मुस्लिम दुकानदार को बचाने वाले दीपक के खिलाफ हुई एफआईआर
समीरात्मज मिश्र
३ फ़रवरी २०२६
उत्तराखंड के कोटद्वार में मुस्लिम दुकानदार को बचाने आए युवक दीपक के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है. उनके खिलाफ बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन भी किया. वहीं, दीपक का कहना है कि वे नफरत के आगे नहीं झुकेंगे.
यह फोटो किश्तवाड़ की है जिसमें बजरंग दल के कार्यकर्ता पाकिस्तान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते दिख रहे हैं. कोटद्वार कस्बे में हुई घटना में इसी संगठन के युवकों का नाम आया हैतस्वीर: Gourav/ANI
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उत्तराखंड में पौड़ी जिले के कोटद्वार कस्बे में एक मुस्लिम व्यक्ति की कपड़े की दुकान के नाम पर हिन्दू संगठन के कुछ युवकों ने आपत्ति जताई, नाम बदलने का दबाव बनाया लेकिन मुस्लिम दुकानदार के समर्थन में आए स्थानीय लोगों ने जब इसका विरोध किया तो इस मामले ने तूल पकड़ लिया.
घटना की शुरुआत 26 जनवरी को होती है, जब पूरा देश संविधान लागू होने का उत्सव यानी गणतंत्र दिवस मना रहा था. कोटद्वार कस्बे में पिछले तीस साल से ‘बाबा स्कूल ड्रेस' नाम से कपड़ों की दुकान चलाने वाले वकील अहमद की दुकान पर बजरंग दल के कुछ लोग आए और 75 वर्षीय वकील अहमद से दुकान के नाम से ‘बाबा' शब्द हटाने का दबाव बनाने लगे.
कोटद्वार कस्बे में ही एक जिम चलाने वाले दीपक कुमार कश्यप वकील अहमद के समर्थन में खड़े हो गए. उस वक्त तो पुलिस ने किसी तरह स्थिति को संभाल लिया लेकिन 31 जनवरी को हालात तब बिगड़ गए जब दीपक के खिलाफ बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया.
भारत पाकिस्तान की दुश्मनी
भारत के बंटवारे के साथ 1947 में जब से पाकिस्तान बना है और तब से ही दोनों के बीच बैर का सिलसिला जारी है. इन तस्वीरों में देखिए दोनों देशों की रंजिश की कहानी.
तस्वीर: AP Photo/picture alliance
1947 में आजादी के साथ विभाजन
1947 में भारत आजाद हुआ लेकिन विभाजन की कीमत पर. भारत और पाकिस्तान दो देश बन गए. पाकिस्तान मुसलमानों का देश बना जबकि भारत ने धर्मनिरपेक्षता को चुना. विभाजन के समय करीब डेढ़ करोड़ लोग विस्थापित हुए. इस दौरान हुए दंगों में दोनों ओर के हजारों लोगों की जान गई.
तस्वीर: AP Photo/picture alliance
1947 की लड़ाई
विभाजन के कुछ ही महीनों बाद दोनों देशों के बीच कश्मीर में लड़ाई छिड़ गई. हिंदू राजा और मुसलमान बहुसंख्यक आबादी वाले कश्मीर पर नियंत्रण के लिए दोनों देश भिड़ गए. कश्मीर पर पहले पाकिस्तान की ओर से हमला हुआ और तब राजा हरि सिंह ने भारत में कश्मीर के विलय के कागजात पर दस्तखत कर दिए. 1948 में युद्ध खत्म होने के पहले दोनों तरफ के हजारों लोगों की मौत हुई.
तस्वीर: Max Desfor/AP Photo/picture alliance
कश्मीर का बंटवारा
संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में हुए युद्धविराम ने कश्मीर को भारत और पाकिस्तान के बीच बांट दिया. उस वक्त वादा किया गया था कि कश्मीर में जनमत संग्रह के जरिए यह तय होगा कि कश्मीर किधर जाएगा. यह जनमतसंग्रह कभी नहीं हुआ. भारत का कहना है कि कश्मीर के लोगों ने चुनाव में हिस्सा लेकर अपनी मंशा जता दी है.
