अमेरिका में बाल यौन शोषण के कानून पर बहस छिड़ी हुई है. एरिजोना सुप्रीम कोर्ट ने डायपर बदलने की तुलना बच्चों के यौन शोषण से की है. हाल ही में यौन शोषण के एक मुकदमे के दौरान कोर्ट ने ऐसी टिप्पणी की. हालांकि इस मामले की सुनवाई कर रहे दो जजों की राय बाकियों से अलग थी. उन्होंने लिखा कि बच्चों के यौन शोषण को लेकर बनाया गया कानून स्पष्ट नहीं है. इस कानून के मुताबिक ऐसा कोई भी काम यौन शोषण है जिसमें बच्चों के यौनांग से संपर्क होता है. अगर ऐसा जानबूझ कर किया जाता है तो व्यक्ति दोषी होगा भले ही उसकी मंशा कैसी भी हो.
फैसले से असहमत जज ने कहा कि इसका मतलब यह हुआ कि मां-बाप का अपने बच्चों के डायपर बदलना भी यौन शोषण माना जाएगा और नहलाना भी. हालांकि व्यवहारिकता में ऐसा होगा नहीं कि किसी माता-पिता पर डायपर बदलने के लिए या बच्चे को नहलाने के लिए यौन शोषण का मुकदमा किया जाए. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद लोगों के बीच जबरदस्त प्रतिक्रिया हुई जो सोशल मीडिया पर भी दिखी.
तस्वीरों: छह दिल और 50 उंगलियां
ऑस्ट्रेलिया की एक महिला ने पांच बच्चों के साथ अपनी बेहद प्यारी तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट कीं और देखते ही देखते ये तस्वीरें वायरल हो गईं. ये पांचों बच्चे इसी महिला के हैं.
तस्वीर: Erin Elizabeth Photographyऑस्ट्रेलिया की किम टुची ने जनवरी में 5 बच्चों को एक साथ जन्म दिया. अब इनकी बहुत प्यारी तस्वीरें फेसबुक पर पोस्ट हुईं और दुनियाभर में फैल गईं. लेकिन टुसी को आपकी मदद चाहिए.
तस्वीर: Erin Elizabeth Photographyपर्थ की रहने वाली किम टुची ने जनवरी में पांच बच्चों को एक साथ जन्म दिया था. चार लड़कियां और एक लड़का. टुची 26 साल की हैं.
तस्वीर: Erin Elizabeth Photographyइस डिलीवीरी के लिए 50 डॉक्टरों और नर्सों की टीम ने खूब मेहनत की. साढ़े पांच करोड़ में एक बार ऐसा होता है कि पांच बच्चे एक साथ जन्म लें.
तस्वीर: Erin Elizabeth Photographyस्थानीय फोटोग्राफर एरिना एलिजाबेथ ने इन बच्चों को तस्वीरों में उतारा. टुची ने लिखा कि 50 उंगलियां, 6 दिल, धड़कते एक साथ. टुची के तीन बच्चे पहले से हैं. नौ साल का एक बेटा है और दो बेटियां हैं 2 और 4 साल कीं.
तस्वीर: Erin Elizabeth Photographyशुरू में टुची को डॉक्टरों ने कहा था कि पांच में से 2 ही बच्चों को बचाना चाहिए और बाकी तीन को टर्मिनेट कर देना चाहिए क्योंकि सेहत को खतरा है. लेकिन टुची राजी नहीं हुईं.
तस्वीर: Erin Elizabeth Photographyअब टुची को एक वैन चाहिए जिसमें ये सारे बच्चे एक साथ लाए-ले जाए जा सकें. इसी के लिए वह फंड जुटाने की कोशिश कर रही हैं. आप भी उनके फेसबुक पेज पर जाकर मदद कर सकते हैं.
तस्वीर: Erin Elizabeth Photography समस्या यह है कि एरिजोना के बाल यौन शोषण विरोधी कानून में स्पष्टता नहीं है. कानून बस इतना कहता है कि 15 साल से कम उम्र के बच्चे के साथ किसी भी तरह का यौन संपर्क अपराध है. अब माता-पिता के सामने समस्या यह है कि उनके बच्चों की देखभाल करने वाले लोग मसलन आया या किंडरगार्टन के कर्मचारी कहीं दोषी तो नहीं मान लिए जाएंगे. एक साल के बच्चे की मां फीनिक्स की तबिथा शमाल्ज कहती हैं, ”किंडरगार्टन में मेरे बच्चों की देखभाल करने वाले अगर कानून का पालन करने के चक्कर में मेरे बच्चे की अनदेखी करने लगे तो मैं तो कहूंगी ऐसा कानून मानो ही मत.”
