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यूरोप में क्यों लोकप्रिय हो रही हैं धुर-दक्षिणपंथी पार्टियां

क्रिस्टॉफ हाजेलबाख
१३ जून २०२५

जर्मन राजनीति में धुर-दक्षिणपंथी 'अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी' पार्टी अभी भी अलग-थलग दिख रही है, लेकिन कुछ अन्य यूरोपीय देशों में ऐसी पार्टियां सत्ता में हैं. आखिर धुर-दक्षिणपंथी पार्टियां इतनी लोकप्रिय क्यों हो रही हैं?

जर्मन पार्टी एएफडी की प्रमुख एलिस वाइडेल को हंगरी की सरकार के मुखिया ओरबान के साथ
जर्मन पार्टी एएफडी की प्रमुख एलिस वाइडेल को हंगरी की सरकार के मुखिया ओरबान का लगातार समर्थन मिला हैतस्वीर: Szilard Koszticsak/MTI/AP/dpa/picture alliance

जर्मनी की खुफिया एजेंसी 'फेडरल ऑफिस फॉर द प्रोटेक्शन ऑफ दी कॉन्स्टिट्यूशन' (बीएफवी) ने देश की धुर-दक्षिणपंथी पार्टी 'अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी' को 'दक्षिणपंथी चरमपंथी' पार्टी करार दिया है. जर्मनी में ज्यादातर राजनीतिक दल इस पार्टी से किसी तरह का संबंध नहीं रखना चाहते हैं. कुछ नेताओं ने तो इस पार्टी पर प्रतिबंध लगाने की भी मांग की है.

वहीं, इसके विपरीत यूरोप के कुछ देशों में इसी तरह की पार्टियां सरकार में शामिल हैं और कहीं-कहीं वे सरकार का नेतृत्व कर रही हैं. एक नजर ऐसी ही धुर-दक्षिणपंथी पार्टियों पर डालते हैं.

पिछले संसदीय चुनावों में गेर्ट विल्डर्स की पार्टी सबसे मजबूत बनकर उभरी थीतस्वीर: Piroschka Van De Wouw/REUTERS

नीदरलैंड्स: पार्टी फॉर फ्रीडम (पीवीवी)

गेर्ट विल्डर्स की पार्टी फॉर फ्रीडम (पीवीवी) का मानना था कि सरकार प्रवासियों के खिलाफ ज्यादा सख्त नहीं हुई. इसी वजह से उनकी पार्टी ने चार दलों वाले सत्तारूढ़ गठबंधन से हाल ही में समर्थन वापस ले लिया. सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद, मौजूदा प्रधानमंत्री डिक स्कूफ और उनकी कैबिनेट को इस्तीफा देना पड़ा.

विल्डर्स ने संवाददाताओं से कहा, "मैंने शरणार्थियों के लिए सीमाएं बंद करने, उन्हें दूर भेजने और शरणार्थियों के लिए बनाए गए शेल्टर को बंद करने की योजना का प्रस्ताव दिया था. मैंने गठबंधन के सहयोगियों से इस पर हस्ताक्षर करने की मांग की थी, जो उन्होंने नहीं किया. मैंने नीदरलैंड्स के पतन के लिए नहीं, बल्कि सबसे सख्त शरण नीतियों के लिए हस्ताक्षर किए हैं."

सरकार गिरने के बाद, अब इस साल अक्टूबर में फिर से चुनाव कराने की योजना बनाई गई है.

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दरअसल, पिछले संसदीय चुनावों में गेर्ट विल्डर्स की पार्टी सबसे मजबूत बनकर उभरी थी, लेकिन विल्डर्स खुद प्रधानमंत्री नहीं बन पाए, क्योंकि गठबंधन में शामिल बाकी दलों ने उन्हें बहुत कट्टरपंथी माना. उनकी जगह  प्रधानमंत्री पद के लिए डिक स्कूफ को चुना गया था. स्कूफ किसी भी राजनीतिक दल से नहीं जुड़े हैं.

अगर सब कुछ सिर्फ विल्डर्स के हाथ में होता, तो वे नए मस्जिदों के निर्माण और कुरान पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा देते. वे जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए बनाई गई हरित नीतियों या पर्यावरण बचाने की योजनाओं के भी कड़े आलोचक हैं. साथ ही, उन्हें यूरोपीय संघ का बढ़ता हस्तक्षेप भी पसंद नहीं है.

पीवीवी पार्टी के एकमात्र आधिकारिक सदस्य खुद गेर्ट विल्डर्स हैं. उनके अलावा, सभी सांसद और मंत्री सिर्फ पीवीवी के समर्थक के तौर पर काम करते हैं. इसका नतीजा यह है कि पार्टी पर उनका पूरी तरह नियंत्रण है. वे अकेले ही पार्टी के घोषणापत्र, नीतियों और उम्मीदवारों के चयन पर फैसला लेते हैं.

