रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि तीन दशक में पहली बार रूस परमाणु परीक्षण कर सकता है. इसका अर्थ होगा कि रूस परीक्षण प्रतिबंध संधि को तोड़ देगा. यह परमाणु हथियारों के दौरको एक बार फिर से शुरू करने की ओर अहम कदम हो सकता है, जो कई दशकों पहले खत्म हो गया था.
अमेरिका ने जुलाई 1945 में पहली बार परमाणु परीक्षण किया था. उसने न्यू मेक्सिको के एल्मोगोर्डो में 20 किलोटन परमाणु बम का परीक्षण किया था. ऐसे दो बम उसी साल अगस्त में जापान के हिरोशिमा और नागासाकी में गिराये गये थे.
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि रूस फिर से परमाणु परीक्षण कर सकता है. उन्होंने नए रणनीतिक हथियारों को मोर्चे पर तैनात करने की भी बात कही. देखिए, कितना बड़ा है रूस के परमाणु हथियारों का जखीरा.
तस्वीर: Alexander Zemlianichenko/AP Photo/picture allianceरूस परमाणु महाशक्ति है. 2022 के आंकड़ों के मुताबिक उसके पास 5,977 परमाणु हथियार थे. फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स के मुताबिक अमेरिका के पास 5,428 परमाणु हथियार हैं, यानी रूस से कम.
तस्वीर: Alexander Zemlianichenko/AP Photo/picture allianceरूस ने 1,500 हथियार सेवानिवृत्त कर दिए हैं लेकिन उन्हें नष्ट शायद नहीं किया गया है. 2,889 रिजर्व में रखे गए हैं जबकि 1,588 मोर्चे पर तैनात हैं.
तस्वीर: Island of Forts/ITAR-TASS/IMAGOरूस ने लगभग 800 परमाणु बम तो जमीन से मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों पर तैनात कर रखे हैं जबकि करीब 576 पनडुब्बियों पर तैनात हैं. 200 बम विमानों पर तैनात हैं.
तस्वीर: Maxim Shipenkov/EFE/EPAबुलेटिन ऑफ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स कहता है कि रूस के पास परमाणु बमों से लैस 400 अंतरमहाद्वीपीय मिसाइलें हैं जो 1,185 बम ले जाने की क्षमता रखती हैं.
तस्वीर: Cover-Images/IMAGOरूस के पास 10 परमाणु शक्तिसंपन्न पनडुब्बियां भी हैं जो 800 बम बरसाने की क्षमता से लैस हैं. इसके अलावा 60-70 विमान भी हैं जिनमें परमाणु हमले करने की ताकत है.
तस्वीर: Oleg Kuleshov/TASS/dpa/picture allianceअमेरिका ने 1,644 बम तैनात किए हुए हैं, यानी रूस से कुछ ज्यादा. चीन के पास कुल 350 परमाणु बम हैं जबकि फ्रांस के पास 290 और ब्रिटेन के पास 225 बम तैयार हैं.
तस्वीर: abaca/picture alliance शीत युद्ध के दौरान यानी जब अमेरिका और रूस के बीच तनाव चरम पर था, तब एक वक्त में सोवियत संघ के पास 40 हजार परमाणु हथियार थे जबकि अमेरिका के पास 30 हजार.
तस्वीर: Russian Defense Ministry Press Service/AP/picture alliance चार साल बाद अगस्त 1949 में सोवियत संघ ने अपना पहला परमाणु परीक्षण किया. तब एक होड़ शुरू हुई जो कई दशकों तक जारी रही. 1945 से 1996 के बीच के पांच दशकों में 2,000 से ज्यादा परमाणु परीक्षण किये गये. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक इनमें से 1,032 अकेले अमेरिका ने किये और 715 सोवियत संघ ने किये. ब्रिटेन ने 45, फ्रांस ने 210 और चीन ने 45 परीक्षण किये.
1996 में पूर्ण परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि (सीटीबीटी) पर हस्ताक्षर के बाद अमेरिका और रूस ने परीक्षण करने बंद किये. तब से दुनिया में दस परमाणु परीक्षण हुए हैं. इनमें से दो भारत ने किये, जब 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के समय भारत ने पोखरण में परमाणु बम टेस्ट किया था. उसी साल पाकिस्तान ने भी दो परीक्षण किये. इसके अलावा उत्तर कोरिया ने 2006, 2009, 2013, 2016 और 2017 में परमाणु परीक्षण किये थे.
