भारत सरकार ने 128 लोगों को पद्म पुरस्कार देने का ऐलान किया है. हालांकि सीपीएम नेता बुद्धदेब भट्टाचार्य समेत तीन लोगों ने इसे अस्वीकार कर दिया है.
तस्वीर: picture-alliance/dpa/P.Adhikary
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पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री और मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी (CPIM) नेता बुद्धदेब भट्टाचार्य ने कहा है कि उन्हें पद्म भूषण के लिए नामांकित किया गया है या नहीं, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है लेकिन ऐसा हुआ तो वह इस सम्मान को स्वीकार नहीं करेंगे.
पार्टी के सोशल मीडिया पेज पर बांग्ला में प्रकाशित एक बयान में भट्टाचार्य ने कहा, "मुझे पद्म भूषण अवॉर्ड के बारे में कोई जानकारी नहीं है. मुझे इस बारे में किसी ने कुछ नहीं बताया. अगर उन्होंने मुझे पद्म भूषण दिया है, तो मैं इसे अस्वीकार करता हूं."
उधर भारत सरकार का कहना है कि भट्टाचार्य की पत्नी को इस बारे में सूचित किया गया था और उन्होंने इसे स्वीकार भी किया था. एनडीटीवी के मुताबिक गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि केंद्रीय गृह सचिव ने बुद्धदेब भट्टाचार्य की पत्नी से मंगलवार सुबह बात की थी और उन्होंने स्वीकार करने पर सहमति दी थी.
औरों ने भी ठुकराया
बुद्धदेब भट्टाचार्य के अलावा दो और लोगों ने पद्म पुरस्कार ठुकराए हैं. तबलावादक पंडित अनिंदो चटर्जी ने कहा है कि उन्हें पद्मश्री की पेशकश की गई थी, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया. एक बयान में उन्होंने कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय से इस बारे में फोन आया था लेकिन उन्हें अपमानित महसूस हुआ और उन्होंने इसे लेने से इनकार कर दिया.
कॉमेडी वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी पुरस्कार पशु-पक्षियों की असाधारण लेकिन हास्यास्पद तस्वीरों को सम्मानित करते हैं. पेश हैं इस साल के विजेता.
तस्वीर: John Speirs/Comedywildlifephoto.com
आउच!
चीन के यूनान प्रांत में एक तार पर लटक रहे एक गोल्डन सिल्क बंदर की इस तस्वीर को पहला पुरस्कार मिला. इसे शौकिया तस्वीरें लेने वाले केन जेन्सेन ने 2016 में लिया था. उनका कहना है कि उस समय यह बंदर वाकई आक्रामक तेवर दिखा रहा था.
तस्वीर: Ken Jensen/Comedy Wildlife Photography Awards 2021
क्या यह बबून गा रहा है?
क्लेमेंस गिनार्ड द्वारा ली गई इस तस्वीर में इस हैमद्रियास बबून ने अपने पंजों को अपने गले के नीचे रखा हुआ है और उबासी ले रहा है. इस प्रतियोगिता के संस्थापक पॉल जॉनसन-हिक्स और टॉम सुल्लम का मानना है कि पशु-पक्षियों की हास्यास्पद तस्वीरें लोगों को आकर्षित करती हैं.
तस्वीर: Clemence Guinard/Comedywildlifephoto.com
हरा स्टाइलिस्ट
टशन में पोज दे रहे इस गिरगिट की तस्वीर भारत के वेस्टर्न घाटों की है. इस प्रतियोगिता में अलग अलग श्रेणियां हैं, जैसे उड़ने वाले जीव, जमीन पर चलने वाले जीव और पानी में रहने वाले जीव.
इस तस्वीर में एक स्मूथ-कोटेड ऊदबिलाव अपने बच्चे को दांत में पकड़े तैरना सिखाना के लिए पानी में ले कर जा रहा है. इसे ची की ताओ ने सिंगापुर में लिया था. इसने पानी के नीचे रहने वाले जीव की श्रेणी में पुरस्कार जीता.
तस्वीर: Chee Kee Teo/Comedywildlifephoto.com
निंजा प्रेयरी कुत्ता
अमेरिका के कोलोरैडो प्रांत में इस निंजा कुत्ते ने एक बॉल्ड ईगल को चौंका दिया और उतने समय में भाग कर पास ही एक मांद में छुप गया. बॉल्ड ईगल एक बार उसे पकड़ने के लिए झपट्टा मार चुका था, लेकिन कुछ कर नहीं पाया. यह तस्वीर आर्थर त्रेविनो ने ली थी और इसने जमीन पर रहने वाले जीव की श्रेणी में पुरस्कार जीता.
तस्वीर: Arthur Trevino/Comedywildlifephoto.com
"श्श्श! मैं नशे में हूं"
इस उल्लू की तस्वीर अनीता रॉस ने अमेरिका के कैलिफोर्निया प्रांत में ली. उन्होंने बताया कि उन्होंने यह तस्वीर इसलिए ली क्योंकि इसमें ऐसा लग रहा है जैसे उल्लू नशे में है. इन पुरस्कारों का सिद्धांत है "प्रतियोगिता के जरिए संरक्षण".