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1965 की लड़ाई
साल 1965 में दोनों देश एक बार फिर भिड़ गए. हजारों लोगों की मौत के बाद सोवियत संघ और अमेरिका की मध्यस्थता में संघर्षविराम हुआ. उसके बाद कई महीनों की बातचीत से ताशकंद समझौता हुआ. दोनों देशों ने युद्ध के दौरान कब्जाई गई एक दूसरे की जमीन वापस कर दी और सेना को पीछे खींच लिया.
तस्वीर: AP Photo/picture alliance
1971 की लड़ाई
पूर्वी पाकिस्तान में विद्रोह के दौरान भारत ने बंगालियों का साथ दिया. इस जंग में पाकिस्तान की सेना को हार का मुंह देखना पड़ा. सिर्फ इतना ही नहीं उसका पूर्वी हिस्सा आजाद हो कर बांग्लादेश के नाम से एक नया देश बन गया.
तस्वीर: AP/picture alliance
1972 का शांति समझौता
भारत और पाकिस्तान के बीच 1972 में एक शांति समझौता हुआ. इसके तहत कश्मीर में संघर्षविराम की रेखा को नियंत्रण रेखा घोषित किया गया. दोनों देशों ने इस मोर्चे पर बड़ी संख्या में अपनी सेनाएं तैनात कर दी.
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1989 का संघर्ष
पाकिस्तान की मदद से कश्मीर में भारत के खिलाफ उग्रवादी आंदोलन की शुरुआत हुई. इसी दौरान कश्मीरी पंडितों को वहां से भागने पर मजबूर किया गया. भारत ने इसका सख्ती से जवाब दिया. इसका नतीजा दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और सैन्य संघर्ष के रूप में सामने आया.
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1999 का कारगिल युद्ध
पाकिस्तानी सैनिकों और कश्मीरी लड़ाकों ने भारत की सीमा में हिमालय की कई चोटियों पर कब्जा कर लिया. भारत ने टैंक और हवाई बमबारी से जवाब दिया. 10 हफ्ते की लड़ाई में हजारों सैनिकों की मौत हुई. इसके साथ ही दोनों देशों के बीच परमाणु युद्ध का खतरा उभर आया. अमेरिका के दखल से यह लड़ाई बंद हुई.
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2008 में मुंबई पर आतंकवादी हमला
पाकिस्तान से आए 10 आतंकवादियों ने मुंबई शहर में खूब तांडव मचाया. वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों समेत 250 से ज्यादा लोगों की मौत हुई. भारतीय सुरक्षाबलों की कार्रवाई में 9 आतंकवादी मारे गए जबकि एक आतंकवादी को जिंदा पकड़ कर उस पर मुकदमा चला. बाद में अदालत ने उसे मौत की सजा दी. पाकिस्तान इस हमले के सबूत मांगता रहा लेकिन दोषियों पर कभी कार्रवाई नहीं हुई.
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पहलगाम में सैलानियों पर हमला
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में सैलानियों पर हमला करके आतंकवादियों ने 26 लोगों की हत्या कर दी. उसके बाद से दोनों देशों के बीच तनाव फिर चरम पर है. भारत ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि रोकने की घोषणा की और फिर पाकिस्तानी इलाकों पर मिसाइलों से हमला किया है.
तस्वीर: ANI
2016 की सर्जिकल स्ट्राइक
भारतीय कश्मीर में सेना के अड्डे में घुसे आतंकवादियों के हमले में कम से कम 18 सैनिकों की मौत हुई. भारत ने इसका जवाब सर्जिकल स्ट्राइक से दिया और कई संदिग्धों को मार गिराया. पाकिस्तान सर्जिकल स्ट्राइक होने से इनकार करता रहा. हालांकि इस दौरान दोनों देशों के बीच सीमा पर काफी तनाव फैला रहा.
