ऑस्ट्रेलिया ने तय की अंतरराष्ट्रीय छात्रों की अधिकतम सीमा
२७ अगस्त २०२४
ऑस्ट्रेलिया ने कहा है कि वह 2025 के लिए नए अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या को 2,70,000 तक सीमित करेगा, क्योंकि सरकार रिकॉर्ड माइग्रेशन को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है.
ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटियों में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र पढ़ते हैंतस्वीर: Fabio Mazzarella/Sintesi/Photoshot/picture alliance
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ब्रिटेन और कनाडा की तरह ऑस्ट्रेलिया भी अपने यहां माइग्रेशन को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है और इसके लिए विदेशों से आने वाले छात्रों की संख्या को सीमित करने का फैसला किया गया है. मंगलवार को उसने कहा कि 2025 में दो लाख 70 हजार से ज्यादा छात्रों को वीजा नहीं दिया जाएगा.
कोविड के बाद से अंतरराष्ट्रीय छात्रों को कई तरह की छूटें दी गई थीं लेकिन पिछले एक साल में ऑस्ट्रेलिया ने कई कड़े निर्णय लिए हैं. शिक्षा मंत्री जेसन क्लेयर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "हमारे विश्वविद्यालयों में आज महामारी से पहले की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत अधिक अंतरराष्ट्रीय छात्र हैं, और निजी व्यावसायिक और प्रशिक्षण संस्थानों में उनकी संख्या लगभग 50 फीसदी अधिक है."
नई सीमा के तहत अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या विश्वविद्यालयों के लिए 1,45,000 और व्यावहारिक और स्किल-आधारित पाठ्यक्रमों के लिए 95,000 तक सीमित की जाएगी, जो लगभग 2023 के स्तर के आसपास है.
क्लेयर ने कहा कि सरकार विश्वविद्यालयों को उनकी विशेष नामांकन सीमा के बारे में सूचित करेगी. इस फैसले का विश्वविद्यालयों ने विरोध किया है. बड़े विश्वविद्यालयों की संस्था ‘यूनिवर्सिटीज ऑस्ट्रेलिया‘ ने कहा कि सरकार का यह कदम इस क्षेत्र पर "हैंड ब्रेक" लगाने जैसा होगा.
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नाखुश हैं विश्वविद्यालय
यूनिवर्सिटीज ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख प्रोफेसर डेविड लॉयड ने एक बयान में कहा, "हम प्रवासियों की संख्या को नियंत्रित करने के सरकार के अधिकार को स्वीकार करते हैं, लेकिन यह किसी भी एक क्षेत्र की कीमत पर नहीं किया जाना चाहिए, विशेष रूप से एक ऐसा क्षेत्र जो आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है, जैसे शिक्षा."
इंटरनेशनल माइग्रेशन आउटलुक 2023 के मुताबिक आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) देशों में सबसे अधिक प्रवास के मामले में भारतीय सबसे आगे हैं.
तस्वीर: Fotolia/Arvind Balaraman
भारतीय हैं सबसे आगे
विदेशी धरती की नागरिकता लेने के मामले में भारतीय शीर्ष पर हैं. इसके साथ ही आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) में प्रवास के मामले में भी भारतीय सबसे आगे हैं.
तस्वीर: Imago/Zumapress/N. Economoux
अमेरिका है पसंद
नागरिकता लेने के मामले में भारतीयों की पहली पसंद अमेरिका है. साल 2019 में 63,500 भारतीयों ने अमेरिका की नागरिकता ली. वहीं 2021 में वहां की नागरिकता लेने वाले भारतीयों की संख्या 56 हजार के करीब थी.
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अमीर देशों की नागरिकता ले रहे भारतीय
इंटरनेशनल माइग्रेशन आउटलुक 2023 की रिपोर्ट के मुताबिक 2021-22 में अमीर देशों की नागरिकता पाने वाला सबसे बड़ा राष्ट्रीय समूह भारतीय है.
तस्वीर: Julia Nikhinson/AP/picture alliance
विदेशियों को नागरिकता दे रहा कनाडा
2021-22 के दौरान कनाडा ने नागरिकता देने में सबसे बड़ी (174 प्रतिशत) वृद्धि हासिल की. पिछले साल 28 लाख लोगों ने ओईसीडी देशों की नागरिकता हासिल की.
तस्वीर: Darryl Dyck/The Canadian Press/picture alliance/AP
ओईसीडी देशों की नागरिकता लेने वाले
2019 में 1,55,799 भारतीयों ने ओईसीडी देशों की नागरिकता ली थी, साल 2021 में यह आंकड़ा घटकर 1,32,795 पर आ गया. मेक्सिको के 1,18,058 लोगों ने 2021 में ओईसीडी देशों की नागरिकता ली. जबकि सीरिया के 1,03,736 लोगों ने साल 2021 में नागरिकता ली.
