अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने पेरिस जलवायु समझौते से हटते हुए भारत को भी आड़े हाथ लिया और उस पर अरबों खरबों डॉलर मांगने का आरोप लगाया. कुलदीप कुमार का कहना है कि अमेरिका का यह रुख मोदी सरकार की नाकामी को जाहिर करता है.
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार का आधे से अधिक कार्यकाल पूरा हो चुका है और अब उसके पास योजनाओं को पूरा करने के लिए केवल दो साल बचे हैं. विदेश नीति को विदेश मंत्री और उनके मंत्रालय के हाथ से लेकर स्वयं प्रधानमंत्री और उनके कार्यालय द्वारा चलाये जाने के नतीजे सुखद और सकारात्मक नहीं रहे हैं. अभी तक शायद किसी भी प्रधानमंत्री ने इतने विदेश दौरे नहीं किए, जितने मोदी कर चुके हैं लेकिन केवल वहां रहने वाले भारतीयों या भारतीय मूल के लोगों को प्रभावित करने के अलावा इन दौरों की अन्य कोई विशेष उपलब्धि सामने नहीं आ पायी है.
अब विश्व की सबसे बड़ी आर्थिक और सामरिक शक्ति अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताजातरीन बयान ने भारतीय विदेश नीति की विफलता को सरेआम उजागर कर दिया है. ट्रंप ने आरोप लगाया है कि पर्यावरण की रक्षा और कार्बन डाइऑक्साइड गैस के उत्सर्जन को कम करने के नाम पर भारत अरबों-खरबों डॉलर की मांग करता है और पेरिस समझौता भारत और चीन के पक्ष में झुका हुआ है. इसलिए अमेरिका इस समझौते से बाहर हो जाएगा.
भारत के लिए यह एक बहुत बड़ा झटका है. हालांकि अब चीन ने कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन के मामले में अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है, लेकिन अब भी वह 28 यूरोपीय देशों द्वारा कुल मिलाकर किए जाने वाले उत्सर्जन से अधिक गैस छोड़ रहा है. भारत का उत्सर्जन अमेरिका के उत्सर्जन के आधे से भी अधिक कम है जबकि उसकी जनसंख्या अमेरिका के मुकाबले चार गुना अधिक है. लेकिन ट्रंप और उनके सलाहकारों का मानना है कि कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन का स्तर कम करने से अमेरिका के औद्योगिक विकास पर असर पड़ेगा और उसके यहां रोजगार में कमी आएगी.
भारत के प्रधानमंत्री मोदी के जितने आलोचक हैं, उससे कहीं ज्यादा समर्थक हैं. उन्हें टेक्नोसेवी और नए जमाने के साथ चलने वाला माना जाता है. सरकार में आते ही उन्होंने कई नई पहलें शुरू कीं. आइए डालते हैं इन्हीं पर एक नजर.
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डिजिटल इंडिया
इस पहल का मकसद लोगों तक सरकारी सेवाएं इलेक्ट्रॉनिक तरीके से पहुंचाना है. साथ ही इंटरनेट कनेक्टिविटी बेहतर कर ऑनलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर को भी सुधारना है. सरकार इसके जरिए सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना चाहती है.
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स्किल इंडिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 जुलाई 2015 को इस पहल को शुरू किया. इसके तहत 2022 तक देश के 40 करोड़ लोगों को अलग अलग तरह की ट्रेनिंग देकर दक्ष बनाना है. सरकार जोर शोर से इसका प्रचार करती है, लेकिन आलोचक इसमें मिलने वाली ट्रेनिंग की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हैं.
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मेक इन इंडिया
मोदी सरकार भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना चाहती है, ताकि बहुराष्ट्रीय और भारतीय कंपनियां अपने उत्पाद भारत में ही बनायें. इसलिए मेक इंडिया पहल की शुरुआत की गई. इसके तहत विदेशी निवेश और कंपनियों के लिए भारत में काम का बेहतर माहौल बनाया जाएगा.
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स्टार्टअप इंडिया
स्टार्टअप इंडिया का उद्देश्य युवाओं में उद्यमशीलता को बढ़ावा देना और नौकरियों के नये अवसर पैदा करना है. इसके तहत छोटे कारोबारों के लिए बैंक लोन आसान बनाने और लालफीताशाही घटाने की बात भी शामिल है. सरकार स्टार्टअप इंडिया के तहत पिछड़े वर्गों और महिलाओं को भी उद्यम शुरू करने के लिए प्रेरित करना चाहती है.
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स्मार्ट विलेज इंडिया
गांवों के विकास के लिए इस पहल को शुरू किया गया है. इसे महात्मा गांधी के "आदर्श ग्राम" विजन से प्रेरित बताया जाता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता में आते ही सांसद आदर्श ग्राम योजना भी शुरू की थी, जिसमें हर सांसद से एक गांव को गोद लेकर उसका पूरी तरह विकास करने का आग्रह किया गया था.
