ब्राजील ने आठ साल बाद अंटार्कटिका में स्थाई अनुसंधान केंद्र खोला है. 2012 में रिसर्च सेंटर में आग लगने की वजह से दो सैनिकों की मौत हो गई थी. जिसमें सेंटर जलकर खाक हो गया था.
तस्वीर: AFP/Brazilian Navy
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ब्राजील की सरकार ने अंटार्कटिका में अनुसंधान केंद्र खोलने के लिए 10 करोड़ डॉलर का निवेश किया है. यह प्रोजेक्ट अंटार्कटिका के दक्षिण में सबसे बड़े द्वीप किंग जॉर्ज पर बनाया गया है. इसका क्षेत्रफल 48,500 वर्ग फुट है. अनुसंधान केंद्र का नाम रखा गया है कोमांडेंटे फेराज अंटार्कटिका स्टेशन. ब्राजील की नेवी के मुताबिक 15 जनवरी से इस अनुसंधान केंद्र की शुरुआत हो चुकी है.
अंटार्कटिका में केंद्र खोलना क्यों है अहम
अंटार्कटिका दुनिया के सातों महाद्वीपों में सबसे ठंडा महाद्वीप है. सबसे दुर्गम क्षेत्र माने जाने वाले इस क्षेत्र में 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बर्फीली हवाएं चलती हैं. यहां इंसान का बसना मुश्किल है. इस महाद्वीप का कुल क्षेत्रफल 1.4 करोड़ वर्ग किलोमीटर है. इसे ठंडा रेगिस्तान भी कहा जाता है.
अनुसंधान की नजर से यह इलाका इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वहां कई वैज्ञानिक प्रयोग किए जा सकते हैं. वैज्ञानिकों ने पृथ्वी की चुंबकीय विशेषताओं, मौसम, सागरीय हलचलों, जीवों पर सौर विकिरण के प्रभाव और भूगर्भ विज्ञान से संबंधित प्रयोग किए हैं. भारत समेत कई देशों ने अंटार्कटिका में स्थायी वैज्ञानिक केंद्र स्थापित किए हैं. चीन, ब्राजील, अर्जेन्टीना, कोरिया, पेरू, पोलैंड, उरूग्वे, इटली, स्वीडन, अमरीका और रूस इनमें शामिल हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि अंटार्कटिका में 900 से भी अधिक तत्वों की महत्वपूर्ण खानें हैं. सीसा, तांबा और यूरेनियम जैसे पदार्थ इनमें से कुछ हैं.
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2012 में ईंधन के रिसाव की वजह से अंटार्कटिका के रिसर्च सेंटर में आग लग गई थी. जिसमें दो सैनिक मारे गए थे. साथ ही अनुसंधान केंद्र भी जलकर खाक हो गया था. ब्राजील के वैज्ञानिक अस्थायी रूप से दूसरे देशों के अनुसंधान केंद्रों पर काम करते रहे थे. 1984 में पहली बार रिसर्च के लिए केंद्र बनाया गया था. जिसमें मौसम विज्ञान, जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान और चिकित्सा के क्षेत्र में प्रयोग और अध्ययन किया जाता है. ब्राजील के इस नए केंद्र को चीन की कंपनी सीईआईईसी ने बनाया है. जिसमें 17 प्रयोगशालाएं और 64 लोगों के लिए रहने का इंतजाम है.
कितने देश काम करते हैं अंटार्कटिका में
1959 अंटार्कटिक संधि के तहत 30 देशों के अपने अनुसंधान केंद्र हैं. संधि का उद्देश्य वहाँ के क्षेत्रीय विवादों पर टकराव की संभावना को कम करना. 1975 में ब्राजील संधि में शामिल हुआ, और 1984 में पहली बार अनुसंधान केंद्र बनाया. भारत के इस वक्त दो अनुसंधान केंद्र हैं. भारत की अंटार्कटिका में चहलकदमी 1982 में हुई. भारत के प्रेस इनफॉर्मेशन ब्यूरो के मुताबिक भारत के अंटार्कटिका में दो अनुसंधान केंद्र "मैत्रेयी" और "भारती" हैं. तीसरे लेकिन सबसे पुराने अनुसंधान केंद्र "दक्षिण गंगोत्री" के 70 मीटर बर्फ की चादर में धंसने की वजह से उसे बंद कर दिया गया था.
