा है. मिल्की-वे में अब तक इतनी दूर का कोई सितारा नहीं मिला था.
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वैज्ञानिकों ने हमारी आकाशगंगा मिल्की-वे के सबसे दूर के छोर पर 208 नए सितारों की खोज की है. ये सितारे उस खगोलीय धुंध में मिले हैं, जो मिल्की-वे के किनारे पर दिखाई देती है.
शोधकर्ताओं का कहना है कि ये 208 सितारे धुंध के जिस हिस्से में मिले हैं, वहां डार्क मैटर नामक रहस्यमय पदार्थ की भरमार है. डार्क मैटर अंतरिक्ष का वह अंधेरा हिस्सा होता है, जिसे ना देखा जा सकता है और ना उसके भीतर जाया जा सकता है. उसकी मौजूदगी का पता सिर्फ उसकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति से चलता है.
208 सितारों का यह समूह उसी धुंध में मौजूद है. इनमें से सबसे ज्यादा दूर का सितारा पृथ्वी से करीब 10.8 लाख प्रकाश वर्ष दूर है. एक प्रकाश वर्ष लगभग 95 खरब किलोमीटर के बराबर होता है.
विज्ञान के लिए शानदार साल रहा 2022
ऐतिहासिक अंतरिक्ष अभियानों, पुरातात्विक खोजों और वैज्ञानिक प्रयोगों ने विज्ञान के लिहाज से 2022 को एक शानदार साल बनाया. इन वैज्ञानिक उपलब्धियों की गूंज कई दशकों तक सुनाई देती रहेगी.
तस्वीर: M. Gann/blickwinkel/McPHOTO/picture alliance
जनवरी
साल 2022 की शुरुआत जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप के अपनी मंजिल पर पुहंचने के इंतजार के साथ हुई. पृथ्वी से करीब 15 लाख किलोमीटर का सफर तय करके यह वहां पहुंच गया
तस्वीर: via REUTERS
जनवरी
जनवरी में पहली बार एप्स्टाइन बार वायरस के पक्के सुबूत भी मिले . यह वायरस मल्टिपल स्लेरोसिस का प्रमुख कारण है.
तस्वीर: Cavallini James/BSIP/picture-alliance
जनवरी
इसी महीने पहली बार एक इंसान को सूअर का जेनेटिकली मॉडिफाइड दिल लगाया गया. उम्मीद यह की जा रही है कि भविष्य में जब किसी इंसान में ट्रांसप्लांट के लिए इंसान का दिल उपलब्ध नहीं होगा, तो इस तरह के ज्यादा प्रयोग होंगे. हालांकि, इस पहली कोशिश में इंसान की दो महीने बाद ही मौत हो गई.
तस्वीर: Cover-Images/imago images
फरवरी
फरवरी में घोषणा हुई कि अंतरिक्ष में सहयोग, शांति और रिसर्च का बड़ा प्रतीक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन 2031 में रिटायर हो जायेगा. वापसी के बाद इसे प्रशांत महासागर में लौटने के बाद वहीं जलसमाधि दे दी जायेगी.
तस्वीर: Stanislav Rishnyak/Zoonar/picture alliance
मार्च
मार्च अफासिया को लेकर जागरूकता के लिहाज से एक अहम महीना बन गया, जब ब्रूस विलिस में लैंग्वेज डिसॉर्डर की बात पता चली और इसके साथ ही उनका चार दशक लंबा अभिनय करियर समाप्त हो गया. मार्च में ही एक रिसर्च में पता चला कि कोविड-19 के कारण पूरी दुनिया में 1.80 करोड़ लोगों की मौत हुई. यह आंकड़ा डब्ल्यूएचओ के आंकड़े की तुलना में तीन गुना ज्यादा है.
तस्वीर: Charles Sykes/Invision/AP/picture alliance
मार्च
मार्च में ही एक रिसर्च में पता चला कि कोविड-19 के कारण पूरी दुनिया में 1.80 करोड़ लोगों की मौत हुई. यह आंकड़ा डब्ल्यूएचओ के आंकड़े की तुलना में तीन गुना ज्यादा है. इसी महीने में जब अंटार्कटिका में शेकेल्टन के शिप एंड्यूरेंस की खोज हुई, तो इसे ध्रुवीय इतिहास और ध्रुवीय विज्ञान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल किया गया.