तस्वीर: Francois Mori/AP Photo/picture alliance
कितने भारतीयों ने छोड़ी नागरिकता
विदेश मंत्रालय के मुताबिक जनवरी 2018 और जून 2023 के बीच नागरिकता छोड़ने वाले 1.6 लाख (करीब 20 फीसदी) ने कनाडा को चुना. इस सूची में अमेरिका टॉप पर है. ऑस्ट्रेलिया और यूनाइटेड किंगडम तीसरे और चौथे स्थान पर है.
तस्वीर: Mirko84/Pond5 Images/IMAGO
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अंतरराष्ट्रीय शिक्षा ऑस्ट्रेलिया का चौथा सबसे बड़ा निर्यात उद्योग है. 2022-2023 वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था में इस क्षेत्र का योगदान 36.4 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर यानी लगभग दो हजार अरब रुपये था.
लेकिन सर्वेक्षणों से पता चला है कि प्रवासियों की बढ़ती संख्या से लोगों में चिंता है. एक सर्वे के मुताबिक मतदाता बड़े पैमाने पर विदेशी छात्रों और कामगारों की आमद से चिंतित हैं, जो हाउसिंग मार्किट पर अधिक दबाव डाल रहे हैं. इस कारण माइग्रेशन एक साल के अंदर चुनावी मुद्दों में से एक बन सकता है.
30 सितंबर 2023 तक के वर्ष में नेट माइग्रेशन 60 फीसदी बढ़कर रिकॉर्ड 5,48,800 हो गया था. इनमें बहुत बड़ी संख्या भारत, चीन और फिलीपींस से आए छात्रों की थी. 2022-23 में देश में आए कुल प्रवासियों की संख्या 5,18,000 थी.
ब्रिटेन और कनाडा की तर्ज पर छात्रों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए पिछले कुछ महीनों में ऑस्ट्रेलिया ने कई कड़े कदम उठाए हैं. पिछले महीने विदेशी छात्रों के लिए वीजा फीस को दोगुने से भी ज्यादा बढ़ा दिया गया था. साथ ही, उन नियमों में खामियों को खत्म करने का वादा किया था, जिनसे अंतरराष्ट्रीय छात्रों को अपने रहने की अवधि को लगातार बढ़ाने की अनुमति मिल रही थी.
छात्रों का नया रिकॉर्ड
इस साल अंतरराष्ट्रीय छात्रों का कुल नामांकन आठ लाख को पार कर जाने की संभावना जताई गई है जो 2019 की तुलना में 17 फीसदी ज्यादा है.
संयुक्त राष्ट्र की वर्ल्ड माइग्रेशन रिपोर्ट 2024 के मुताबिक भारत अंतरराष्ट्रीय प्रवासियों का सबसे बड़ा स्रोत देश है. जानिए कितने प्रवासी भारत छोड़ कर गए और कहां कहां गए.
तस्वीर: Patricia de Melo Moreira/AFP
बढ़ता प्रवासन
वर्ल्ड माइग्रेशन रिपोर्ट के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय प्रवासन मानव विकास और आर्थिक वृद्धि का संचालक है और 2022 में दुनिया में अनुमानित 28.10 करोड़ अंतरराष्ट्रीय प्रवासी थे. रिपोर्ट प्रवासन के लिए संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय संस्था (आईओएम) ने जारी की है.
तस्वीर: Adrees Latif/REUTERS
प्रवासियों द्वारा भेजी हुई रकम
रिपोर्ट में दिखाया गया है कि प्रवासियों द्वारा अपने देश वापस भेजी जाने वाली रकम में 2000 से 2022 के बीच में 650 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. 2000 में इस रकम का कुल मूल्य 128 अरब डॉलर था जबकि 2022 में यह रकम बढ़ कर 831 अरब डॉलर हो गई.
तस्वीर: picture alliance/imageBROKER
कम आय वाले देशों का फायदा
इन 831 अरब डॉलरों में 647 अरब डॉलर प्रवासियों द्वारा कम और मध्यम आय वाले देशों में भेजे गए. आईओएम के मुताबिक यह रकम इस तरह के देशों के सकल घरेलू उत्पाद का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है. वैश्विक स्तर पर यह रकम ऐसे देशों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को पीछे छोड़ चुकी है.
