इमानुएल कारपेंटिये विज्ञान जगत की स्टार हैं. ऐसी स्टार की लोग उनके साथ सेल्फी खिंचाने को तरसते हैं. इस कामयाबी का राज है उनकी एक खोज.
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कुछ साल पहले मॉलीक्यूलर बायोलॉजिस्ट इमानुएल कारपेंटिये को अभूतपूर्व कामयाबी मिली. एक अमेरिकी सहयोगी के साथ उन्होंने इस बात की खोज की कि बैक्टीरिया बाहर से आने वाले वायरस को कैसे असरहीन बनाते हैं. साथ ही उन्होंने ये भी पता किया कि ये प्राकृतिक मैकेनिज्म जीन को बदलने में इस्तेमाल हो सकता है. अपनी खोज के बारे में वह कहती हैं, " इस खोज में रोमांचक बात ये है कि हम जीवन के मैकेनिज्म को समझना चाहते थे और इस प्रक्रिया में हमने कुछ ऐसा पाया जिसे बायोलॉजी, बायो टेक्नोलॉजी और बायोमेडिसिन में इस्तेमाल किया जा सकता है." कारपेंटिये की खोज का नाम है क्रिसपरकैस 9.
कारपेंटिये की इस खोज की मदद से इंसान में कैंसर और वंशानुगत बीमारियों का इलाज हो सकता है. हालांकि मानव जीनोम में किस हद तक हस्तक्षेप किया जा सकता है, यह नैतिक सवाल है लेकिन इसका जवाब मिलने तक खोज को रोका नहीं जा सकता. लिहाजा पौधों पर खोज जारी है. क्रपरकैस 9 को मक्के पर टेस्ट किया जा रहा है ताकि उसकी फसल को बेहतर किया जा सके. सफेद मशरूम पर भी काम चल रहा है, ताकि पीले होने की प्रक्रिया को धीमा किया जा सके. और मूंगफली को एलर्जी से मुक्त करने के लिए भी क्रिसपर कैस 9 का इस्तेमाल हो रहा है.
तस्वीरों में, देखिए जर्मन बच्चे क्या क्या कमाल कर रहे हैं
जर्मन किशोरों के आविष्कार और खोजें
जर्मनी में टीनएजर्स के लिए हर साल रिसर्च प्रतियोगिता "युगेंड फोर्श्ट" आयोजित होती है. 2016 में 191 युवाओं ने अपनी अपनी खोजों के साथ हिस्सा लिया. प्रस्तुत हुए 110 रिसर्च प्रोजेक्ट्स में से यहां देखिए कुछ चुनिंदा खोजें.
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क्या लड़कों से ज्यादा मददगार लड़कियां?
इस सवाल का जवाब ढ़ूंढने की कोशिश की जर्मनी में फ्रांकेनबर्ग की स्कूली छात्राओं - लॉरा क्रुपके, मारी डिपेल और इजाबेल ड्राथ ने. इन्होंने एक 'अल्टीमेटम गेम' विकसित किया और प्रश्नावली बनाई. 600 से भी ज्यादा हाई स्कूल छात्र, छात्राओं पर टेस्ट कर के नतीजा मिला कि महिलाएं ज्यादा कोऑपरेटिव होती हैं.
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वैसे लड़के भी जानते हैं कोऑपरेशन
इस टीम में यानोश ओट और रॉबिन फॉन वेरडेन ने साथ मिल कर ही एलईडी शूज बनाए हैं. डार्मश्टाट के स्कूली छात्रों ने इंडक्शन कॉयल को स्पोर्ट्स शूज के सोल में लगा दिया. इन जूतों को पहन कर दौड़ने पर इसके छोटे डायनेमो से बैटरी चार्ज हो जाती है.
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आग से बचाने वाला कागज
क्या आप सोच सकते हैं कि कोई कागज आग ना पकड़े बल्कि आग से बचाए. जर्मन शहर कासेल के छात्र यानो शाडे ने रिसाइकिल किए कागज से एक आगरोधी परत बना डाली. इसके लिए इस किशोर ने ज्वलनशील इन्सुलेशन पैनल का आविष्कार किया.
