जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने कहा है कि जर्मनी चीन समेत सभी देशों के साथ "निष्पक्ष व्यापार" के लिए खुला रहना चाहता है. हालांकि उन्होंने अनुचित व्यापारिक तौर-तरीकों को लेकर ईयू के और तेज प्रतिक्रिया देने पर जोर दिया.
जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने कहा है कि उनका देश चीन के साथ ट्रेड वॉर नहीं चाहता तस्वीर: Fabian Sommer/dpa/picture alliance
विज्ञापन
जर्मन राजधानी बर्लिन में हो रहे चौथे 'बर्लिन ग्लोबल डायलॉग‘ में जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने कहा कि यूरोपीय संघ (ईयू) को अनुचित प्रतिस्पर्धा से अपने उद्योगों की रक्षा करने की जरूरत है. उन्होंने ईयू बाजार को खुला रखने पर बल दिया लेकिन साथ ही चीन के साथ ईयू के व्यापार घाटे का जिक्र भी किया.
मैर्त्स ने कहा, "चीन बहुत प्रतिस्पर्धी है और हमें रिसर्च एंड डेवलपमेंट में चीन की सफलता का सम्मान करना चाहिए." साथ ही, उन्होंने चीन के कुछ ऐसे व्यापारिक तौर-तरीकों के बारे में चेताया जो चीन को फायदा पहुंचाते हैं लेकिन उसके यूरोपीय व्यापारिक साझेदारों के हित में नहीं हैं.
मैर्त्स ने ईयू के साथ व्यापारिक संबंधों में चीन की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता, सब्सिडी, विनिमय दरों और डब्ल्यूटीओ के नियमों को कुछ अलग तरह से इस्तेमाल करने का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि इसी साल अक्टूबर में जर्मनी और फ्रांस ने यूरोपीय संघ से अनुचित व्यापारिक तौर-तरीकों से निपटने के लिए एक नया, तेजी से इस्तेमाल किया जा सकने वाला व्यापार-रक्षा साधन बनाने का प्रस्ताव पेश किया है, जिसे सर्वसम्मति से ईयू देशों का समर्थन मिल चुका है. उन्होंने कहा, "हम अपना टूल-बॉक्स खोल कर दिखा रहे हैं, लेकिन हम नहीं चाहते कि उसका इस्तेमाल करना पड़े."
बर्लिन ग्लोबल डायलॉग बीते चार सालों से बर्लिन में हो रहा है जिसमें कारोबार, शिक्षा और राजनीति के दिग्गज हिस्सा लेते हैं तस्वीर: Fabian Sommer/dpa/picture alliance
मैर्त्स ने बताया कि यूरोपीय और चीनी अधिकारियों ने उस प्रस्ताव से जुड़े कई व्यापारिक मुद्दों पर बातचीत शुरू कर दी है, फिलहाल जिसके शुरुआती नतीजे सामने आए हैं. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ईयू चीन के साथ आर्थिक संबंध बनाए रखना चाहता है, साथ ही निष्पक्ष व्यापारिक परिस्थितियां भी सुनिश्चित करना चाहता है. मैर्त्स ने जोर देकर कहा कि इसका मकसद "अनुचित तौर-तरीकों को रोकना है, ना कि ट्रेड वॉर को भड़काना."
दूसरी ओर, जी7 के सदस्य देश और भारत समेत कुछ विकासशील देश 'क्रिटिकल रेअर अर्थ मटीरियल‘ जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित और विविध बनाने के उपायों पर चर्चा करते रहे हैं. चीन दूसरे देशों को इन दुर्लभ खनिज तत्वों के निर्यात में काफी सख्त नियंत्रण रखता है. ये संसाधन तकनीकी क्षेत्र, खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स, में तेजी से विकास के लिए बेहद अहम हैं. जर्मन चांसलर ने इस बात पर भी जोर दिया कि जी7 देशों को संसाधन की सुरक्षा पर ध्यान देने और महत्वपूर्ण कच्चे माल की खरीद के लिए "खरीदारों के समूह" के रूप में मिलकर काम करने की जरूरत है.
