कभी सोचा है आपने, यदि अचानक लखपति बन जाएं तो क्या करेंगे. दक्षिण कोरिया में ऐसा ही हुआ और कुछ लोगों ने मौके का फौरन फायदा उठाया. लेकिन बिटकॉइन कंपनी की आफत आ गई.
इस घटना के बाद बिटकॉइन की कीमतों में बड़ी गिरावट आई. दक्षिण कोरिया के वित्तीय नियामक ने शनिवार को आपात बैठक भी बुलाईतस्वीर: Jiri Hera/Zoonar/picture alliance
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दक्षिण कोरिया के क्रिप्टोकरेंसी प्लैटफॉर्म बिटथंब ने गलती से अपने यूजर्स को 6,20,000 बिटकॉइन भेज दिए. प्लैटफॉर्म का इरादा ऐसा करने का था नहीं, वह तो एक प्रोमोशनल ऑफर के दौरान अपने हर यूजर को 2000 वॉन भेजना चाहती थी, जिसकी कीमत भारतीय रुपये में करीब 120 रुपये के बराबर है. लेकिन प्रोफेशनल ऑफर की आपाधापी में गलती हो गई और चुनिंदा 695 यूजर्स को 2000 वॉन के बदले 2000 बिटकॉइन भेज दिए गए.
यानी जहां इरादा हर यूजर को सिर्फ 2000 वॉन देने का था, वहीं कुल चले गए 6,20,000 बिटकॉइन. इनकी कीमत करीब 37 अरब यूरो थी, यानी करीब 4000 अरब रुपये. अब ऐसे में जो होना था, वही हुआ. कुछ यूजर परेशान हुए कि आखिर ये क्या हो गया. कुछ यूजरों ने अचानक आए बिटकॉइन को फटाफट बेचने का फैसला किया और बेच भी दिया. इसकी वजह से इस डिजिटल मुद्रा की कीमत में भारी गिरावट आ गई.
शनिवार, 7 फरवरी को कंपनी ने बिटकॉइन की कीमत में आई इस अचानक गिरावट के लिए अपने ग्राहकों से माफी मांगी है. अचानक धनी बने कुछ यूजर्स द्वारा बिटकॉइन बेचे जाने की वजह से भाव में एक समय तो 17 फीसदी की गिरावट आ गई और उसकी कीमत गिर कर सिर्फ 81 मिलियन वॉन रह गई. ये भारतीय मुद्रा में करीब 50 लाख रुपये के बराबर है.
बिटकॉइन कैसे काम करता है और यह किस काम आता है
हाल में बिटकॉइन के मूल्य में काफी उतार चढ़ाव देखे गए हैं, जिसकी वजह से निवेशकों को संदेह हो गया है कि इसमें अपना पैसा डालें या नहीं. डीडब्ल्यू कोई सलाह नहीं देता लेकिन आइए आपको बताते हैं कि आखिर बिटकॉइन काम कैसे करता है.
डिजिटल मुद्रा
बिटकॉइन एक डिजिटल मुद्रा है क्योंकि यह सिर्फ वर्चुअल रूप में ही उपलब्ध है. यानी इसका कोई नोट या कोई सिक्का नहीं है. यह एन्क्रिप्ट किए हुए एक ऐसे नेटवर्क के अंदर होती है जो व्यावसायिक बैंकों या केंद्रीय बैंकों से स्वतंत्र होता है. इससे बिटकॉइन को पूरी दुनिया में एक जैसे स्तर पर एक्सचेंज किया जा सकता है. एन्क्रिप्शन की मदद से इसका इस्तेमाल करने वालों की पहचान और गतिविधियों को गुप्त रखा जाता है.
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एक रहस्यमयी संस्थापक
बिटकॉइन को पहली बार 2008 में सातोशी नाकामोतो नाम के व्यक्ति ने सार्वजनिक रूप से जाहिर किया था. यह आज तक किसी को नहीं मालूम कि यह एक व्यक्ति का नाम है या कई व्यक्तियों के एक समूह का. 2009 में एक ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर के रूप में जारी किए जाने के बाद यह मुद्रा लागू हो गई.
