पांच सौ रुपये की कोल्हापुरी चप्पलों पर जब प्राडा का ठप्पा लगता है तो उनका दाम सवा लाख पहुंच जाता है. जब भारत के कारीगर कुछ बनाते हैं, तो लोग मोलभाव करते हैं. लेकिन वही काम जब वेस्टर्न डिजाइनर करते हैं, तो ब्रैंड वैल्यू के लिए लोग सौ गुना दाम देने को भी तैयार हो जाते हैं. भारत से चोरी का सिलसिला बहुत पुराना है. जानिए कब और कैसे शुरू हुई यह चोरी, बेबाक ईशा के पहले एपिसोड में.
क्या खाएं, क्या पहनें, कौनसे सब्जेक्ट पढ़ें, करियर किस फील्ड में बनाएं - ऐसे फैसले लेना आसान हो जाता है, जब कोई फैक्ट्स के साथ आसान भाषा में समझाए. यहां होगी सीधी बात बिना किसी फिल्टर के, पूरी बेबाकी के साथ.