तस्वीर: Anita Ross/Comedywildlifephoto.com
मुंह के बल
विक्की जौरों द्वारा ली गई इस तस्वीर में जिम्बाब्वे में एक युवा हाथी मातुसाडोना राष्ट्रीय उद्यान में करीबा झील के किनारे मिट्टी में खेल रहा है. इस साल इस प्रतियोगिता की कुल कमाई का 10 प्रतिशत 'सेव वाइल्ड ओरांगुटान' नाम की एक धर्मार्थ संस्था को दिया जाएगा.
गर्मियां खत्म कब हो रही हैं? लगता है इस सवाल का जवाब हवाओं में तैर रहा है. यह तासीर इंग्लैंड के ओबान में जॉन स्पीयर्स ने ली और इसने पीपल्स चॉइस पुरस्कार जीता. (जॉन मार्शल)
तस्वीर: John Speirs/Comedywildlifephoto.com
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उनके अलावा जानीमानी गायिका 90 वर्षीया संध्या मुखोप्पाध्याय ने भी पद्मश्री ठुकराने की बात कही है. उन्होंने कहा कि 75 वर्ष के लंबे करियर के बाद अगर सरकार को लगता है कि वह पद्मश्री के लायक हैं तो उन्हें यह पुरस्कार नहीं चाहिए. टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, "वे लोग (इनकार की) वजह जानना चाहते थे तो मैंने कहा मुझे नहीं चाहिए, यह मेरे लिए अपमान है. वे यह तक नहीं जानते कि इतने सालों में मैंने क्या काम किया है. ना वे मुझे जानते हैं ना भारतीय संगीत को. इतने सालों बाद अगर अब वे मुझे पुरस्कार देना चाहते हैं जबकि मैं मंच पर खड़ी भी नहीं हो सकती, तो मैं यह पुरस्कार कैसे ले सकती हूं?"
पद्म पुरस्कारों का ऐलान करने से पहले नामांकित व्यक्तियों से सहमति ली जाती है. पहले भी कई बड़ी हस्तियां ये पुरस्कार लेने से इनकार कर चुकी हैं. 2015 में फिल्म लेखक सलीम खान ने कहा था कि उन्होंने इसकी पेशकश ठुकरा दी थी.
2005 में इतिहासकार रोमिला थापर भी यह पुरस्कार अस्वीकार कर चुकी हैं. इससे पहले 1974 में मिला अपना पुरस्कार थापर ने 1984 में तब वापस कर दिया था जब भारतीय सेना ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर गुरुद्वारे को घेर लिया था. 1984 में ही लेखक खुशवंत सिंह ने भी स्वर्ण मंदिर पर सेना की चढ़ाई का विरोध करते हुए 1974 में मिला अपना पद्म भूषण वापस कर दिया था. हालांकि 2007 में उन्हें पद्म विभूषण मिला था.
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किस-किस को मिले पुरस्कार
2022 के लिए भारत सरकार ने जिन लोगों को पद्म पुरस्कार दिए हैं उनमें देश-विदेश की कई जानी-मानी हस्तियां शामिल हैं. दिवंगत जनरल बिपिन रावत, वैक्सीन तैयार करने वाले कृष्णा इल्ला, सुचित्रा इल्ला और सायरस पूनावाला, कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद, माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्य नाडेला और गूगल प्रमुख सुंदर पिचाई का नाम इस सूची में शामिल है.
बुकर पुरस्कार को विश्व साहित्य की दुनिया का ऑस्कर भी कहा जाता है. 1997 की विजेता अरुंधति रॉय से लेकर 2020 के विजेता डगलस स्टुअर्ट तक, जानिए किस किस ने जीता इस पुरस्कार को.
तस्वीर: Martyn PICKERSGILL/thebookerprizes/AFP
अरुंधति रॉय
अरुंधति रॉय ने 1997 में अपनी किताब 'द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स' से तहलका मचा दिया था. यह केरल में राजनीतिक उथल पुथल के बीच जुड़वां भाई-बहन रहेल और एस्था के बड़े होने की कहानी है. कहानी 1960 के दशक की है और इसमें भारत की जाति व्यवस्था, धार्मिक विविधता और पेचीदा सामाजिक वर्गीकरण की तस्वीर है.
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माइकल ओंदात्ये
1992 में माइकल ओंदात्ये द्वारा लिखा गया नॉवेल 'द इंग्लिश पेशेंट' द्वितीय विश्व युद्ध के अंत होने के समय की कहानी है. यह इटली के एक विला में एक बुरी तरह से जल चुके ब्रिटिश मरीज, एक थकी हुई नर्स, एक अपंग चोर और एक सैन्य इंजीनियर के तजुर्बे की कहानी है. 1996 में इस किताब पर आधारित एक फिल्म भी बनाई गई थी, जिसने नौ ऑस्कर जीते.