अप्रैल में एक रिसर्च ने बताया कि इंसान के जीन के म्यूटेशन को उस व्यक्ति से बहुत मजबूती से जोड़ा जा सकता है, जिसमें शिजोफ्रेनिया का विकास हो रहा हो. इसके बाद 120 ऐसे जीन की पहचान की गई, जो इसमें भूमिका निभाते हैं. इसी महीने एक और रिसर्च ने मैजिक मशरूम में मिलने वाले साइलोसिबिन का पता लगाया, जो अवसाद से जूझने वालों के इलाज में मदद कर सकता है. हालांकि, इसमें जरूरी यह है कि लोग खुद से दवा ना लें.
तस्वीर: Wolfgang Kumm/dpa/picture alliance
मई
मई में इवेंट होराइजन टेलिस्कोप टीम ने बताया कि उसने हमारी आकाशगंगा के केंद्र में विशाल ब्लैक होल की पहली तस्वीर ली है. इसके बाद हमें पता चला कि सात घंटे की नींद हमारे अच्छे मानसिक स्वास्थ्य और संज्ञान के लिए उत्तम है. तकरीबन 5 लाख प्रतिभागियों पर किये गये प्रयोग से यह पता चला.
इंसानियत अभी कोविड-19 के खतरे से जूझ रही रही थी कि एक और वायरस ने दस्तक दे दी और मंकी पॉक्स के मामले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ने लगे. डब्ल्यूएचओ ने बाद में इसका नाम एमपॉक्स कर दिया.
तस्वीर: BSIP/UIG/IMAGO
जून
जून में जर्मनी के अल्फ्रेड वेगेनर इंस्टीट्यूट ने वैश्विक तापमान बढ़ने के कारण सदी के मध्य तक साइबेरियन टुंड्रा के "भारी नुकसान" की भविष्यवाणी की. उनका कहना है कि टुंड्रा गायब भी हो सकता है.
तस्वीर: Ulrike Herzschuh/AWI
जून
इसके बाद इस साल कई दिलचस्प खगोलीय घटनायें हुईं. इसमें पांच ग्रहों का एक सीध में आना भी जबर्दस्त नजारा था. मंगल, बृहस्पति, शनि, बुध और शुक्र चांद के साथ एक खास आकृति में नजर आये.
तस्वीर: M. Gann/blickwinkel/McPHOTO/picture alliance
जुलाई
जुलाई में 2022 की वो घड़ी आई, जिसका सबसे ज्यादा इंतजार था. वैज्ञानिकों ने जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप से ली गईं तस्वीरें दुनिया के सामने रखीं. इन तस्वीरों में ब्रह्मांड की अद्भुत छवि और ब्यौरा दिखाई पड़ा. पृथ्वी से करीब 1,150 प्रकाश वर्ष दूर एक ग्रह पर पानी की भाप भी दिखाई पड़ी.
तस्वीर: ESA, NASA, CSA, STScI/AFP
जुलाई
जुलाई में ही दुनिया के सबसे बड़े और ताकतवर कोलाइडर, द लार्ज हेड्रॉन कोलाइडर पर काम कर रहे वैज्ञानिकों ने तीन नये कणों के खोज की घोषणा की.
अगस्त महीने में एक स्टडी ने बताया कि प्राचीन इंसानों में बड़े होने पर लैक्टोज को पचाने के पीछे दूध पीना शायद कारण नहीं था. इसी महीने हम लॉन्ग कोविड को लेकर अपनी समझ बेहतर करने में सफल हुए, जब दो साल की अवधि में कुल 12 लाख मरीजों पर स्टडी की गई.
तस्वीर: DW
अगस्त
करीब 120 सालों तक लिनियर एलामाइट के नाम से विख्यात लेखन शैली को अपठनीय माना जाता रहा. हालांकि, पुरातत्वविदों की एक टीम ने अब इसे पढ़ने का दावा किया है. उनका कहना है कि उन्होंने आंशिक रूप से इस लेखन शैली को समझ लिया है.
