दो साल पहले जर्मनी में काम करने वाले लोगों के लिए जलवायु परिवर्तन एक बड़ा मुद्दा था लेकिन ताजा सर्वेक्षण बताते हैं कि यह स्थिति बदल गई है.
जर्मनी में लोगों प्राथमिकताएं बदल रही हैंतस्वीर: Hesham Elsherif/Anadolu/picture alliance
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जर्मनी के कर्मचारियों के बीच जलवायु संकट को लेकर चिंता अब पहले की तुलना में काफी कम हो गई है. विटेनबर्ग सेंटर फॉर ग्लोबल एथिक्स द्वारा किए गए एक ताजा सर्वेक्षण में सामने आया है कि अब केवल 10 प्रतिशत कर्मचारी जलवायु संरक्षण को सबसे अहम मुद्दा मानते हैं.
यह सर्वेक्षण ऊर्जा कंपनी ई डॉट ओएन की कॉरपोरेट फाउंडेशन के लिए कराया गया था और इसमें 2,000 से अधिक मौजूदा व भावी कर्मचारियों से फरवरी 2025 में सवाल पूछे गए थे. 2022 की तुलना में कर्मचारियों के नजरिए में साफ बदलाव देखा गया है. दो साल पहले, 20 फीसदी कर्मचारियों ने जलवायु संरक्षण को सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया था. वहीं, अब यह आंकड़ा घटकर लगभग आधा रह गया है. दूसरी ओर, सामाजिक असमानता को कम करना (17 फीसदी), रोजगार सुरक्षा (15 फीसदी) और भू-राजनीतिक संघर्षों का समाधान (14 फीसदी) जैसी चिंताएं कर्मचारियों के लिए कहीं ज्यादा अहम हो गई हैं.
सेंटर के प्रमुख मार्टिन फोन ब्रूक ने कहा, "लोग अब आर्थिक स्थिरता पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं, और पर्यावरणीय स्थिरता के सवाल थोड़े पीछे छूटते जा रहे हैं." उनके अनुसार, जलवायु संकट को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है, लेकिन अब कर्मचारी चाहते हैं कि सरकारें और कंपनियां पर्यावरण के लक्ष्यों को आर्थिक अवसरों के साथ आगे बढ़ाएं.
जलवायु संरक्षण पर बंटी राय
रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग आधे कर्मचारी अभी भी चाहते हैं कि जलवायु के अनुकूल औद्योगिक परिवर्तन को और तेज किया जाए. वहीं 30 फीसदी कर्मचारियों का मानना है कि वर्तमान गति काफी है. हालांकि 20 फीसदी लोग अब कहते हैं कि इस बदलाव की गति को धीमा कर देना चाहिए. ये आंकड़े संकेत देते हैं कि जलवायु परिवर्तन के प्रति उत्साह में निश्चित रूप से कमी आई है, लेकिन पूरी तरह से समर्थन खत्म नहीं हुआ है.
जर्मनी में इस साल के मार्च ने सूखे रहने के मामले में रिकॉर्ड बनाया बनाया है. जर्मन पर्यावरण मंत्री स्टेफी लेमके ने चेतावनी दी है कि सूखे की वजह से जंगल में आग का खतरा बढ़ने की आशंका है.
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जर्मनी में अब तक का सबसे सूखा मार्च
जर्मनी में इस बार वसंत ऋतु धूप से धुली हुई है और असामान्य रूप से सूखी भी. जर्मन मौसम विभाग के हालिया डेटा के अनुसार 1881 में सबसे पहले जलवायु का आकलन शुरू हुआ. तब से लेकर अब तक जर्मनी समेत कई अन्य यूरोपीय देशों में इस बार अभी तक का सबसे सूखा मार्च रहा. मिट्टी की ऊपरी परतों में पानी की मात्रा,खासकर उत्तर जर्मनी में, दीर्घकालीन न्यूनतम मात्रा से 20% तक कम है.
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सूखे का डटकर सामना कर रहे नन्हे पौधे
ये नन्हे पौधे कई महीनों से सूखे का डटकर सामना कर रहे हैं: लेकिन मार्च कभी इतना सूखा नहीं था. फरवरी में थोड़ी बहुत बारिश हुई. अप्रैल के महीने में भी पहले हफ्ते में बिल्कुल भी बारिश नहीं हुई, जिसकी उम्मीद नहीं की गई थी. जर्मन मौसम विभाग के मार्सेल श्मिट का कहना है कि आने वाले दिनों में भी “ज्यादा से ज्यादा” यहां वहां थोड़ी बहुत बूंदा-बांदी ही होगी
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एल्बे नदी भी सूखे का शिकार
एसोसिएशन ऑफ जर्मन सिटीज के प्रमुख हेल्मुट डेडी ने जर्मन नागरिकों से पानी बचाकर चलने की गुहार लगाई है. रिडाक्सियॉन नेट्सवर्क से बात करते हुए उन्होंने कहा, “जलवायु परिवर्तन दिन-ब-दिन और ज्यादा नजर आने लगा है.” हालांकि फिलहाल जर्मनी में पीने के पानी की कोई कमी नजर नहीं आ रही.
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तालाबों का पानी भी कम
स्विट्जरलैंड की सीमा पर स्थित लेक कॉन्स्टांस में पानी का स्तर पिछले कुछ समय से कम है. राइशेनाओ द्वीप पर अभी भी इतना पानी है कि ये जहाज वहां तैरते रहें, लेकिन लेक के एक और हिस्से जिसे उंटर सी कहा जाता है, वहां स्थित बंदरगाह पहले ही सूख चुका है. और लेक कॉन्स्टांस का सबसे छोटा द्वीप होय, जो तट से लगभग 100 मीटर दूर है, अब वहां पैदल चलकर भी पहुंचा जा सकता है.