तस्वीर: Mohamed Abd El Ghany/REUTERS
प्रवासियों में पुरुष ज्यादा
प्रवासियों में जेंडर गैप पिछले 20 सालों में लगातार बढ़ता ही गया है और इस समय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रवासियों में महिलाओं के मुकाबले पुरुषों की संख्या ज्यादा है. 2000 में अंतरराष्ट्रीय प्रवासियों में 50.6 प्रतिशत पुरुष थे तो 49.4 प्रतिशत महिलाएं थीं. लेकिन 2020 में पुरुषों का आंकड़ा 51.9 प्रतिशत (14.6 करोड़) पर और महिलाओं का आंकड़ा 48.1 प्रतिशत (13.5 करोड़) पर आ गया.
तस्वीर: Clare Roth/DW
कहां जाते हैं सबसे ज्यादा प्रवासी
अमेरिका अंतरराष्ट्रीय प्रवासन का सबसे बड़ा गंतव्य देश है. इसके बाद स्थान है जर्मनी, सऊदी अरब, रूस, ब्रिटेन और फिर यूएई का. दिलचस्प बात है कि यूरोपीय देशों, अमेरिका और कनाडा को चुनने वाले प्रवासियों में महिलाओं का प्रतिशत पुरुषों से ज्यादा है.
तस्वीर: Justin Hamel/REUTERS
भारत से सबसे ज्यादा प्रवासन
भारत से सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय प्रवासी अपना देश छोड़ कर दूसरे देश जा रहे हैं. 2022 में भारत से जाने वाले अंतरराष्ट्रीय प्रवासियों की संख्या करीब 1.70 करोड़ थी. इनमें करीब 60 लाख महिलाएं थीं और बाकी सब पुरुष.
तस्वीर: Hans Lucas/IMAGO
प्रवासन की मजबूरी
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि संघर्ष, हिंसा, आपदा और अन्य वजह से दुनिया भर में विस्थापित लोगों की आबादी 11.70 करोड़ हो गई है, जो आधुनिक युग में सबसे बड़ी संख्या है.
तस्वीर: Adrees Latif/REUTERS
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2024 में कुल नामांकनों की संख्या 2,89,230 है, जो इस अवधि के लिए एक रिकॉर्ड है और 2019 के 2,49,261 नामांकनों से 16 फीसदी अधिक है. यह रिकॉर्ड आंकड़ा बताता है कि ऑस्ट्रेलिया के प्रति अंतरराष्ट्रीय छात्रों का आकर्षण न केवल वापस आया है, बल्कि नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया है. इसकी एक वजह कनाडा और ब्रिटेन द्वारा अंतरराष्ट्रीय छात्रों को कम वीजा दिया जाना भी है.
ऑस्ट्रेलिया पढ़ने जाने वाले छात्रों में 21 फीसदी चीन से आते हैं. उसके बाद भारत (16 फीसदी), नेपाल (8 फीसदी), फिलीपींस (5 फीसदी) और वियतनाम (5 फीसदी) का नंबर है. व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण क्षेत्र में सबसे बड़ी वृद्धि देखने को मिली है, जहां नामांकन 2019 के बाद से 46 फीसदी बढ़ गए. उच्च शिक्षा में भी दाखिले बढ़े हैं लेकिन 2019 के स्तर से उनकी वृद्धि केवल 1 फीसदी की रही है. अंग्रेजी भाषा के पाठ्यक्रमों में दाखिले में 7 फीसदी वृद्धि हुई है, जबकि स्कूलों और अन्य पाठ्यक्रमों में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के दाखिलों में लगभग 25 फीसदी की गिरावट हुई है.
केरल प्रवासन सर्वे 2023 की रिपोर्ट दिखा रही है कि जहां राज्य से प्रवासन करने वालों की संख्या में मामूली इजाफा हुआ है, वहीं घर वापस लौटने वालों की संख्या भी बढ़ी है. इसके अलावा खाड़ी के देशों का आकर्षण भी कम हुआ है.
तस्वीर: P.P. Afthab/AP
थोड़ा कम हुआ है प्रवासन
केरल प्रवासन सर्वे 2023 के मुताबिक, पिछले साल केरल से 22 लाख लोगों ने प्रवासन किया. यह संख्या 2018 में 21 लाख थी. 1998 में जब यह सर्वे शुरू हुआ था, तब केरल से 14 लाख लोगों ने प्रवासन किया था. 2013 में यह संख्या बढ़ कर 24 लाख हो गई थी, लेकिन उसके बाद से यह धीरे-धीरे घट रही है. अनुमान है कि करीब 50 लाख मलयालम-भाषी लोग भारत से बाहर रहते हैं.
दिलचस्प यह है कि रिपोर्ट के मुताबिक 2018 में जहां 12 लाख मलयालम-भाषी भारत लौटे थे, वहीं 2023 में यह संख्या बढ़कर 18 लाख हो गई. बीते पांच सालों में वापस लौट आने वाले केरल के लोगों की संख्या 38.3 प्रतिशत बढ़ी है. वापस आने वालों में करीब 18.4 प्रतिशत लोगों ने लौटने का कारण नौकरी छूट जाना, 13.8 प्रतिशत ने कम वेतन, 11.2 प्रतिशत ने बीमारी या हादसा, 16.1 प्रतिशत ने केरल में काम करने की इच्छा को वजह बताया.
