टिड्डी दल के हमले को रोकने के लिए कीटनाशक से लेकर बर्तन बजाने तक के जुगाड़ अपनाए जाते हैं लेकिन फिर भी किसानों को टिड्डी दल से फसल को बचाने का अचूक इलाज नहीं मिल पाया है. अब एक शोध में एक रसायन का पता चला है.
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वैज्ञानिकों ने टिड्डियों द्वारा छोड़े जाने वाले एक ऐसे केमिकल कंपाउंड (रासायनिक यौगिक) की पहचान की है जो उनके झुंड बनने में कारण बनता है. इन कीटों को रोकने के लिए संभव है कि नए तरीकों की खोज के दरवाजे खोले जा सकते हैं जो फसलों को बर्बाद होने से रोक पाएंगे. हजारों-लाखों टिड्डियां मिनटों में फसल खा जाती हैं और इंसानों के सामने खाद्य संकट पैदा होने का खतरा बना रहता है.
शोधकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने फीरोमोन नाम के रसायन की पहचान की है. जानवरों द्वारा उत्पादित रसायन अपनी प्रजातियों के दूसरे सदस्यों के व्यवहार को प्रभावित करता है. यह दुनिया की सबसे व्यापक टिड्डियों की प्रजातियों, प्रवासी टिड्डी या फिर मौसम बदलने पर एक जगह से दूसरी जगह जाने वाली टिड्डियों में पाया जाता है. शोधकर्ताओं ने इस रसायन का नाम 4-वाइनेलेनसोन (4वीए) रखा है, यह मुख्य तौर पर पिछले पैर से निकलता है और अन्य टिड्डियां अपने एंटेना से इसका पता लगा लेती हैं और गंध की पहचान करने वाले रिसेप्टर्स इसको महसूस कर लेते हैं.
एक दल में लाखों टिड्डी शामिल होती हैं. तस्वीर: picture-alliance/NurPhoto/V. Bhatnagar
जर्नल नेचर पत्रिका में छपे शोध के मुताबिक 4वीए उम्र या लिंग की परवाह किए बिना शक्तिशाली रूप से टिड्डियों को आकर्षित करता है. यह रसायन तब पैदा होता है जब एकांत में रहने वाली चार या पांच टिड्डियां एक साथ आ जाती हैं. रिसर्च टीम के प्रमुख ले कांग के मुताबिक, "मानव इतिहास में टिड्डी का हमला, सूखा और बाढ़ तीन प्रमुख प्राकृतिक आपदाओं के रूप में मानी जाती है जो कि दुनिया भर में कृषि और आर्थिक नुकसान के लिए गंभीर कारण बनती हैं." कांग आगे कहते हैं, "सबसे व्यापक रूप से फैली और सबसे खतरनाक टिड्डी प्रजातियां दुनिया भर में कृषि के लिए गंभीर खतरा है." टिड्डी के दल में लाखों टिड्डियां शामिल होतीं हैं जो कुछ ही मिनटों में सैकड़ों एकड़ की फसल चट कर जाती हैं. एशिया, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड में प्रवासी टिड्डी का दल अहम फसल जैसे कि गेहूं, चावल, मक्का, बाजरा और चारे की फसल पर हमला करती है.
कांग का कहना है कि 4वीए पर और अधिक शोध की जरूरत है यह जानने के लिए कि क्या वह अन्य प्रजातियों में भी मौजूद रहता है जैसे कि रेगिस्तानी टिड्डी. मौजूदा समय में रासायनिक कीटनाशक टिड्डियों को खत्म करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इसका इस्तेमाल मानव स्वास्थ्य और सुरक्षा के बारे में चिंताओं को और अधिक बढ़ाता है. 4वीए की पहचान नए तरीकों के विकसित करने के लिए प्रेरित कर सकती है. एक रसायन का विकास किया जा सकता है जो कि 4वीए को रोकने के लिए हो सकता है. इसके जरिए टिड्डियों को दल बनाने से रोका जा सकता है.
एए/सीके (रॉयटर्स)
कैसे टिड्डियां मिनटों में कर देती हैं करोड़ों की खेती चौपट?
टिड्डियों के हमले की वजह से अफ्रीका और दक्षिण एशिया बुरी तरह परेशान हैं. पाकिस्तान ने टिड्डी हमले के चलते आपातकाल लगा दिया है. वहीं राजस्थान में कई मंत्रियों और सांसदों ने केंद्र सरकार से मदद मांगी है.
