अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन कैमरा पर एक पत्रकार को "स्टुपिड सन ऑफ अ बिच" कहते हुए पकड़े गए हैं. इसे लेकर बाइडेन के मीडिया के प्रति व्यवहार को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
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सोमवार 24 जनवरी को ऐसा उस समय हुआ जब व्हाइट हाउस में आयोजित एक फोटो ऑप के बाद सभी पत्रकार बस जा ही रहे थे. फॉक्स न्यूज के पत्रकार पीटर डूसी ने जाते जाते बाइडेन से महंगाई पर एक सवाल पूछ लिया जिसका जवाब राष्ट्रपति ने कटाक्ष में दिया और उसके बाद दबी आवाज में पत्रकार को गाली भी दे दी.
डूसी ने पूछा था, "क्या आप महंगाई पर सवाल लेंगे. क्या आपको लगता है कि मध्यावधि चुनावों से पहले महंगाई आप के लिए राजनीतिक रूप से एक बोझ है?" बाइडेन ने जवाब में कहा, "नहीं, ये एक फायदे की चीज है. और ज्यादा महंगाई होनी चाहिए."
गाली से नहीं इंकार
सोशल मीडिया पर मौजूद एक वीडियो में बाइडेन यह कहने के तुरंत बाद सवाल पूछने वाले पत्रकार को "स्टुपिड सन ऑफ अ बिच" भी कहते हुए नजर आते हैं.
बाइडेन के साथ इससे पहले भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन अक्सर व्हाइट हाउस के अधिकारी या तो उनकी टिप्पणी के बारे में समझाने या उसका खंडन करने के लिए आगे आते हैं.
लेकिन इस बार ना सिर्फ ऐसा कुछ भी नहीं हुआ बल्कि कार्यक्रम के बाद व्हाइट हाउस ने जो लिखित प्रतिलिपि जारी की उसमें गाली समेत बाइडेन की पूरी टिप्पणी मौजूद है.
इसका मतलब एक अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा पत्रकार को दी गई गाली अब इतिहास के लिए व्हाइट हाउस के आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज हो चुकी है. न्यूयॉर्क टाइम्स अखबार की व्हाइट हाउस संवाददाता केटी रोजर्स ने प्रतलिपि के इस अंश की एक तस्वीर ट्वीट की.
अमेरिका में महंगाई इस समय चालीस सालों में सबसे ऊंचे स्थान पर है और इस वजह से बाइडेन की अप्रूवल रेटिंग को नुकसान पहुंचा है. डूसी का नेटवर्क बाइडेन की लगातार आलोचना करता आया है.
बाइडेन का व्यवहार
डूसी फॉक्स न्यूज के लिए काम करते हैं, जिसे विपक्षी रिपब्लिकन पार्टी का पसंदीदा समाचार चैनल माना जाता है. डूसी ने बाद में अपने ही चैनल पर कहा कि बाइडेन ने बाद में उन्हें फोन भी किया और कहा, "इसे व्यक्तिगत तौर पर मत लेना दोस्त."
बाइडेन ने इससे पहले भी यह दिखाने की कोशिश की है फॉक्स न्यूज और डूसी जैसे जिन मीडिया संगठनों और
पत्रकारों को वो उनके प्रति ज्यादा आलोचनात्मक समझते हैं उन्हें चुनौती देने में उन्हें कोई झिझक नहीं है.
पिछले सप्ताह की अपनी समाचार वार्ता में बाइडेन ने डूसी पर कटाक्ष करते हुए कहा था, "तुम हमेशा मुझसे सबसे ज्यादा सुहावने सवाल पूछते हो." पत्रकार ने जवाब दिया था, "मेरे पास एक पूरी फाइल इनसे भरी हुई है." बाइडेन ने कहा था, "मुझे यह मालूम है. उनमें से कोई भी मुझे समझदार सवाल नहीं लगता है. पूछना शुरू करो."
(एपी, एएफपी से जानकारी के साथ)
बाइडेन के पहले साल पर क्या कहते हैं नंबर
वैक्सीन लगाने से लेकर कुछ और चीजों के हिसाब से अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन अपने कार्यकाल के पहले साल को कामयाबियों का साल कह सकते हैं. नंबरों की नजर से देखें तो इन्हीं कामयाबियों में सरकार की नाकामियां भी दिखती हैं.
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63.5 प्रतिशत वैक्सीनेशन
अमेरिका के ज्यादातर लोगों को वैक्सीन लग गई लेकिन वैक्सीनेशन दर के मामले में अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कंबोडिया, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, नॉर्वे, सऊदी अरब, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड और यूनाइटेड किंगडम अमेरिका से आगे हैं.
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3.9 प्रतिशत बेरोजगारी
बेरोजगारी की कम दर भी बाइडेन के कार्यकाल की पहले साल की उपलब्धि है. कोरोना वायरस के चंगुल में फंसी अर्थव्यवस्था ने उन्हें विरासत में 6.4 फीसदी बेरोजगारी दी थी. एक साल में अमेरिकी कंपनियों और सरकार ने कुल 64 लाख नौकरियां पैदा कीं. संसद के बजट कार्यालय ने बेरोजगारी 4.6 प्रतिशत तक नीचे आने का अनुमान लगाया था लेकिन यह कहीं ज्यादा नीचे है.
