अमेरिका और चीन के बीच टिकटॉक को लेकर फ्रेम वर्क डील हो गई है हालांकि अब भी कई ऐसे सवाल हैं, जिनका हल खोजा जाना बाकी है.
अगर इस साल के अंत तक अमेरिका और चीन के बीच टिकटॉक पर डील नहीं होती तो अमेरिका में टिकटॉक बंद हो जाता तस्वीर: Jaap Arriens/NurPhoto/picture alliance
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टिकटॉक के अमेरिकी वर्जन का अमेरिका को मिल जाना, इतना भी आसान नहीं होगा. टिकटॉक को अमेरिका को बेचे जाने को लेकर चीन की अब भी कई पहलुओं पर सहमति नहीं है. इस बीच चीन ने कहा है कि यह ऐसी डील को प्रोत्साहित करता है, जिसमें हितों का संतुलन बना रहे. हालांकि एक दिन पहले ही डॉनल्ड ट्रंप ने कहा था कि ऐसी एक डील पर प्रगति हो रही है, जिसमें टिकटॉक के मालिकाने को अमेरिकी कंपनी को दिया जाएगा.
इस बीच टिकटॉक ने एक बार फिर से पिछले हफ्ते की कुछ बातें दोहराई हैं. चीनी सरकार ने कहा है कि टिकटॉक को लेकर चीन की स्थिति स्पष्ट है. यह बाजार नियमों पर आधारित व्यापारिक बातचीत का स्वागत करता है. ताकि ऐसे हल तक पहुंचा जा सके जो चीन के कानूनों और नियमों के अनुकूल हो और जिसमें हितों का संतुलन बना रहे. चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा, चीन पिछले हफ्ते वाली स्थिति को ही दोहराता है.
अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच शुक्रवार को बातचीत हुई थी. इसके बावजूद भी कई अहम सवालों का जवाब दिया जाना बाकी है. दोनों राष्ट्रपतियों के बीच हुई बातचीत में टिकटॉक के मालिकाने को लेकर भी चर्चा हुई थी. दरअसल मालिकाने का स्वरूप अब भी स्पष्ट नहीं है. चीन जानना चाहता है कि ऐप की अंदरूनी कार्यप्रणालियों पर चीन का कितना नियंत्रण रहेगा और चीन अगर अपनी सबसे सफल कंपनियों में से एक पर अमेरिका के नियंत्रण की अनुमति देता है, तो बदले में इसे क्या मिलेगा.
अमेरिका में 17 करोड़ से ज्यादा लोग टिकटॉक का इस्तेमाल करते हैं. अमेरिका और चीन के बीच होने वाली व्यापार वार्ताओं में इस ऐप पर फैसला बहुत अहम है. जानकार मान रहे हैं कि वायुयानों से लेकर सोयाबीन तक, दोनों बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच, कई चीजों का व्यापार इस चीनी ऐप के भविष्य पर निर्भर करता है. हालांकि दुनिया की दोनों ही सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं बहुत संभल संभल कर एक-दूसरे के साथ व्यापार पर बातचीत को आगे बढ़ा रही हैं.
वंशवाद, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और सोशल मीडिया बैन से यूं उबल पड़ा नेपाल
नेपाल में आम जनता का बरसों से सुलगता गुस्सा ऐसा फूटा कि पीएम ओली को इस्तीफा देना पड़ा. कई मंत्रियों को भीड़ ने दौड़ा-दौड़ाकर पीटा. आखिर नेपाल की युवा पीढ़ी इतने गुस्से में क्यों है.
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल के नेता और पीएम पद से इस्तीफा दे चुके प्रधानमंत्री केपी शर्मा, सोशल मीडिया पर आलोचना को बर्दाश्त नहीं कर रह पा रहे थे. एक सच्चाई यह भी है कि ओली सोशल मीडिया के समर्थक नहीं हैं और अपने पिछले कार्यकाल से ही वह इन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नकेल कसना चाहते थे.
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क्या ओली से बड़ी गलती हो गई?
केपी शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट के एक साल पुराने निर्देश का इस्तेमाल करते हुए उन सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को एक हफ्ते का नोटिस दिया, जिन्होंने नेपाल में सरकारी नियमों का पालन करने के लिए पंजीकरण नहीं कराया था. लेकिन जल्दबाजी में लिए गए इस फैसले में सरकार ने इसके नतीजों का अंदाजा लगाने में चूक की, खासकर युवाओं के मामले में जिनके बीच इंस्टाग्राम और यूट्यूब बेहद लोकप्रिय हैं.