तस्वीर: Imago/ZUMA Press/R. Tang
मार्गरेट ऐटवुड
कैनेडियन लेखक मार्गरेट ऐटवुड को 1985 में लिखी गई उनकी किताब 'द हैंडमेड्स टेल' के लिए सबसे ज्यादा जाना जाता है लेकिन उन्होंने सबसे पहली बार अपनी किताब 'ब्लाइंड अस्सासिन' के लिए 2000 में बुकर जीता. यह एक बुजुर्ग महिला की कहानी है जो अपनी लेखक बहन की कम उम्र में हुई रहस्मयी मौत और उसके बाद हुए विवाद के बारे में सोचती है.
तस्वीर: picture-alliance/dpa/D.Calabrese
हिलेरी मैंटेल
हिलेरी मैंटेल बुकर पुरस्कार एक नहीं बल्कि दो बार जीतने वाली पहली महिला और पहली ब्रिटिश लेखक हैं. पहले उनके नॉवेल 'वुल्फ हॉल' को बुकर मिला और फिर उसकी उत्तरकथा 'ब्रिंग अप द बॉडीज' को भी बुकर से नवाजा गया. यह इंग्लैंड के ट्यूडर काल की कहानी है जिसमें हेनरी अष्टम और उनकी पत्नी ऐन बोलिन को पुत्र ना होने की वजह से राजसिंहासन के उत्तराधिकारी को लेकर संकट खड़ा हो जाता है.
तस्वीर: AP
रिचर्ड फ्लैनगन
ऑस्ट्रेलियाई लेखक रिचर्ड फ्लैनगन की किताब 'द नैरो रोड टू द डीप नॉर्थ' को 2014 में बुकर मिला था. यह एक जापानी युद्ध बंदी की कहानी है जिसमें द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान थाईलैंड-बर्मा की मौत की ट्रेन का विवरण किया गया है.
तस्वीर: Verlag Piper
जॉर्ज सॉन्डर्स
अमेरिकी लघु कथा लेखक जॉर्ज सॉन्डर्स का पहले नॉवेल 'लिंकन इन द बार्डो' एक प्रयोगात्मक किताब थी जिसे 2017 में बुकर दिया गया. इसमें 1862 में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन वॉशिंगटन की एक कब्रिस्ता में अपने 11 साल के बेटे की लाश को देखने जाते हैं, जिसकी आत्मा अभी भी जिंदा है.
तस्वीर: picture-alliance/ZUMAPRESS/R. Tang
बर्नान्डिन एवरिस्तो
बर्नान्डिन एवरिस्तो 2019 में बुकर जीतने वाली पहली अश्वेत लेखक बनीं. अपनी किताब 'गर्ल, वुमन, अदर' में उन्होंने इंग्लैंड में 12 ऐसे लोगों के बड़े लोगों की कहानी सुनाई जिनमें अधिकांश महिलाएं थीं, अश्वेत थीं और अलग अलग पीढ़ियों और सामाजिक वर्गों से आती थीं.
तस्वीर: picture-alliance/Photoshot
डगलस स्टुअर्ट
2020 का बुकर जीतने वाली किताब 'शुग्गी बैन' को लिखने में डगलस स्टुअर्ट को 10 साल लगे और उसे 32 बार अस्वीकार भी किया गया. लेकिन 2020 में बुकर की निर्णायक मंडली को इस किताब को चुनने में सिर्फ एक घंटा लगा. यह उनका पहला नॉवेल था और 1980 में ग्लासगो में एक समलैंगिक के तौर पर बिताए गए उनके अपने जीवन पर आधारित था.
तस्वीर: Martyn PICKERSGILL/thebookerprizes/AFP
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उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को भी मरोणपरांत पद्म विभूषण दिया गया है. टाटा समूह के अध्यक्ष नटराजन चंद्रशेखर, अमेरिका में रहने वालीं शेफ मधुर जैफ्री, पैरालिंपिक जैवलिन थ्रो खिलाड़ी देवेंद्र झज्जरिया, धर्मगुरु स्वामी सचिदानंद भी पद्म भूषण पाने वालों में शामिल हैं. गायक सोनू निगम, ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने वाले नीरज चोपड़ा और जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर नजमा अख्तर को पद्म श्री से सम्मानित किया गया है.
आयरलैंड के जॉन स्कॉटस सीनियर स्कूल में संस्कृत विभाग के अध्यक्ष रटगर कोर्टेनहोर्स्ट और थाईलैंड की सिल्पाकोर्न यूनिवर्सिटी में संस्कृत विभाग के अध्यक्ष डॉ. चिरापट प्रपंदविद्या समेत दस विदेशियों को पद्म पुरस्कार दिए गए हैं. पद्म पुरस्कारों की सूची में कुल 128 नाम हैं. चार लोगों को पद्म विभूषण दिया गया है जबकि 17 लोगों को पद्म विभूषण वह बाकी को पद्म श्री से पुरस्कृत किया गया है. पुरस्कार पाने वालों में 34 महिलाएं हैं. भारत रत्न के लिए किसी नाम की घोषणा नहीं की गई.