करनाल में किसानों ने 28 अगस्त को हुए लाठीचार्ज के विरोध में आंदोलन को बुधवार को भी जारी रखा. किसानों की मांग है कि लाठीचार्ज का आदेश देने वाले अधिकारी का निलंबन हो. करनाल में किसानों ने लघु सचिवालय के बाहर डेरा डाल लिया.
तस्वीर: Adnan Abidi/REUTERS
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28 अगस्त को करनाल में प्रदर्शन कर रहे किसानों पर लाठीचार्ज का आदेश देने वाले अधिकारी के निलंबन की मांग पर संयुक्त किसान मोर्चा अड़ा हुआ है. मंगलवार को किसानों ने करनाल की अनाजमंडी में महापंचायत की और किसान नेताओं की अधिकारियों के साथ बैठक भी हुई. लेकिन सहमति नहीं बन पाई.
किसानों ने मंगलवार को लघु सचिवालय का घेराव किया और इस दौरान पुलिस ने किसानों पर पानी की बौछारें भी की. किसान अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहे हैं. मंगलवार रात को ही किसानों ने लघु सचिवालय के बाहर स्थाई धरने का ऐलान कर दिया और टेंट लगा दिए.
अधिकारी पर कार्रवाई की मांग
किसान नेता राकेश टिकैत का कहना है कि जब तक न्याय नहीं मिलता है प्रदर्शनकारी किसान लघु सचिवालय के बाहर डटे रहेंगे. इस बीच स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने एक निजी चैनल से बातचीत में कहा, "हमारी एक बहुत छोटी सी मांग है, ये कोई तीन कानून रद्द करने वाला मोर्चा नहीं है. हम तो सिर्फ यह कह रहे हैं कि जिस अफसर ने किसानों का सिर फोड़ने की बात पब्लिक में बोली, वीडियो में सामने आई, उस पर आप कार्रवाई करो. और, उसके बाद जिन किसानों के ऊपर लाठीचार्ज हुआ जिसमें किसान घायल हुए उनके बारे में मुआवजे का ऐलान होना चाहिए. इतनी छोटी बात के लिए महीनों धरना चलाने का कोई इरादा नहीं है."
यादव ने कहा कि सरकार को बात नहीं बढ़ानी चाहिए और इस पर कार्रवाई करनी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने कार्रवाई की जगह आरोपी अफसर के कंधे पर हाथ रखा है.
28 अगस्त को एसडीएम आयुष सिन्हा का एक वीडियो सामने आया था जिसमें वह लाठीचार्ज से पहले सिपाहियों को किसानों का सिर फोड़ देने के निर्देश देते नजर आए थे. हरियाणा सरकार ने एसडीएम के पद से हटाकर आयुष सिन्हा का ट्रांसफर राजधानी चंडीगढ़ में एक विभाग में कर दिया है. हालांकि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने सिन्हा का बचाव किया था और कहा था कि सख्त कार्रवाई जरूरी थी.
सूखे के दौर में कैसे हो सिंचाई
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मोबाइल इंटरनेट पर रोक
इस बीच हरियाणा सरकार ने करनाल में मोबाइल इंटरनेट और एसएमएस सेवा पर बुधवार रात तक रोक लगा दी है. बीते दिनों किसानों उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक बड़ी महापंचायत की थी और करीब पांच लाख लोग इस महापंचायत में शामिल हुए थे. पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसान पिछले साल से केंद्र के तीन नए कृषि कानून का विरोध कर रहे हैं और उन्हें वापस लेने की मांग कर रहे हैं. केंद्र का कहना है कि नए कृषि कानून किसानों के हित में हैं और उससे उनकी आय बढ़ेगी.
संयुक्त किसान मोर्चा ने इसी महीने की 27 तारीख को भारत बंद का ऐलान किया है और देश के 10 बड़े केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने इस बंद के समर्थन का ऐलान किया है.
पूरी दुनिया में सौर ऊर्जा की मदद से किसान दोगुना कमा रहे हैं. खेतों के ऊपर सौर ऊर्जा के पैनल लगा देने से नीचे फसलें उगती हैं और ऊपर बिजली पैदा होती है. पैनलों की छांव से पानी बचाने में मदद मिलती है और पैदावार भी बढ़ती है.
तस्वीर: picture alliance/blickwinkel/R. Linke
फल भी उगाइए, बिजली भी बनाइए
फाबियान कार्टहाउस जर्मनी में फोटोवोल्टिक पैनलों के नीचे रसबेरी और ब्लूबेरी उगाने वाले पहले किसानों में से हैं. उत्तर-पश्चिमी जर्मनी के शहर पैडरबॉर्न में स्थित उनका सौर खेत करीब एक एकड़ में फैला है, लेकिन वो उसे 10 एकड़ का बनाना चाहते हैं. ऐसे करने से वो इतनी बिजली बना पाएंगे जो करीब 4,000 घरों के काम आएगी. इसके अलावा उन्हें बाजार में बेचने के लिए बेरियां भी मिल जाएंगी.