तस्वीर: Louvre Museum
सितंबर
सितंबर में अंतरिक्ष विज्ञानियों ने कुछ ऐसा हासिल किया, जो अब तक साइंस फिक्शन फिल्मों में ही संभव माना जाता था. मानव ने पहली बार किसी क्षुद्र ग्रह से अंतरिक्ष यान को टकराकर उसके रास्ते में फेरबदल करने में सफलता पाई. यह नासा का डार्ट मिशन था. यह परीक्षण इसलिए किया गया, ताकि भविष्य में पृथ्वी को ऐसे किसी क्षुद्रग्रह की टक्कर या चोट से बचाया जा सके.
तस्वीर: ASI/NASA
अक्टूबर
अक्टूबर की शुरुआत नोबेल पुरस्कारों की घोषणा से हुई. चिकित्सा का पुरस्कार स्वांते पाबो को इंसान की उत्पत्ति के बारे में खोज के लिए मिला.
रसायनशास्त्र में कारोलिन आर बर्तोजी, के बैरी शार्पलेस और मॉर्डेन मेल्डल को स्नैपिंग मॉलिक्यूल को साथ लाने का तरीका ढूंढने के लिए नोबेल पुरस्कार दिया गया. भौतिकी में अलायन एस्पेक्ट, जॉन एफ क्लाउजर और एंटन जाइलिंगेरफर को नोबेल पुरस्कार मिला.
तस्वीर: AFP via Getty Images
अक्टूबर
अक्टूबर में ही हमने यह भी जाना कि पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र पर आधारित पुरातात्विक चीजों की डेटिंग से बाइबिल की कथाओं में वर्णित सैन्य अभियानों की तारीख भी जानी जा सकती है. इस साल वर्ल्ड पोलियो डे ने यह ध्यान दिलाया कि यह बीमारी अभी दो देशों में मौजूद है. इसके साथ ही इसके दो नये प्रकारों के बारे में भी जानकारी मिली, जो अमेरिका और ब्रिटेन में नजर आये.
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नवंबर
इंसान ने खाना बनाना कब शुरू किया, इसके बारे में हमारी जानकारी महज 1,70,000 साल पहले तक की ही थी. इसी साल पता चला कि 7,80,000 साल पहले भी इंसान खाना पकाकर खाता था.
तस्वीर: Tel Aviv University/Ella Maru
आर्टेमिस 1
16 नवंबर को आर्टेमिस 1 नाम का चंद्र अभियान धरती से रवाना हुआ. आर्टेमिस अभियान के जरिये इंसान को फिर से चांद पर ले जाने और वहां एक बेस बनाने की तैयारी है. इसकी मदद से इंसान मंगल तक का सफर तय कर सके, ऐसी कोशिश चल रही है.
तस्वीर: NASA/UPI Photo/IMAGO
दिसंबर
दिसंबर के महीने में अमेरिका की नेशनल इग्निशन फैसिलिटी ने घोषणा की कि रिसर्चरों ने फ्यूजन तकनीक में एक बड़ी कामयाबी हासिल कर ली है. परमाणु विखंडन यानी न्यूक्लियर फ्यूजन वह प्रक्रिया है, जिसकी मदद से सूरज के अंदर ऊर्जा पैदा होती है. वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि यह धरती पर ऊर्जा का भविष्य बनेगा. हालांकि, अभी उस तक पहुंचने का रास्ता बहुत लंबा है.
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इन सितारों को कनाडा-फ्रांस-हवाई टेलीस्कोप की मदद से खोजा गया है. यह अमेरिका के हवाई में मौना किया माउंटेन पर स्थित है. ये सितारे उस श्रेणी का हिस्सा हैं, जिसे आरआर लायरे कहा जाता है. इस श्रेणी के सितारे तुलनात्मक रूप से हल्के होते हैं. उनमें हाइड्रोजन व हीलियम से ज्यादा भारी तत्व बहुत कम मात्रा में होते हैं. सबसे दूर जो सितारा मिला है, वह हमारे सूर्य के भार का करीब 70 प्रतिशत प्रतीत होता है.
