1. कंटेंट पर जाएं
  2. मेन्यू पर जाएं
  3. डीडब्ल्यू की अन्य साइट देखें

एसआईआर पर विवाद बढ़ा तो चुनाव आयोग ने बदल दी अपनी रणनीति

२ अक्टूबर २०२६

विपक्षी पार्टियों का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में वोटर लिस्ट से करोड़ों मतदाताओं के नाम हटाए गए. अब चुनाव आयोग ने कहा है कि छूट गए लोगों के नाम जुड़वाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा.

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त विवेक जोशी
चुनाव आयोग के भीतर कई फैसलों को लेकर मतभेद होने की बात सामने आई हैतस्वीर: Jitender Gupta/ANI

अपने काम काज के तरीके को लेकर भारी आलोचना झेल रहे भारतीय चुनाव आयोग ने कहा है कि जिन लोगों के नाम एसआईआर प्रक्रिया के दौरान वोटर लिस्ट से कट गए, उन्हें दोबारा वोटर लिस्ट में शामिल करने के लिए विशेष अभियान चलाए जाएंगे. ऐसे युवा जिनके नाम एसआईआर प्रक्रिया के दौरान वोटर लिस्ट में शामिल नहीं हो सके, वे भी इन विशेष अभियानों के जरिए वोट देने का हक हासिल कर सकेंगे.

चुनाव आयोग ने शुक्रवार, 2 अक्टूबर को इससे जुड़ी प्रेस रिलीज जारी की. इसमें कहा गया है कि बूथ लेवल ऑफिसर यानी बीएलओ, मौजूदा मतदाता सूची की एसआईआर से पहले की मतदाता सूची से तुलना करेंगे और ऐसे मतदाताओं की पहचान करेंगे, जिनके नाम एसआईआर से पहले की सूची में थे लेकिन मौजूदा सूची में नहीं है. ऐसे मतदाताओं की एक सूची तैयार की जाएगी.

बीएलओ इन लोगों के घर-घर जाकर इनकी मौजूदा स्थिति का पता लगाएंगे और पात्र व्यक्ति मिलने की स्थिति में उसका फॉर्म-6 भरवाएंगे. मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरना जरूरी होता है. चुनाव आयोग के मुताबिक, रैनबसेरों और लेबर कॉलोनियों में रह रहे लोगों के साथ-साथ बेघरों के नाम वोटर लिस्ट में जोड़ने के लिए भी स्पेशल कैंप लगाए जा सकते हैं.

कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि एसआईआर के कारण "अब तक 13 करोड़ 30 लाख भारतीयों के नाम मतदाता सूचियों से हटा दिए गए हैंतस्वीर: Sanchit Khanna/Hindustan Times/Sipa USA/picture alliance

चुनाव आयोग ने फॉर्म-6 में भी किया बदलाव

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, चुनाव आयोग ने वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए भरे जाने वाले फॉर्म-6 से एसआईआर से जुड़ा घोषणापत्र भी हटा दिया है. यह उन राज्यों के लिए किया गया है, जहां एसआईआर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी घोषणा की थी. हालांकि, जिन राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया जारी है, वहां अभी भी यह घोषणापत्र भरना जरूरी होगा.

इस घोषणापत्र में आवेदक से पूछा जाता था कि क्या उनका या उनके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछले एसआईआर के बाद प्रकाशित हुई मतदाता सूची में था. जवाब में हां कहने की स्थिति में आवेदक को अपना बूथ और सीरियल नंबर बताना होता था. आलोचकों का कहना है कि इससे मतदान करने की पात्रता साबित करने की पूरी जिम्मेदारी आवेदक पर ही आ जाती है.

फॉर्म-6 में इस बदलाव को लेकर चुनाव आयोग के भीतर भी मतभेद उभरे थे. इंडियन एक्सप्रेस की एक खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने फॉर्म-6 में इस घोषणापत्र को जोड़े जाने पर आपत्ति दर्ज करवाई थी. उनका तर्क था कि केंद्रीय कानून मंत्रालय ही फॉर्म-6 में बदलाव कर सकता है. हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया कि दोनों अधिकारियों की कई आपत्तियों के बावजूद फॉर्म-6 में एसआईआर से जुड़ा घोषणापत्र जोड़ा गया.

2 अक्टूबर को दिल्ली में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के साथ विरोध प्रदर्शन हुएतस्वीर: Abiraj Kumar Arulgnanakumar/DW

13 करोड़ नाम काटे जाने का आरोप

चुनाव आयोग ने जून, 2025 में बिहार में एसआईआर करवाने की घोषणा की थी. चुनाव आयोग ने इसे वोटर लिस्ट का शुद्धिकरण करार दिया. वहीं, देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने इसे वोट चोरी बताया. एसआईआर का यह विवाद सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर भी पहुंचा, जहां करीब आठ महीने चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने एसआईआर को संवैधानिक रूप से वैध करार दिया.