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7 प्रतिशत महंगाई
अर्थव्यवस्था को दौड़ाने की तेजी में बाइडेन प्रशासन के हाथ महंगाई ने जला दिए. अमेरिका में महंगाई बीते 40 सालों के सबसे ऊंचे स्तर पर है. ऊंची कीमतों ने उनके आर्थिक नेतृत्व के प्रति लोगों में अविश्वास पैदा किया. गैसोलीन और खाने पीने की चीजों के दाम सबसे ज्यादा बढ़े. अर्थशास्त्रियों का कहना है कि राष्ट्रपति ने जो राहत पैकेज दिया, वह बहुत बड़ा था.
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1 हजार अरब डॉलर का खर्च
बाइडेन ने जो इंफ्रास्ट्रक्चर लॉ पास किया उसमें 550 अरब डॉलर का नया खर्च था. संसद से पास कराने के लिए बाइडेन ने इसे 2300 अरब डॉलर के शुरुआती प्रस्ताव से कम किया. उन्होंने सामाजिक और पर्यावरण से जुड़ी पहलों के लिए 1800 अरब डॉलर का प्रस्ताव अलग से दिया था. संशोधनों के बाद उन्हें इसके एक चौथाई यानी करीब एक हजार अरब डॉलर की मंजूरी मिली.
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13 सैनिकों की मौत
अफगानिस्तान से 124,000 लोगों की वापसी के समय काबुल एयरपोर्ट के गेट पर हुए आत्मघाती हमले में 13 अमेरिकी सैनिक मारे गए. इस दौरान 169 अफगान लोगों की भी मौत हुई और दसियों हजार अफगान सहयोगी वहीं छूट गए. दो दशकों की अफगान जंग में अमेरिका के कुल 2,460 अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई.
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17.8 लाख शरणार्थी
बाइडेन के राष्ट्रपति बनने के बाद 10 महीनों में मेक्सिको बॉर्डर पार कर अमेरिका आने वाले शरणार्थियों की संख्या 17.8 लाख तक पहुंच गई. यह संख्या पूर्व राष्ट्रपति डॉनल्ड टंप के आखिरी 10 महीने के कार्यकाल की तुलना में चार गुना ज्यादा है.
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20 प्राकृतिक आपदाएं
बीते एक साल में कुल 20 प्राकृतिक आपदाओं ने अमेरिका का रुख किया. इनमें से हरेक में कम से कम 1000 अरब डॉलर की संपत्ति का नुकासान और कुल मिला कर 688 लोगों की जान गई. इनमें एक सूखा, दो बाढ़, 11 भयानक आंधियां, चार चक्रवात, एक जंगल की आग और एक बर्फीली आंधी शामिल है. अमेरिका ने 1980 के बाद हर साल ऐसी 7.4 आपदाएं देखी हैं जिनमें एक हजार अरब डॉलर या ज्यादा का नुकसान हुआ हो.
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24 राज्यों का दौरा
बाइडेन ने अपने कार्यकाल के पहले साल में अमेरिका के 50 में से लगभग आधे यानी 24 राज्यों का दौरा किया. इनमें डेलावेयर के उनके घर के दौरे शामिल नहीं है. सबसे ज्यादा वह पेंसिल्वेनिया गए जिसके बाद मिशिगन की बारी आती है. ये दोनों राज्य उनकी जीत के लिहाज से काफी अहम थे. उनकी पत्नी जिल बाइडेन ने 35 राज्यों का दौरा किया.
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41 संघीय जज
बाइडेन ने अपने कार्यकााल के पहले साल में 41 जजों की नियुक्ति की पुष्टि की. पिछले राष्ट्रपतियों के पूरे कार्यकाल की तुलना में भी यह कहीं ज्यादा है. व्हाइट हाउस के मुताबिक जज बनाए गए लोगों में से 80 फीसदी महिलाएं हैं और 53 फीसदी काले लोग हैं.
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सीनेट से पुष्टि में 103 दिन
बाइडेन ने जिन लोगों की नियुक्तियां कीं, उनकी पुष्टि सीनेट से कराने में औसतन 103 दिन का समय लगा. पिछले छह प्रशासनों के पहले साल को अगर देखें तो यह समय काफी ज्यादा है और रोनाल्ड रीगन के पहले साल से तुलना करें तो करीब तीन गुना ज्यादा है.
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9 न्यूज कांफ्रेंस
अमेरिकी राष्ट्रपति 10वीं न्यूज कांफ्रेंस बुधवार को करेंगे. बाइडेन प्रेस से मुलाकात के मामले में थोड़े शर्मीले हैं. हालांकि बीते एक साल में उन्होंने मीडिया को कुल 22 इंटरव्यू दिए हैं. पिछले पांच राष्ट्रपतियों की तुलना में यह काफी कम है.
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32 बार कहा "मजाक नहीं है"
मजाक नहीं है (नॉट ए जोक). यह राष्ट्रपति जो बाइडेन के भाषणों की पसंदीदा लाइन है. उन्होंने इसे कुल 32 बार बोला है. जिन चीजों को उन्होंने मजाक नहीं माना है उनमें नागरिक अधिकार नेता, मजदूर संघ जिनसे मध्य वर्ग बनता है, डेलावेयर के केमिकल प्लांट से निकलने वाला प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जोखिम, कैलिफोर्निया के वोटर शामिल हैं.