विज्ञापन
रिकॉर्डनिर्यातबढ़ारहाहैचीनकीविकासगाथाकोआगे
उधर, सितंबर के अंत में खत्म हुई तीसरी तिमाही में चीन की अर्थव्यवस्थामें अनुमान से भी तेज बढ़त दर्ज हुई है. निर्यात में तेजी ने चीन के कमजोर पड़े उपभोक्ता खर्च और लंबे समय से चल रही प्रॉपर्टी मार्केट की मंदी की भरपाई कर दी, जिससे चीन अपने 2026 के विकास लक्ष्य को हासिल करने की राह पर आगे बढ़ रहा है.
डॉनल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात पर दुनियाभर की नजरें थीं. मीटिंग के सबसे अहम एजेंडा में रेअर अर्थ भी शामिल था. क्या है रेअर अर्थ? दुनिया को इसकी इतनी ज्यादा जरूरत क्यों है, और सप्लाई की चाबी चीन के पास क्यों है?
तस्वीर: Maxim Shemetov/REUTERS
17 धातुओं का एक समूह है रेअर अर्थ
डॉनल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग की ताजा मुलाकात से दो चर्चित हासिल निकले. एक, टैरिफ घटाने का एलान. और दूसरा, रेअर अर्थ देने पर चीन की रजामंदी. रेअर अर्थ, या दुर्लभ खनिज संपदा 17 एलिमेंट्स का एक समूह है. इनमें ज्यादातर हैवी-मैटल हैं.
तस्वीर: Andrew Harnik/Getty Images
सभी 17 रेअर अर्थ एलिमेंट्स के नाम
पीरियॉडिक टेबल के क्रम अनुसार इन तत्वों के नाम हैं: स्कैंडियम, इट्रियम, लैंथनम, सेरियम, प्रेजियोडिमियम, नियोडिमियम, प्रॉमीथियम, समैरियम, यूरोपियम, गैडोलिनियम, टेर्बियम, डिस्प्रोजियम, होल्मियम, एर्बियम, थूलियम, इटैर्बियम और लूटीशियम.
तस्वीर: Sergei Bulkin/TASS/IMAGO
कहां मिलता है ये?
हमारी पृथ्वी की तीन परतें हैं: क्रस्ट, मैंटल और कोर. क्रस्ट सबसे बाहरी परत है. ये सख्त चट्टानों और खनिजों से बनी है. रेअर अर्थ इसी हिस्से में पाया जाता है. यूनाइटेड स्टेट्स जिओलॉजिकल सर्वे का अनुमान है कि हमारी दुनिया में तकरीबन 110 मिलियन मीट्रिक टन रेअर अर्थ का भंडार है. इसमें से 44 मिलियन मीट्रिक टन अकेले चीन के पास है. वही इसका सबसे बड़ा उत्पादक है.
तस्वीर: Manu Mata/Pond5 Images/IMAGO
इतना बड़ा भंडार, फिर रेअर क्यों कहते हैं
आमतौर पर ऐसा कुछ जो बहुत कम या असामान्य हो, दुर्लभ कहलाता है. रेअर अर्थ इस आशय में रेअर नहीं हैं. लेकिन, ये पृथ्वी के क्रस्ट में छोटी-छोटी मात्रा में फैले हैं. ऊपर से, ये दूसरे खनिजों के साथ मिले होते हैं. ऐसे में, कोयले की तरह एक जगह पर इनका विशाल भंडार मिलना मुश्किल है. नतीजतन, इसकी माइनिंग महंगी पड़ती है.
तस्वीर: IMAGO/Wirestock
किन चीजों में जरूरत पड़ती है?
रेअर अर्थ या उनसे बने रेअर अर्थ मैग्नेट, जरूरत की ऐसी ढेरों चीजों के लिए चाहिए जो बड़ी जरूरी हैं. इनमें रोजमर्रा की जरूरत की चीजें भी हैं, जैसे कि आईफोन, वॉशिंग मशीन, इलेक्ट्रिक गाड़ियां.
