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नाच गाकर भी बचाई जा सकती है धरती

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५ फ़रवरी २०२६

यूगांडा की कनूंगू पहाड़ियों में जब ढोल की आवाज़ गूंजती है, तो स्थानीय लोग समझ जाते हैं कि अब प्रकृति के नाम पर थिरकने का समय है. यहां यह ताल सिर्फ संगीत नहीं, बल्कि धरती को फिर से हरा‑भरा बनाने का संदेश है. पर्वतीय इलाकों में गलत खेती-बाड़ी से बिगड़े ईको‑सेंसिटिव इलाकों को बहाल करने के लिए ढोल की यही थाप लोगों को एकजुट कर रही है.

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