पोलैंड: लॉ ऐंड जस्टिस पार्टी (पीआईएस)

2023 के अंत में हुए संसदीय चुनावों में लॉ एंड जस्टिस पार्टी (पीआईएस) को हार का सामना करना पड़ा था. इसके बाद, यूरोपियन काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष और उदारवादी नेता डोनाल्ड टुस्क पोलैंड के प्रधानमंत्री बने. हालांकि, पीआईएस के पास अब भी राष्ट्रपति पद है और वह वीटो का इस्तेमाल करके सरकार की नीतियों पर रोक लगा सकता है.

यह स्थिति मई 2025 के अंत में हुए राष्ट्रपति चुनाव के बाद भी नहीं बदली, जिसमें बहुत कम अंतर से पीआईएस समर्थित उम्मीदवार कारोल नावरोत्सकी ने जीत हासिल की. उन्होंने यह चुनाव यूरोपीय संघ और जर्मनी विरोधी प्रचार के आधार पर लड़ा था.

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हालांकि, पीआईएस पार्टी यूरोपीय संघ के मामलों में सोच-समझकर कदम उठाती है, क्योंकि उसे पता है कि यूरोपीय संघ से मिलने वाली आर्थिक मदद पोलैंड के लिए बहुत जरूरी है. इसके अलावा, पार्टी रूस के साथ चल रही जंग में यूक्रेन के समर्थन में खड़ी है और चाहती है कि नाटो यूक्रेन की सुरक्षा के लिए मजबूती से खड़ा रहे.

वहीं, प्रवासन को लेकर यह पार्टी अपने यूरोपीय सहयोगियों की तरह ही सख्त रवैया अपनाती है. सामाजिक मामलों में यह पार्टी कैथोलिक चर्च की सोच से मेल खाती है. यह गर्भपात, समलैंगिक शादी और गोद लेने को कानूनी मान्यता देने का विरोध करती है.

हंगरी: फिडेस

'फिडेस हंगेरियन सिविक अलायंस' संभवतः यूरोप की सबसे सफल दक्षिणपंथी पार्टी है. अपने नेता विक्टर ओरबान की बदौलत, पार्टी 1998 से 2002 के बीच हंगरी में सत्ता में थी और 2010 से लगातार सत्ता में है. साम्यवाद के पतन से कुछ समय पहले, 1988 में एक कट्टरपंथी उदारवादी पहचान के साथ स्थापित, यह पार्टी लंबे समय तक इसी रास्ते पर रही.

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हालांकि, 2015 के बाद ओरबान और उनकी पार्टी फिडेस का रुख धीरे-धीरे दक्षिणपंथ की ओर जा रहा है. खासकर तब से जब जर्मनी की पूर्व चांसलर अंगेला मैर्केल ने शरणार्थियों के लिए ‘वेलकम कल्चर' की बात कही थी. अब फिडेस खुलकर ‘गैर-उदारवादी लोकतंत्र' का समर्थन करती है. उसका मानना है कि ‘ईसाई मूल्यों वाला पश्चिमी समाज'  विदेशी हस्तक्षेप से खतरे में है और वे यूरोपीय संघ के प्रभाव को सीमित करना चाहते हैं.

पोलैंड की पीआईएस पार्टी के बिल्कुल उलट, फिडेस ने यूक्रेन युद्ध के बावजूद रूस से संपर्क बनाए रखा है, खासकर ऊर्जा से जुड़े मामलों को लेकर. इसके अलावा, ओरबान वैचारिक रूप से भी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के काफी करीबी माने जाते हैं.

हालांकि दूसरी समान विचारधारा वाली पार्टियों के विपरीत, यह पार्टी मानती है कि जलवायु परिवर्तन इंसानों की वजह से हो रहा है और यह एक गंभीर खतरा है.

स्लोवाकिया: स्मेर - स्लोवेन्स्का सोशलना डेमोक्रेसी

स्मेर पार्टी की स्थापना वर्तमान स्लोवाकियाई प्रधानमंत्री रॉबर्ट फीको ने की थी. इसका पूरा नाम 'डायरेक्शन-स्लोवाक सोशल डेमोक्रेसी' है. हालांकि, नाम में 'सोशल डेमोक्रेसी' शब्द है, लेकिन इसकी विचारधारा दक्षिणपंथी है और यह जर्मनी जैसी सामाजिक लोकतांत्रिक नीतियों से काफी अलग है. स्मेर पार्टी ने यह चेतावनी भी दी है कि स्लोवाकिया बहुत ज्यादा 'विदेशी' बनता जा रहा है.

फीको ने कहा है कि मुसलमान समाज में घुल-मिल नहीं सकते. साल 2016 में उन्होंने यहां तक कहा था कि स्लोवाकिया में इस्लाम के लिए कोई जगह नहीं है. उन्होंने कहा कि रूस ने जिन यूक्रेनियों पर हमला किया है वे 'नाजी और फासीवादी' हैं. 2023 के संसदीय चुनावों से पहले, उन्होंने एलान किया था कि अगर वे सत्ता में आए तो यूक्रेन को हथियारों की आपूर्ति तुरंत बंद कर देंगे. इस चुनाव में उनकी पार्टी को जीत भी मिली.