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'ऑगमेंटेड' सरौता
वुपरटाल के छात्र थोमास गेयरब्राख्ट ने होलोग्राफिक प्रोजेक्शन तकनीक का इस्तेमाल किया. इस सरौते का केवल आधा हिस्सा सचमुच है और आधा आभासी है.
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गर्म और ठंडा दोनों कर सकने वाले ब्लाइंड्स
खिड़कियों पर लगने वाले ब्लाइंड्स जिनका गहरे रंग का हिस्सा सूर्य की रोशनी लेकर गर्मी दे और चमकीली सतह वाला हिस्सा गर्मी को दूर रखे, ऐसी है पाइने शहर के छात्र लार्स विटे की ऊर्जा बचाने वाली खोज. खास बात यह भी है कि यह शटर ऑटोमेटिक हैं और कमरे के तापमान के अनुसार एडजस्ट हो सकते हैं.
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आपके घर के लिए 3डी स्कैनर
गिसन-ओस्ट हाइस्कूल के छात्र यूलियान कूलेनकाम्फ ने घरों में आसानी से इस्तेमाल किये जाने लायक 3डी स्कैनर बनाया है. इसे बनाने में उन्होंने एक साधारण वेबकैम और लेसर का प्रयोग किया. उनका असल काम था इस साधारण से उपकरण को काम करने लायक बनाने के लिए सॉफ्टवेयर विकसित करना, जो यूलियान ने खुद कोड किया.
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लीवर कैंसर से बचाने वाली बूटी
नॉए-इजेनबुर्ग के गोएथे स्कूल के छात्रों रोबेर्ट सेजलिंस्की और लुकास हरफ्रिश को ऐसी बूटी ढूंढनी थी. उन्होंने नीले फूलों और रोयेंदार पत्तियों वाले बोराज पौधे से एक जहरीला क्षारीय तत्व निकाला. यहां वे उसी तत्व के अणु 'लाइकोसामिन' का मॉडल पकड़े हुए दिख रहे हैं. अभी इस बूटी पर आगे टेस्ट किया जाना बाकी है, इसलिए फिलहाल इसका सेवन ना करें.
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इमानुएल कारपेंटिये हाल ही में माक्स प्लांक इंस्टीट्यूट फॉर इनफेक्शन बायोलॉजी की डाइरेक्टर बनी हैं. उनके जीवन का यह नया पड़ाव है जिससे वह खुश हैं. उनका मानना है कि नयापन उत्सुकता बनाए रखता है. लेकिन जिंदगी इतनी आसान नहीं है. वह पेटेंट का का एक मुकदमा झेल रही हैं. विज्ञान जगत में यह नई बात नहीं है. एक अमेरिकी रिसर्चर का दावा है कि उसने पहली बार क्रिसपर कैस नाइन को मानवीय कोशिकाओं पर टेस्ट किया था. लेकिन कारपेंटिये अपनी बात पर कायम हैं. वह कहती हैं, "मैं समझती हूं कि हर अच्छी खोज के साथ पेटेंट का विवाद होता ही है. यही बात क्रिसपर कैस नाइन पर भी लागू होती है. लेकिन मुझे पूरा भरोसा है."
समय बताएगा कि इस झगड़े का क्या नतीजा निकलता है. इस समय पहली चुनौती है प्रयोगशाला को संगठित करना और नई टीम का गठन. समय कम है क्योंकि फ्रांसीसी इमानुएल कारपेंटिये विज्ञान जगत की स्टार हैं. उन्हें बड़े बड़े इनाम मिले हैं. न सिर्फ मीडिया जगत उनके पीछे रहता है, बल्कि सेल्फी लेने वाले प्रशंसक भी. प्रसिद्धि उन्हें अच्छी लगती है, लेकिन इसमें समय भी खर्च होता है. इसे वह शोध में लगाना चाहती हैं. अभी वे बहुत कुछ करना चाहती हैं. वह कहती हैं कि क्रिसपर कैस 9 जैसी खोज दोबारा कर पाना तो शायद मुश्किल होगा लेकिन मेरा लक्ष्य शोध को जारी रखना है, शायद हम और अनोखी खोज करने में कामयाब रहेंगे.
तस्वीरों में: क्लोनों की रेस में फर्स्ट
क्लोनों की रेस में 'फर्स्ट'
20 साल पहले आई दुनिया की पहली क्लोन भेड़ डॉली तो सबको याद है, लेकिन उसके बाद भी कई जानवरों के क्लोन बनाने की कोशिशें हुईं. मिलिए डॉली की क्लोन बिरादरी के और सदस्यों से.