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स्मार्ट सिटी मिशन
इस योजना के तहत देश भर के 100 से ज्यादा शहरों को अत्याधुनिक बनाने का लक्ष्य तय किया है. संबंधित राज्य सरकारों के साथ मिल कर केंद्र सरकार इस योजना को लागू करेगी. इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर सरकार ने पांच साल के दौरान एक लाख करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई है.
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कैशलेस अर्थव्यवस्था
मोदी सरकार का कैशलेस लेन देन पर बहुत जोर है. आम जनता को भुगतान के डिटिजल विकल्पों से जोड़ने के लिये सरकार ने कई इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम लॉन्च किये हैं. इनमें यूपीआई, इंटरनेट बैंकिंग, आधार कार्ड से भुगतना और भीम ऐप जैसे विकल्प शामिल हैं.
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स्वच्छ भारत अभियान
मोदी सरकार की जिन पहलों का सबसे ज्यादा प्रचार प्रसार हुआ है, उनसें से एक है स्वच्छ भारत अभियान. साफ सफाई पर जोर देने वाली इस मुहिम के साथ बहुत सी जानी-मानी हस्तियां भी जुड़ीं. हालांकि इसे कितनी गंभीरता से लागू किया जा रहा है, आलोचक इस पर सवाल उठाते हैं.
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गर्व ऐप
भारत के छह लाख गांवों में बिजली पहुंचाने का काम कहां किस रफ्तार से चल रहा है, इसकी जानकारी आप गर्व ऐप पर पा सकते हैं. इस ऐप का मकसद रियल टाइम डाटा मुहैया करा कर पारदर्शिता को बढ़ावा देना है. इसे गगूल प्ले और एप्पल ऐप स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है.
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बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ
"बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" अभियान की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 जनवरी 2015 को की. इसका उद्देश्य एक तरफ लड़कियों को शिक्षित, योग्य और समर्थ बनाना है, तो वही बिगड़ते लैंगिक अनुपात को सुधारना भी है. 2016 के ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली साक्षी मलिक इसकी ब्रैंड एम्बैसडर हैं.
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देश के शासन और विकास में लोगों की भागीदारी को बढ़ाने के लिए सरकार ने माईगव यानी मेरी सरकार पहल शुरू की. प्रधानमंत्री मोदी के मुताबिक इसका मकसद मतदाताओं और उनके चुने हुए प्रतिनिधियों के बीच अंतर को पाटना है. कई बार मोदी ने इस मंच के जरिए आने वाले विचारों, सवालों और सुझावों को अपने रेडियो कार्यक्रम "मन की बात" में शामिल किया है.
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ट्रंप का जनाधार अल्प-शिक्षित और कोयले की खान में काम करने वाले मजदूर जैसे तबकों में अधिक मजबूत है. इन लोगों की रोजगार संबंधी आशंकाओं को भड़का कर और उनका चुनावी फायदा उठाकर ही ट्रंप सत्ता में आए हैं. अब उन्हें नजरअंदाज करना उनके लिए संभव नहीं. मोदी इसके उलट अपने सभी चुनावी वादे लगभग भूल चुके हैं. लेकिन भारत और अमेरिका के लोकतंत्र और उसकी कार्यप्रणाली में यही अंतर है. अमेरिका में लोग इतनी आसानी से चुनावी वादे भूलने नहीं देते.
इससे हिंदुत्ववादियों की अदूरदर्शिता और अंध मुस्लिम-विरोध भी खुल कर सामने आ गया है क्योंकि चुनाव प्रचार के दौरान ट्रंप के मुस्लिम आतंकवादियों के खिलाफ दिये गए बयानों से उत्साहित होकर अमेरिका और भारत में वे ट्रंप की जीत की कामना करते हुए यज्ञ, हवन और आरती कर रहे थे. दरअसल ट्रंप भी अनेक बातों में मोदी से मिलते-जुलते हैं. बोलते समय वे भी तथ्यों का कोई खास ख्याल नहीं रखते. मसलन भारत पर अरबों-खरबों डॉलर की मांग करने का आरोप बिलकुल निराधार है लेकिन ट्रंप को इसकी उसी तरह कोई चिंता नहीं है जिस तरह मोदी को इसी तरह के बयान देते हुए नहीं होती. दोनों ही आक्रामक किस्म के नेता हैं और अचानक लोकप्रियता प्राप्त कर बैठे हैं. लेकिन पर्यावरण के मुद्दे पर ट्रंप की बातें कितनी भी आघात पहुंचाने वाली क्यों न हों, यह बात ध्यान में रखनी होगी कि उन्होंने अपने चुनाव प्रचार के दौरान भी यही कहा था और वैश्विक तापमान बढ़ने के विचार से असहमति जताई थी. ट्रंप कह सकते हैं कि वे अपने चुनावी वादे पूरे कर रहे हैं क्योंकि पर्यावरण संबंधी समझौतों को नकारने का वादा उनके चुनाव प्रचार का हिस्सा था.