अमेरिका ने अपना आखिरी परमाणु परीक्षण 1992 में किया था. जबकि चीन और फ्रांस ने 1996 में. रूस ने 1990 के बाद से कोई परमाणु परीक्षण अब तक नहीं किया है.
परमाणु परीक्षणों पर पाबंदी
परमाणु परीक्षणों के नुकसान के कारण दुनियाभर के विशेषज्ञ लगातार चिंताएं जताते रहे हैं. उन्होंने इंसान और पर्यावरण की सेहत पर इनके नुकसानों को लेकर लगातार आगाह किया है.
परमाणु परीक्षणों के विरोध में काम करने वाले कार्यकर्ताओं की यह भी दलील है कि परीक्षणों को रोकने से दुनिया में तनाव कम किया जा सकता है.
रूस ने 1996 में सीटीबीटी पर हस्ताक्षर किये थे और साल 2000 में इसे रेटीफाई कर दिया था. अमेरिका ने 1996 में संधि पर हस्ताक्षर तो किये लेकिन इसे रेटीफाई नहीं किया.
फिर से परीक्षणों का दौर?
सवाल यह है कि कोई फिर से उस दौर को शुरू क्यों करना चाहेगा. कोविड महामारी और यूक्रेन युद्ध के बाद दुनिया कहीं ज्यादा विभाजित नजर आती है. ऐसे में परमाणु परीक्षण करने का मकसद सूचनाएं जुटाना भी हो सकता है और संकेत भेजना भी.
परीक्षणों के जरिये यह पता लगाया जा सकता है कि पुराने परमाणु हथियारों में कितना दम बचा है या नये हथियार कितने ताकतवर होंगे. 2020 में अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट ने खबर छापी थी कि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने परमाणु परीक्षण करने पर चर्चा की थी.
पांच साल हो गए हैं जब उत्तर कोरिया में किम जोंग उन ने अपने पिता की मौत के बाद सत्ता संभाली थी. इन पांच सालों में क्या क्या बदला, आइए डालते हैं एक नज़र
तस्वीर: picture-alliance/dpa/KCNAउत्तर कोरिया पर पिछले सात दशकों से किम परिवार का ही शासन है. 1948 से लेकर 1994 तक देश की सत्ता किम जोंग उन के दादा किम इल सुंग के हाथ में रही जबकि उनके पिता ने किम जोंग इल 1997 से 2011 तक उत्तर कोरिया के नेता रहे.
तस्वीर: picture-alliance/dpaकिम जोंग उन कई मायनों अपने पिता से ज्यादा अपने दादा की तरह दिखते हैं. बालों का अंदाज भी उन्होंने अपने दादा के जैसा ही अपनाया है. किम जोंग इल शायद ही कभी सार्वजनिक रूप से बोले हों, लेकिन किम जोंग उन कई बार सार्वजनिक तौर पर अपनी बात रख चुके हैं. मई में पार्टी कांग्रेस में वह लगातार चार घंटे बोले.
तस्वीर: picture-alliance/AP Photo/Wong Maye-Eकिम जोंग उन ने अपने फूफा को मौत की सजा देकर साबित करने की कोशिश की कि वह स्वतंत्र हैं और उन्हीं तरीकों का इस्तेमाल करने में उन्हें कोई समस्या नहीं है जो उनके पिता और दादा करते रहे हैं.
तस्वीर: Getty Images/AFP/KCNAअमेरिकी बॉलीवॉल एसोशिएशन एनबीए के स्टार खिलाड़ी डेनिस रोडमैन से कुछ समय के लिए उनकी दोस्ती हुई. लेकिन अभी तक उन्होंने कोई विदेश दौरा नहीं किया है.
तस्वीर: picture-alliance/dpaकिम जोंग उन के पांच साल के दौरान उत्तर कोरिया ने पांच परमाणु परीक्षण किए. उत्तर कोरिया ने अपने पास हाइड्रोजन बम होने का दावा भी किया. किम जोन उन का उत्तर कोरिया आधुनिक परमाणु हथियार और मिसाइल टेक्नोलजी की दिशा में आगे तेजी से बढ़ रहा है ताकि वह दक्षिण कोरिया, जापान और वहां तैनात 50 हजार सैनिकों को निशाना बना सके.