तस्वीर: Ronny Hartmann/AFP
इनकी सप्लाई ना मिले, तो क्या होगा?
काफी उन्नत उपकरण और मशीनरी में भी इनकी जरूरत है. जैसे कि मिसाइल, रेडार सिस्टम, मेडिकल उपकरण, तेल की रिफाइनिंग. इनकी उपलब्धता ना हो, तो सप्लाई चेन रुक जाएगी. मसलन, इस साल अप्रैल में जब चीन ने इनके निर्यात पर मुट्ठी बंद की, तो कई कार निर्माताओं को अपना उत्पादन रोकना पड़ा.
तस्वीर: JENS SCHLUETER/AFP/Getty Images
कब से हो रही है इनकी माइनिंग?
दिलचस्प है कि रेअर अर्थ्स को बाकी खनिजों से अलग करने और उनसे अशुद्धियां-मिलावट दूर करने की प्रक्रिया विकसित करने में अमेरिकी वैज्ञानिकों ने मदद की. ये बात है 1950 के दशक की. लेकिन, 1980 के दशक से ही चीन का इस इंडस्ट्री में दबदबा बनने लगा. इसकी कई वजहें थीं. जैसे कि कम लागत, पर्यावरण संबंधी कमजोर नियम और सरकारी मदद.
तस्वीर: Xie zhengyi/dpa/picture alliance
रेअर अर्थ्स की माइनिंग से पर्यावरण पर क्या असर?
रेअर अर्थ्स की प्रॉसेसिंग में अक्सर बहुत भारी रसायन इस्तेमाल होते हैं. इनसे निकला विषैला कचरा मिट्टी, पानी और आबोहवा को प्रदूषित कर सकता है. अब ज्यादा ईको-फ्रेंडली तकनीकें विकसित की जा रही हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल बहुत कम ही होता है. प्रदूषण संबंधी चिंताओं के कारण कई देशों में इस सेक्टर को विकसित करने की राह में पर्यावरण कानूनों की अड़चन आती है.
तस्वीर: AP Photo/AP Images/picture alliance
अभी बना रहेगा चीन का दबदबा
आज दुनिया में खनन के हिसाब से जितना उत्पादन होता है, उसका 60 फीसदी हिस्सा चीन में होता है. रिफाइन्ड प्रॉडक्शन और रेअर अर्थ मैग्नेट उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी लगभग 90 प्रतिशत है. वैकल्पिक सप्लाई चेन विकसित करने के लिए अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में नई परियोजनाएं चल रही हैं. लेकिन इन्हें संतोषजनक उत्पादन शुरू करने में कई साल लगेंगे. और, इस वजह से रेअर अर्थ में अभी चीन का दबदबा बरकरार रहेगा.
तस्वीर: Evelyn Hockstein/REUTERS
9 तस्वीरें1 | 9
चीन की अर्थव्यवस्था ने 2026 के पहले नौ महीनों में 4.6 फीसदी की वृद्धि दर्ज की है. मौजूदा रुझानों के आधार पर विश्लेषकों का मानना है कि अर्थव्यवस्था, सरकार के 4.5 से 5 फीसदी के सालाना विकास लक्ष्य के दायरे में रह सकती है. कमजोर घरेलू मांग के बीच निर्यात अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहा है. चीन का ट्रेड-सरप्लस भी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है और पिछले साल के करीब 1.2 ट्रिलियन डॉलर के स्तर से आगे निकलने की दिशा में बढ़ रहा है.
यूरोपीय आयोग के व्यापार आंकड़ों के अनुसार, 2025 में यूरोपीय संघ और चीन के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 759 अरब यूरो तक पहुंच गया. इस दौरान चीन के साथ ईयू का वस्तु व्यापार घाटा करीब 360 अरब यूरो रहा, यानी औसतन यह घाटा लगभग एक अरब यूरो प्रतिदिन के स्तर पर है.