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प्लास्टिक की छत की जगह शीशे का पैनल
अभी तक कई किसान नाजुक फलों और सब्जियों को प्लास्टिक के पर्दों के नीचे उगाते थे. लेकिन प्लास्टिक के ये पर्दे सिर्फ कुछ ही साल चलते हैं, महंगे होते हैं और इनसे काफी प्लास्टिक कचरा भी उत्पन्न होता है. निदरलैंड में कई किसान फलों, सब्जियों को शीशे के पैनलों के नीचे उगा रहे हैं. ग्रोनलेवेन में ये पैनल फसल को तो बचाते हैं ही, ये 30 सालों तक चलते हैं. बिजली बेचने से अतिरिक्त कमाई होती है.
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चीन बढ़ावा दे रहा है एग्रीवोल्टिक को
चीन बड़े पैमाने पर फोटोवोल्टिक का विस्तार कर रहा है और पिछले कुछ सालों से कृषि संबंधित फोटोवोल्टिक या एग्रीवोल्टिक पर भी निर्भर कर रहा है. उत्तरी चीन के हेबेई में स्थित यह प्लांट 24 एकड़ से भी ज्यादा इलाके में फैला है. नीचे अनाज उगाया जाता है. सौर मॉड्यूल पास ही में बनाए जाते हैं. इससे रोजगार के अवसर भी पैदा होते हैं और गरीबी कम करने में भी मदद मिलती है.
दुनिया के सबसे बड़े सौर पार्कों में से कुछ चीन के गोबी रेगिस्तान में हैं, जहां जगह की कोई कमी नहीं है. कुछ स्थानों पर मॉड्यूलों की छांव में फसलें उगाई जाती हैं. इससे मरुस्थलीकरण रुकता है और मिट्टी को फिर से खेती के योग्य बनने में मदद मिलती है.
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सूखे से मुकाबला
चिली के सैंतिआगो में स्थित यह छोटी से सौर छत दक्षिणी अमेरिका के सबसे पहले एग्रीवोल्टिक प्रणालियों में से है. शोधकर्ता यहां ब्रोकोली और गोभी का इस्तेमाल कर यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि प्रणाली को चलाने का सबसे अच्छा तरीका क्या होगा. इस इलाके में कड़ी धूप होती है और यह कम होती बारिश और बढ़ते सूखे से भी जूझ रहा है. सौर छांव के साथ शुरुआती तजुर्बा सकारात्मक रहा है.
तस्वीर: Fraunhofer Chile
सौर ऊर्जा से पानी
रवांडा की ये किसान सौर ऊर्जा से चलने वाले एक चलते फिरते जल पंप से अपनी जीविका चलाती हैं. एक छोटे से शुल्क के बदले वो अपने पंप को दूसरे किसानों के खेतों तक ले जाती हैं और आस पास के पानी के स्रोतों से उनकी सिंचाई करती हैं. पूरे अफ्रीका में कृषि में सौर ऊर्जा के उपयोग की संभावनाएं हैं.
तस्वीर: Ennos
सौर ऊर्जा के साथ मछली पालन
यह अनोखा इंतजाम पूर्वी चीन में शंघाई से 150 किलोमीटर दक्षिण की तरफ स्थित है. इस तालाब में पीपे के पुलों पर सौर पैनल तैरते हैं और उनके नीचे मछली पालन होता है. पैनलों को इस तरह सजाया गया है कि मछलियों को भी पर्याप्त रोशनी मिले. लगभग 740 एकड़ में फैले ये पैनल 1,00,000 परिवारों के लिए बिजली बनाते हैं.
एक वैकल्पिक दृष्टिकोण
सौर पैनलों को खेतों में लंबवत रखने से उन्हें दोनों तरफ से रोशनी मिलती है. जर्मनी में इस तरह के ढांचे छतों पर लगे पैनलों के जितनी ही बिजली बना सकते हैं. साथ ही साथ ये एक तरह से बाड़ का भी काम करते हैं और हवा से बचाते हैं. खेती के दूसरे उपकरणों को रखने के लिए काफी जगह भी बच जाती है.
तस्वीर: Next2Sun GmbH
जमीन को खाली रखना
बायोगैस और बायो ईंधन के लिए मक्का, गेहूं और गन्ने उगाने में पूरी दुनिया की कृषि योग्य भूमि का चार प्रतिशत इस्तेमाल में लग जाता है. इस ऊर्जा को सौर स्रोतों से बनाना कहीं ज्यादा सस्ता होगा और इसके लिए अभी जितनी जमीन की जरूरत है उसके सिर्फ दसवें भाग की जरूरत होगी. (गेरो रूटर)