कैसे बने ये सितारे?
वैज्ञानिकों का एक मत यह है कि मिल्की-वे के किनारों पर जो खगोलीय धुंध छायी हुई है और जहां ये सितारे मिले हैं, दरअसल वे कभी छोटी-छोटी आकाशगंगाएं हुआ करती होंगी जो बाद में मिल्की-वे में मिल गईं.
सांता क्रूज की कैलिफॉर्निया यूनिवर्सिटी में डॉक्टरेट कर रहे युटिंग फेंग ने इस शोधकार्य का नेतृत्व किया. वह बताते हैं, "इन सितारों के जन्म के बारे में हमारी व्याख्या यह है कि इनका निर्माण छोटी आकाशगंगाओं और सितारों के छोटे-छोटे समूहों में हुआ होगा. बाद में ये सारे-के-सारे मिल्की-वे में मिल गए.”
फेंग ने अपना शोधपत्र अमेरिकन एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी की सिएटल में हुई मीटिंग में पेश किया. उन्होंने कहा, "इन सितारों की आकाशगंगाओं को गुरुत्वाकर्षण के जरिए छिन्न-भिन्न कर निगल लिया गया और हजम कर लिया गया. लेकिन ये सितारे मलबे के रूप में बचे रह गए.”
कैलिफॉर्निया यूनिवर्सिटी में खगोलविज्ञान विभाग के अध्यक्ष और शोध के सह-लेखक राजा गुहा ठाकुरता ने कहा, "बड़ी आकाशगंगाएं अपने जैसी छोटी आकाशगंगाओं को निगलकर ही बड़ी होती हैं.” इस तरह की घटनाओं के जरिए ही मिल्की-वे का आकार लगातार बढ़ता रहा है.
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रहस्यमय मिल्की-वे
मिल्की-वे की धुंध में एक अंदरूनी परत होती है और एक बाहरी. यह धुंध असल में मिल्की-वे के मुख्य चपटे हिस्से से भी बड़ी है. आकाशगंगा के केंद्र में एक विशाल ब्लैकहोल, है जो पृथ्वी से करीब 2,600 प्रकाश वर्ष दूर है. मिल्की-वे में कुल सितारों की संख्या 100 से 400 अरब के बीच हो सकती है. इन्हीं में से एक हमारा सूर्य है. मिल्की-वे के कुल सितारों में पांच प्रतिशत उस खगोलीय धुंध में हैं.
धुंध का अधिकतर हिस्सा डार्क मैटर, यानी वह रहस्यमय पदार्थ है, जिसके बारे में मनुष्य को मामूली जानकारियां हैं. माना जाता है कि इसी डार्क मैटर के कारण मिल्की-वे का आकार डिस्क जैसा है क्योंकि इसके गुरुत्वाकर्षण के कारण ही सारे सितारे और अन्य खगोलीय पिंड साथ आए हैं और एक आकाशगंगा के रूप में जमा हो गए हैं.
मिल्की-वे के बाहरी हिस्से के बारे में भी वैज्ञानिक ज्यादा नहीं जानते हैं. जो नए सितारे मिले हैं, वे मिल्की-वे की पड़ोसी आकाशगंगा एंड्रोमीडा के अंदर घुसे हुए थे. फेंग बताते हैं, "हम देख सकते हैं कि एंड्रोमीडा और मिल्की-वे के बाहरी हिस्से काफी फैले हुए हैं और एक दूसरे के बहुत करीब हैं, लगभग सटे हुए.”
वैज्ञानिकों का यह भी अनुमान है कि इन सितारों के ग्रह हो सकते हैं. गुहा ठाकुरता बताते हैं, "हमें पक्के तौर पर तो नहीं पता है, लेकिन इनमें से हरेक तारे के अपने ग्रह हो सकते हैं जो इनके चक्कर लगाते होंगे. ठीक वैसे ही, जैसे हमारा सौरमंडल है.”