नई दिल्ली के कई इलाकों में एक्यूआई 284 के पार पहुंच चुका है. दिवाली के बाद वायु प्रदूषण का स्तर शहर और बढ़ने की आशंका है.
अनुमान जताया गया है कि दिल्ली में अगले कुछ दिनों तक प्रदूषण की स्थिति ऐसी ही बनी रहेगीतस्वीर: ANI
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दिवाली से पहले नई दिल्ली में स्मॉग की वापसी हो गई है. दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों को स्मॉग की चादर ने ढक लिया है. दिवाली से पहले ही राजधानी दिल्ली की हवा 'खराब' श्रेणी में पहुंच चुकी है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक दिल्ली के कुछ इलाकों में एक्यूआई 284 के आंकड़े तक जा पहुंचा.
हालांकि, मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक रविवार को आसमान साफ रहने की उम्मीद है. जबकि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक स्थिति ज्यादा गंभीर है. ये रिपोर्ट बताती हैं कि दिल्ली के कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में है. वजीरपुर, बवाना जैसे इलाकों में एक्यूआई 300 के पार चला गया है. वहीं, आनंद विहार इलाके में एक्यूआई 426 दर्ज किया गया.
दिल्ली और एनसीआर के कई इलाकों में दिवाली से पहले ही हवा में प्रदूषण का स्तर बेहद खराब स्तर तक पहुंच गया है.तस्वीर: ANI
क्या ग्रीन पटाखों से कम होगा प्रदूषण?
इस साल सुप्रीम कोर्ट की तरफ से एक निर्धारित समय के लिए ग्रीन पटाखे जलाने की इजाजत मिलने के बाद पटाखों के कारण भी हवा की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है. इस बार कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया है कि वह पेट्रोलिंग टीमें तैनात करे और पटाखे फोड़ने के लिए बनाए गए नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें.
हालांकि, पहले बैन के बावजूद भी दीवाली के मौके पर दिल्ली में पटाखे जलाए जाते रहे हैं. पर्यावरणविद् इस बात पर संशय जताते रहे हैं कि ग्रीन पटाखे, किसी भी तरह पर्यावरण के अनुकूल हैं. उनका कहना है कि ग्रीन पटाखे भीस्वास्थ्य को काफी नुकसान पहुंचाते हैं.
हवा की खराब होती गुणवत्ता से निपटने के लिए नई दिल्ली में कई जगह पानी का छिड़काव भी शुरू कर दिया गया है.तस्वीर: ANI
खतरनाक स्तर पर पहुंचे पीएम 2.5 के कण
करीब 3 करोड़ की आबादी वाला शहर नई दिल्ली दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में टॉप पर रहता है. सर्दियों से ठीक पहले यहां की हवा में पीएम 2.5 के कण विश्व स्वास्थ्य संगठन की तय की गई सीमा से करीब 60 गुना अधिक तक बढ़ जाते हैं. हवा की गुणवत्ता जांचने वाली अंतरराष्ट्रीय कंपनी आईक्यू एयर के मुताबिक बीते बुधवार को ही नई दिल्ली में पीएम 2.5 के कण 75 पर पहुंच गए थे.
दिल्ली को कब मिलेगी स्मॉग से राहत?
दिल्ली में इस हफ्ते स्मॉग की एक घनी चादर छा गई और पहले से खराब हवा की गुणवत्ता काफी गिर गई. जानिए क्या है इस समस्या के जड़ में.
तस्वीर: Anushree Fadnavis/REUTERS
कितना बुरा था स्मॉग
13 और 14 नवंबर को दिल्ली एनसीआर में ऐसा स्मॉग देखने को मिला जिसे कहीं "घना" तो कहीं "बहुत घना" श्रेणी में डाला गया. "घना" श्रेणी में सिर्फ 50 मीटर से 200 मीटर तक दिखाई देता है और "बहुत घना" श्रेणी में 50 मीटर से भी कम. 13 नवंबर को तो दिल्ली हवाई अड्डे समेत कई स्थानों पर कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था. 14 नवंबर को फॉग थोड़ा कम हुआ और करीब 300 मीटर तक दिखाई देना शुरू हुआ.
