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चीन के साथ ट्रेड वॉर नहीं फेयर ट्रेड चाहता है जर्मनी: चांसलर मैर्त्स

२२ अक्टूबर २०२६

जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने कहा है कि जर्मनी चीन समेत सभी देशों के साथ "निष्पक्ष व्यापार" के लिए खुला रहना चाहता है. हालांकि उन्होंने अनुचित व्यापारिक तौर-तरीकों को लेकर ईयू के और तेज प्रतिक्रिया देने पर जोर दिया.

ब्रिलन ग्लोबल डायलॉग में जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स
जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने कहा है कि उनका देश चीन के साथ ट्रेड वॉर नहीं चाहता तस्वीर: Fabian Sommer/dpa/picture alliance

जर्मन राजधानी बर्लिन में हो रहे चौथे 'बर्लिन ग्लोबल डायलॉग‘ में जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने कहा कि यूरोपीय संघ (ईयू) को अनुचित प्रतिस्पर्धा से अपने उद्योगों की रक्षा करने की जरूरत है. उन्होंने ईयू बाजार को खुला रखने पर बल दिया लेकिन साथ ही चीन के साथ ईयू के व्यापार घाटे का जिक्र भी किया.

मैर्त्स ने कहा, "चीन बहुत प्रतिस्पर्धी है और हमें रिसर्च एंड डेवलपमेंट में चीन की सफलता का सम्मान करना चाहिए." साथ ही, उन्होंने चीन के कुछ ऐसे व्यापारिक तौर-तरीकों के बारे में चेताया जो चीन को फायदा पहुंचाते हैं लेकिन उसके यूरोपीय व्यापारिक साझेदारों के हित में नहीं हैं.

चीन के साथ निष्पक्ष व्यापारिक परिस्थितियां सुनिश्चित करने पर जोर

मैर्त्स ने ईयू के साथ व्यापारिक संबंधों में चीन की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता, सब्सिडी, विनिमय दरों और डब्ल्यूटीओ के नियमों को कुछ अलग तरह से इस्तेमाल करने का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि इसी साल अक्टूबर में जर्मनी और फ्रांस ने यूरोपीय संघ से अनुचित व्यापारिक तौर-तरीकों से निपटने के लिए एक नया, तेजी से इस्तेमाल किया जा सकने वाला व्यापार-रक्षा साधन बनाने का प्रस्ताव पेश किया है, जिसे सर्वसम्मति से ईयू देशों का समर्थन मिल चुका है. उन्होंने कहा, "हम अपना टूल-बॉक्स खोल कर दिखा रहे हैं, लेकिन हम नहीं चाहते कि उसका इस्तेमाल करना पड़े."

बर्लिन ग्लोबल डायलॉग बीते चार सालों से बर्लिन में हो रहा है जिसमें कारोबार, शिक्षा और राजनीति के दिग्गज हिस्सा लेते हैं तस्वीर: Fabian Sommer/dpa/picture alliance

मैर्त्स ने बताया कि यूरोपीय और चीनी अधिकारियों ने उस प्रस्ताव से जुड़े कई व्यापारिक मुद्दों पर बातचीत शुरू कर दी है, फिलहाल जिसके शुरुआती नतीजे सामने आए हैं. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ईयू चीन के साथ आर्थिक संबंध बनाए रखना चाहता है, साथ ही निष्पक्ष व्यापारिक परिस्थितियां भी सुनिश्चित करना चाहता है. मैर्त्स ने जोर देकर कहा कि इसका मकसद "अनुचित तौर-तरीकों को रोकना है, ना कि ट्रेड वॉर को भड़काना."

रूस, चीन और चरम दक्षिणपंथी ताकतेंः जर्मनी के सामने बढ़ती चुनौतियां

दूसरी ओर, जी7 के सदस्य देश और भारत समेत कुछ विकासशील देश 'क्रिटिकल रेअर अर्थ मटीरियल‘ जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित और विविध बनाने के उपायों पर चर्चा करते रहे हैं. चीन दूसरे देशों को इन दुर्लभ खनिज तत्वों के निर्यात में काफी सख्त नियंत्रण रखता है. ये संसाधन तकनीकी क्षेत्र, खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स, में तेजी से विकास  के लिए बेहद अहम हैं. जर्मन चांसलर ने इस बात पर भी जोर दिया कि जी7 देशों को संसाधन की सुरक्षा पर ध्यान देने और महत्वपूर्ण कच्चे माल की खरीद के लिए "खरीदारों के समूह" के रूप में मिलकर काम करने की जरूरत है.

रिकॉर्ड निर्यात बढ़ा रहा है चीन की विकास गाथा को आगे

उधर, सितंबर के अंत में खत्म हुई तीसरी तिमाही में चीन की अर्थव्यवस्थामें अनुमान से भी तेज बढ़त दर्ज हुई है. निर्यात में तेजी ने चीन के कमजोर पड़े उपभोक्ता खर्च और लंबे समय से चल रही प्रॉपर्टी मार्केट की मंदी की भरपाई कर दी, जिससे चीन अपने 2026 के विकास लक्ष्य को हासिल करने की राह पर आगे बढ़ रहा है. 

चीन की अर्थव्यवस्था ने 2026 के पहले नौ महीनों में 4.6 फीसदी की वृद्धि दर्ज की है. मौजूदा रुझानों के आधार पर विश्लेषकों का मानना है कि अर्थव्यवस्था, सरकार के 4.5 से 5 फीसदी के सालाना विकास लक्ष्य के दायरे में रह सकती है. कमजोर घरेलू मांग के बीच निर्यात अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहा है. चीन का ट्रेड-सरप्लस भी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है और पिछले साल के करीब 1.2 ट्रिलियन डॉलर के स्तर से आगे निकलने की दिशा में बढ़ रहा है.

यूरोपीय आयोग के व्यापार आंकड़ों के अनुसार, 2025 में यूरोपीय संघ और चीन के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 759 अरब यूरो तक पहुंच गया. इस दौरान चीन के साथ ईयू का वस्तु व्यापार घाटा करीब 360 अरब यूरो रहा, यानी औसतन यह घाटा लगभग एक अरब यूरो प्रतिदिन के स्तर पर है.

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