तस्वीर: Jaipal Singh/dpa/picture alliance
पाकिस्तानी कश्मीर पर हमला
2019 में भी दोनों देश युद्ध के करीब आ गए थे जब कश्मीरी चरमपंथियों ने विस्फोटकों से भरी कार भारतीय सुरक्षा बलों को ले जा रही बस से टकरा दी. इस हमले में 40 सैनिक मारे गए. भारत ने इसके बाद पाकिस्तान के इलाके में आतंकवादी शिविरों को निशाना बनाया. इस दौरान पाकिस्तान ने भारत के एक लड़ाकू विमान को मार गिराया और पायलट को गिरफ्तार कर लिया. बाद में पायलट को छोड़ दिया गया.
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क्याथापूरामामला?
पौड़ी जिले के एसएसपी सर्वेश पंवार ने घटना के बारे में डीडब्ल्यू को बताया, "कोटद्वार में दुकान के नाम को लेकर 26 जनवरी को कुछ विवाद हुआ था. उसके बाद शनिवार को कुछ लोग देहरादून से आए थे. उस दिन मुस्लिम दुकानदार के समर्थन में जिस युवक ने विरोध जताया था, उसके विरोध में ये लोग पहुंचे थे. पुलिस ने मामले में खुद संज्ञान लेते हुए देहरादून से आए कुछ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. क्योंकि इन्होंने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की थी. इसके अलावा 'बाबा गारमेंट्स' के दुकानदार की शिकायत पर भी एक मुकदमा दर्ज किया गया है.”
लेकिन रविवार को पुलिस ने इस मामले में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं की शिकायत पर वकील अहमद का बचाव करने वाले जिम संचालक दीपक कुमार और उनके साथी विजय रावत के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की. लेकिन दीपक कुमार और उनके साथी के खिलाफ दर्ज एफआईआर का काफी विरोध हो रहा है. 'उत्तराखंड इंसानियत मंच' और कुछ अन्य सामाजिक संगठन से जुड़े लोगों ने इसका विरोध किया और इस बारे में उत्तराखंड के डीआइजी (लॉ एंड ऑर्डर) धीरेंद्र गुंज्याल से मुलाकात कर मुकदमा वापसी की मांग की.
मंच के संयोजक डॉक्टर रवि चोपड़ा ने मीडिया को बताया कि दीपक कुमार के खिलाफ दर्ज मुकदमा पूरी तरह से झूठा है. उनका कहना था, "इसे वापस लिया जाना चाहिए. दीपक ने जो काम किया, वह भाईचारे को बढ़ाता है और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करता है. उसके खिलाफ मुकदमा किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.”
दरअसल, इस मामले में घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिसमें वकील अहमद को बचाते हुए जब दीपक कुमार से बजरंग दल के लोगों ने पूछा कि तुम कौन हो? इस पर दीपक कुमार ने जवाब दिया- "मेरा नाम मोहम्मद दीपक है.”
क्या कहती है उत्तराखंड की समान नागरिक संहिता
समान नागरिक संहिता दशकों से राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी के पुराने चुनावी वादों में शामिल रही है. उत्तराखंड में बीजेपी की सरकार इस पर कानून ले आई है. जानिए क्या प्रावधान हैं उत्तराखंड के कानून में.
तस्वीर: Hindustan Times/IMAGO
दशकों पुराना मुद्दा
राम मंदिर, धारा 370 और समान नागरिक संहिता या यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) तीन ऐसे मुद्दे हैं जो दशकों से बीजेपी के चुनावी घोषणा पत्र का हिस्सा रहे हैं. माना जाता है कि इन तीनों को सबसे पहले 1989 में बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में शामिल किया था.
