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सैन्य जुंटा को हथियार मुहैया कर रहे चीन और रूस

२३ फ़रवरी २०२२

म्यांमार के लिए संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र पर्यवेक्षक ने कहा है कि सैन्य जुंटा अभी भी लड़ाकू जेट और बख्तरबंद वाहन हासिल कर रही है, जिनका इस्तेमाल पिछले साल के तख्तापलट के बाद से नागरिकों के खिलाफ किया जा रहा है.

तस्वीर: Uncredited/AP Photot/picture alliance

संयुक्त राष्ट्र के एक स्वतंत्र पर्यवेक्षक और अमेरिकी कांग्रेस के पूर्व सदस्य थॉमस एंड्रयूज ने मंगलवार को कहा कि चीन और रूस अभी भी सैन्य जुंटा को युद्धक विमानों और बख्तरबंद वाहनों की आपूर्ति करा रहे हैं. एक बयान में एंड्रयूज ने कहा, "पिछले साल के सैन्य तख्तापलट के बाद से नागरिकों के खिलाफ अथक अपराधों और दुर्व्यवहार के सबूत के बावजूद रूस और चीन ने सैन्य विमान और बख्तरबंद वाहन दिए."

एंड्रयूज ने म्यांमार की सैन्य जुंटा को हथियारों की आपूर्ति करने वाले देशों में सर्बिया का भी नाम लिया. बयान के मुताबिक, "इसी अवधि के दौरान सर्बिया ने म्यांमार सेना को रॉकेट और बख्तरबंद वाहनों के निर्यात को मंजूरी दी." एंड्रयूज ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से म्यांमार को हथियारों की आपूर्ति को निलंबित करने का आह्वान किया.

उन्होंने जोर देकर कहा, "यह निर्विवाद होना चाहिए कि नागरिकों को मारने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले हथियारों को अब म्यांमार को नहीं देना चाहिए."

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से तेल और गैस और विदेशी मुद्रा भंडार तक सैन्य पहुंच को निलंबित करने का भी आह्वान किया. उन्होंने अन्य देशों और निजी क्षेत्र की संस्थाओं से भी अपील की कि वे म्यांमार से बांस और कीमती पत्थर न खरीदें क्योंकि इससे होने वाली आय सैन्य जुंटा को जाती है.

इससे पहले यूरोपीय संघ ने देश के कई प्रमुख अधिकारियों और शासन से जुड़ी चार संस्थाओं पर अपने प्रतिबंध का विस्तार किया था. पिछले साल भी 27 सदस्यीय ब्लॉक ने सैन्य अधिकारियों पर यात्रा प्रतिबंध लगाया था और म्यांमार की सेना से जुड़ी चार "आर्थिक संस्थाओं" पर कार्रवाई की थी.

सोमवार को जिन 22 अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं, उनमें उद्योग और सूचना मंत्री, चुनाव आयोग के अधिकारी और वरिष्ठ सैन्य अधिकारी शामिल हैं. उनकी संपत्ति फ्रीज कर दी गई है और यात्रा प्रतिबंध लगाए गए. म्यांमार और दुनिया भर में मानवाधिकार समूहों ने तर्क दिया था कि एमओजीई पर प्रतिबंध लगाने से सेना के धन का एक महत्वपूर्ण स्रोत ठप हो जाएगा.

म्यांमार पिछले साल 1 फरवरी को सैन्य तख्तापलट के बाद से उथल-पुथल में है. तख्तापलट के बाद से ही राष्ट्रव्यापी विरोध का एक सिलसिला शुरू हुआ और सेना ने विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ बल का इस्तेमाल भी किया. संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले एक साल में सैन्य अभियानों में कम से कम 1,500 लोग मारे गए हैं. सेना और सशस्त्र विद्रोहियों के बीच जारी संघर्ष में तीन लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं.

एए/सीके (एएफपी, रॉयटर्स)

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