लकड़ी के भाला बरछी ले कर गोतोखोर लहरों के नीचे डुबकी मारते हैं और स्टारफिश के झुंड को निशाना बनाते हैं. ये सारी कवायद इसलिए है ताकि स्टारफिश को कोरल रीफ को नुकसान पहुंचाने से रोका जा सके.
स्टारफिश एक साल में 10 वर्गमीटर कोरल रीफ खा कर खत्म कर देती हैंतस्वीर: William West/AFP
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कुक आइलैंड के इन गोताखोरों ने इस जुगाड़ के औजार को ही कांटे जैसी सींग वाली स्टारफिश को रोकने के लिए अपना हथियार बनाया है. स्टारफिश की यह प्रजाति बड़े चाव से कोरल रीफ को अपना आहार बनाती है. उष्णकटिबंधीय कोरल रीफ पहले ही जलवायु परिवर्तन का खामियाजा उठा रहे हैं. मछलियों का आहार बनने से उन पर और अधिक खतरा मंडराने लगा है.
स्टारफिश को मारने के लिए वॉलंटियर लकड़ी के भाले बरछी लेकर पानी में डुबकी मारते हैंतस्वीर: William West/AFP
कोरल रीफ को खाने वाली स्टारफिश
दक्षिण प्रशांत महासागर में मौजूद इस छोटा से देश में करीब 17,000 लोग रहते हैं. कई सालों से यहां के कोरल रीफ इस मुसीबत की चपेट में आ रहे हैं. समुद्री जीवविज्ञानी टाइना रोंगो कहते हैं, "यह द्वीप के आसपास मौजूद समूचे रीफ को पूरी तरह से खत्म कर सकते हैं." रोंगो स्वयंसेवियों की मदद से रीफ के संरक्षण के लिए काम करते हैं. उन्होंने यह भी कहा, "मुझे लगता है कि इस वक्त पूरे प्रशांत के इलाके में यह समस्या है, हम दूसरे देशों में इसी समस्या के सिर उठाने की खबरें सुन रहे हैं."
एक स्टारफिश अकेले साल भर में 10 वर्गमीटर रीफ को खा कर खत्म कर सकती है. ये जीव ऑस्ट्रेलिया के ग्रेट बैरियर रीफ के लिए भी बड़ा खतरा बन कर उभरे हैं. ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने इनसे लड़ने के लिए रोबोट विकसित किए हैं जो स्टारफिश को पकड़ कर उनके शरीर में जहर डाल देते हैं. ऑस्ट्रेलियन इंस्टिट्यूट ऑफ मरीन साइंस की रिसर्चर स्वेन उथीके का कहना है, "फिलहाल तो उन्हें इंजेक्शन के जरिए मारा जा रहा है. वह विनेगर, लाइम जूस या फिर ऑक्स बाइल कुछ भी हो सकता है." उथीके ने यह भी बताया कि कुछ लोग केमिकल अट्रैक्शन वाले जाल भी बना रहे हैं लेकिन यह अभी विकास के शुरुआती चरण में है.
स्टारफिश बड़ी तेजी से कोरल रीफ को अपना भोजन बना रही हैंतस्वीर: William West/AFP
क्राउन ऑफ थोर्न्स स्टारफिश
सैकड़ों जहरीले कांटों की वजह से क्राउन ऑफ थोर्न्स स्टारफिश को यह नाम मिला है. उसके 21 मांसल हाथ हो सकते हैं और वह आकार में कार के टायर जितनी बड़ी हो सकती है. आमतौर पर वे इतनी कम संख्या में होती थीं कि उन्हें समस्या नहीं माना जाता. लेकिन बीते कुछ समय से उनकी आबादी में हुई तेज वृद्धि ने रीफ को खतरे में डाल दिया है.
ऑस्ट्रेलियन इंस्टिट्यूट ऑफ मरीन साइंस के मुताबिक वे प्लेग की तरह बढ़ रही हैं और इस समय कोरल के खत्म होने में बड़ी भूमिका निभा रही हैं. वैज्ञानिकों को आशंका है कि उनकी संख्या बढ़ने के पीछे कई कारण हैं. इनमें एक कारण है खेती से पोषक तत्वों का सागर में पहुंचना और प्राकृतिक शिकारियों की संख्या में कमी. समस्या यह है कि उनके बढ़ने के कारण रीफ की जान पर बन आई है. रीफ पहले ही जलवायु परिवर्तन के कारण होने वले कोरल ब्लीचिंग और सागरों के अम्लीकरण के कारण कमजोर हैं. यही वजह है कि रीफ को बचाने के लिए इस तरह के कदम उठाना जरूरी हो गया है.