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बारिश का इंतजार
नॉर्थ राइन-वेस्टफेलिया के ग्लाडबेक में किसान बर्न्ड इम विंकेल तस्वीर में दिखा रहे हैं कि उनकी जमीन कितनी सूख गई है. जर्मन किसान संघ के प्रमुख योआखिम रुकवीड ने कहा, "हम मौजूदा मौसम की स्थिति को लेकर चिंतित हैं. हमें बारिश का बेसब्री से इंतजार है.”
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हवा में धूल
जर्मन मौसम विभाग के आंद्रेयास ब्रोएमजर ने "इस समय के लिए मिट्टी में असामान्य रूप से कम नमी" की पुष्टि की है, लेकिन कहा है कि अभी भी गहराई में जाएंगे तो अच्छा खासा पानी मौजूद है. उन्होंने कहा कि अगर कुछ हफ्ते लगातार अच्छी बारिश हो जाये तो सूखे की दिक्कत से निपटा जा सकता है. "फिलहाल, हम ये मानकर नहीं चल सकते कि गर्मियों में बेशक सूखा पड़ ही जायेगा.”
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जंगल में आग लगने का खतरा बढ़ा
जर्मन मौसम विभाग के अनुसार, जंगल में आग लगने का खतरा काफी बढ़ गया है. यहां जाउरलांड के इलाके में, फायर ब्रिगेड ने दो दिनों के भीतर दो जगह बड़े पैमाने पर लगी आग पर काबू पाया है. सूखे ने पेड़ों को भी कमजोर कर दिया है, जिससे उन्हें कीटों के संक्रमण से बचने में मुश्किल आ रही है.
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जलवायु का गहराता प्रभाव
मंगलवार को पर्यावरण मंत्री स्टेफी लेमके ने कहा, "वसंत ऋतू के हिसाब से भी देखें तो इस समय बहुत सूखा पड़ रहा है.” उन्होंने आगे कहा, "कृषि और वानिकी समेत हम सभी जलवायु संकट के परिणामों को साफ तौर पर महसूस कर रहे हैं.” उन्होंने कहा कि अगर ऐसे ही सूखा पड़ता रहा, तो फसल प्रभावित हो सकती है.
तस्वीर: Jens Büttner/AP/dpa/picture alliance
राहत की उम्मीद
पूर्वानुमानों में अगले हफ्ते के लिए अच्छी खबर है - कम से कम पश्चिमी जर्मनी के लिए. फ्राइबुर्ग और कोलोन जैसी जगहों पर बारिश होने की उम्मीद है, जिससे राइन नदी में पानी का स्तर बढ़ सकता है.
तस्वीर: Rolf Vennenbernd/dpa/picture-alliance
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2022 में "प्रतिस्पर्धा बनी रहे" इसे प्रमुख सामाजिक मुद्दा मानने वालों की संख्या भी अपेक्षाकृत कम थी. लेकिन 2025 में यह संख्या तीन गुना बढ़ गई है.
रिपोर्ट यह भी उजागर करती है कि जलवायु संरक्षण के लिए व्यक्तिगत स्तर पर समझौते करने की इच्छा सीमित है. 62 फीसदी कर्मचारी नए स्किल सीखने के लिए तैयार हैं, लेकिन केवल 15 फीसदी लोग ही इसके लिए कम वेतन वाली नौकरी स्वीकार करने को तैयार हुए. सिर्फ 20 फीसदी कर्मचारी किसी अन्य स्थान पर तबादले के लिए सहमत हैं.
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आर्थिक असुरक्षा ने बदली प्राथमिकता
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव कोविड-19 महामारी, ऊर्जा संकट और हालिया भू-राजनीतिक तनावों के बाद पैदा हुई आर्थिक अनिश्चितताओं का नतीजा है. कर्मचारियों का ध्यान अब ज्यादा ठोस और तात्कालिक चिंताओं, जैसे सामाजिक समानता, नौकरी की सुरक्षा और आर्थिक प्रतिस्पर्धा पर केंद्रित हो गया है.
डेर श्पीगल पत्रिका की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में 42 फीसदी कर्मचारियों को विश्वास था कि जलवायु के अनुकूल बदलाव उनके रोजगार के लिए सकारात्मक रहेंगे. लेकिन 2025 में यह भरोसा गिरकर 37 फीसदी रह गया है. वहीं, बदलाव के नकारात्मक प्रभावों की आशंका रखने वालों की संख्या 14 फीसदी से बढ़कर 18 फीसदी हो गई है.
जर्मनी में झटपट पुल बनाने का नया तरीका
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जर्मनी में कर्मचारी अब भी जलवायु संकट को महत्व देते हैं, लेकिन आर्थिक सुरक्षा और सामाजिक न्याय के सवाल उनके लिए कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण बन चुके हैं. विशेषज्ञ कहते हैं कि अब नीति-निर्माताओं के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे जलवायु परिवर्तन की दिशा में तेजी से काम करते हुए कर्मचारियों की आजीविका और सामाजिक स्थिरता सुनिश्चित करने पर भी ध्यान दें.
मार्टिन फोन ब्रूक के शब्दों में, "लोग जलवायु तटस्थता को अवसर के रूप में देखते हैं, बाधा के रूप में नहीं. लेकिन वे चाहते हैं कि सरकारें बेहतर प्रोत्साहन दें, ना कि केवल अपेक्षाएं बढ़ाएं."