जर्मनी: चार साल में दोगुने कैसे हुए एएफडी के वोट

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इसके बाद फीको ने वाकई में यूक्रेन को हथियार भेजना बंद कर दिया. उन्होंने यह दावा भी किया कि यूक्रेन पर रूसी हमले के लिए नाटो और अमेरिका जिम्मेदार हैं. उनके इस बयान और निर्णय के बाद पूरे स्लोवाकिया में विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए. फीको की सरकार ने यूरोपीय संघ की ओर से रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों की बार-बार आलोचना की है. उनका कहना है कि ये प्रतिबंध "बेकार हैं और इनसे हमारा ही नुकसान हो रहा है.”

स्पेन: वॉक्स

वॉक्स (लैटिन में इसका अर्थ है आवाज), एक स्पेनिश पार्टी है. इसके नेता सैंटियागो अबास्कल हैं. यह पार्टी 2013 में बनी और बहुत तेजी से लोकप्रिय हुई. 2016 के संसदीय चुनावों में इसे सिर्फ 0.2 फीसदी वोट मिले थे, लेकिन 2019 में इसका वोट शेयर बढ़कर 15 फीसदी हो गया. हालांकि,  इसके बाद से इसकी लोकप्रियता में कुछ गिरावट आई है.

फिर भी, यह पार्टी इस समय स्पेन की तीसरी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनी हुई है. हालांकि, वॉक्स आज तक कभी संघीय सरकार में शामिल नहीं हुई है. रूढ़िवादी पार्टी ‘पार्टिडो पॉपुलर' (पॉपुलर पार्टी) शायद वॉक्स के साथ गठबंधन करने को तैयार होती, लेकिन उससे पहले सोशलिस्ट नेता पेद्रो सांचेज ने सरकार बना ली.

वॉक्स पार्टी की सबसे बड़ी चिंता खासतौर पर स्पेन से जुड़ी हुई है. पार्टी का मानना है कि कैटालोनिया और बास्क देश जैसे स्वायत्त क्षेत्रों को खुद शासन करने के जो अधिकार मिले हैं उन्हें खत्म कर देना चाहिए और स्पेन को फिर से एक केंद्रीय शक्ति वाला राष्ट्र बन जाना चाहिए.

पार्टी के प्रवासी विरोधी और इस्लाम विरोधी रुख में भी स्पेन की अपनी ऐतिहासिक सोच झलकती है. पार्टी नेता सैंटियागो अबास्कल ने नए ‘रिकॉन्क्विस्टा' की मांग की है.

पहला रिकॉन्क्विस्टा 1492 में समाप्त हुआ था. यह ईसाई शासकों द्वारा मुस्लिम सल्तनतों के खिलाफ चलाया गया एक लंबा सैन्य अभियान था. इन मुस्लिम सल्तनतों ने सदियों तक इबेरियन प्रायद्वीप (आज का स्पेन और पुर्तगाल) पर शासन किया था. 

फरवरी की शुरुआत में वॉक्स ने स्पेन की राजधानी मैड्रिड में ‘मेक यूरोप ग्रेट अगेन' नामक एक प्रमुख कार्यक्रम की मेजबानी की थी. इसमें हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान और फ्रांस के दक्षिणपंथी राजनेता मरीन ले पेन शामिल हुए थे.

डेनमार्क: डेनस्क फोल्केपार्टी

डेनिश पीपुल्स पार्टी की स्थापना 1995 में हुई थी. 2000 और 2010 के दशक में इसकी लोकप्रियता चरम पर थी. इस पार्टी ने प्रवासी विरोधी, वैश्वीकरण विरोधी और यूरोपीय संघ विरोधी रुख के साथ-साथ एक मजबूत कल्याणकारी देश की मांग करते हुए, डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में कई सेंटर-राइट सरकारों को समर्थन दिया. खास बात यह रही कि यह पार्टी शरण देने वाले कानून को सख्त बनाने में सफल रही.

हालांकि, 2019 के बाद इस पार्टी की लोकप्रियता कम होने लगी, क्योंकि डेनमार्क की सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता मेटे फ्रेडेरिक्सन ने न सिर्फ इसकी शरण-विरोधी मांगों को अपना लिया, बल्कि उन्हें लागू भी कर दिया. 2022 के पिछले संसदीय चुनाव में पीपुल्स पार्टी को सिर्फ 2.6 फीसदी वोट ही मिले. आज डेनमार्क की सोशल डेमोक्रेटिक सरकार की प्रवासन और शरण नीति पूरे यूरोप में सबसे सख्त मानी जाती है.

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