दिल्ली में 2019 के दिसंबर ने 108 साल का ठंड का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. ऐसे में कम धूप और ज्यादा ठंड आपको अवसाद से घेर सकती हैं, जिसे विंटर डिप्रेशन भी कहा जाया है. क्या है विंटर डिप्रेशन और कैसे पायी जा सकती है इससे निजात.
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1. क्या है विंटर डिप्रेशन
सर्दियों को अवसाद बढ़ाने वाला मौसम भी कहा जाता है. इस मौसमी अवसाद को 'सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर' SAD और आम भाषा में विंटर डिप्रेशन भी कहते हैं. सर्दियों के दिन आपका मूड डल करने वाले होते हैं. अगर आपको अक्सर तनाव की समस्या रहती है तो सर्दियों में आपकी ये समस्या बढ़ सकती है. इस मौसम में अवसाद, तनाव या डिप्रेशन बढ़ने के कुछ और खास कारण भी हैं.
2. क्या हैं इसके कारण
दुनिया के कई देशों में सर्दियों में दिन छोटे और रातें बड़ी हो जाती हैं, जिससे आपके जागने और सोने का चक्र गड़बड़ा जाता है. यह थकान का कारण बन जाती है. सर्दियों में सूरज की रोशनी मिलने के कारण मस्तिष्क में ज्यादा मात्रा में मैलेटोनिन हॉर्मोन बनता है. चूंकि इस स्लीप हॉर्मोन का सीधा संबंध रोशनी और अंधेरे से होता है इसीलिए आप आलस भी महसूस करते हैं.
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3. कौन होते हैं इसका शिकार
जर्मनी के मनोचिकित्सकों के मुताबिक जर्मनी में 3 प्रतिशत लोग सर्दियों के दौरान अवसाद का शिकार हो जाते हैं. महिलाएं एसएडी यानी सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर का सबसे ज्यादा शिकार होती हैं. भारत में मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि जीवन में सब कुछ ठीक-ठाक है, इसके बावजूद भी आप दुखी हैं तो आप सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर यानी विंटर डिप्रेशन की गिरफ्त में हैं.
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4. जो पहले से हैं अवसाद का शिकार वो हो जाएं सावधान
अमेरिका के राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान की मानें तो युवा और महिलाओं को सर्दियों में होने वाले इस अवसाद के शिकार होने की संभावना सबसे ज्यादा होती है. जो लोग पहले से ही अवसाद से जूझ रहे हैं उनके लिए यह समय मुश्किल भरा हो सकता है. भू-मध्य रेखा से दूर रहने वालों के लिए भी यह मौसम अवसाद से भरा हो सकता है.
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5. क्या हैं उपाय
ब्रिटेन के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ एंड केयर एक्सीलेंस सलाह देता है कि सर्दियों में होने वाले इस अवसाद को अन्य प्रकार के अवसादों के जैसा ही इलाज किया जाना चाहिए. डॉक्टर से परामर्श करना बेहतर विकल्प हो सकता है.
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6. थोड़ी कसरत भी है जरूरी
डॉक्टर मानते हैं कि सर्दियों के दिनों में कसरत मेलैटोनिन लेवल को कम करने में मदद करता है. सर्दियों में उपयुक्त गर्म कपड़े पहनकर बाहर जाने भर से अवसाद से छुटकारा मिल सकता है.
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7. लाइट थैरेपी लैंप का इस्तेमाल
कई देशों में अवसाद से बचने के लिए लोग लाइट थैरेपी लैंप का भी इस्तेमाल कर रहे हैं. सुबह 30 मिनट लाइट के सामने रहने से अवसाद से काफी हद तक बचा जा सकता है.
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8. कैसे करें अवसाद को दूर
खाने में पोषण का खास ख्याल रखें. ऐसी चीजें करें, जो आपको खुशी दे. संगीत सुनें, किताबें पढ़ें और सिनेमा देखें. एक्सर्साइज करें ताकि मूड बदलने में मदद मिल सके. इस मौसम से जुड़ी चीजों की शॉपिंग करें. परिवार और दोस्तों के साथ वक्त बिताएं. अकेले कमरे में बंद ना रहें. मन में नकारात्मक विचार ना आने दें.