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क्या है यूसीसी
समान नागरिक संहिता मूल रूप से एक ऐसी परिकल्पना है जिसके तहत अलग अलग समुदायों की मान्यताओं के अनुरूप बनाए गए पर्सनल लॉ या फैमिली लॉ को हटा दिया जाएगा और सबको एक ही कानून का पालन करना होगा. ये पर्सनल लॉ विवाह, तलाक, उत्तराधिकार जैसे जटिल विषयों पर बनाए गए थे ताकि समुदायों को उनके धर्म और उनकी मान्यताओं के आधार पर इन क्षेत्रों में झगड़ों के समाधान का अधिकार रहे.
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उत्तराखंड का कानून
रॉयटर्स समाचार एजेंसी के मुताबिक उत्तराखंड के कानून के तहत राज्य में बहुविवाह प्रतिबंधित हो जाएगा. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण, 2019 के मुताबिक भारत में 1.9 प्रतिशत मुस्लिम पुरुषों, 1.3 हिंदू पुरुषों और दूसरे समुदायों के 1.6 पुरुषों की एक से ज्यादा पत्नियां थीं. ये 2011 में ली गई मिजोरम के जियोना आर के परिवार की तस्वीर है, जिनकी 39 पत्नियां थीं.
तस्वीर: Adnan Abidi/Reuters/IMAGO
बराबर हिस्सा
नए कानून के तहत राज्य में बेटों और बेटियों को पैतृक धन-संपत्ति में बराबर हिस्सा देना होगा. इसके अलावा अविवाहित दंपतियों की संतानों, गोद लिए गए बच्चों और सरोगेसी से पैदा हुए बच्चों को बराबर अधिकार होंगे.
तस्वीर: Frederic Soreau/IMAGO
शादी की उम्र
लड़कियों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु सीमा 18 साल और लड़कों के लिए 21 साल रखी गई है.
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तलाक में भी बराबरी
नए कानून के तहत उत्तराखंड में तलाक के मामलों में भी पुरुषों और महिलाओं को एक जैसे अधिकार होंगे.
तस्वीर: Ingrid Balabanova/Zoonar/picture alliance
पक्ष और विपक्ष
हिन्दुओं, मुसलमानों, ईसाइयों, सिखों, पारसियों और यहूदियों, सभी के अपने अपने फैमिली लॉ हैं. बीजेपी का मानना है कि पर्सनल लॉ एक देश की भावना जगाने की राह में अवरोधक हैं. यूसीसी के आलोचकों का कहना है कि इतनी विविधताओं वाले देश में ऐसा कानून लाना अलोकतांत्रिक है.
तस्वीर: AP Photo/picture alliance
विधि आयोग ने ठुकरा दिया था
2018 में 21वें विधि आयोग ने यूसीसी के प्रस्ताव का निरीक्षण किया था और कहा था कि "इस समय यह देश के लिए ना तो जरूरी है और ना वांछनीय." हालांकि विधि आयोग एक बार फिर यूसीसी के प्रस्ताव पर काम कर रहा है.
तस्वीर: Aamir Ansari/DW
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राहुल गांधी ने किया समर्थन
वायरल वीडियो में दीपक और उनके साथी वकील अहमद के बचाव में ये कहते हुए सुने जा सकते हैं कि ‘इनकी दुकान तीस साल से यहां है और दुकान का यही नाम है. आपके कहने से क्या नाम बदल देंगे?'
दरअसल, बजरंग दल के सदस्यों को इस बात पर आपत्ति थी कि मुस्लिम व्यक्ति ने अपनी दुकान का नाम 'बाबा स्कूल ड्रेस' क्यों रखा है? उन्हें इस नाम से इसलिए आपत्ति थी क्योंकि यह नाम कोटद्वार के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर सिद्धबली बाबा के नाम से मिलता-जुलता है और यह भ्रम पैदा कर सकता है.
