जर्मनी: एक और राज्य चुनाव जीतने के कितने करीब है एएफडी?
१७ सितम्बर २०२६
हैम्बर्ग की हलचल से थोड़ी दूर, उत्तर पूर्वी हिस्से में पड़ता है जर्मनी का शांत राज्य मेक्लेनबुर्ग वेस्टर्न पोमेरेनिया. यहां गर्मियों में मिचमिचाई आंखों से जितनी दूर देखो बस पर्यटक ही पर्यटक. लेकिन इन दिनों ध्यान पर्यटकों के दाएं, बाएं, बैकग्राउंड में लगे राजनीतिक पार्टियों के पोस्टर पर जाता है. यहां छुट्टियों के साथ-साथ चुनावी सरगर्मी चरम पर है. इस राज्य में 20 सितंबर को प्रांतीय चुनाव होने हैं.
महज 16 लाख की आबादी वाले इस राज्य के चुनाव में लोगों की दिलचस्पी नहीं होती, मगर सैक्सनी अनहाल्ट राज्य चुनाव में एएफडी पार्टी की ऐतिहासिक जीत के बाद, सवाल उठा कि क्या एक और पिछड़े हुए राज्य में चुनाव जीत पाएगी जर्मनी की धुर दक्षिणपंथी पार्टी?
चुनावी सर्वेक्षण की मानें तो मेक्लेनबुर्ग वेस्टर्न पोमेरेनिया में सबसे आगे एएफडी है और तीन पॉइंट पीछे है, एसपीडी यानी सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी.
मेक्लेनबुर्ग वेस्टर्न पोमेरेनिया के दौरे पर निकले डीडब्ल्यू हिन्दी के दो पत्रकार, रजत शर्मा और तस्नीम जहरा, रॉस्टॉक में ‘हान्सश्टाट रॉस्टॉक III' चुनाव क्षेत्र से एएफडी पार्टी के उम्मीदवार एनरिको डाइके से मिले. 25 साल के डाइके और उनके साथी एएफडी के इन्फो डेस्क पर लोगों के सवालों के जवाब दे रहे थे और नीले रंग के पर्चे और पेन बांट रहे थे.
डीडब्ल्यू हिंदी के साथ कुछ देर बातचीत के बाद, डाइके एक इंटरव्यू के लिए राजी हुए. उन्होंने अपने एजेंडे के बारे में बताया और जोर दिया कि इस राज्य में उनकी प्राथमिकताओं में शिक्षा, बिजली, प्रवासन और पेंशन शामिल हैं. डाइके ने कहा, "यहां (मेक्लेनबुर्ग वेस्टर्न पोमेरेनिया) भी प्रवासन से जुड़े अनियंत्रित अपराध होते हैं. तो हम इस बात के पक्ष में हैं कि इसे सीमित और नियंत्रित किया जाए, स्थिति पर फिर से बारीकी से नजर रखी जाए, और जिन्हें वापस जाना है, वे कानून के शासन के अनुसार स्वाभाविक रूप से वापस जाएं.”
डीडब्ल्यू हिंदी की पत्रकार तस्नीम जहरा ने डाइके से सवाल किया कि क्या एएफडी की पॉलिसी उनके जैसे भारतीय मूल के प्रवासियों के लिए खतरा है? इस पर डाइके ने कहा, "हम हमेशा से स्किल्ड इमिग्रेशन के पक्ष में रहे हैं. हम हर टॉक शो में, लगभग हर भाषण में जहां यह विषय आता है, यही कहते हैं कि अगर कोई पहले से ही जर्मन बोलता है या शायद उसके पास एम्प्लॉयमेंट कॉन्ट्रैक्ट या ऐसा ही कुछ है, तो बेशक वे यहां आ सकते हैं.”