तस्वीर: Anushree Fadnavis/REUTERS
कैसे बना स्मॉग?
अधिकारियों ने इसके लिए मौसम के हालात को जिम्मेदार ठहराया, जैसे ज्यादा ह्यूमिडिटी यानी हवा में नमी का होना. इसकी वजह से धुंध की छोटी छोटी बूंदें बन जाती हैं. इसके अलावा अधिकारियों के मुताबिक हवा के बहने की गति भी कम थी और न्यूनतम तापमान में भी गिरावट आ गई थी. 12 नवंबर को न्यूनतम तापमान 17.9 डिग्री सेल्सियस था, जो 14 नवंबर को गिर कर 16.1 पर पहुंच गया था.
तस्वीर: ARUN SANKAR/AFP/Getty Images
क्या प्रदूषण भी एक वजह थी?
अधिकारियों का कहना है कि प्रदूषण ने भी इस स्थिति में योगदान दिया था और स्विस संस्था आईक्यूएयर के सूचकांक में 13 नवंबर को दिल्ली दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी बन गई थी. इस दिन शहर की वायु गुणवत्ता इस मौसम में पहली बार "गंभीर" श्रेणी में पहुंच गई थी, जिसका मतलब होता है सूचकांक पर 400 से भी ज्यादा का स्कोर. 50 से नीचे अच्छा स्कोर माना जाता है.
तस्वीर: Anushree Fadnavis/REUTERS
क्या स्मॉग से सिर्फ दिल्ली प्रभावित थी?
घना स्मॉग पंजाब और उत्तर प्रदेश समेत उत्तर भारत के अन्य इलाकों में भी देखने को मिला. भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में भी इसी तरह के हालात हैं.
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क्या दिल्ली की हालत जल्द सुधरेगी?
अनुमान है कि 15 नवंबर को भी दिल्ली का प्रदूषण "गंभीर" श्रेणी में ही रहेगा, लेकिन उम्मीद है कि उसके बाद हालत में सुधार होगा और प्रदूषण "बहुत खराब" श्रेणी में पहुंच जाएगा, यानी सूचकांक पर 300 से 400 के बीच में. हवा की गति भी बढ़ने का अनुमान है.
अधिकारियों को उम्मीद है कि हवा की रफ्तार बढ़ने और वायु प्रदूषण की स्थिति सुधरने से दिल्ली का स्मॉग छंट जाएगा और हालात सुधरेंगे. हालांकि ऐसा हर साल होता है और सर्दियों में दिल्ली की हवा के इस कदर खराब हो जाने का कोई टिकाऊ समाधान अभी तक सामने नहीं आया है. सीके/एके (रायटर्स)
आईक्यू एयर के ही मुताबिक दिल्ली की हवा की गुणवत्ता 2024 के मुकाबले और खराब हुई है. हालात ऐसे हैं कि अच्छे मौसम वाले दिनों में भी दिल्ली में प्रदूषण स्तर बढ़ रहा है. खासकर सर्दियों में ऐसा हो रहा है. कंपनी के मुताबिक दिल्ली के प्रदूषण के पीछे कई स्थानीय और क्षेत्रीय वजहें जिम्मेदार हैं. गाड़ियों और कारखानों से होने वाला उत्सर्जन और निर्माण कार्य शहरी प्रदूषण को बढ़ाने के जिम्मेदार हैं.
बढ़ते स्मॉग और प्रदूषण को देखते हुए इंडिया गेट के आस पास पानी का छिड़काव भी शुरू कर दिया गया है. लेकिन मौसम को देखते हुए संभव है कि दिल्ली में स्मॉग की यह स्थिति अगले कुछ दिनों तक बनी रहेगी.