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आपदाभारत

क्या ब्लैक बॉक्स सुलझाएगा एयर इंडिया फ्लाइट हादसे का रहस्य

२० जून २०२५

12 जून को हुए एयर इंडिया के विमान हादसे का रहस्य अभी तक बना हुआ है. उम्मीद की जा रही है कि विमान के ब्लैक बॉक्सों की मदद से पता चल पाएगा कि हादसा आखिर हुआ कैसे.

विमान के मलबे के इर्द गिर्द खड़े जांच और बचावकर्मी
ब्लैक बॉक्स से कॉकपिट की बातचीत और विमान के इंजन और नियंत्रण सेटिंग की रिकॉर्डिंग मिलेगीतस्वीर: Ajit Solanki/AP/dpa/picture alliance

खबरों के मुताबिक विमान के दोनों ब्लैक बॉक्स यूनिट बरामद कर लिए गए थे और अब वो एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टीगेशन ब्यूरो (एएआईबी) के पास हैं. ब्यूरो के विशेषज्ञ ब्रिटेन, अमेरिका और बोइंग कंपनी के अधिकारियों की मदद से इन दोनों बॉक्स का अध्ययन कर रहे हैं. हालांकि अभी तक कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है.

कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह दावा भी किया गया है कि ब्लैक बॉक्स को नुकसान पहुंचा है और इनकी जांच किस तरह से की जाए इस पर फैसला जल्द ही लिया जाएगा. एनडीटीवी के मुताबिक हादसे के समय या उसके बाद संभावित रूप से गिरने की वजह से दोनों बॉक्स को नुकसान हुआ और इसमें भी एक बॉक्स को ज्यादा नुकसान पहुंचा है.

क्या होता है ब्लैक बॉक्स

सूत्रों के हवाले से एनडीटीवी ने कहा है कि प्राथमिक जांच में पता चला कि एक बॉक्स के बाहरी हिस्से को नुकसान पहुंचा है और इसे अगर संभल कर हाथ नहीं लगाया गया तो अंदर मौजूद डाटा पर असर पड़ सकता है.

ब्लैक बॉक्स असल में नारंगी रंग के होते हैंतस्वीर: ASSOCIATED PRESS/picture alliance

इन दोनों ब्लैक बॉक्स से कॉकपिट की बातचीत और विमान के इंजन और नियंत्रण सेटिंग की रिकॉर्डिंग मिलेगी, जिनकी मदद से जांच अधिकारी हादसे का कारण पता लगाने की कोशिश करेंगे.

हर विमान में उड़ान से जुड़ी जानकारी को रिकॉर्ड करने के दो उपकरण होते हैं जिन्हें ब्लैक बॉक्स कहा जाता है. ये असल में नारंगी रंग के होते हैं. इससे उन्हें हादसे के बाद मलबे में से आसानी से ढूंढा जा सकता है. इन्हें इस तरह से बनाया जाता है ताकि ये काफी झटका और ऊंचा तापमान सह सकें. 

एक बॉक्स होता है कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (सीवीआर) और दूसरा होता है फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर (एफडीआर). सीवीआर में 25 घंटों तक की कॉकपिट में हुई बातचीत, इमर्जेंसी अलार्म, डिस्ट्रेस सिग्नल, एयर ट्रैफिक कंट्रोल से हुई बातचीत जैसी आवाजों की रिकॉर्डिंग होती है. पुराने विमानों के सीवीआर में दो घंटे तक की ही रिकॉर्डिंग होती है.  

एफडीआर विमान की जमीन से ऊंचाई, गति, इंजन की जानकारी आदि दर्जनों तरह की अन्य जानकारी स्टोर करता है. मशीन हर सेकंड में कई बार इस तरह की जानकारी सेव करती है. आधुनिक विमानों में इस तरह की हजारों जानकारी एक बार में स्टोर की जा सकती है. 

बेहद जरूरी जानकारी

पूर्व पायलट और विमानन विशेषज्ञ अमित सिंह का कहना है कि हादसे से पहले क्या क्या हुआ इसे ठीक से समझने के लिए फ्लाइट डाटा और ब्लैक बॉक्स का बरामद किया जाना बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा कि इन डब्बों का "डाटा सब बता देगा".

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सिंह ने यह भी कहा कि इसके अलावा जांच संस्थाएं आसपास के इलाके की सीसीटीवी फुटेज भी देखेंगी और गवाहों से भी बात करेंगी. साथ ही पायलटों के प्रशिक्षण के रिकॉर्ड, विमान का कुल लोड, इंजन से जुड़ी संभावित समस्याएं, विमान के प्रदर्शन का इतिहास भी देखा जाएगा.

एएआईबी के पूर्व महानिदेशक अरबिंदो हांडा ने बताया कि पूरी दुनिया में विमान हादसे की जांच करने वाले अधिकारी संयुक्त राष्ट्र के निर्धारित 'मैन्युअल ऑफ एक्सीडेंट इनवेस्टीगेशन' का पालन करते हैं, जिसे "डॉक् 9756" भी कहा जाता है.

उन्होंने कहा कि मुमकिन है इस हादसे की जांच लंबी चलेगी क्योंकि विमान बुरी तरह से जल गया था. हांडा ने यह भी कहा कि ब्लैक बॉक्स का हाल जानना बेहद जरूरी होगा क्योंकि ऐसा हो सकता है कि विमान में लगी आग से पैदा हुई गर्मी उपकरणों के सहने लायक तापमान से ज्यादा हो. (एपी)

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