वैसे सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा है कि कानून बनाते वक्त विधायिका की ऐसी कोई मंशा नहीं रही होगी कि रोजमर्रा के कामों को अपराध घोषित कर दिया जाए. लेकिन फैसले के बाद लोगों के बीच तनाव ऐसा था कि फीनिक्स के मुख्य अधिवक्ता को बयान जारी करना पड़ा. अटॉर्नी बिल मॉन्टगोमरी ने कहा, "यह तो पूरी तरह अपमानजनक है कि बच्चों के यौन शोषण के आरोपों की जांच करते वक्त कोई वकील रोजमर्रा के कामों और यौन शोषण में फर्क नहीं कर पाएगा.”
अपने बच्चों को ऐसा ना करने दें
सोडा पीने में बच्चों का मजा तो आता है. पर आपको सख्ती बरतनी ही होगी. ये लजीज, मीठे और तरोताजा कर देने वाले ड्रिंक्स बच्चों को क्या नुकसान पहुंचा सकते हैं, माता-पिता के लिए उन्हें जानना फायदेमंद होगा.
तस्वीर: Colourbox/Monkey Business Imagesसोडा ड्रिंक्स की फितरत अफीम या गांजे जैसी ही होती है. इसकी लत लग जाती है. इसका असर मस्तिष्क पर वैसा ही होता है, जैसा नशीली दवाओं का.
तस्वीर: Fotolia/ Nitrसोडा ड्रिंक्स में एक भी ऐसी चीज नहीं होती जो सेहत को जरा सा भी फायदा पहुंचाती हो. हां, नुकसानदायक चीजों की भरमार है. जैसे इसे पीने से भूख मरती है.
तस्वीर: Imago/Indiapictureकिशोरावस्था तक मस्तिष्क का विकास जारी रहता है. लेकिन सोडा पीने से ब्रेन में ऐसे केमिकल्स बनते हैं जो उसकी वृद्धि को रोकते हैं.
तस्वीर: Colourbox/R. Gusovसोडा पीने से हड्डियां भुरती हैं. उनका कैल्शियम खत्म होता है. सोडा पीने वाले बच्चे चूंकि दूध कम पीते हैं इसलिए कैल्शियम सप्लाई भी नहीं हो पाती.
सोडा ड्रिंक्स बच्चों के व्यवहार को नुकसान पहुंचाते हैं. कैफीन, चीनी या कृत्रिम रंग ब्लड शुगर को बढ़ावा देते हैं. ऐसे बच्चे ज्यादा आक्रामक होते हैं.
तस्वीर: picture-alliance/Denkou Imagesसोडा ड्रिंक्स बच्चों के दांतों के लिए बेहद खतरनाक होते हैं. उनमें साइट्रिक एसिड और फॉसफोरस होता है जो दांतों पर चढ़े इनेमल को खुरच देता है.
तस्वीर: luna/Fotolia.comएक प्रयोग हुआ. चूहों को वे स्वीटनर दिए गए जो डाइट सोडा में होते हैं. चूहों में टाइप 2 डायबिटीज के लक्षण पाए गए. 12 आउंस सोडा रोज पीने से डायबिटीज होने का खतरा 22 फीसदी बढ़ता है.
तस्वीर: Fotolia/Dmitry Lobanov3 से 5 साल के बच्चों पर एक स्टडी की गई तो पता चला कि सोडा ड्रिंक्स पीने से मोटापे का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. डाइट सोडा भी उतना ही खतरनाक है.
तस्वीर: AP/S. Aivazovएक बोतल सोडा रोज पीने से हृदय रोगों का खतरा 61 फीसदी बढ़ जाता है. बचपन में ही सोडे की शुरुआत हो जाए तो बुढ़ापे से पहले ही कई बीमारियां घेर लेंगी.
तस्वीर: Imago/UIGसोडा पीने से बहुत पेशाब आता है. इससे डिहाइड्रेशन होती है. खासकर तब जब आप पानी के बदले ही सोडा पीने लगें. बच्चों को पानी पिलाएं, दूध पिलाएं. सोडे से बचाएं.
तस्वीर: picture-alliance/Tetra Images/Bildagentur-online लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि कानून को स्पष्ट होना चाहिए. एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी के लॉ कॉलेज में प्रोफेसर पॉल बेंडर कहते हैं, "मुझे नहीं लगता कि कानून की इस व्याख्या के तहत अन्यायपूर्ण सजाएं होंगी, लेकिन ऐसा हो तो सकता है. लोग इस बारे में चिंतित है और यह एक समस्या है.” उन्होंने कहा कि कानून में सबसे बड़ी समस्या यह है कि अपनी बेगुनाही साबित करने की जिम्मेदारी आरोपी पर होगी.
वीके/एमजे (रॉयटर्स)