इस बीच चुनाव आयोग ने देश के अन्य राज्यों में भी एसआईआर करवाने का एलान किया. बिहार के बाद दूसरे चरण में पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश समेत नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर प्रक्रिया हुई. तीसरे चरण में महाराष्ट्र और कर्नाटक समेत 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर करवाने की घोषणा हुई. इसके बाद हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख ही ऐसे क्षेत्र बचे हैं, जो एसआईआर से अछूते हैं.

चुनाव आयोग का कहना है कि एसआईआर का मकसद, वोटर लिस्ट में पात्र मतदाताओं को बनाए रखना और अपात्र नामों को हटाना है. वहीं, विपक्षी पार्टियों और आलोचकों का कहना है कि इससे वैध मतदाताओं के मतदान से वंचित होने का खतरा पैदा होता है. विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार पर एसआईआर के जरिए बीजेपी को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया है, जिसे चुनाव आयोग और बीजेपी दोनों ने खारिज किया है.

कांग्रेस कार्यसमिति ने 29 सितंबर को एक प्रस्ताव पास किया जिसमें लिखा था कि एसआईआर के कारण "अब तक 13 करोड़ 30 लाख भारतीयों के नाम मतदाता सूचियों से हटा दिए गए हैं.” इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर के बाद प्रकाशित हुईं ड्राफ्ट वोटर लिस्टों में पहले के मुकाबले करीब 13 करोड़ नाम कम थे.

लगातार हो रहे विरोध-प्रदर्शनों की वजह से चुनाव आयोग के दफ्तर की सुरक्षा बढ़ा दी गई हैतस्वीर: Bhawika Chhabra/REUTERS

विरोध बढ़ने के बाद बदले गए नियम

लंबे समय तक एसआईआर और इसका विरोध साथ-साथ चलते रहे. लेकिन इस मामले में एक बड़ा मोड़ 23 सितंबर, 2026 को आया, जब इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने पहले पेज पर एक खोजी रिपोर्ट छापी. इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि दो चुनाव आयुक्तों- विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने 10 महीनों में 14 बार चुनाव आयोग द्वारा लिए गए फैसलों पर आपत्ति दर्ज करवाई थी.

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद बड़े पैमाने पर चुनाव आयोग खासतौर पर सीईसी ज्ञानेश कुमार का विरोध शुरू हो गया. हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को नकारा और कहा कि किसी भी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग विचार और टिप्पणियां आना एक सामान्य बात है. आयोग ने ये भी दावा किया कि सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे. तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में बहुमत के आधार पर फैसले लेने का ही नियम है.

रिपोर्ट सामने आने के बाद शनिवार, 26 सितंबर को चुनाव आयुक्तों की बैठक हुई जिसमें कई फैसले लिए गए. जैसे-नोटिस पाने वाले लोगों को सुनवाई के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने होंगे, बहुत जरूरत होने पर ऑनलाइन सुनवाई की जाएगी. जमीनी स्तर पर काम कर रहे अधिकारियों को उनकी भूमिका के आधार पर ईसीआईनेट सिस्टम का इस्तेमाल करने की अनुमति मिलेगी.

इस बैठक में दिल्ली और महाराष्ट्र में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट को लेकर दावे और आपत्ति दर्ज करवाने की समयसीमा बढ़ा दी गई. यह फैसला भी लिया गया कि आयोग की सभी बैठकों के लिए एजेंडा पहले ही साझा कर दिया जाएगा और बाद में मीटिंग की मिनट्स भी जारी की जाएंगी. यह भी कहा गया कि आयोग के अधिकारियों को आयुक्तों द्वारा जारी किए गए निर्देशों का पालन करना होगा.

इन फैसलों के बाद भी चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध कम होता नहीं दिख रहा है. पहले कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन किए. अब धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा करवाने में सफल हो चुकी कॉकरोच जनता पार्टी ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के लिए देशव्यापी प्रदर्शन करने की बात कही है. 2 अक्टूबर को मुंबई से इसकी शुरुआत हुई. वहीं, इंडिया गठबंधन ने 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग के दफ्तर तक मार्च करने की बात कही है.

आदर्श शर्मा डीडब्ल्यू हिन्दी के साथ जुड़े आदर्श शर्मा भारतीय राजनीति, समाज और युवाओं के मुद्दों पर लिखते हैं.
डीडब्ल्यू की टॉप स्टोरी को स्किप करें

डीडब्ल्यू की टॉप स्टोरी

डीडब्ल्यू की और रिपोर्टें को स्किप करें

डीडब्ल्यू की और रिपोर्टें