तस्वीर: picture-alliance/dpa/Kcnaउत्तर कोरिया अंतरिक्ष शोध की रेस में भी शामिल हो गया है. वह अपने उपग्रह अंतरिक्ष में भेज रहा है और अगले दशक में उसका इरादा चांद तक पहुंच जाने का है.
तस्वीर: picture alliance/AP Photo/D. Guttenfelderकिम जोंग इल के शासन में उत्तर कोरिया की प्राथमिकता थी “सेना सबसे पहले”. लेकिन किम जोंग उन के दौर में प्राथमिकता बेहतर परमाणु हथियार बनाने और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर है. वे साइंस और टेक्नोलजी पार्क विकसित कर रहे हैं.
तस्वीर: Reuters/KCNAयह बात पहले से मानी जाती है कि उत्तर कोरिया के पास परमाणु हथियार हैं. उसकी अर्थव्यवस्था की हालत जाहिर तौर पर खराब है लेकिन उनमें बेहतरी के कुछ संकेत दिख रहे है. किम जोंग उन ने “वफादारी अभियानों” के जरिए लोगों से पार्टटाइम करने को कहा है ताकि देश को बेहतर बनाया जा सके.
तस्वीर: Reuters/KCNAकिम जोंग उन ने वक्त की जरूरत को देखते हुए पूंजीवादी शैली के बाजारों और उद्यमशीलता को बढ़ावा दिया है और घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है. देश को राजस्व दिलाने के नए स्रोत तैयार किए जा रहे हैं.
तस्वीर: picture-alliance/dpa/KCNAइसका असर देश की राजधानी प्योंगयांग पर दिखता है जहां टैक्सी से लेकर कॉफी शॉप और स्ट्रीट स्टॉल बढ़े हैं. लेकिन इसके कारण पैदा हो रहा मध्य वर्ग किम के लिए समस्या भी बन सकता है क्योंकि यह वर्ग पूंजीवादी विचारों के लिए ज्यादा खुला है या कहें कि उसमें धन हासिल करने की लालसा है.
तस्वीर: Reuters/KCNAकिम जोंग उन ने कई बार उत्तर कोरिया को “अधिक सभ्य” राष्ट्र बनाने की बात कही है. उन्होंने राजधानी प्योंगयांग में घुड़सवारी सेंटर और एक शानदार वॉटर पार्क तैयार कराया है. यही नहीं, पूर्वी तट पर वोनसान शहर में एक लग्जरी स्की रिसॉर्ट भी बनवाया गया है.
तस्वीर: Reutersकिम ने डिज्नी की क्वॉलिटी की एक एनिमेशन सिरीज “बॉय जनरल” भी तैयार कराई है, जो उत्तर कोरिया में बहुत हिट रही है. हालांकि इसका आदेश उनके पिता ने दिया था.
तस्वीर: picture-alliance/AP Photo/Ahn Young-joonकिम जोंग उन उत्तर कोरिया को खेलों की दुनिया की एक ताकत बनाना चाहते हैं. यह देश के स्वास्थ्य और राष्ट्रीय गर्व से भी जुड़ा है. बड़े आयोजनों में उत्तर कोरिया ने कई पदक भी जीते हैं. (रिपोर्ट: एपी/एके)
तस्वीर: picture-alliance/AP Photo/P.Giannakouris अमेरिका तकनीकी डेटा जुटाने के अलावा इसलिए भी परीक्षण कर सकता है ताकि चीन और रूस को अपने प्रभुत्व का संकेत भेजा जा सके. ऐसा होता है तो जवाब में रूस भी परीक्षण करने से नहीं हिचकेगा. इसी साल फरवरी में जब यूक्रेन युद्ध को एक साल पूरा हुआ तो व्लादिमीर पुतिन ने कहा थाकि अगर अमेरिका ने परीक्षण शुरू किये तो रूस भी ऐसा ही करेगा.
गुरुवार को पुतिन ने एक बार यही बात कही और साथ में जोड़ा कि रूस ने सीटीबीटी को रेटीफाई किया है लेकिन अमेरिका ने ऐसा नहीं किया है. उन्होंने कहा कि रूसी संसद भी अपनी रेटीफिकेशन को वापस ले सकती है.
पुतिन ने कहा, "मैं ऐसा कहने को तैयार नहीं हूं कि हमें टेस्ट करने हैं या नहीं लेकिन सैद्धांतिक तौर पर हम वैसा ही व्यवहार करेंगे, जैसा अमेरिका करेगा.”
वीके/एए (रॉयटर्स)