मोदी के भाषण के साथ ब्रिक्स सम्मेलन का समापन
१३ सितम्बर २०२६
रविवार, 13 सितंबर को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मलेन के आखिरी दिन भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण के साथ सम्मलेन का समापन किया. इस दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान समेत ब्रिस्क देशों के कई और नेता मौजूद थे.
मोदी ने कहा, “आज दुनिया में तनाव लगातार बढ़ रहे हैं और इसका आम लोगों की जिंदगी पर बहुत नकारात्मक और व्यापक असर पड़ रहा है. महामारी, जलवायु आपदाओं और सप्लाई चेन में रुकावटों ने दिखाया है कि एक-दूसरे से जुड़ी दुनिया में कोई भी संकट सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता.”
साथ ही उन्होंने ग्लोबल साउथ के देशों के बीच सहयोग और एक-दूसरे के समर्थन को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया. मोदी ने तकनीक और खनिजों के हथियार के रूप में इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि इनका गलत इस्तेमाल दुनिया के विकास को नुकसान पहुंचा सकता है.
उन्होंने आगे बताया कि ब्रिक्स देश संक्रामक बीमारियों के लिए एक साझा चेतावनी प्रणाली बनाने पर सहमत हुए हैं, जिससे भविष्य में महामारी से निपटने में मदद मिलेगी.
सम्मलेन के पहले ही दिन देखने को मिले दो अहम पल
सम्मलेन के पहले ही दिन दो सबसे महत्वपूर्ण क्षण देखने को मिले. पहला, 12 सितंबर को नई दिल्ली घोषणा-पत्र 2026, जिसे सभी 11 सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया. इससे पहले मई में ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों की बैठक में संयुक्त बयान जारी नहीं हो पाया था. इसकी वजह ईरान युद्ध को लेकर सदस्य देशों के बीच मतभेद थे.
दूसरा, 12 सितंबर को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की. उन्होंने शनिवार को भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए चीन के समर्थन और सहयोग के लिए धन्यवाद दिया.
चीन और भारत के बीच हुई बैठक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच सम्मेलन से इतर शनिवार को नई दिल्ली में द्विपक्षीय बैठक हुई. बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता भारत-चीन संबंधों के लिए बेहद जरूरी है. भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, मोदी ने दोनों देशों के बीच सीमा से जुड़े मौजूदा समझौतों और सहमतियों का पालन करने की जरूरत पर जोर दिया.
शी जिनपिंग ने कहा कि चीन और भारत के बीच कई महत्वपूर्ण सहमतियां बनी हैं. चीन हमेशा भारत के साथ अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से देखता रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों की परिस्थितियां अलग हैं, लेकिन वे एक-दूसरे की अच्छी बातों से सीख सकते हैं, सहयोग कर सकते हैं और साझा विकास की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं.
पहले दिन और क्या हुआ
वहीं भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए प्रतिबद्ध है. किसी भी विवाद और संघर्ष का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए होना चाहिए. यह मुलाकात पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच हुई. ईरान को लेकर अमेरिका की सैन्य कार्रवाई और उस पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है.
ईरान और इस्राएल-अमेरिका युद्ध पर कहां खड़े हैं ब्रिक्स देश
ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान अमेरिका द्वारा विभिन्न देशों पर लगाए गए प्रतिबंधों और डॉलर पर निर्भरता पर भी बात हुई. ब्रिक्स ने अमेरिकी डॉलर को सीधे चुनौती देने के बजाय उसकी वैश्विक पकड़ को कम करने की दिशा में कदम बढ़ाया है. इन देशों ने किसी नई साझा मुद्रा या डॉलर के विकल्प को अपनाने की बात नहीं कही. इसके बजाय, समूह ने आपसी व्यापार और निवेश में स्थानीय मुद्राओं के ज्यादा इस्तेमाल और सीमा-पार भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ने का समर्थन किया है.