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कैसे मिलता है बिटकॉइन
इसे हासिल करने के कई तरीके हैं. पहला, आप इसे कॉइनबेस या बिटफाइनेंस जैसे ऑनलाइन एक्सचेंजों से डॉलर, यूरो इत्यादि जैसी मुद्राओं में खरीद सकते हैं. दूसरा, आप इसे अपने उत्पाद या अपनी सेवा के बदले भुगतान के रूप में पा सकते हैं. तीसरा, आप खुद अपना बिटकॉइन बना भी सकते हैं. इस प्रक्रिया को माइनिंग कहा जाता है.
डिजिटल बटुए की जरूरत
बिटकॉइन खरीदने से पहले आपको अपने कंप्यूटर में वॉलेट सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करना पड़ता है. इस वॉलेट में एक 'पब्लिक' चाभी होती है जो आपका पता होता है और एक निजी चाभी भी होती है जिसकी मदद से वॉलेट का मालिक क्रिप्टो मुद्रा को भेज सकता है या पा सकता है. स्मार्टफोन, यूएसबी स्टिक या किसी भी दूसरे डिजिटल हार्डवेयर का इस्तेमाल वॉलेट के रूप में किया जा सकता है.
अब बिटकॉइन से कुछ खरीदा जाए
आइए जानते हैं भुगतान के लिए बिटकॉइन का इस्तेमाल कैसे किया जाता है. मान लीजिए मिस्टर एक्स मिस वाई से एक टोपी खरीदना चाहते हैं. इसके लिए सबसे पहले मिस वाई को मिस्टर एक्स को अपना पब्लिक वॉलेट पता भेजना होगा, जो एक तरह से उनके बिटकॉइन बैंक खाते की तरह है.
ब्लॉकचेन
मिस वाई से उनके पब्लिक वॉलेट का पता पा लेने के बाद, मिस्टर एक्स को अपनी निजी चाभी से इस लेनदेन को पूरा करना होगा. इससे यह साबित हो जाता कि इस डिजिटल मुद्रा को भेजने वाले वही हैं. यह लेनदेन बिटकॉइन से रोजाना होने वाले हजारों लेनदेनों की तरह बिटकॉइन ब्लॉकचेन में जमा हो जाता है.
डिजिटल युग के खनिक
अब मिस्टर एक्स द्बारा किए हुए लेनदेन की जानकारी ब्लॉकचेन नेटवर्क में शामिल सभी लोगों को पहुंच जाती है. इन लोगों को नोड कहा जाता है. मूल रूप से ये निजी कम्प्यूटर होते हैं, जिन्हें 'माइनर' या खनिक भी कहा जाता है. ये इस लेनदेन की वैधता को सत्यापित करते हैं. इसके बाद बिटकॉइन मिस वाई के पब्लिक पते पर चला जाता है, जहां से वो अपनी निजी चाभी का इस्तेमाल कर इसे हासिल कर सकती हैं.
बिटकॉइन मशीन रूम
सैद्धांतिक तौर पर ब्लॉकचेन नेटवर्क में कोई भी खनिक बन सकता है. लेकिन अधिकतर यह प्रक्रिया बड़े कंप्यूटर फार्मों में की जाती है जहां इसका हिसाब रखने के लिए आवश्यक शक्ति हो. इस प्रक्रिया में लेनदेन को सुरक्षित रखने के लिए नए लेनदेनों को तारीख के हिसाब से जोड़ कर एक कतार में रखा जाता है.