मेक्लेनबुर्ग वेस्टर्न पोमेरेनिया में कितना बड़ा है रूसी गैस का मुद्दा
2013 में स्थापित हुई एएफडी यानी ‘अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी' ने बहुत कम समय में एक बड़े मतदाता वर्ग को अपनी ओर आकर्षित किया है. चुनावी सर्वेक्षणों के मुताबिक, जहां जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स पर जनविश्वास निचले स्तर पर है, वहीं एएफडी लोकप्रियता के नए आंकड़े छू रही है. एएफडी की विचारधारा कट्टरपंथी है, यूक्रेन युद्ध के मुद्दे पर पार्टी रूस का समर्थन करती दिखती है. अप्रवासन नीति, जर्मनी में बढ़ते विदेशी कामगार और शरणार्थियों के प्रति जर्मनी की नीतियां, इस पार्टी के मुख्य चुनावी मुद्दे बने रहते हैं.
एएफडी के बाकी नेताओं की तरह डाइके भी कहते हैं, "हम नॉर्ड स्ट्रीम को फिर से चालू करने के पक्ष में हैं, ताकि हम एक बार फिर सस्ती गैस का फायदा उठा सकें.”
मेक्लेनबुर्ग वेस्टर्न पोमेरेनिया एक तटीय राज्य है, जो उत्तर में बाल्टिक सागर के साथ जर्मनी की सीमा निर्धारित करता है. इस सागर के भीतर ऐसा पाइपलाइन सिस्टम था जिससे जर्मनी को सीधे रूसी गैस की सप्लाई मिलती थी. 1,222 और 1,230 किलोमीटर लंबी नार्ड स्ट्रीम वन और टू पाइपलाइनें, रूस की सरकारी गैस कंपनी गाजप्रोम ने तैयार की थीं. नॉर्ड स्ट्रीम गैस पाइपलाइन रूस के सेंट पीटर्सबर्ग क्षेत्र से शुरू होकर मेक्लेनबुर्ग वेस्टर्न पोमेरेनिया के ग्रीफ्सवाल्ड शहर में खत्म होती थी. 2011 से 2022 तक नार्ड स्ट्रीम वन से जर्मनी को गैस सप्लाई मिलती रही.
लेकिन सितंबर 2022 में नार्ड स्ट्रीम की दोनों पाइपलाइनों में समंदर के भीतर धमाके हुए. और तब से गैस सप्लाई पूरी तरह बंद है. हालांकि गैस सप्लाई बंद होने के पीछे यूक्रेन युद्ध के कारण जर्मनी और रूस के संबंधों में आया तनाव भी है. बीते एक साल में नॉर्ड स्ट्रीम धमाकों को लेकर जर्मनी में कुछ संदिग्धों को गिरफ्तार किया है. प्रमुख संदिग्ध यूक्रेन के नागरिक हैं. अब तक की जांच में पता चला है कि धमाका करने के लिए बहुत उच्च स्तर की तैयारी और मिलिट्री ग्रेड का विस्फोटक इस्तेमाल किया गया.
मेक्लेनबुर्ग वेस्टर्न पोमेरेनिया की मुख्यमंत्री मानुएला श्वेसिग ‘नॉर्ड स्ट्रीम 2' की बड़ी समर्थक रह चुकी हैं. लेकिन 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद उन्होंने इसे एक गलती बताया. वहीं दूसरी तरफ एएफडी ‘नॉर्ड स्ट्रीम' को दोबारा सक्रिय करना चाहती है. उनका मानना है कि बढ़ती महंगाई के बीच जर्मनी को अपने लिए सोचने की जरूरत है. साथ ही एएफडी, मॉस्को के खिलाफ यूक्रेन को ज्यादा सैन्य संसाधन देने का भी विरोध करती है. यूक्रेन युद्ध पर कुछ इसी तरह का रुख बीएसडब्ल्यू का भी है.
गरीबी से जूझता बुजुर्गों से भरा जर्मन राज्य
रॉस्टॉक शहर की सड़कों पर युवाओं से ज्यादा बुजुर्ग दिखते हैं. राजधानी श्वेरीन में तो पर्यटक भी बुजुर्ग ही थे. जर्मनी में पेंशन एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है. प्रांतीय चुनावों से कुछ ही हफ्तों पहले जर्मन सरकार ने पेंशन में सुधारों का प्लान पेश किया. प्लान में, लोगों को लंबे समय तक काम करने के लिए प्रोत्साहित करना, समय से पहले रिटायरमेंट के फायदों में कटौती करना, काम जारी रखने वाले बुजुर्गों को टैक्स में छूट देना और स्वरोजगार लोगों के लिए भी पेंशन प्रणाली से जुड़ना अनिवार्य करने जैसे प्रस्ताव रखे गए.