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रभाव का अंदाजा सोशल मीडिया पर उनके फॉलोअर्स की संख्या से भी लगाया जा सकता है. दुनिया के तमाम नेताओं में फेसबुक पर सबसे ज्यादा फॉलोअर उनके हैं. देखिए और कौन कर रहा है फेसबुक पर लीड.
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भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
जनसंपर्क कंपनी बर्सन-मार्सटेलर की हाल ही में आई रिपोर्ट में विश्व भर के नेताओं की सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर फॉलोइंग के हिसाब से रैंकिंग की गयी. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निजी पेज को 4 करोड़ लोग फॉलो करते हैं. सवा अरब की आबादी वाले देश में अमेरिका के बाद सबसे ज्यादा फेसबुक यूजर रहते हैं.
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अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप
ट्रंप के निजी पेज को करीब 2 करोड़ लोग फॉलो करते हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति के ट्विटर एकाउंट पर इससे ज्यादा यानि करीब 2.5 करोड़ फॉलोअर हैं. बर्सन-मार्सटेलर की इस स्टडी में साल 2016 के दौरान विश्व भर के 590 टॉप नेताओं के फेसबुक अकाउंट पर गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है.
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ओबामा, पद पर नहीं फिर भी सबसे आगे
आठ साल तक अमेरिका के राष्ट्रपति का पद संभालने वाले लोकप्रिय नेता बराक ओबामा की कुर्सी छूट जाने के बावजूद सोशल मीडिया पर लोकप्रियता कम नहीं हुई है. अब भी फेसबुक पर उनके निजी अकाउंट को करीब 5.4 करोड़ लोग फॉलो करते हैं. यानि बाकी सब नेताओं के मिलाकर भी इतने फॉलोअर नहीं हैं.
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जॉर्डन की क्वीन रानिया
क्वीन रानिया ऑफ जॉर्डन, किंग अब्दुल्लाह द्वितीय की पत्नी हैं. मानवाधिकार और महिला अधिकार फोरमों से सक्रिय रूप से जुड़ी क्वीन के फेसबुक पर 1 करोड़ से भी अधिक फॉलोअर हैं. यह जॉर्डन की कुल आबादी से भी ज्यादा है. साफ पता चलता है कि पश्चिमी मीडिया में इस प्रगतिशील मुस्लिम अरब क्वीन की लोकप्रियता कितनी ज्यादा है.
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तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोवान
रेचेप तैय्यप एर्दोवान को 90 लाख लोग फॉलो करते हैं. पिछले साल वे ओबामा और मोदी के बाद तीसरे नंबर पर थे. इस बार फॉलोअर्स की संख्या के मामले में क्वीन रानिया से पिछड़ने के कारण उन्हें चौथे नंबर पर संतोष करना पड़ेगा.
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मिस्र के राष्ट्रपति अल सीसी
मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फतह अल सीसी को 70 लाख लोग फेसबुक पर फॉलो करते हैं. इस रिपोर्ट में ध्यान दिया गया है कि नेता किस तरह की चीजें पोस्ट करते हैं और उनके पोस्ट पर कितने लोगों की "इंगेजमेंट" (यानि लाइक्स, कमेंट्स और शेयर) होते हैं.
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कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन सेन
इस स्टडी में विश्लेषण किया गया है कि नेताओं ने सोशल मीडिया पर लोगों के साथ कितना इंटरऐक्शन किया है. पाया गया कि 5.8 करोड़ इंटरऐक्शन के साथ कंबोडिया के प्रधानमंत्री सेन का फेसबुक अकाउंट विश्व नेताओं में तीसरे नंबर पर है. (नदीने बेर्गहाउसेन/आरपी)
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भारतीय विदेश सचिव एस. जयशंकर चार बार अमेरिका की यात्रा कर चुके हैं. लेकिन नतीजा ट्रंप की इस नई आक्रामकता के रूप में सामने आया है. ट्रंप का यह भी कहना है कि विदेशों से लोग आकर अमेरिकियों के रोजगार छीन रहे हैं और वह इस प्रक्रिया पर विराम लगाना चाहते हैं. आउटसोर्सिंग से भारतीय अर्थव्यवस्था को बहुत बड़ा लाभ हुआ है और अभी भी हो रहा है. सूचना तकनीकी के क्षेत्र में भी भारतीयों को बहुत बड़ी संख्या में रोजगार मिला है. ऐसे में ट्रंप का ताजा बयान आने वाले दिनों के बारे में अनेक किस्म की आशंकाएं पैदा करने वाला है.