एक विशाल सार्वजनिक बही-खाता
हर लेनदेन को एक विशाल सार्वजनिक बही-खाते में शामिल कर लिया जाता है. इसी को ब्लॉकचेन कहा जाता है क्योंकि इसमें सभी लेनदेन एक ब्लॉक की तरह जमा कर लिए जाते हैं. जैसे जैसे सिस्टम में नए ब्लॉक आते हैं, सभी इस्तेमाल करने वालों को इसकी जानकारी पहुंच जाती है. इसके बावजूद, किसने किसको कितने बिटकॉइन भेजे हैं, यह जानकारी गोपनीय रहती है. एक बार कोई लेनदेन सत्यापित हो जाए, तो फिर कोई भी उसे पलट नहीं सकता है.
बिटकॉइनों का विवादास्पद खनन
खनिक जब नए लेनदेन को प्रोसेस करते हैं तो इस प्रक्रिया में वे विशेष डिक्रिप्शन सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर नए बिटकॉइन बनाते हैं. डिक्रिप्ट होते ही श्रृंखला में एक नया ब्लॉक जुड़ जाता है और उसके बाद खनिक को इसके लिए बिटकॉइन मिलते हैं. पूरे बिटकॉइन नेटवर्क में चीन सबसे बड़ा खनिक है. वहां कोयले से मिलने वाली सस्ती बिजली की वजह से वो अमेरिका, रूस, ईरान और मलेशिया के अपने प्रतिद्वंदी खनिकों से आगे रहता है.
बिजली की जबरदस्त खपत
क्रिप्टो माइनिंग और प्रोसेसिंग के लिए जो हिसाब रखने की शक्ति चाहिए, उसकी वजह से बिटकॉइन नेटवर्क ऊर्जा की काफी खपत करता है. यह प्रति घंटे लगभग 120 टेरावॉट ऊर्जा लेते है. कैंब्रिज विश्वविद्यालय के बिटकॉइन बिजली खपत सूचकांक के मुताबिक इस क्रिप्टो मुद्रा को इस नक्शे में नीले रंग में दिखाए गए हर देश से भी ज्यादा ऊर्जा चाहिए. - गुडरून हाउप्ट
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दक्षिण कोरियाई मीडिया के अनुसार ने कहा है कि कंपनी को जैसे ही अपनी गलती का अहसास हुआ, करीब 35 मिनट के बाद प्रभावित यूजर्स को खातों को सील कर दिया गया. बिटथंब ने अपने ग्राहकों से नुकसान की भरपाई करने का वादा किया है. कंपनी का कहना है कि उसने गलती से ट्रांसफर किए गए बिटकॉइन का लगभग पूरा हिस्सा वापस ले लिया है.
लेकिन नुकसान फिर भी हुआ है. अनुमान है कि बिटथंब का कुल घाटा 1 अरब वॉन का है जो दक्षिण कोरियाई मुद्रा में करीब 13-14 बिटकॉइन की कीमत के बराबर है. कंपनी ने इस बात से इंकार किया है कि इस मामले का किसी हैकिंग या साइबर हमले से लेना देना है.
डॉनल्ड ट्रंप, उनकी पत्नी मेलानिया और परिवारिक सदस्य अपना क्रिप्टो कॉइन लॉन्च कर चुके हैं, जिससे उन्हें काफी फायदा भी हुआ हैतस्वीर: Ian Maule/AFP/Getty Images
डिजिटल करेंसी बिटकॉइन इस समय अपनी चढ़ती गिरती कीमतों के कारण काफी चर्चा में है. अपनी टैरिफ नीतियों के कारण चर्चित अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने दोबारा सत्ता में आने के बाद बिटकॉइन को काफी बढ़ावा दिया है. नवंबर 2024 में डॉनल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद पहली बार बिटकॉइन की कीमतों में इस हफ्ते काफी गिरावट आई है. शुक्रवार को बिटकॉइन की कीमत गिरकर 54 लाख रुपये रह गई थी. साल की शुरुआत से बिटकॉइन की कीमतों में 25 फीसदी की गिरावट आई है. ग्राहकों का भरोसा गिर रहा है जबकि कारोबारी विश्लेषक अमेरिका में ब्याज दर बढ़ने की संभावना और संस्थागत निवेशकों की गिरती दिलचस्पी को इसका कारण बताते हैं.