तस्वीर: UNI
खाड़ी के देशों का आकर्षण गिरा
मलयालम-भाषी प्रवासियों के बीच बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और यूएई का आकर्षण घटा है और इनके मुकाबले दूसरे देशों का चाव 19.5 प्रतिशत बढ़ा है. यानी 80.5 प्रतिशत मलयाली प्रवासी आज भी खाड़ी देश जाना ही पसंद करते हैं, लेकिन 1998 में यह आंकड़ा 93.8 प्रतिशत था. 2023 में खाड़ी देशों के बाद मलयालम-भाषी प्रवासियों ने ब्रिटेन (छह प्रतिशत), कनाडा (2.5 प्रतिशत), अमेरिका (2.2 प्रतिशत) और ऑस्ट्रेलिया को चुना.
तस्वीर: Jon Gambrell/AP/picture alliance
प्रवासी छात्रों की संख्या बढ़ी
प्रवासन करने वाले छात्रों की संख्या बढ़ती जा रही है. 2023 में प्रवासन करने वाले सभी मलयालम-भाषियों में से 11.3 प्रतिशत छात्र थे. यह 2018 के मुकाबले दोगुनी संख्या है. छात्र खाड़ी देश जाना पसंद नहीं करते हैं.
तस्वीर: NurPhoto/picture alliance
महिलाओं की संख्या ज्यादा
महिला प्रवासियों की संख्या भी बढ़ी है. 2018 में जहां महिला प्रवासियों की हिस्सेदारी 15.8 थी, वहीं यह 2023 में बढ़कर 19.1 हो गई. इनमें 71.5 महिलाएं स्नातक थीं, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा सिर्फ 34.7 प्रतिशत है. प्रवासी मलयाली महिलाओं में से 51.6 प्रतिशत बतौर नर्स काम करती हैं. करीब 40.5 प्रतिशत प्रवासी मलयाली महिलाएं पश्चिमी देशों में हैं.
तस्वीर: Manish Swarup/AP Photo/picture alliance
हिंदुओं से ज्यादा मुसलमान प्रवासी
प्रवासी मलयालम-भाषियों में 41.9 प्रतिशत मुसलमान हैं और 35.2 प्रतिशत हिंदू. केरल की आबादी में 26 प्रतिशत मुसलमान हैं और 54 प्रतिशत हिंदू. आबादी में 18 प्रतिशत ईसाई हैं, जबकि प्रवासियों में ईसाईयों की हिस्सेदारी 22.3 प्रतिशत है.
तस्वीर: R S Iyer/AP/picture alliance
विदेश से भेज रहे धन
रेमिटेंस (विदेश से अपने देश भेजा हुआ धन) में भी काफी बढ़ोतरी आई है. जहां 2018 में 85,092 करोड़ रुपए भेजे गए थे, वहीं 2023 में 2,16,893 करोड़ रुपए वापस भेजे गए, यानी 154.9 प्रतिशत ज्यादा. प्रति प्रवासी परिवार को 2023 में औसत 2.24 रुपए रेमिटेंस मिले. प्रवासी परिवारों ने इसमें से 15.8 प्रतिशत धन मकानों या दुकानों की मरम्मत पर, 14 प्रतिशत बैंक लोन चुकाने पर और 10 प्रतिशत शिक्षा पर खर्च किया.
तस्वीर: PETA India
1998 से हो रहा है सर्वे
केरल सरकार द्वारा जारी किए गए इस सर्वे को इंटरनैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ माइग्रेशन एंड डेवलपमेंट और गुलाटी इंस्टिट्यूट ऑफ फाइनेंस एंड टैक्सेशन ने करवाया था. यह हर पांच साल पर करवाया जाता है. इस बार सर्वे में केरल के सभी 14 जिलों में से 20,000 परिवारों ने हिस्सा लिया है.
तस्वीर: Creative Touch Imaging Ltd/NurPhoto/IMAGO
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नए नियमों का भारतीय छात्रों पर बड़ा असर पड़ सकता है, जिनके लिए विदेशों में पढ़ने के कई मौके कम होंगे. ऑस्ट्रेलिया भारतीय छात्रों में सबसे लोकप्रिय जगहों में से एक है और बीते सालों में उनकी संख्या लगातार बढ़ी है. 2019 में लगभग 90 हजार भारतीय छात्र पढ़ने के लिए ऑस्ट्रेलिया गए थे लेकिन 2024 में उनकी संख्या एक लाख 18 हजार को पार कर चुकी है.