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क्या होती है टिड्डी?
टिड्डी एक 6-8 सेंटीमीटर आकार का एक कीड़ा होता है जो हमेशा समूह में चलता है. ये समूह फसलों को चट करता चलता है. टिड्डी हर दिन अपने वजन के बराबर खाना खा सकता है. इसलिए जब हजारों टिड्डियों का एक दल आगे बढ़ता है तो वह फसल के लिए बड़ा खतरा बन जाता है.
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कितने टिड्डी?
संयुक्त राष्ट्र के संगठन फूड एंड एग्रिकल्चर ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक एक वर्ग किलोमीटर इलाके में 8 करोड़ टिड्डी हो सकते हैं. एक साथ चलने वाला टिड्डियों का एक झुंड एक वर्ग किलोमीटर से लेकर कई हजार वर्ग किलोमीटर तक फैला हो सकता है. एक टिड्डी पांच महीने तक जी सकता है. इनके अंडों से दो सप्ताह में बच्चे निकल सकते हैं. दो से चार महीनों का समय इनकी जवानी का समय होता है.
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कितने बुरे हैं टिड्डी?
टिड्डी चुनकर खाना नहीं खाते. वे अपने रास्ते में आने वाली हर खाने वाली चीज को खा सकते हैं. टिड्डों का एक औसत झुंड एक दिन में 19.2 करोड़ किलोग्राम पौधों और फसलों को चट कर सकता है. टिड्डी दल एक दिन में 5 से 130 किलोमीटर का इलाका कवर कर सकते हैं. केन्या, इथियोपिया और सोमालिया में तो टिड्डी दल इतने घने हैं कि उनके पार कुछ नहीं दिख रहा.
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कौन-कौन प्रभावित?
टिड्डी दल का प्रभाव एक महाद्वीप से निकल दूसरे महाद्वीप तक पहुंचने लगा है. अफ्रीका के इथियोपिया, युगांडा, केन्या, दक्षिणी सूडान से आगे निकलकर ये टिड्डी यमन और ओमान होते हुए पाकिस्तान और भारत तक पहुंच गए हैं. पाकिस्तान में टिड्डियों के चलते आपातकाल लगाया गया है. भारत में राजस्थान और गुजरात के किसानों के हालात टिड्डी के चलते बुरे हुए हैं.
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कैसे आए इतने टिड्डी?
इस इलाके में सालों तक पड़े सूखे और उसके बाद आई भारी बारिश और बढ़ते तापमान ने टिड्डियों के जनन के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा की. अच्छी बारिश की वजह से इन इलाकों में हरियाली भी बढ़ी है. हरियाली बढ़ना भी टिड्डियों के प्रजनन में बढ़ोत्तरी में एक बड़ी वजह है. इन देशों में टिड्डियों को रोकने के सही इंतजाम भी नहीं हैं. इसके चलते इनमें तेज बढ़ोत्तरी हुई है.
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रोकने के लिए क्या हो रहा है?
टिड्डियों को रोकने के लिए एक आम तरीका तेज आवाज का इस्तेमाल है. लेकिन जरूरी नहीं कि इससे टिड्डी आगे ना बढ़ें . कई बार तेज आवाज से टिड्डी तेजी से आगे बढ़ते हैं. दूसरा तरीका इन्हें खाने का है. दुनिया के कई इलाकों में इन्हें खाया भी जाता है. लेकिन उससे इनकी संख्या पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा. यूएन ने टिड्डी मारक कीटनाशकों के छिड़काव के लिए 10 मिलियन डॉलर दिए हैं. लेकिन अभी भी 70 मिलियन डॉलर की जरूरत है.
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आतंकवाद भी एक मुश्किल
केन्या में पांच हवाई जहाजों को कीटनाशकों का छिड़काव करने के लिए लगाया गया है. ये कीटनाशक इंसानों के लिए खतरा नहीं हैं. इथियोपिया में चार विमान कीटनाशकों का छिड़काव कर रहे हैं. सोमालिया में भी इस तरह के कदम उठाए गए हैं. लेकिन कई जगह अल कायदा से जुड़े आतंकी संगठन जैसे अल शबाब राहत पहुंचाने के काम में अड़ंगा डाल रहे हैं.