ऑस्ट्रेलिया के ग्रेट बैरियर रीफ के कोरल, ब्लीच के भयानक खतरे का सामना कर रहे हैं. वैज्ञानिकों के सर्वे में शामिल इलाके के 73 फीसदी कोरल को भारी नुकसान हुआ है.
तस्वीर: Grace Frank/Australian Institute of Marine Science/REUTERS
ग्रेट बैरियर रीफ का सर्वे
वैज्ञानिकों ने हवाई सर्वे में 1,000 रीफ को देखा जिसमें 730 रीफ में ब्लीच नजर आया. ब्लीच की मात्रा 90 फीसदी से ज्यादा है. ऑस्ट्रेलिया के रीफ प्रशासन के मुताबिक यह ब्लीच इस रीफ के पूरे विस्तार में नजर आया है.
तस्वीर: Grace Frank/Australian Institute of Marine Science/REUTERS
क्या है कोरल रीफ
कोरल दूसरे जीवों की तरह छोटे समुद्री जीव हैं. ये छोटे छोटे जीव कुछ खास समुद्री इलाकों में अपनी जड़ें जमा कर बैठते हैं और एक दूसरे से जंगल के पेड़ों की तरह जुड़ कर रीफ बनाते हैं. ये अपनी सुरक्षा के लिए अपने आस पास सख्त ढांचे तैयार करते हैं जो चूना पत्थर जैसे होते हैं.
तस्वीर: Supplied/CSIRO/dpa/picture alliance
कोरल के भूखे मरने का खतरा
कोरल रीफ का भोजन हैं कवक. अलग अलग तरह के कवक इनके लिए आहार बनते हैं. समुद्र का तापमान बढ़ने और प्रदूषण से कवकों में कमी आती है तो कोरल भूखे रह जाते हैं. उनका रंग सफेद पड़ कर पारदर्शी हो जाता है और उनके मरने का खतरा पैदा हो जाता है. इसी को ब्लीचिंग कहा जाता है.
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जैव विविधता के लिए खतरा
समुद्र के सिर्फ एक प्रतिशत इलाके में कोरल रीफ का विस्तार है. जबकि दुनिया के 25 फीसदी समुद्री प्रजातियों को कोरल के इलाके में घर मिलता है. जाहिर है कि अगर समुद्र के नीचे का यह जंगल खत्म हो गया तो जीवों का बसेरा उजड़ जाएगा.
तस्वीर: Grace Frank/Australian Institute of Marine Science/REUTERS
ऑस्ट्रेलिया का ग्रेट बैरियर कोरल रीफ
ऑस्ट्रेलिया के ग्रैट बैरियर रीफ को दुनिया की सबसे विशाल जीवित संरचना भी कहा जाता है. यह 2,300 किलोमीटर के इलाके में फैला हुआ है. इसमें 600 से ज्यादा कोरल के प्रकार और 1,625 मछलियों की प्रजातियां हैं.
तस्वीर: HPIC/dpa/picture alliance
कब होती है ब्लीचिंग
पानी का तापमान अत्यधिक बढ़ने पर कोरल अपना अस्तित्व बचाने के लिए सूक्ष्म कवकों को बाहर निकालते हैं. अगर ऊंचा तापमान बना रहे तो कोरल सफेद हो कर मर जाते हैं.
तस्वीर: WWF AUSTRALIA/AAP/dpa/picture alliance
पहले से बहुत ज्यादा खतरे में है रीफ
इसी साल की गर्मियों में सरकार की तरफ से जारी रिपोर्ट में 46 फीसदी रीफ में अत्यधिक गर्मी की वजह से दबाव की बात की गई थी. इससे पहले 2016 में केवल 20 फीसदी रीफ ही दबाव झेल रहे थे. पिछले 8 सालों में यह पांचवां मौका है जब बड़े पैमाने पर रीफ ब्लीचिंग झेल रहे हैं.
तस्वीर: Grace Frank/ Australian Institute of Marine Science/REUTERS
कैसे बचेंगे कोरल
विशेषज्ञों ने कोरल की ब्लीचिंग रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की है. इसमें वैश्विक उत्सर्जन को घटाने के साथ ही स्थानीय पुनर्वास परियोजनाओं को बढ़ाना शामिल है.
तस्वीर: Grace Frank/Australian Institute of Marine Science/REUTERS
क्या कर रहा है ऑस्ट्रेलिया
ऑस्ट्रेलिया ने पानी की गुणवत्ता सुधारने, जलवायु परिवर्तन के असर को घटाने और खतरे का सामना कर रही प्रजातियों को बचाने पर करीब 3.2 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश किया है. हालांकि यह देश गैस और कोयले के सबसे बड़े निर्यातकों में है और इसने कार्बन न्यूट्रल बनने का लक्ष्य हाल ही में तय किया है.