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भ्रष्टाचार कितना बड़ा मुद्दा
नेपाल में 8 सितंबर को जब बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए तो सोशल मीडिया पर बैन तो एक मुद्दा था, इन प्रदर्शनों के दौरान भ्रष्टाचार भी एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरा. रिपोर्टों के मुताबिक लगभग सभी शीर्ष नेपाली नेता किसी न किसी भ्रष्टाचार घोटाले में फंसे हुए हैं.
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वंशवाद बनाम आम नेपाली
युवा वर्ग 'नेपो-किड्स' यानी नेताओं के बच्चों की विलासितापूर्ण जीवनशैली से भी नाराज है. यह उस देश में नामंजूर लगता है जो अपनी अर्थव्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए संघर्ष कर रहा है और जहां रोजाना हजारों युवा रोजगार की तलाश में देश छोड़ रहे हैं. एक अनुमान के अनुसार, हर साल लगभग 8 लाख नेपाली रोजगार के लिए विदेश जाते हैं.
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श्रीलंका और बांग्लादेश से सबक नहीं ले पाई सरकार?
नेपाली नेतृत्व क्षेत्र के बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य, उदाहरण के लिए बांग्लादेश और श्रीलंका में हुए व्यापक परिवर्तनकारी प्रदर्शनों से सबक नहीं ले सका. शीर्ष पदों पर उन्हीं पुराने चेहरों को बैठाना और विकास व सुधारों के मामले में निष्क्रियता ने व्यापक आक्रोश को जन्म दिया.
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बेरोजगारी भी एक समस्या
वर्ल्ड बैंक के अनुसार, पिछले साल युवा बेरोजगारी दर लगभग 20 फीसदी थी, और सरकार का अनुमान है कि हर रोज 2,000 से अधिक युवा मध्य पूर्व या दक्षिण-पूर्व एशिया में काम की तलाश में देश छोड़ रहे हैं.
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कैसी है नेपाल की अर्थव्यवस्था
वर्ल्ड बैंक के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में नेपाल का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 42.91 अरब अमेरिकी डॉलर का था. नेपाल का जीडीपी मूल्य विश्व अर्थव्यवस्था का 0.04 प्रतिशत है.
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नेपाल: सियासी तौर पर एक अस्थिर देश
2008 में 239 साल पुरानी राजशाही के खात्मे के बाद से नेपाल राजनीतिक रूप से अस्थिर रहा है. 2008 से अब तक 14 सरकारें बनी हैं, जिनमें से एक भी पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाई है. 73 वर्षीय केपी शर्मा ओली ने पिछले साल अपने चौथे कार्यकाल के लिए शपथ ली थी.
ऐसे में चीन की ओर से कही गई बात अहम हो जाती है. चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा है, "उम्मीद है अमेरिकी पक्ष भी, चीनी लक्ष्य की ओर ही बढ़ते हुए काम करेगा. ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारियां निभाएगा और चीनी कंपनी के अमेरिका में कामकाज के लिए व्यापार का स्वतंत्र, निष्पक्ष, समान और गैर-पक्षपाती माहौल उपलब्ध कराएगा." चीनी वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता हे याडोंग ने उम्मीद जताई है कि टिकटॉक पर डील के आधार पर अमेरिका, चीनी कंपनियों पर लागू व्यापार बाधाओं को भी कम करेगा.
इसी हफ्ते स्पेन की राजधानी मैड्रिड में अमेरिका और चीन के बीच टिकटॉक को लेकर फ्रेमवर्क डील हो गई है. चीनी अधिकारियों और चीन के सरकारी चैनलों ने इसे दोनों ही पक्षों की जीत वाला सौदा बताया था. चीन ने दावा भी किया था कि वो टिकटॉक के टेक्नोलॉजी एक्सपोर्ट और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी लाइसेंसिंग का निरीक्षण करेगा.
फ्रेमवर्क डील के जरिए ट्रंप ने अपने रास्ते से टिकटॉक को अमेरिका में जारी रखने की बाधा दूर कर ली है. नहीं तो अमेरिकी कांग्रेस की ओर से जनवरी, 2025 के अंत तक अमेरिका में टिकटॉक को बंद किए जाने का आदेश जारी किया गया था. अगर टिकटॉक की मालिक कंपनी बाइटडांस इसकी अमेरिकी संपत्तियों को अमेरिका को बेचने पर राजी नहीं होती तो ऐसा हो जाता.