लेकिन चांसलर मैर्त्स के इन प्रस्तावों ने पेंशन पाने वाले या रिटायरमेंट के करीब पहुंचने वाले लोगों को नाराज जरूर किया. आलोचकों का तर्क है कि रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने और शुरुआती फायदों को कम करने से शारीरिक श्रम करने वाले मजदूरों और कम आय वाले लोगों पर अन्यायपूर्ण बोझ पड़ेगा, जिससे आगे चलकर बुजुर्गों में गरीबी बढ़ने का खतरा है.
पेंशन के मुद्दे पर मैर्त्स का तीखा विरोध करने वालों में एएफडी भी शामिल है. डीडब्ल्यू की मुख्य राजनीतिक संपादक मिखाएला कुए्फनर ने समझाया, "जर्मनी के पूर्वी हिस्से में पश्चिम के मुकाबले ज्यादा गरीब लोग रहते हैं. बुढ़ापे में अपनी एकमात्र आय के तौर पर वे सरकारी पेंशन पर बहुत ज्यादा निर्भर रहते हैं.”
सैक्सनी अनहाल्ट में चांसलर मैर्त्स की पार्टी सीडीयू की हार और एएफडी की बड़ी जीत के बाद मैर्त्स को एलान करना पड़ा कि वे विवादित पेंशन सुधारों के प्रस्तावों को वापस लेने के लिए तैयार हैं.
क्या सोचते हैं मेक्लेनबुर्ग वेस्टर्न पोमेरेनिया में रहने वाले विदेशी युवा
रॉस्टॉक की रौनक के पीछे उसकी 600 साल पुरानी यूनिवर्सिटी है. वही यूनिवर्सिटी जिसने 1919 में अल्बर्ट आइंस्टाइन को मेडिसिन में मानद डॉक्टरेट से सम्मानित किया था. इस ऐतिहासिक यूनिवर्सिटी में कई भारतीय स्टूडेंट्स भी पढ़ते हैं. डीडब्लू हिंदी ने इन छात्रों से राब्ता किया. स्टूडेंट्स ने रॉस्टॉक शहर और यूनिवर्सिटी में अपना अनुभव साझा किया. ज्यादातर खुश थे, लेकिन हंसी-मुस्कराहट शिकन में बदल गई जब सवाल जर्मन राजनीति पर आया. वे कैमरे पर खुलकर बात करने में संकोच कर रहे थे.
आठ साल पहले जर्मनी आकर बसे जुनैद, रॉस्टक में काम करते हैं. पासपोर्ट बदलने के बाद अब वह जर्मन नागरिक हैं. खुद को मुस्लिम इमीग्रेंट बताने वाले जुनैद के मुताबिक, जर्मनी में उनका अनुभव अब तक बहुत अच्छा रहा है, लेकिन आने वाले चुनाव और एएफडी का उभार यह हालात बदल सकता है. उन्होंने कहा, "हम अपनी कम्युनिटी को लेकर थोड़े चिंतित हैं. हम महसूस करते हैं कि उनके (एएफडी) दिल में हमारे खिलाफ नफरत है. वे शायद खुलकर इजहार नहीं करते. लेकिन अगर एएफडी जीत जाती है या कोई दक्षिणपंथी पार्टी जीत जाती है, तो उनको खासी प्रेरणा मिलेगी कि वे खुलकर अपनी नफरत या ख्यालात का इजहार कर सकें.”
एएफडी पार्टी का जोर उनकी ‘रीमाइग्रेशन' पॉलिसी पर है. यानी अगर कोई अवैध रूप से जर्मनी में रह रहा है तो उसे फौरन निकाल दिया जाए. सैक्सनी अनहाल्ट की घरेलू खुफिया एजेंसियों ने एएफडी को "चरमपंथी धुर दक्षिणपंथी” पार्टी घोषित किया है. ऐसे में क्या एएफडी मेक्लेनबुर्ग वेस्टर्न पोमेरेनिया में भी चरमपंथी रुख अपनाएगी?