यह मामला तब और सुर्खियों में आया जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर दीपक कुमार की तारीफ करते हुए लिखा, "उत्तराखंड के दीपक भारत के हीरो हैं. दीपक संविधान और इंसानियत के लिए लड़ रहे हैं, उस संविधान के लिए जिसे बीजेपी और संघ परिवार रोज रौंदने की साजिश कर रहे हैं. वे नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान का जीवित प्रतीक हैं. ”
पुलिसपर क्या लगेआरोप
पुलिस और प्रशासन स्थिति को संभालने का दावा भले ही कर रहे हैं लेकिन दीपक कुमार ने प्रशासन पर एकतरफा रवैया अपनाने का आरोप लगाया है. सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए वीडियो में दीपक कुमार कहते हैं, "मेरे जिम में शनिवार को सौ से ज्यादा लोग पहुंचकर हंगामा करने लगे. प्रदर्शनकारी कई गाड़ियों में हथियार लेकर पहुंचे हुए थे. पुलिस ने मुझे तो वहां से हटा दिया लेकिन बजरंग दल के लोग वहां घंटों हंगामा करते रहे.”
उधर एक फरवरी यानी रविवार को पुलिस ने इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए फ्लैग मार्च निकाला. लेकिन दीपक कुमार का कहना है कि उन्हें अभी भी धमकियां मिल रही हैं. एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा, "देश को प्यार की जरूरत है, नफरत की नहीं. आप जितनी चाहें नफरत फैला लें, लेकिन प्यार बांटना बहुत बड़ी बात है.”
इस बीच, घटना के बाद से ही दीपक का जिम भी बंद पड़ा है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान भी हो रहा है. डीडब्ल्यू से बातचीत में दीपक कुमार का कहना था, "जिम कई दिनों से बंद है. जिम किराए की जगह पर है जिसका हर महीने करीब 50 हजार रुपये किराया जाता है. तीन-चार दिन में ही बड़ा नुकसान हो गया है. घर वाले भी बहुत परेशान हैं. समझ में नहीं आता कि किसी की मदद करके, इंसानियत की बात करके हमने क्या गुनाह कर दिया है. लेकिन कुछ भी हो जाए, मैं नफरत के आगे नहीं झुकूंगा.”
स्थानीय लोग कर रहे समर्थन
वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम घटना के बाद कोटद्वार पहुंचे थे. सोमवार को उन्होंने तमाम लोगों से बातचीत की. डीडब्ल्यू से बातचीत में अजीत अंजुम बताते हैं कि फिलहाल तो हालात सामान्य हैं और पुलिस ने सख्ती भी कर रखी है लेकिन जिस तरह से उत्तराखंड जैसे शांत राज्य में आए दिन ऐसी घटनाएं हो रही हैं, वो बहुत गंभीर हैं.
अजीत अंजुम कहते हैं, "अच्छी बात यह है कि कोटद्वार में आम लोग दीपक के समर्थन में हैं और दीपक जैसे लोगों की तारीफ कर रहे हैं. हंगामा करने वाले लोग बाहर से आए थे- देहरादून, हरिद्वार इत्यादि जगहों से. उन्हीं लोगों ने दीपक के खिलाफ एफआईआर भी कराई है लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि यह तो नाइंसाफी हुई. चूंकि स्थानीय लोगों में से ज्यादातर कारोबारी लोग हैं, खुलकर बोलने से बच रहे हैं क्योंकि उन्हें डर है कि बजरंग दल के लोग कहीं फिर सैकड़ों की संख्या में आकर हंगामा न करें. लेकिन ऐसी सांप्रदायिक घटना का समर्थन तो कतई नहीं करते.”
उत्तराखंड में पिछले कुछ समय से ऐसी घटनाएं काफी बढ़ी हैं. दो महीने पहले पूर्वोत्तर के एक छात्र की हत्या हो गई थी और उसके बाद देहरादून के विकास नगर में कश्मीरी युवक पर जानलेवा हमला हुआ था.