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क्लोनों की रेस में 'फर्स्ट'
दुनिया में एक वयस्क स्तनधारी जीव की पहली क्लोन थी भेड़ डॉली. 5 जुलाई 1996 को जन्मी डॉली का कोई पिता नहीं था, लेकिन तीन मांएं थीं. उसे एक भेड़ की बॉडी सेल, दूसरे का अंडा और तीसरी सरोगेट का गर्भ मिला था. 6 साल जीने के बाद डॉली की फेफड़ों की बीमारी के कारण मौत हो गई. अब डॉली को नेशनल म्यूजियम ऑफ एडिनबरा में संरक्षित करके रखा गया है.
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आधा घोड़ा, आधा गधा
आइदाहो जेम का जन्म 2003 में हुआ. यह दुनिया का पहला क्लोन खच्चर था. लेकिन इसे आइडाहो का रत्न ऐसे ही नहीं कहा गया. असल में इसकी खासियत ये थी कि वह कई पुरस्कार जीत चुके रेसिंग खच्चर का जेनेटिक भाई था.
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कॉपी कैट
"सीसी" दुनिया की पहली क्लोन कैट है. 2011 में टैक्सस में जन्मी इस बिल्ली का यह नाम उसके हूबहू अपने पेरेंट जैसे होने के कारण पड़ा. मांग तो बहुत है लेकिन बिल्लियों की व्यावसायिक स्तर पर क्लोनिंग नहीं की जाती है.
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एक जैसे पांच
नोएल, एंजेल, स्टार, जॉय और मेरी - पांचों सूअर बहनें 5 मार्च 2000 को पैदा हुईं. इन्हें बनाने वाली पीपीएल थेरेप्युटिक्स ने उम्मीद जताई कि इससे इंसान के शरीर में लगाने लायक अंग और कोशिकाएं स्तनधारी जीव सूअर के शरीर में बनाने का रास्ता खुलेगा.
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डेजर्ट ब्यूटी
पहला क्लोन ऊंट 2009 में बना. दुबई के कैमल रिप्रोडक्शन सेंटर में जन्मे इस ऊंट को एक खास किस्म के ऊंट की प्रजाति के जीन्स को सुरक्षित रखने के लिए बनाया गया था. रेगिस्तान वाले इलाकों में ऊंट का इस्तेमाल सामान ढोने के अलावा रेसिंग के लिए होता है.
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स्पेन की फाइटिंग बुल
2010 में स्पेन के वैज्ञानिकों ने पहले फाइटिंग बुल का क्लोन बना डाला. लेकिन गॉट नाम का यह सांढ़ रिंग में लड़ाने के लिए नहीं ब्रीडिंग के लिए बनाया गया. इसकी सरोगेट मां एक बहुत शांत फ्रीजियन प्रजाति की डेयरी वाली गाय थी.
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बंदर
ओरेगन के वैज्ञानिकों ने 2000 में रीसस मंकी की प्रजाति का पहला क्लोन बनाया. इसका नाम टेट्रा रखा गया जो कि ग्रीक भाषा का शब्द है और इसका अर्थ है चार. रिसर्चरों ने चार भ्रूण तैयार किए और उन्हें चार मांओं में इंप्लांट किया. केवल टेट्रा जीवित बचा.
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सबसे प्यारा पालतू
दक्षिण कोरिया की एक रिसर्च टीम ने 2005 में दुनिया का पहला क्लोन कुत्ता बनाया. स्नूपी एक अफगानी कुत्ता था. फिर 2014 में राजधानी सोल की एक बायोटेक कंपनी ने एक और कुत्ते का क्लोन बनाया. इस बार एक 12 साल के छोटे पैरों वाले कुत्तों की प्रजाति की नकल बनाई गई और निकला यह मिनी विनी. कंपनी कुत्तों के क्लोन बना कर 90,000 यूरो तक में बेचती है.
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क्रिसपर कैस नाइन कोई छोटी खोज नहीं थी. इसके लिए इमानुएल को बड़ा इनाम मिल सकता है. लोग नोबेल पुरस्कार की भी उम्मीद कर रहे हैं.